बड़े से बड़ा पुलिस ऑफिसर भी तुरंत सुनेगा आपकी बात, बस जान लें ये 7 बातें

> फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) एक रिटन स्टेटमेंट होता है। कॉग्निजेबल ऑफेंस होने पर पुलिस एफआईआर लिखने के बाद इन्वेस्टिगेशन शुरू करती है। कॉग्निजेबल ऑफेंस वह होता है, जिसमें पुलिस बिना वारंट के संबंधित व्यक्ति को अरेस्ट कर सकती है। ऐसे में पुलिस को कोर्ट से भी किसी तरह की परमीशन नहीं लेना होती।

> वहीं नॉन कॉग्निजेबल ऑफेंस होने पर एफआईआर लिखने से पहले पुलिस को मजिस्ट्रेट की परमीशन लेना होती है। बिना वारंट के पुलिस गिरफ्तारी नहीं कर सकती।

शिकायतकर्ता को होता है कॉपी लेने का अधिकार,

> ऐसा जरूरी नहीं है कि सिर्फ पीड़ित व्यक्ति ही एफआईआर लिखवाए। कोई भी ऐसा व्यक्ति जिसे घटना की जानकारी है वे एफआईआर दर्ज करवा सकता

है। यदि किसी पुलिस अधिकारी को किसी घटना की जानकारी है तो वह खुद भी एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं। वहीं एफआईआर लिखने में देरी नहीं की जा सकती। उचित कारण होने पर ही एफआईआर लिखने में देरी हो सकती है।

> शिकायतकर्ता को एफआईआर की एक कॉपी लेने का अधिकार होता है। पुलिस इसके लिए मना नहीं कर सकती। इसके एवज में किसी तरह का शुल्क भी शिकायतकर्ता से नहीं लिया जा सकता।

> वहीं एफआईआर लिखने के बाद यह पुलिस ऑफिसर की ड्यूटी होती है कि एफआईआर में जो लिखा गया है, वो शिकायतकर्ता को पढ़कर सुनाया जाए। शिकायतकर्ता इससे सहमत हुआ तो वो इस पर हस्ताक्षर कर सकता है। पुलिस अधिकारी एफआईआर में खुद कुछ टिप्पणी नहीं कर सकते। वे किसी पॉइंट को हाइलाइट भी नहीं कर सकते।

> यदि कोई भी पुलिस अधिकारी एफआईआर लिखने से मना करता है तो शिकायतकर्ता क्षेत्र के सीनियर ऑफिसर को इसकी शिकायत कर सकता है। वहां से भी समस्या का समाधान न हो तो मजिस्ट्रेट के पास शिकायत की जा सकती है।

मजिस्ट्रेट पुलिस को एफआईआर लिखने के लिए आदेश दे सकते हैं।

> एफआईआर में घटना की पूरी जानकारी लिखवाना होती है, जैसे अपराध कब हुआ, कहां हुआ, समय क्या था, किसने किया, किसने देखा, क्या नुकसान हुआ आदि। एफआईआर दर्ज होने के शुरुआती एक हफ्ते में प्रारंभिक जांच पुलिस को पूरी करना जरूरी होता है।

सऊदी की गरीबी दिखातीं PHOTOS, अमीर शेखों के देश में भी ऐसे जी रहे लोग

इंटरनेशनल डेस्क.अमीर शेखों के देश सऊदी अरब की आमतौर पर एक ही तस्वीर सामने आती है। जबकि यहां एक तबका ऐसा भी है, जो जबरदस्त गरीबी में जी रहा है। फ्रेंच फोटोग्राफर एरिक लफ्फार्ज ने यहां के दोनों तबके के लोगों की डेली लाइफ कैमरे में कैद की। उन्होंने यहां के शहरी और अमीरों के इलाकों से ज्यादा गांवों और गरीब तबकों वाले इलाकों का दौरा दिया। यहां एक तरफ अमीरी की चकाचौंध है तो दूसरी तरफ जबरदस्त गरीबी दिखती है। उन्होंने हर फोटो के पीछे की कहानी बयां की थी और अपने अनुभव शेयर किए। हर जगह दिखेंगे पुलिस एस्कॉर्ट से घिरे…

– एरिक ने बताया कि यहां टूरिस्ट वीजा के लिए लोकल ट्रैवल एजेंसी या कंपनी से स्पॉन्सरशिप लेने की जरूरत होती है।
– मक्का में तीर्थयात्रियों की जबरदस्त भीड़ आने के चलते एजेंसी गैर मुस्लिमों की मदद में ज्यादा इंट्रेस्ट नहीं दिखाती हैं।
– लिहाजा, एरिक को भी वीजा के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ा और 2012 में वो 15 दिन के टूर पर सऊदी पहुंचे।
– यहां के नियम-कायदे के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि 30 साल से कम उम्र की महिला यहां बिना हसबैंड या भाई के घर से बाहर नहीं निकल सकती है।
– इसके साथ ही एल्कोहल, पोर्नोग्राफी, गैम्बलिंग और पोर्क को लेकर यहां सख्त तौर पर मनाही है। महिलाओं के लिए अबाया पहनना कम्पलसरी है।
– एरिक ने बताया कि यहां हर जगह आपका वेलकम होगा, लेकिन आप हर जगह खुद को पुलिस एस्कॉर्ट से घिरा भी पाएंगे।

पहला अनुभव रहा ऐसा
– एरिक ने बताया कि इस देश में दाखिल होने के वक्त प्लेन में पहला अनुभव ही बहुत दिलचस्प रहा।
– लैंडिंग से पहले लुफ्थांसा एयरलाइन्स के मेरे प्लेन में एल्कोहल की सारी बोतलें एक बॉक्स में भर दी गई थीं।
– साथ ही, सभी पैसेंजर्स को हिदायत दी गई कि अगर किसी पास इजरायली करंसी हो तो उसे छिपाकर रखें।
– एरिक ने कहा, “देश के अंदर पहला अनुभव अच्छा नहीं रहा, क्योंकि इंडोनेशियन वर्कर के साथ लाइन में खड़े होकर यहां एंट्री करनी पड़ी।”

गाजा जैसा दिखता है आधा सऊदी
– एरिक का यहां घूमने के बाद पहला इम्प्रेशन यही था कि देश के कई इलाकों में अब भी काफी गरीबी है।
– उन्होंने कहा कि देश करीब से देखने के बाद उतना अमीर नहीं लगता है, जिसकी हम कल्पना करते हैं।
– एरिक ने कहा, ”मैं यहां के रिच और बिलेनियर्स के इलाकों से ज्यादा ऐसे पिछड़े इलाकों में गया जो गाजा जैसे दिखते हैं। मैंने कुछ रिमोट विलेज का भी दौरा किया।
– उनके मुताबिक, कल्चर के मामले में सऊदी के लोग बहुत अलग हैं। यहां ह्यूमन राइट्स और जस्टिस में बहुत बड़ा गैप है।
– गाइड ने उन्हें यहां रियाद का वो स्क्वेयर भी दिखाया, जहां पब्लिक के बीच में मर्डर के दोषियों का सिर कलम किया जाता है।
– एरिक ने जब गाइड को बताया कि उनके देश में इस तरह मौत देने पर 1881 में ही पाबंदी लग गई थी, तो उसे विश्वास नहीं हो रहा था।

मेहमानवाजी की तारीफ की
– एरिक ने यहां की मेहमानवाजी की तारीफ की और कहा कि इस सफर में मैं सिर्फ पुरुषों से मिला। कभी महिलाओं से मुलाकात नहीं हुई।
– एरिक के मुताबिक, सऊदी में लोग काम नहीं करते। उनकी जिंदगी सरकार से मिली रकम पर चलती है। ऐसे वो खाली रहते हैं और हमेशा आपको गाइड करने और आपके खाने का इंतजाम करने के लिए तैयार रहते हैं।

300 लोगों की लिस्ट में चमकी यह एक बॉलीवुड एक्ट्रेस, फोर्ब्स ने जारी की लिस्ट

मुंबई.बिजनेस मैगजीन फोर्ब्स ने ’30 अंडर 30 एशिया’ की लिस्ट जारी की है। खास बात यह है कि इस लिस्ट में बॉलीवुड से सिर्फ एक एक्ट्रेस ही अपनी जगह बना पाई है। ‘रब ने बना दी जोड़ी’ (2008), ‘पीके’ (2014), ‘एन एच 10’ (2015) और ‘सुल्तान’ (2016) जैसी फिल्मों की एक्ट्रेस रहीं 29 साल की अनुष्का शर्मा ने फोर्ब्स की इस लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। 24 देशों के चेहरों को किया शामिल…

– फोर्ब्स ने अपनी इस लिस्ट में एशिया पैसिफिक के 24 देशों के कई पॉपुलर चेहरों को जगह दी।
– करीब 300 लोगों को इस लिस्ट में शामिल किया गया,जिन्हें आर्ट, एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट और बिजनेस सहित 10 अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया। इन सभी का चयन अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान को ध्यान में रखते हुए किया गया।
– लिस्ट में इंडियन बैडमिंटन प्लेयर पीवी सिंधू का नाम भी शामिल है।

ऐसा रहा अनुष्का का करियर

2007 में अनुष्का शर्मा ने बतौर मॉडल करियर की शुरुआत की थी। इसके करीब एक साल बाद 2008 में यशराज प्रोडक्शन की फिल्म ‘रब ने बना दी जोड़ी’ से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा।
– कई सुपरहिट फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने अपना प्रोडक्शन हाउस क्लीनस्लेट फ्लिम्स खोला और 2015 में इसके बैनर तले पहली फिल्म ‘एनएच 10’ बनाई, जिसकी एक्ट्रेस भी खुद अनुष्का शर्मा ही थीं।
– उन्होंने ‘फिल्लौरी'(2016) और ‘परी’ (2017) को भी प्रोड्यूस किया था।

017 में की अनुष्का ने शादी

यूपी राज्यसभा चुनाव: बीजेपी ने एसपी-बीएसपी गठबंधन को दी मात, 10 में से 9 सीटें जीतीं; एक एसपी के खाते में

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों में से 9 पर बीजेपी ने जीत हासिल की। एक सीट सपा के खाते में गई है। 10वीं सीट के लिए बीएसपी के बीआर अांबेडकर और अनिल अग्रवाल के बीच मुकाबला था, जीत बीजेपी को मिली। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने 9 सीटें जीतने की पुष्टि की। उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी का अवसरवादी चेहरा लोगों ने देखा। आज से नहीं प्रदेश की जनता ने काफी पहले से देखा है। मैं सभी सहयोगियों, विधायकों को बधाई देता हूं। समाजवादी पार्टी दूसरों से ले सकती है दे नहीं सकती है।”

बीजेपी अरुण जेटली (वित्त मंत्री), डॉ. अशोक बाजपेयी, विजयपाल सिंह तोमर, सकलदीप राजभर, कांता कर्दम, डॉ. अनिल जैन, अनिल अग्रवाल जीवीएल नरसिम्हा राव, हरनाथ सिंह यादव।
एसपी जया बच्चन

1) 10वीं सीट पर जीत के लिए मशक्कत क्यों?

