‘मैं हिंदू हूँ और 30 साल से बीफ़ का कारोबार कर रहा हूँ’

Friday, June 2nd, 2017, 6:33 pm

भारत में ‘बीफ़’ के व्यापार और उसके निर्यात से जुड़े लोगों का कहना है कि जिस ‘बीफ़’ का व्यापार भारत में होता है वो गोमांस नहीं है, बल्कि भैंस का मांस है.

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बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक लाइव के दौरान चर्चा करते हुए ऑल इण्डिया मीट एंड लाइवस्टॉक एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन के महासचिव एसपी सभरवाल ने दावा किया कि भारत में ‘बीफ़’ यानी भैंस के कारोबार से जुड़े 70 प्रतिशत लोग मुसलमान नहीं हैं.

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सभरवाल ने कहा, ”मैं हिंदू हूं और पिछले 30 साल ले बीफ के कारोबार में हूं.”

उनका कहना है कि ना तो भारत में मौजूद बूचड़खानों में गोहत्या होती है और ना ही गोमांस का निर्यात ही किया जाता है. वो कहते हैं, “बीफ का निर्यात भारत में चार अरब अमरीकी डॉलर का उद्योग है.”

वो कहते हैं इस उद्योग पर सरकार द्वारा पशुओं से क्रूरता को रोकने के लिए बने क़ानून में हाल ही में किये गए संशोधन से बुरा असर पड़ा है.

इसके अलावा इससे ही जुड़े चमड़े के उद्योग ने भी 13 अरब अमरीकी डॉलर का व्यवसाय किया है.

मसला बीफ़ का नहीं

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वहीं, बीबीसी हिंदी के फेसबुक लाइव के दौरान हो रही चर्चा में मौजूद इतिहासकार प्रोफेसर पुष्पेश पंत का कहना था कि मसला ‘बीफ़’ का है ही नहीं.

उनका कहना था कि ‘बीफ़’ के नाम पर जो कुछ हो रहा है वो पिछले 10-15 साल के आपसी सद्भाव को ख़त्म करने के प्रयास हो रहे हैं – यह उसका परिणाम है.

रहा सवाल क़ानून का तो प्रोफेसर पंत कहते हैं कि अगर ऐसा कोई क़ानून है जो कहता है कि जानवर इस तरह कटेगा और बिकेगा, तो उसका पालन भी सख़्ती के साथ होना चाहिए.

उत्तर प्रदेश का उदहारण देते हुए प्रोफेसर पंत कहते हैं कि राज्य में नयी सरकार के आने से पहले अवैध बूचड़खाने चल रहे थे जिनपर रोक लगनी चाहिए थी. मगर पिछली सरकार ने उन्हें नियंत्रित करने के लिए कोई पहल नहीं की, जिससे घूसखोरी को बढ़ावा मिला.

नहीं बेच पाएंगे अब भैंसें

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फेसबुक लाइव में मौजूद ‘बीफ़’ की निर्यातक कंपनी के निदेशक फ़ौज़ान अल्वी कहते हैं कि देश में दूध का उत्पादन भी इसीलिए बढ़ रहा था क्योंकि मांस का निर्यात बढ़ रहा था.

वो कहते हैं कि किसान के लिए एक दूध देने वाली भैंस की उपयोगिता सिर्फ छह से सात साल तक की होती है.

वो कहते हैं कि जब भैंस दूध देना बंद कर देती है तो किसान उसे पशु बाज़ार में बेच देते हैं और दूसरी दूध देने वाली भैंस ले आते हैं. मगर अब क़ानून में संशोधन के बाद वो ऐसा नहीं कर सकेंगे.