– 400 विधायकों ने वोट डाले, यानी राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी पार्टी के पास 37 विधायक जरूरी थे।

– भाजपा गठबंधन के पास 324 सीटें हैं। एक विधायक लोकेन्द्र सिंह का 21 फरवरी को सड़क हादसे में निधन हो गया। वे नूरपुर विधानसभा सीट से चुने गए थे। इस तरह बीजेपी के पास 323 सीटें बचती हैं। 8 सदस्यों को राज्यसभा पहुंचाने के बाद 27 विधायक बचते हैं। ऐसे में एक और सदस्य को अपर हाउस भेजने के लिए 10 विधायकों का समर्थन चाहिए था।

2) बीएसपी की मुश्किल कैसे बढ़ी?

– बसपा के मुख्तार अंसारी और सपा के हरिओम यादव जेल में हैं। हाईकोर्ट ने उनके राज्यसभा चुनाव में वोट डालने पर बैन लगा दिया। बसपा विधायक अनिल सिंह ने भी भाजपा के फेवर में वोटिंग कर दी।

– इसके बाद आंबेडकर को राज्यसभा भेजने के लिए बीएसपी के पास 17, सपा के 8, कांग्रेस के 7, राष्ट्रीय लोकदल के 1 वोट के सहारे थी। इस तरह टोटल 33 विधायक हो रहे हैं। जीत के लिए चार और विधायकों की जरूरत थी।

3) जरूरी वोट नहीं होने के बावजूद समीकरण भाजपा के फेवर में क्यों?
– किसी उम्मीदवार को 37 वोट नहीं मिले, इसके बाद दूसरी वरीयता (सेकंड प्रेफरेंस) के आधार पर जीत का फैसला हुआ। इसमें 10वीं सीट पर बीजेपी का कैंडिडेट जीत गया। बता दें कि राज्यसभा चुनाव में वोटिंग के दौरान हर विधायक तय कर सकता है कि वो पहली, दूसरी, तीसरी वरीयता में किसे मत देगा।

– दूसरी वरीयता वाले वोटों की गिनती होती है तो इसमें सभी 400 विधायकों के प्रिफरेंस को देखा गया। भाजपा के पास 323 विधायक होने के कारण 10वीं सीट पर उसके उम्मीदवार के जीतने की संभावनाएं ज्यादा थीं, जो सही साबित हुईं।

4) क्या है राज्यसभा का गणित?

– राज्यसभा चुनाव का फॉर्मूला है= (खाली सीटें + एक) कुल योग से विधानसभा की सदस्य संख्या से भाग देना। इसका जो जवाब आए उसमें भी एक जोड़ने पर जो संख्या होती है। उतने ही वोट एक सदस्य को राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए चाहिए।
यूपी में विधायक 403 हैं। दो विधायक वोट नहीं करेंगे। एक विधायक का निधन हो गया।

ऐसे में संख्या 400 हो जाती है।

यूपी में एक राज्यसभा सीट के लिए जरूरी वोट इस तरह तय हुए

10 (खाली सीट)+1= 11

400/11= 36.45

36.45 +1= 37.45

5) यूपी में किसके पास कितनी ताकत?
– उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं। एक सीट बीजेपी विधायक का निधन होने की वजह से खाली है।

पार्टी सीट
1 बीजेपी 311
2 अपना दल 9
3 भारतीय समाज पार्टी 4
बीजेपी अलायंस 324
4 समाजवादी पार्टी 47
5 बहुजन समाज पार्टी 19
6 कांग्रेस 7
7 राष्ट्रीय लोक दल 1
8 निषाद पार्टी 1
9 निर्दलीय 03

Facebook अकाउंट नहीं है सिक्योर, तो इन 11 सेटिंग्स को तुरंत करें अप्लाई

फेसबुक CEO मार्क जुकरबर्ग के मुताबिक यूजर्स के डाटा सीक्रेसी को लेकर कंपनी से गलती हुई है।

यूटिलिटी डेस्क। क्या आपका फेसबुक अकाउंट सेफ है? ये सवाल इसलिए बड़ा हो गया है, क्योंकि फेसबुक CEO मार्क जुकरबर्ग के मुताबिक यूजर्स के डाटा सीक्रेसी को लेकर कंपनी से गलती हुई है। ऐसे में अब कंपनी यूजर्स के पर्सनल डाटा का गलत यूज रोकने के लिए प्लानिंग कर रही है। पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें फेसबुक से महिला यूजर्स के फोटो चुराकर उनका गलत इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में हम फेसबुक अकाउंट को सेफ करने के कुछ टिप्स बता रहे हैं।

1. फोटो सेफ्टी टिप

फेसबुक में प्राइवेसी सेटिंग्स का ऑप्शन होता है। इसके लिए सबसे पहले फेसबुक पेज पर ऊपर से राइट साइड में दिए गए आइकॉन पर क्लिक करें। इसके बाद ‘See More Settings’ पर क्लिक करें।

अब आपको ‘Privacy Settings and Tools’ ऑप्शन दिखाई देगा। इसमें सेटिंग्स को बदलकर आप अपनी प्रोफाइल को अनचाहे लोगों से छुपा सकते हैं। इसके लिए आपको ‘Who can see my future posts?’ पर क्लिक करना है। इसके बाद ‘Only Me’ पर क्लिक करें।

2. फॉलोअर्स की सेटिंग

इस सेटिंग्स के बाद आपके पोस्ट कोई अन्य यूजर्स नहीं देख पाएंगे। फेसबुक आपके फ्रेंड्स के साथ फॉलोअर्स को भी आपके पोस्ट देखने की अनुमति देता है। अगर अपने पोस्ट सिर्फ फ्रेंड्स को ही दिखाना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे पहले सेटिंग्स में जाकर Followers ऑप्शन पर क्लिक करें। इसके बाद ‘Who can follow me’ ऑप्शन पर जाकर ‘Everybody’ से ‘Friends’ पर क्लिक करें।

3. कहीं से भी करें लॉगआउट

कई बार हम अपना फेसबुक अकाउंट लॉगआउट करना भूल जाते हैं। ऐसे में इससे कोई भी छेड़छाड़ कर सकता है। हालांकि, इसे कहीं से भी लॉगआउट किया जा सकता है। यूजर फेसबुक अकाउंट ओपन करने के लिए जब भी लॉगइन करता है, उसका रिकॉर्ड सेव हो जाता है। यानी उसने कब, कहां और किस सिस्टम पर लॉगइन किया। अगर किसी सिस्टम पर वो लॉगआउट करना भूल गया है, तो उसे किसी भी सिस्टम से किया जा सकता है। फेसबुक के सिक्युरिटी ऑप्शन में यूजर्स के लिए ये सुविधा होती है। इसके लिए ये स्टेप फॉलो करें।

Settings > Security Settings > Where You’re Logged In

यहां पर आपके लॉगइन से जुड़ी जानकारी में शहर का नाम और डिवाइस टाइप होता है। इसके सामने End activity का ऑप्शन होता है, जिस पर क्लिक करते ही पुरानी डिवाइस से यूजर का अकाउंट लॉगआउट हो जाता है।

4. लॉगइन अलर्ट को ON करें

इसका फायदा ये है कि कोई पर्सन आपके अकाउंट को गलत तरीके से ओपन करने की कोशिश करता है या गलत पासवर्ड डालता है तो उसका अलर्ट आपको ई-मेल ID पर मिल जाता है। फेसबुक के लॉगइन अलर्ट फीचर को ON करने के लिए ये स्टेप फॉलो करें।

Settings >> Security Settings >> Login Alerts

यहां पर यूजर को Notifications और Email address के अलर्ट ऑप्शन को ON करके सेव चेंज करना है।

5. सिक्युरिटी कोड एक्टिव करें

इस फीचर की मदद से आपको अकाउंट से जुड़ी जानकारी मिलती है। फेसबुक का ये फीचर स्मार्टफोन यूजर्स के लिए है। ऐसे यूजर्स जो फेसबुक ऐप का इस्तेमाल करते हैं, वे सिक्युरिटी के लिए कोड एक्टिव कर सकते हैं। इस कोड को ब्राउजर और ऐप दोनों की मदद से अप्लाई किया जाता है। कोड जनरेट करने के लिए इन स्टेप को फॉलो करें।

Settings >> Security Settings >> Code Generator

यहां पर कोड अनेबल का ऑप्शन आएगा। इस पर जैसे ही क्लिक करेंगे, एक बॉक्स आएगा जिसमें सिक्युरिटी नंबर डालना होता है। यूजर को सिक्युरिटी नंबर फेसबुक ऐप से मिलता है। ऐप के Menu में Code Generator का ऑप्शन होता है, जहां से ये नंबर मिलता है। इसे 30 सेकंड के अंदर बॉक्स में सबमिट करना होता है। हर 30 सेकंड में नया कोड जनरेट होता है। इसका फायदा यह होगा कि यदि कोई आपके अकाउंट में बदलाव करता है तो उसके लिए आपके मोबाइल अकाउंट की भी जरूरत पड़ेगी।

6. https सिक्युरिटी चेक करें

फेसबुक की सिक्युरिटी को ध्यान में रखते हुए हमेशा ऐसे ब्राउजर का इस्तेमाल करना चाहिए जिसके एड्रेस बार पर https:// हो। यह हाईपरटैक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल होता है। इसके आगे एक लॉक का साइन होता है, जिससे यूजर के अकाउंट को पूरी सिक्युरिटी मिलती है। आपको ऐसे ब्राउजर पर काम नहीं करना चाहिए जिस पर लॉक नहीं दिख रहा हो। साथ ही यूजर को अपना पुराना वेब ब्राउजर लगातार अपडेट करते रहना चाहिए। यह बात केवल फेसबुक ही नहीं, किसी भी वेबसाइट को ओपन करते समय ध्यान रखनी चाहिए।

7. फ्रेंड रिक्वेस्ट

कई बार हमें ऐसे यूजर्स की फ्रेंड रिक्वेस्ट मिलती है, जिन्हें हम नहीं जानते। साथ ही कई यूजर्स बार-बार रिक्वेस्ट सेंड करते हैं। ये ऐसे यूजर्स हो सकते हैं जिनका मकसद आपके अकाउंट को हैक करना हो सकता है। ऐसे यूजर्स की रिक्वेस्ट को रोका जा सकता है।

इसके लिए सबसे पहले Privacy सेटिंग पर जाएं। इसके बाद Who can contact me? ऑप्शन में आपको ‘Who can send you friend requests’ सेटिंग मिलेगी। इस पर क्लिक करने के बाद आपको ‘Everyone’ to ‘Friends of Friends’ में से अपने मनपसंद ऑप्शन पर क्लिक करना है।

8. मैसेज फिल्टर

अगर आपके इनबॉक्स में रोजाना कई सारे अनवॉन्टेड मैसेज आ रहे हैं, जिससे आपको परेशानी हो रही है, तो ‘Whose messages do I want filtered into my inbox’ पर क्लिक करें। इसमें आपको ‘Basic’ और ‘Strict’ ये दो ऑप्शन मिलेंगे। यह आपको तय करना है कि आप यहां किस तरह की सेटिंग करना चाहते हैं। इन्हें फिल्टर करना भी इसलिए जरूरी है क्योंकि इनसे भी आपकी प्राइवेट इन्फॉर्मेशन लीक हो सकती है।

9. हाइड FB ई-मेल ऐड्रेस

फेसबुक से आपके ई-मेल ऐड्रेस को चुराकर उस पर कई तरह के मैसेज और दूसरे मेल आते हैं। हालांकि, इसे छुपाने का भी ऑप्शन होता है। इसके लिए आपको ‘Who can look you up using the email address you provided?’ पर क्लिक करें। इसके लिए बाद ‘Everyone’ या ‘Friends’ पर क्लिक करें।

10. फोन नंबर

यदि आपने फेसबुक पर फोन नंबर दिया है, तो इसे भी यहां से चुराया जा सकता है। ऐसे में इसे हमेशा दूसरों से छुपाकर रखें। इसे हाइड रखने के लिए ‘Who can look you up using the phone number you provided?’ पर जाकर इसे ‘Everyone’ से हटाकर ‘Friends’ पर क्लिक करें।

11. टाइमलाइन और टैगिंग

कई बार कुछ गलत पोस्ट आपके अकाउंट के साथ शेयर कर दी जाती हैं। ऐसे में इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि कोई आपको टैग नहीं कर सके। इससे बचने के लिए आपको ‘Timeline and Tagging Settings’ में जाना होगा।

इन पर केवल ‘Only Me’ करें :

– ‘Who can post on your timeline’
– ‘Who can see posts you’re tagged in on your timeline’
– ‘Who can see what others post to your timeline’
– ‘When you’re tagged in a post, who do you want to add to the audience if they can already see it’

मुकेश अंबानी की जितनी जिंदगीभर की है कमाई, उतने जुकरबर्ग ने 2 दिन में गंवाए

मुंबई। डाटा लीक के मामले में दुनियाभर में फेसबुक की निंदा हो रही है। कंपनी CEO मार्क जुकरबर्ग ने इस संबंध में यूजर्स से माफी भी मांगी है। दूसरी तरफ यह मामला बाहर आने के पहले ही दो दिनों में फेसबुक का मार्केट केप में करीब 3,80,000 करोड़ रुपए (50 बिलियन डॉलर) का घाटा हुआ है।

# मुकेश अंबानी की है इतनी नेटवर्थ

विवाद के पहले इस सप्ताह की शुरुआत में फेसबुक की मार्केट वेल्यू 34,93,295 करोड़ रुपए थी। इसके बाद 2 ही दिनों में यह घटकर 31,13,565 करोड़ रुपए हो गई। इस तरह से फेसबुक की वेल्यू में 3,80,000 करोड़ की कमी आई। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यह राशि भारत के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी के नेटवर्थ 2,53,000 (38.9 बिलियन डॉलर) से भी डेढ़ गुना यानी 50 प्रतिशत ज्यादा है।

# हर मिनट पर 135 करोड़ का नुकसान

विवाद सामने आने के 48 घंटे में फेसबुक ने 3,80,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इस तरह से दो दिनों के 48 घंटे में फेसबुक ने हर घंटे 8125 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। यदि इसे मिनट में देखें, तो यह राशि 135 करोड़ रुपए प्रति मिनट होती है। वहीं, इसे सेकंड में देखें तो ये 2.26 करोड़ रुपए है

  • # मार्क जुकरबर्ग को 52 हजार करोड़ का नुकसान

    फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग की साख भी दांव पर लगी हुई है। ब्लूमबर्ग बिलियोनर इंटेक्स के अनुसार जुकरबर्ग की नेटवर्थ 4.90 लाख करोड़ में से 52 हजार करोड़ रुपए से घटकर 4.38 लाख करोड़ रह गई है।

     फेसबुक के शेयर में गिरावट

    फेसबुक के शेयर्स में भी भारी कमी देखी गई है। पिछले शुक्रवार 16 मार्च को बंद बाजार में जिस शेयर के भाव 185 डॉलर थे, वहीं मंगलवार 20 मार्च की शाम को घटकर 166.57 डॉलर तक पहुंच गए थे।

     

‘इराक में रहना ख़तरनाक है पर यहां भी तो ग़रीबी जान ले रही थी’

“इराक़ में रहना ख़तरनाक है लेकिन घर पर भी तो ग़रीबी परिवार की जान ही ले रही थी”, इराक़ के मूसल में मारे गए दविंदर सिंह की पत्नी मंजीत कौर के इन शब्दों में उनकी बेबसी साफ झलक रही थी.

52 साल के दविंदर उन 39 भारतीयों में शामिल थे, जिनकी हत्या कथित चरमपंथी संगठन आईएसने इराक के मूसल में कर दी थी.

यादों को आंसुओं में समेटे मंजीत आगे कहती हैं, ” जिस दिन वो जा रहे थे, उस दिन उनकी बहन ने बहुत समझाया कि इराक़ में युद्ध चल रहा है, लेकिन उन्होंने कहा कि चिंता मत करो, कुछ नहीं होगा मुझे.”

इतना कहते ही वो आंखें बंद कर लेती हैं. पलकों से ठोकर खाकर पुरानी यादें समेटे उनके आंसू जमीन पर गिरते हैं और लगता कि उनके तमाम सपने बिखर गए हैं.

मंजीत कौर ने बताया, “वो हमेशा कहते थे कि जहां धमाके और संघर्ष हो रहा है, वो जगह उनसे काफी दूर है और उनके आसपास माहौल ठीक है. जून 2014 में जब उनसे अंतिम बार बात हुई थी तब उनका अपहरण हो चुका था पर उन्होंने हमलोगों को जानकारी नहीं दी. वो हमें परेशान नहीं करना चाहते थे. लेकिन अब वो कुछ नहीं कर सकते हैं.”

दविंदर अपने पैतृक गांव रुड़का कलां में मजदूरी करते थे. वो 200 से 250 रुपए तक एक दिन में कमाते थे लेकिन उन्हें रोज काम नहीं मिलता था.

मंजीत कौर के तीन बच्चे हैं, जिनमें से दो जुड़वा हैं. पेट पालने के लिए मंजीत गांव के एक स्कूल में सिलाई सिखाती हैं. इस काम से वो हर महीने ढाई हज़ार रुपए कमाती हैं.

एक कमरे के जर्जर मकान में रहने वाली मंजीत याद करती हैं, “उन्होंने कहा था कि वो तीन-चार साल के लिए इराक़ जा रहे हैं और वहां से आने के बाद उनका अपना घर होगा.”

“वो इराक जा सकें इसके लिए हमलोगों ने एजेंट को देने के लिए डेढ़ लाख रुपए का कर्ज लिया था. एजेंट ने दावा किया था कि वो इलाका अमरीकी सैनिकों के नियंत्रण में हैं और वहां स्थिति बुरी नहीं है.”

दविंदर 2011 में इराक़ गए थे. उस समय उनका बड़ा बेटा छह साल का था और जुड़वा बच्चे महज आठ महीने के थे.

मंजीत कहती हैं, “अपहरण होने से पहले तक वो हर महीने अपनी कमाई के 25 हजार रुपये में से ज्यादातर भेज देते थे.”

पिछले चार सालों से मंजीत की अपने पति से किसी तरह की बात नहीं हुई पर उनकी आंखों में उनके आने की उम्मीदें बरकार थीं. “जब भी मैं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मिलती थी तो वो हमें उम्मीद नहीं खोने को कहती थीं.”

कुछ महीने पहले सरकार ने उनका डीएनए सैंपल लिया था. वो कहती हैं, “डीएनए लेते वक्त हमलोगों को कुछ नहीं बताया गया था कि वो इसे क्यों ले रहे हैं, पर गांव वाले यह अनुमान लगा रहे थे कि शायद दविंदर वहां बीमार हैं, इसलिए ऐसा किया जा रहा है.”

बच्चे की चाहत

मंगलवार को गांव की कुछ महिलाओं ने जब उन्हें सरकार की ओर से दी गई जानकारी के बारे में बताया तो वो भागती हुई अपने मायके पहुंच गईं. “मैं मौत की बात जानकर हैरान थी. मैं अपने मायके चली आई.”

वो अपने जुड़वा बच्चों में से एक की तरफ देखते हुए कहती हैं, “ये अपने पिता के आने की बात पूछता रहता था और हमलोग हमेशा ये कहते थे कि वो विदेश में रहते हैं. जब वो लौटेंगे तो उनके लिए साइकिल लेकर आएंगे. लेकिन अब वो कभी नहीं आएंगे.”

मूसल में मारे गए 39 लोगों में से 31 पंजाब से थे. बेहतर अवसरों की तलाश में पंजाबियों के विदेश जाने की चाहत जगजाहिर है. राज्य में गरीबी और नौकरियों की कमी के चलते वो युद्ध क्षेत्र में भी जाने से नहीं कतराते हैं.

जाने वालों की मजबूरियां

32 साल के संदीप कुमार का नाम भी उन 39 मृतकों की सूची में शामिल हैं. मल्सियान के नजदीक एक गांव में रहने वाले संदीप भी दिहाड़ी मजदूर थे.

अपनी चार बहनों की परवरिश के लिए वो 2012 में इराक़ गए थे. संदीप के भाई कुलदीप कुमार कहते हैं, “परिवार हर महीने पैसे का इंतजार करता था.”

संदीप के परिवार की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके घर के दरवाजे में किवाड़ तक नहीं हैं.

धूरी के प्रीतपाल शर्मा भी मारे गए 39 लोगों में से एक थे. उनकी पत्नी राज रानी कहती हैं, “वो वहां 2011 में गए थे क्योंकि यहां करने को कुछ नहीं था. हमलोगों को बताया गया था कि इराक़ में बहुत पैसा है लेकिन उन्हें वहां भी कमाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती थी.”

सेक्स वीडियो पर महिला की खुदकुशी

इटली में एक महिला के सेक्स वीडियो पर खुदकुशी करने के मामले में चार लोगों से पूछताछ की जा रही है.

मंगलवार को 31 साल की तिज़याना कैनटोन ने नेपल्स के नज़दीक म्यूनानो में आत्महत्या कर ली थी.

इस महिला ने महीनों तक अपने सेक्स वीडियो को इंटरनेट से हटाने के लिए लड़ाई लड़ी थी.

ये सेक्स वीडियो उसने अपने पुराने पुरूष मित्र और तीन अन्य लोगों को भेजा था, जिन्होंने इसे ऑनलाइन कर दिया.

उनका वीडियो में कहा शब्द “तुम फ़िल्म बना रहे हो ? ब्रावो”, एक ऑनलाइऩ मज़ाक बन गया.

इसे 10 लाख से अधिक लोगों ने देखा और वह हंसी का पात्र तो बनीं ही, उन पर गालियों की बौछार भी होने लगी.

इस मामले में चार लोगों से महिला की मानहानि करने पर पूछताछ की जा रही है.

सेक्स वीडियो के वायरल होने के बाद तिज़याना ने नौकरी छोड़ दी और जगह बदल दी. यहाँ तक कि वह अपना नाम बदलने की प्रक्रिया में थी ,लेकिन ये कहानी उनका पीछा नहीं छोड़ रही थी.

अदालती मामले में तिज़याना ने ” राइट टू बी फॉरगोटन (भुला दिए जाने का अधिकार)” के तहत ये केस जीता और अदालत ने फेसबुक सहित वीडियो को कई साइट्स और सर्च इंजनों से हटाने का आदेश दिया.

उन्हें मुकदमे की फीस के बीस हजार यूरो अदा करने को भी कहा गया, जिसे स्थानीय मीडिया में ” आखिरी अपमान” कहा गया है.

इटली के प्रधानमंत्री मैटियो रेंजी ने कहा,” एक सरकार के तौर पर हम अधिक नहीं कर सकते हैं. ” यह विशेषतः एक सांस्कृतिक लड़ाई है- एक सामाजिक और राजनीतिक लड़ाई भी. हमारी प्रतिबद्धता जो भी हम कर सकते हैं वह करने के प्रयास की है… महिलाओं के खिलाफ़ हिंसा ख़त्म न होने वाली घटना नहीं है.”

उनकी शवयात्रा का सीधा प्रसारण किया गया था.

रोहिंग्या संकट: मुझे नहीं पता था कि मेरे साथ रेप करेंगे

बांग्लादेश के रोहिंग्या शरणार्थी कैंपों से वेश्यावृत्ति के लिए किशोरावस्था में लड़कियों की तस्करी की गई.

इन कैंपों से विदेशियों को आसानी से सेक्स मुहैया कराया जा रहा है. ये लड़कियां म्यांमार में जारी संघर्ष से जान बचाकर अपने परिवार के साथ बांग्लादेश भागकर आई हैं.

अनवरा की उम्र 14 साल हो रही है. म्यांमार में अपने परिवार के मारे जाने के बाद वो बांग्लादेश आ गई थी. वो मदद के लिए बांग्लादेश की सड़क पर भटक रही थी. अनवरा ने कहा, ”एक वैन से महिलाएं आईं. उन्होंने मुझसे साथ आने के लिए कहा.”

मदद स्वीकार लेने के बाद उसे कार में गठरी की तरह डाला दिया गया. अनवरा से सुरक्षित और नई ज़िंदगी का वादा किया गया था. अनवरा को पास के शहर के बजाय कॉक्स बाज़ार ले जाया गया.”

अनवरा ने कहा, ”कुछ ही समय में मेरे पास दो लड़कों को लाया गया. उन्होंने मुझे चाक़ू दिखाकर मेरे पेट पर घूंसा मारा. मेरी पिटाई की गई क्योंकि मैं उन्हें सहयोग नहीं कर रही था. इसके बाद दोनों लड़कों ने मेरे साथ रेप किया. मैं उनके साथ संबंध नहीं बनाना चाहती थी, लेकिन मेरे साथ रेप कभी थमा नहीं.”

यहां के आसपास के शरणार्थी कैंपों में वेश्यावृत्ति के लिए तस्करी के क़िस्से आम है. इसमें महिलाएं और बच्चियां मुख्य रूप से पीड़ित हैं. फाउंडेशन सेंटनल एनजीओ के साथ बीबीसी की टीम बाल शोषण के ख़िलाफ़ इन कैंपो में क़ानूनी मदद पहुंचा रही है.

बांग्लादेश की जांच एजेंसी भी पूरे मामले में शामिल नेटवर्क का पता करने की कोशिश कर रही है.

बच्चों और उनके माता-पिता का कहना है कि उन्होंने विदेशों में नौकरी और राजधानी ढाका में मेड और होटल में काम दिलाने की पेशकश की थी.

सेक्स इंडस्ट्री से इन कैंपों से लड़कियों के लाने के लिए बड़े ऑफर दिए जा रहे हैं. लोगों को मुश्किल घड़ी में अच्छी ज़िंदगी देने की बात कही जा रही है और इसी आधार पर वेश्यावृत्ति के लिए तस्करी हो रही है.

मासुदा की उम्र 14 साल हो रही है. अभी उन्हें एक स्थानीय धर्मशाला में मदद के लिए लाया गया है. उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें कैंप से तस्करों के पास पहुँचा दिया गया.

मासुदा ने कहा, ”मुझे नहीं पता था कि मेरे साथ क्या होने जा रहा है. एक महिला ने मुझे नौकरी देने का वादा किया. सभी को पता है कि वो लोगों को सेक्स के लिए लाती है. वो एक रोहिंग्या है और यहां लंबे समय से है. हमलोग उसे जानते हैं. लेकिन मेरे पास कोई विकल्प नहीं था. यहां मेरे लिए कुछ भी नहीं था.”

मासुदा ने कहा, ”मैं अपने परिवार से बिछड़ गई हूं. मेरे पास कोई पैसा नहीं है. मेरे साथ म्यांमार में भी रेप हुआ था. मैं जंगल में अपने भाई और बहन के साथ खेलने जाती थी. अब मुझे नहीं पता है कि कैसे खेला जाता है.”

कई माता-पिता डरे हुए हैं कि वो अपने बच्चों को फिर कभी नहीं देख पाएंगे. वहीं कई लोगों को लगता है कि कैंप से बाहर की जिंदगी बेहतर होगी.

लेकिन इन बच्चों कौन ले जाता है और कहां ले जाता है? हाल ही में बीबीसी की जांच टीम ने कैंपों में लड़कियों तक पहुंचने की कोशिश की. बीबीसी की टीम ने विदेशी बनकर इसे परखने की कोशिश की.

48 घंटों के भीतर यहां हर चीज़ की व्यवस्थ हो गई. पुलिस को बताकर बीबीसी की टीम ने दलालों से विदेशियों के लिए रोहिंग्या लड़कियों को लेकर बात की. इनमें से एक व्यक्ति ने कहा, ”हमलोग के पास कई जवान लड़कियां हैं, लेकिन आपको रोहिंग्या ही क्यों चाहिए? ये तो बिल्कुल गंदी होती हैं.” वेश्यावृत्ति के पेशे में रोहिंग्या लड़कियों को सबसे सुलभ और सस्ता माना जाता है.

एक नेटवर्क में काम करने वाले कई दलालों ने हमें लड़कियों की पेशकश की. बातचीत के दौरान हमने ज़ोर देकर कहा कि हम लड़कियों के साथ तुरंत रात बिताना चाहते हैं.

तुरंत 13 से 17 साल के बीच की लड़कियों की तस्वीरें हमारे सामने आना शुरू हो गईं. नेटवर्क का फैलाव और लड़कियों की संख्या हैरान करने वाली थी.

अगर हमें तस्वीरों में लड़कियां पसंद नहीं आतीं तो वे और तस्वीरें लेकर हाज़िर हो जाते. अधिकतर लड़कियां दलालों के साथ रहती हैं. जब वो किसी ग्राहक के साथ नहीं होती हैं तो वे खाना बना रही होती हैं या झाड़ू-पोंछा लगा रही होती हैं.

हमें बताया गया, ‘हम लड़कियों को लंबे समय तक नहीं रखते. ज़्यादातर बांग्लादेशी मर्द ही यहां आते हैं. कुछ वक्त के बाद ये लोग बोर हो जाते हैं. छोटी उम्र की लड़कियां काफ़ी हंगामा करती हैं इसलिए हम उनसे जल्द ही छुटकारा पा लेते हैं.’

रिकॉर्डिंग और निगरानी के बाद हमने अपने सबूत स्थानीय पुलिस को दिखाए. एक स्टिंग ऑपरेशन के लिए एक छोटी सी टीम बनाई गई.

पुलिस ने तुरंत दलाल को पहचान लिया, “हम उसे अच्छी तरह से जानते हैं.”

ये समझ नहीं आया कि पुलिस वाला क्या कहना चाहता था. शायद वो दलाल ख़बरी था या एक घोषित अपराधी.

स्टिंग की शुरुआत हमने दलाल से उन दो लड़कियों की मांग से की जिनकी तस्वीरें हमें पहले दिखाई गई थीं.

हमने कहा कि लड़कियां कॉक्स बाज़ार के एक मशहूर होटल में शाम आठ बजे पहुंचाई जाएं.

फ़ाउंडेशन सेंटिनेल संस्था के विदेशी सदस्य को अंडरकवर ग्राहक बनाकर, एक अनुवादक के साथ होटल के बाहर खड़ा कर दिया गया.

जैसे ही मिलने का वक्त क़रीब आया, दलाल और अंडरकवर ग्राहक के बीच फ़ोन पर कई बार बातचीत हुई.

दलाल चाहता था कि ग्राहक होटल से बाहर आए. हमने मना कर दिया. दलाल ने दो लड़कियों को एक ड्राइवर के साथ हमारे पास भेजा.

पैसे के लेन-देन के समय हमारे अंडरकवर ग्राहक ने पूछा, “अगर आज सबकुछ ठीक रहा तो क्या आगे भी इसे जारी रख सकते हैं?”

ड्राइवर ने हां में सिर हिलाया.

इसके बाद पुलिस एक्शन में आ गई. ड्राइवर को गिरफ़्तार किया गया. बच्चों के साथ काम करने वाले विशेषज्ञों और मानव-तस्करी के जानकारों की मदद से लड़कियों के रहने के लिए जगह खोजी गई.

एक लड़की ने वहां जाने से मना कर दिया. लेकिन दूसरी मान गई.

लड़कियां ग़रीबी और वेश्यावृत्ति के बीच फंसी हुई थीं. उनका कहना था कि वेश्यावृत्ति के बिना न तो वो अपना पेट भर पाएंगी और न ही अपने परिवार का.

महिलाओं और बच्चों को अंतरराष्ट्रीय सीमा के आर-पार ले जाने के लिए एक नेटवर्क की ज़रूरत होती है.

इसे इंटरनेट पूरा करता है. इंटरनेट के ज़रिए संगठित अपराध के अलग-अलग सदस्य एक दूसरे के संपर्क में रहते हैं और सेक्स बेचने का धंधा भी होता है.

हमने रोहिंग्या बच्चों को बांग्लादेश के ढाका और चटगाँव, नेपाल के काठमांडू और भारत में कोलकाता ले जाए जाने की मिसालें देखीं.

कोलकाता की सेक्स इंडस्ट्री में उन्हें भारतीय पहचान पत्र दिए जाते हैं जिसकी वजह से उनकी असली पहचान ग़ायब हो जाती है.

ढाका में साइबर क्राइम यूनिट ने हमें बताया कि कैसे मानव तस्कर इंटरनेट के ज़रिए लड़कियों को बेचते हैं.

फ़ेसबुक पर बने ग्रुप सेक्स इंडस्ट्री को लुका-छिपे जारी रखने में मददगार साबित होते हैं.

हमें डार्क वेब के बारे में बताया गया जिसपर मौजूद इनक्रिप्टेड वेबसाइट्स इन गोरखधंधों को आसान बना देती हैं.

डार्क वेब पर एक यूज़र ने शरणार्थी संकट में फंसे रोहिंग्या बच्चों से फ़ायदा उठाने के तरीके बताए.

ये यूज़र आगे ये भी बताता है कि इन बच्चों को खोजने की बेहतर जगह कौन सी है.

इस बातचीत को अब सरकार ने इंटरनेट से हटा दिया है. लेकिन इससे हमें पता चलता है कि कैसे शरणार्थी संकट मानव तस्करों और बच्चों का यौन शोषण करने वालों का केंद्र बनते जा रहे हैं.

बांग्लादेश में ऑनलाइन और ऑफ़लाइन दोनों ही तरीकों से, मानव तस्करों का एक जाल फैलता जा रहा है.

रोहिंग्या संकट ने बांग्लादेश में सेक्स इंडस्ट्री शुरू नहीं की लेकिन इस संकट के बाद इसमें भारी इज़ाफ़ा हुआ है.

कभी कंगना के पैदा होने से नाखुश थे पेरेंट्स, देखें बचपन से अब तक के

मुंबई।एक्ट्रेस कंगना रनोट 31 साल की होने वाली हैं। 23 मार्च, 1987 को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के पास स्थित सुरजपूर (भाबंला) में जन्मी कंगना अपने बोल्ड किरदार, बड़बोलेपन, एक्टिंग स्किल्स या फिर पर्सनल लाइफ के चलते हमेशा सुर्खियों में रहती हैं। फिलहाल कंगना पर कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड मामले में आरोप लगे हैं। इसके मुताबिक, उन्होंने 2016 में रितिक रोशन का मोबाइल नंबर रिजवान सिद्दीकी से शेयर किया था। कंगना को अनवॉन्टेड चाइल्ड मानते थे पेरेंट्स…

कुछ साल पहले वुमन्स डे के मौके पर दिए इंटरव्यू में कंगना ने बताया था कि जब वे पैदा हुई थीं, तब उनके पेरेंट्स नाखुश थे। दरअसल, जब उनकी बड़ी बहन का जन्म हुआ था तो घरवाले बेहद खुश थे। लेकिन दूसरे बच्चे के तौर पर जब घर में लड़की हुई, तो परिवार वाले नाखुश हो गए। उस दौरान कंगना को अनवॉन्टेड चाइल्ड माना जाता था।
कंगना की फेवरेट हैं उनकी बड़ी बहन…
कंगना के पिता अमरदीप रनोट बिजनेसमैन है और मां आशा रनोट स्कूल में टीचर हैं। उनकी बड़ी बहन रंगोली, उनकी फेवरेट हैं। रंगोली, कंगना की मैनेजर है। एसिड अटैक जैसे दर्दनाक हादसे से गुजरने और नए सिरे से जिंदगी जीने वाली रंगोली की लाइफ पर कंगना बायोपिक बनाने की चाहत भी जाहिर कर चुकी हैं। उनका एक छोटा भाई भी है, जिसका नाम अक्षत है।

– कंगना को शुरु से मॉडलिंग का शौक था। एक्टिंग के लिए वो महज 15 साल की उम्र में बिना परमिशन लिए चंडीगढ़ से दिल्ली आ गईं थीं।
– दिल्ली में इंडिया हैबिटेट सेंटर में काफी मेहनत के बाद एक्टिंग करने को मिला। 5-6 महीने के बाद एक्टिंग वर्कशॉप के अरविंद गौड़ ने कंगना को मौका दिया।
– बैक स्टेज एक्टिंग करते-करते कंगना को एक बार एंकर बनने का मौका मिला। इस एंकरिंग को ही कंगना अपना पहला ब्रेक मानती हैं और इसके बाद वो मुंबई के लिए निकल पड़ी।

– रिपोर्ट्स के मुताबिक कंगना के घर से भागने और फिल्मों में काम करने की वजह से कंगना के पिता ने उनसे सालों तक बात नहीं की थी।
– कंगना ज्योतिष में काफी विश्वास करती हैं। वे जब भी मंडी आती हैं यहां के ज्योतिष लेखराज शर्मा से जरूर मुलाकात करती हैं।

कंगना की बहन रंगोली के मुताबिक, “मुझे याद है, बचपन से उन्हें फैशन के कीड़े ने काट रखा था। भाबंला जैसी छोटी जगह में भी वह पब्लिक जगहों पर अजीबो-गरीब कपड़े पहनती थीं। वह शॉर्ट पेंट्स, व्हाइट शर्ट और हैट पहनकर घूमती थी। छोटी-सी जगह में इस तरह के कपड़े पहनने से लोग सोचते थे कि वह अजीब है। मुझे उसके साथ चलने में शर्मिंदगी महसूस होती थी। तो मैं कंगना के साथ जाना अवॉइड करती थी। उसके ड्रेसिंग की वजह से डैड उसे लेडी डायना बुलाते थे।

कंगना के मुताबिक, ‘बचपन में मैं बहुत आलसी हुआ करती थी। यहां तक कि नहाने में भी आना-कानी किया करती थी। मेरे घर वाले इस आदत से बहुत दुखी थे। अब मैं सोचती हूं कि शायद इसी कारण तब कोई मेरा दोस्त नहीं बना। हालांकि जैसे ही मैंने अपनी सफाई पर ध्यान देना शुरू किया, मेरे जीवन में बहुत कुछ अच्छा होना शुरू हो गया।

कंगना के माता-पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर बनें, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कंगना ने कम उम्र में ही मॉडलिंग की राह अपनाई और दिल्ली में रहकर मशहूर थिएटर डायरेक्टर अरविंद गौड़ से एक्टिंग की ट्रेनिंग ली। वे अरविंद के थिएटर इंडिया हैबिटेट सेंटर का हिस्सा बनीं और कई नाटकों में काम किया। उनका पहला प्ले गिरीश कर्नाड का ‘रक्त कल्याण’ था।

मौत से पहले फोन पर रो-रोकर बेटी ने कही थी मुझसे ये बातें, पिता ने सुनाई आपबीती

नोएडा.टीचर के टॉर्चर और गंदी नीयत से परेशान होकर 9वीं की छात्रा इकिशा शाह ने खुदकुुुशी कर ली। लेकिन उसका परिवार अब भी यह मानने को तैयार नहीं कि उनकी बेटी अब उनके बीच नहीं है। पिता का रो-रो कर बुरा हाल है। वे आरोपी टीचर्स को सलाखों के पीछे देखना चाहते हैं। वहीं, मां का कहना है कि अगर उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो पूरे परिवार के साथ आत्महत्या कर लेंगी। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। मौत से 20 मिनट पहले बेटी ने फोन पर पिता से कही थी ये बातें…

– इकिशा दिल्ली के मयूर विहार स्थित एल्कॉन इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ती थी। उसका परिवार नोएडा सेक्टर-52 में रहता है।
– पिता राघव शाह प्रसिद्ध कथक डांसर और बिरजू महाराज के शिष्य हैं।
– मंगलवार शाम मौत से 20 मिनट पहले इकिशा ने पिता से फोन पर बात कर खुदकुशी कर ली।
– रोते हुए पिता ने बताया- ‘मंगलवार शाम करीब 4.15 मिनट पर मेरी इकिशा से फोन पर बात हुई।’
– ‘पापा कहते ही रोने लगी। कहा- मैंने पूरा कोर्स तैयार कर लिया है।’
– ‘लेकिन ये दोनों बहुत गंदे लोग हैं। मुझे फिर फेल कर देंगे।’
– ‘फोन पर मैं उसे दिलासा देता रहा, बेटी कुछ नहीं हुआ। घर आकर बात करता हूं।’

कमरे का दरवाजा तोड़ा, तो दिखा ऐसा मंजर
– पिता राघव शाह के मुताबिक, जब वे घर पहुंचे तो बेटी के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था।
– ‘मैं बहुत घबराया हुआ था। आवाज लगाने पर भी इकिशा दरवाजा नहीं खोल रही थी।’
– ‘मैंने फिर से आवाज लगाई। फिर दरवाजा तोड़कर भीतर देखा…।’
– ‘वो फंदे से लटकी हुई थी। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि बेटी ने आत्महत्या कर ली है।’
– ‘उसे फौरन फंदे से निकालकर हम पास के अस्पताल पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने उसे डेड डिक्लेयर कर दिया।’

आखिर क्या हुआ था इकिशा के साथ, क्यों थी परेशान?
– पिता के मुताबिक, पिछले कुछ समय से इकिशा बहुत परेशान रह रही थी।
– जब उन्होंने बेटी से पूछा- आखिर क्या बात है, तो उसकी बातें सुन पिता हैरान रह गए।
– इकिशा ने स्कूल के ही दो टीचर राजीव सहगल (एसएसटी) और नीरज आनंद (साइंस) पर गंदी नीयत से देखने और छेड़खानी का आरोप लगाया।
– राघव शाह ने बताया, दोनों टीचर अकेले में उसे गंदी नीयत से छूने की कोशिश करते थे।
– ‘मैंने प्रिंसिपल से इसकी शिकायत की। सुनने की बजाए उलटा उन्होंने मुझे बेटी को स्कूल से निकालने की धमकी दे दी।

एक्जाम में किया फेल
– ‘मेरी बेटी पढ़ाई में बहुत अच्छी थी। शिकायत के बाद से ही टीचर उसे परेशान करने लगे।’
– ’16 मार्च को उसका रिजल्ट आया। हैरानी की बात यह है कि उन्हीं दो सब्जेक्ट में इकिशा फेल हुई थी।’
– राघव शाह ने बताया, इसके बाद मैंने प्रिंसिपल से रि-चेकिंग की बात की। पर उन्होंने मुझे अनसुना कर दिया।
– ‘उसी दिन कॉरिडोर में मुझे वो दोनों टीचर मिले। दोनों मुझे देख कर हंस रहे थे।’
– बेटी बैक पेपर की तैयारी में लगी थी। लेकिन मेंटली टॉर्चर्ड महसूस कर रही थी।
– ‘वह बार-बार मुझसे कहती थी कि वो उसे फिर से फेल कर देंगे। मैं ही उसे समझ नहीं पाया।’

आप कभी अमीर बनेंगे या नहीं, इस तरीके से तुरंत हो सकता है मालूम

यूटिलिटी डेस्क. ज्योतिष की मान्यता है कि कुंडली में कुछ विशेष योग होते हैं, जिनके प्रभाव से कोई व्यक्ति धनवान बनता है। यहां जानिए ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार भृगु संहिता में बताए गए कुंडली में कुछ ऐसे योग जो व्यक्ति को धनवान बना सकते हैं…

ये हैं धनवान बनाने वाले कुंडली के योग

– जन्म कुंडली का दूसरा घर या भाव धन को दर्शाता है। कुंडली का दूसरा भाव धन, खजाना, सोना, मोती, चांदी, हीरे आदि से संबंधित है। साथ ही, व्यक्ति के पास कितनी स्थाई संपत्ति जैसे घर, भवन-भूमि होगी, दूसरे भाव से इस बात पर विचार किया जाता है।

– जिस व्यक्ति की कुंडली में द्वितीय भाव में कोई शुभ ग्रह हो या शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, उसे धन प्राप्त होता है।

– अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध द्वितीय भाव में हो और उस पर चंद्र की दृष्टि हो तो व्यक्ति कड़ी मेहनत के बाद भी आसानी से अमीर नहीं बन पाता है।

– अगर किसी व्यक्ति की कुंडली के द्वितीय भाव में चंद्रमा हो तो वह धनवान बनता है।

– यदि द्वितीय भाव के चंद्र पर नीच के बुध की दृष्टि पड़ जाए तो उस व्यक्ति के परिवार का धन नष्ट हो जाता है।

– यदि चंद्रमा अकेला हो और कोई भी ग्रह उससे द्वितीय या द्वादश न हो तो व्यक्ति आजीवन गरीब ही रहता है। ऐसे व्यक्ति को आजीवन अत्यधिक परिश्रम करना होता है, लेकिन वह अधिक पैसा नहीं प्राप्त कर पाता।

– यदि द्वितीय भाव में किसी पाप ग्रह की दृष्टि हो तो व्यक्ति धनहीन होता है।

इस AC को कितना भी करें यूज, नहीं आएगा बिजली बिल, हर महीने बचेंगे हजारों रुपए

यूटिलिटी डेस्क। सोलर प्रोडक्ट मैन्युफैक्चर कंपनी बेलिफल इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने सोलर से चलने वाला एयर कंडीशन (AC) बनाया है। ये AC इलेक्ट्रिसिटी के बिना ही चलता है। यानी इसे यूज करने पर किसी तरह का बिजली बिल नहीं आएगा। कंपनी ने 1 टन और 1.5 टन कैपेसिटी वाले 2 अलग-अलग AC निकाले हैं। यानी कमरे के साइज और जरूरत को देखते हुए इन AC का यूज किया जा सकता है।

# इतने रुपए की होगी सेविंग

इंडिया में बिजली से चलने वाले AC की बड़ी रेंज मौजूद है। इनमें 2 स्टार से लेकर 5 स्टार रेटिंग वाले AC शामिल हैं। 2 स्टार का बिजली बिल ज्यादा आता है, तो वहीं 5 स्टार का कम। यदि AC 2 स्टार है तब वो सिर्फ एक रात में 8 से 10 यूनिट की खपत करता है। यानी महीने में 250 से 300 यूनिट एक्स्ट्रा हो सकती हैं। दूसरी तरफ, 5 स्टार AC से ये यूनिट 200 के अंदर ही रहती हैं।

भोपाल (MP) में 1 यूनिट की कीमत करीब 7 रुपए है। ऐसे में यदि मंथली यूनिट 100 से ज्यादा होती हैं तब उसका चार्ज भी बढ़ जाता है। जैसे, यहां 378 यूनिट पर 2770 रुपए का बिजली बिल आया। यानी एक यूनिट का औसत खर्च 7.33 रुपए है। ऐसे में यदि AC से 300 यूनिट की खपत होती है तब कम से कम 2,199 रुपए का एक्स्ट्रा बिल आएगा।

# इतनी है कीमत

Belifal के 1 टन वाले सोलर AC की कीमत 1.99 लाख रुपए है। वहीं, 1.5 टन वाले सोलर AC की प्राइस 2.49 लाख रुपए है। ये AC पूरी तरह सोलर सिस्टम पर काम करते हैं। यानी इसकी इंडोर और आउटडोर यूनिट DC पर काम करती हैं।

ये AC पूरी तरह से DC वोल्ट पर काम करता है। इसकी दोनों यूनिट DC को सपोर्ट करती हैं। इसके इनवर्टर में लोवर पावर कंजप्शन टेक्नोलॉजी का यूज किया गया है। ये 48VDC के सोलर सिस्टम पर काम करता है। कंपनी इसके साथ 1500वाट्स का सोलर पैनल और 12V 100Ah बैटरी (6 प्लेट्स) दे रही है। सोलर पैनल इतना पावरफुल है कि ये बैटरी को तेजी से चार्ज करता है।

बेड पर आपकी फेवरेट पॉजिशन क्या है? शाहिद कपूर की पत्नी ने दिया ये जवाब

शाहिद कपूर पत्नी मीरा राजपूत के साथ नेहा धूपिया के चैट शो ‘वोग न्यू बीएफएफ’ पर पहुंचे।

मुंबई.शाहिद कपूर पत्नी मीरा राजपूत के साथ नेहा धूपिया के चैट शो ‘वोग न्यू बीएफएफ’ पर पहुंचे। इस दौरान दोनों ने अपनी लाइफ से जुड़ी कई रोचक बातें शेयर की। नेहा धूपिया ने जब दोनों से उनकी सेक्स लाइफ पर सवाल किया तो शाहिद ने शर्माते हुए इसे नजरअंदाज करने की कोशिश की। उन्होंने मीरा को भी चुप रहने का इशारा किया। वे जवाब दिए बगैर नहीं रह सकीं। क्या था नेहा का सवाल और क्या दिया मीरा ने जवाब…

 

– नेहा ने शाहिद और मीरा से सवाल किया था कि बेड पर उनकी फेवरेट पॉजिशन कौन सी होती है? जाहिर सी बात है ऐसे पर्सनल सवालों का जवाब देने में सबको आसानी नहीं होती। इस वजह से शाहिद ने इसे इग्नोर कर दिया और मीरा को इशारा किया कि वे भी सवाल को अवॉयड कर दें।
– लेकिन मीरा ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि वे शाहिद कंट्रोल फ्रीक हैं। वे हमेशा मुझसे कहते हैं कि क्या करना है।”

शाहिद बोले- ‘एक महिला ने मुझे चीट किया’

– शो के दौरान नेहा ने शाहिद से पूछा कि क्या कभी किसी महिला ने उन्हें चीट किया? इस दौरान मीरा ने नेहा से सवाल में कुछ बदलाव करने को कहा।
– तब नेहा ने शाहिद से पूछा कि उन्हें कितनी महिलाओं ने धोखा दिया। जवाब में शाहिद ने कहा, “एक के बारे में मैं निश्चित हूं और दूसरी को लेकर मुझे डाउट है।”
– शाहिद ने नाम नहीं लिया। लेकिन अंदाजा लगाया जा रहा है कि उनका इशारा करीना कपूर की ओर था, जो जब सैफ अली खान के नजदीक आईं, तब शाहिद को डेट कर रही थीं।

ऐसी है मीरा और 13 साल बड़े शाहिद की लव स्टोरी

– शाहिद कपूर और उनके पिता धार्मिक संगठन राधा स्वामी सत्संग व्यास पीठ के फॉलोअर हैं। दोनों सत्संग में हिस्सा लेने दिल्ली जाया करते थे। मीरा और उनकी फैमिली भी इस व्यास पीठ की अनुयायी है। लिहाजा सत्संग के दौरान के दौरान हुईं दोनों की मुलाकातें प्यार में तब्दील गई।
-मीरा राजपूत ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्री राम कॉलेज से इंग्लिश ऑनर्स की पढ़ाई की है। वह शाहिद से 13 साल छोटी हैं। दोनों ने जुलाई, 2015 में शादी की थी।वैसे, एक वक्त था जब मीरा इस शादी के लिए तैयार नहीं थीं। इसका कारण उनकी और शाहिद की उम्र में बड़ा अंतर ही था।

मीरा ने शादी के लिए रखी थी यह शर्त

– एक इंटरव्यू में शाहिद ने खुलासा किया था कि मीरा ने उनसे शादी के पहले एक शर्त रखी थी, जिसमें कहा कि उन्हें अपने बाल पहले की तरह रखने होंगे तभी वह उनसे शादी करेंगी।
– दरअसल दोनों की पहली मुलाकात फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ की शूटिंग के दौरान हुई थी और इसमें शाहिद के बाल काफी बढ़े हुए थे। इसके अलावा मीरा ने शाहिद से प्रॉमिस लिया कि जब उनकी शादी होगी तो शाहिद के बालों का कलर नार्मल होगा।

शाहिद को शादू कहती हैं मीरा

– खबरों की मानें तो मीरा ने शाहिद कपूर को डायरेक्ट नाम से नहीं बुलातीं। वे उन्हें ‘शादू’ कहकर बुलाती हैं।
– मीरा को म्यूजिक सुनना पसंद है और वे बॉलीवुड सिंगर्स के अलावा अवरिल लाविंगे, ब्योंस और डेमी लोवाटो सहित कई विदेशी सिंगर्स की फैन हैं।

तो पोर्न स्टार बन जाती राष्ट्रपति ट्रंप के बच्चे की मां, पोलीग्राफ टेस्ट में सामने आया चौंकाने वाला सच

पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स (असली नाम स्टेफनी क्लिफोर्ड) द्वारा डोनाल्ड ट्रंपर संबंध बनाने के आरोप सच हुए है। हाल ही में इस पोर्न स्टार का लाई डिटेक्टर टेस्ट (पोलीग्राफ टेस्ट) हुआ जिसमें बेहद चौंकाने वाली बाते सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लाई डिटेक्टर टेस्ट में जब पोर्न स्टार से पूछा गया कि क्या उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के साथ सेक्स क्या है तो उनके हां कहते ही पोलीग्राफ ने उन्हें सच साबित कर दिया। पूछे गए ऐसे-ऐसे सवाल…

पोर्न स्टार के वकील ने सीएनन को बताया कि डॉक्टर्स की टीम ने स्टॉर्मी से तीन प्रमुख सवाल पूछे। पहला, कि क्या जुलाई 2006 में आपने डोनाल्ड ट्रंप के साथ सेक्स किया था? दूसरा, कि क्या आपने जुलाई 2006 में डोनाल्ड ट्रंप से असुरक्षित संबंध बनाए थे? तीसरा, कि क्या डोनाल्ड ट्रंप ने आपको अप्रेंटिस में कास्ट करने की बात कही थी?। इन तीनों सवालों के जवाब में पोर्न स्टार ने हां कहा, जो कि सच पाए गए। टेस्ट में उनके झूठ बोलने की संभावना 1 प्रतिशत बताई गई। माना जा रहा है कि इस पोलीग्राफ टेस्ट से अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टेस्ट रिजल्ट के आने के बाद ट्रंप के समर्थक हैरान हैं, वहीं उनके विरोधियों का कहना है कि पोर्न स्टार ट्रंप के बच्चे की मां भी बन सकती थी।

क्या है पूरा मामला

-असल में इसके पीछे की वजह है एक बड़ा खुलासा जो खुद इस पोर्न स्टार ने किया था। आपको बता दें कि स्टेफनी क्लिफोर्ड ने खुलासा किया था कि उनके अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप से संबंध थे। इतना ही नहीं ट्रंप ने मुंह बंद रखने के लिए पोर्न स्टार 130,000 डॉलर (करीब 90 लाख रु) दिए थे। उनका ये अफेयर तब शुरू हुआ जब ट्रंप की वाइफ मेलानिया बेटे को जन्म दिया था। पोर्न स्टार ने कहा कि ट्रंप के बेटे के जन्म के चार महीने बाद दोनों के संबंध बने थे।

होटल में बने थे ट्रंप से संबंध
– क्लिफोर्ड ने बताया था कि उन्होंने 2006 में ट्रंप के साथ एनवी होटल में ट्रंप के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। साथ ही ट्रंप ने उनसे वादा किया था कि वो उन्हें The Apprentice रिऐलिटी शो में भी कास्ट करेंगे। क्लिफोर्ड ने बताया कि ट्रंप ने एक बार मुझे ये भी कहा था कि मैं उनकी बेटी की ही तरह स्मार्ट और खूबसूरत हूं।

बिल ने तीन दिन पहले ही ये कह दिया था कि उनकी बेटी स्टॉर्मी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जरूरी संबंध बनाए होंगे और अब बार-बार ट्रंप का नाम उछालकर वो अपनी जान खतरे में डाल रही है।

बिल ने बताया कि स्ट्रॉमी एक बेहतरीन स्टूडेंट थी लेकिन पैसे और फेम के चक्कर में उसने ये गंदा काम शुरू कर दिया। बिल ने आगे बताया कि 15 साल पहले स्टॉर्मी ने घर से नाता तोड़ लिया था और वो अपनी बच्ची से भी किसी को नहीं मिलने देती।

यहां पर आया गजब का कानून! 2 पत्नियां रखने पर सरकार देगी मकान भत्ता

संयुक्त अरब अमीरात ने एक अजीब कानून शुरु किया है जिसके तहत दो पत्नियां रखने पर सरकार कई तरह की सुविधाएं दे रही है। यहां की सरकार ने दो पत्नियां रखने वाले लोगों के लिए अतिरिक्त मकान भत्ता देने की घोषणा की है।

इस देश में अविवाहित लड़कियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने लोगों को दूसरी शादी करने को प्रोत्साहित करने के लिए यह स्कीम जारी की है। UAE के बुनियादी ढांचा विकास मंत्री डॉ. अब्दुल्ला बेलहैफ अल नुईमी ने फेडरल नेशनल कौंसिंल (FNC) के सत्र के दौरान यह घोषणा की है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने यह निर्णय लिया है कि दो पत्नियां रखने वाले सभी लोगों को शेख जायद हाउसिंग कार्यक्रम के तहत मकान भत्ता दिया जाएगा।

उनके मुताबिक असल में यह दूसरी पत्नी के लिए मकान भत्ता होगा। यह एक पत्नी वाले परिवार को पहले से मिल रहे मकान भत्ते के अतिरिक्त होगा। मंत्री ने कहा कि दूसरी पत्नी के लिए भी उसी तरह के रहन-सहन की व्यवस्था होनी चाहिए, जैसा कि पहली बीवी के लिए होता है।

मंत्री ने कहा कि मकान भत्ता देने से लोग दूसरी शादी करने को प्रोत्साहित होंगे और UAE में अविवाहित महिलाओं की संख्या घटेगी। मंत्रालय यह चाहता है कि दूसरी बीवी को भी पहले बीवी की तरह ही मकान मिले।

गजब है इस चायवाले की इनकम! चाय बेचकर एक महीने में कमाता है 12 लाख

अभी तक आपने चाय वालों के बहुत ही चर्चे सुने होंगे जो आश्चर्य में डाल देने वाले होते हैं। ऐसा ही एक और वाकया सामने आया है जिसके बारे में सुनकर हर कोई हैरान है। यह चाय वाला चाय बेचकर इतनी कमाई कर रहा है जितनी बड़े—बड़े बिजनेसमैन भी नहीं करते है। इतना ही बल्कि यह चायवाला कोई आम चायवाला नहीं बल्कि महाराष्ट्र का सबसे अमीर चायवालाहै। यह चायवाला एक महीने में 12 लाख रुपए कमाता है। आपको बता दें कि यह शख्स पुणे के नवनाथ येवले हैं जिनकी येवले टी स्टॉल नाम से बहुत फेमस टी स्टाल है। इस टी स्टाल पर एक दिन में हजारों कप चाय बिकती है।

उफ! ये गर्मी: भारत में ज्यादातर तीन टंगड़ी वाले पंखे ही क्यों चलते हैं? वजह बेहद दिलचस्प है

गर्मी ने दस्तक दे दी है। पंखे, कूलर और एसी धीरे-धीरे रफ्तार पकडऩे लगे हैं। लेकिन यहां हम बात करेंगे सेलिंग फैन की, जिसका घर-घर प्रशंसक(फैन) है। जी हां, चाहे घर में कूलर चले या एसी, कमरों के ऊपर बेचारे तीन टंगड़ी वाले फैन की सांसें बराबर चलती रहती हैं। इसे सुकून या इसके कलेजे में ठंडक तभी पहुंचती है, जब बिजली (गुल) मेहरबान होती है। आजकल सेलिंग फैन में भी काफी एक्सपेरिमेंट देखने को मिल रहे हैं। इनकी पंखियों को बेहद स्टाइलिश लुक देने में लगी हुई हैं कंपनियां। खैर, पंखियों को चाहे कितना भी स्टाइलिश बना दो, उनका काम  तो सिर्फ ठंडक देना ही है।

फिर बात चाहे देसी पंखे की हो और विदेशी पंखे की…।तक बैंड होती हैं, जो हवा देने का काम करती हैं। अब जरो सोचिए कि सबसे ज्यादा हवा कौन-सा पंखा देगा, तीन पत्ती वाला या चार पत्ती वाला। बता दें कि तीन पत्ती वाली देसी फैन है, जबकि चार पत्ती वाला विदेशी फैन। यहां सवाल यह भी उठता है कि भारत मेंं 99 प्रतिशत तीन पत्ती वाले पंखे ही क्यों चलते हैं और विदेशों में चार पत्ती वाले पंखे?

वैसे आपने इस बारे में कभी सोचा भी नहीं होगा कि पंखे में तीन और चार पत्ती वाले क्यों होते हैं? बेशक, आपने पंखें की पत्तियों की संख्या पर गौर किया न हो, लेकिन इनकी कम या ज्यादा पत्तियां होने के पीछे ठोस वजह है।के सप्लीमेंट के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनका मकसद एसी की हवा को पूरे कमरे में फैलाना होता है। चूंकि 4 पत्ती वाले पंखे 3 पत्ती वाले पंखे की तुलना में धीमे चलते हैं, इसलिए इनकी वजह से यह काम आसान हो जाता है।

ऐसे में यदि भारत में चार पत्ती वाले पंखे इस्तेमाल होने लगे, तो यहां गर्मी में लोगों का जीना मुहाल हो जाएगा। वैसे भी भारत में पंखा का मतलब ज्यादा से ज्यादा हवा दे। तीन पत्ती वाला फैन हल्का होता है और चलने में इसकी रफ्तार तेज होती है और इससे हवा भी तेज मिलती है। वैसे अब भारत में भी पंखे को एसी के सप्लीमेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा है…। ऐसे में आप अपने एसी वाले कमरे में ४ पत्ती वाला फैल लगवा सकते हैं…यह धीमा चलेगा और इससे बिजली भी ज्यादा खपत नहीं होती।

13 की उम्र में हुआ था सलमान की इस Ex-गर्लफ्रेंड का रेप, अब कर रही ये काम

मुंबई.पॉप सिंगर दलेर मेहंदी को 14 साल पुराने में ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामले में 2 साल कैद की सजा सुनाई गई। हालांकि, उन्हें इसके बाद जमानत भी मिल गई। वैसे, बॉलीवुड की एक एक्ट्रेस ऐसी भी हुई है, जिसने ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसे क्राइम का शिकार हुए लोगों के लिए ‘नो मोर टियर’ नाम की संस्था शुरू की। यह एक्ट्रेस कोई और नहीं, बल्कि सलमान खान की गर्लफ्रेंड रह चुकीं सोमी अली हैं।5 की उम्र में सेक्शुअली अब्यूज तो 13 की उम्र में हुई थीं रेप की शिकार…

– पाकिस्तानी मूल की एक्ट्रेस सोमी अली ने एक इंटरव्यू के दौरान खुलासा किया था, “मैं कई तरह के डोमेस्टिक वायलेंस सहते-सहते बड़ी हुई हूं। जब मैं पांच साल की थी, तब मुझे सेक्शुअली अब्यूज किया गया। 12 साल की उम्र में मैं यूएस शिफ्ट हो गई और 13 की उम्र में मेरा रेप किया गया।”
– “मैं हमेशा ऐसे अब्यूज का सामना किया और गवाह भी बनी। हमेशा से इस तरह के क्राइम से पीड़ित महिला, पुरुष और बच्चों के लिए कुछ करना चाहती थी।”
– बता दें कि 2007 में सोमी ने संस्था ‘नो मोर टियर’ शुरू की। वे कहती हैं कि संस्था की शुरुआत उन्होंने डोमेस्टिक वायलेंस के शिकार लोगों की मदद के लिए की थी।
– बकौल सोमी, “यह संस्था मियामी बेस्ड है और यह ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामले में देश (अमेरिका) का सबसे घटिया शहर है। इसी शहर की वजह से मैंने अपनी संस्था के तहत मैंने सेक्स ट्रैफिकिंग और इसी के जैसे दूसरे क्राइम के शिकार लोगों के लिए भी काम करना शुरू किया।”
– सोमी कहती है कि कई महिलाओं को मिडिल ईस्ट, साउथ एशिया और दुनिया के दूसरे हिस्सों से खरीदकर यूएस लाया जाता है, जो बाद में सेक्शुअल और फिजिकल वायलेंस की शिकार होती हैं।
– सोमी के मुताबिक, पिछले 10 सालों में उनकी संस्था ने हजारों महिलाओं,पुरुषों और बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने का कम किया है। इनमें से कई शादीशुदा महिलाएं, जिन्हें उनके पति ने सेक्स के लिए यूज कर बेच दिया तो कई ऐसे लड़के-लडकियां शामिल हैं, जो अपने ही घर में सेक्शुअली अब्यूज हुए और घर से भागने के बाद दलाओं के हत्थे चढ़ गए। इनमें से ज्यादातर इंडिया,पाकिस्तान और मिडिल ईस्ट के विक्टिम्स शामिल हैं।

एक्ट्रेस का पहला प्यार थे सलमान खान

– एक पुराने इंटरव्यू में सोमी ने सलमान के साथ अपने रिश्ते पर खुलकर बात की थी। सोमी ने इस इंटरव्यू में कहा था कि सलमान उनके पहले ब्वॉयफ्रेंड थे। लेकिन ऐश्वर्या राय बीच में आईं और उनका रिश्ता टूट गया।
– बकौल सोमी, “सलमान पर मेरा क्रश उस वक्त हो गया था, जब मैं टीनेजर थी। यही क्रश मुझे फ्लोरिडा से इंडिया ले आया। मैंने फिल्मों को सिर्फ इसलिए ज्वाइन किया, ताकि सलमान से मेरी शादी हो सके। 15 साल की उम्र में आपके पास कुछ भी इडियटिक करने का लाइसेंस होता है। हालांकि, मुझे अपने पहले प्यार का पीछा करने का कोई भी अफ़सोस नहीं है।”

8 साल तक रहा सलमान से रिलेशनशिप

– जब सोमी महज 15 साल की थीं, तब उन्होंने सलमान की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ देखी और उन्हें दिल दे बैठीं।
– सलमान से शादी की चाहत लिए वे मुंबई आईं और काम की तलाश करने लगीं। इसी दौरान एक स्टूडियो में उनकी मुलाकात सलमान से हुई।
– करीब 8 साल तक सोमी सलमान के साथ रिलेशनशिप में रहीं।
– 1997 में सलमान की नजदीकियां ‘हम दिल दे चुके सनम’ के सेट पर ऐश्वर्या राय से बढीं और सोमी के साथ उनका ब्रेकअप हो गया।
– दोनों ने फिल्म ‘बुलंद’ (1992) में साथ काम किया है, जो आजतक रिलीज नहीं हो सकी। फिल्म 80 प्रतिशत शूट हो चुकी थी। लेकिन किन्हीं कारणों से यह अटक गई। – 2016 में आई ऋतिक रोशन स्टारर ‘काबिल’ को मीडिया रिपोर्ट्स ने ‘बुलंद’ की कॉपी बताया था।

रिश्ता टूटने का नहीं है कोई अफ़सोस

– सोमी ने इंटरव्यू में बताया है, “मुझे इस बात का कोई अफ़सोस नहीं है कि सलमान के साथ मेरा रिश्ता आगे नहीं बढ़ पाया। सलमान और उनकी फैमिली से बहुत कुछ सीखा है।”
– मुझे सीख मिली है कि यह मायने नहीं रखता कि किसी का धर्म क्या है, कल्चर क्या है, वह कहां का रहने वाला है। किसी भी इंसान की पहचान उसके काम से होती है। सलमान आगे बढ़ने के लिए अच्छे रोल मॉडल हैं।”

हसीन जहां ने FB पर साधा निशाना, कहा- बिना मंजूरी ब्लॉक हुआ अकाउंट

कोलकाता। पत्नी हसीन जहां की शिकायत के बाद मोहम्मद शमी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज हुआ है। ऐसे में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस बीच पत्नी हसीन ने कहा है कि उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर मोहम्मद शमी से जुड़ी जो तस्वीरें डाली हैं। वो डिलीट हो गई हैं।

मोहम्मद शमी के खिलाफ पत्नी ने पुलिस में शिकायत करने से पहले अपने फेसबुक अकाउंट पर शमी से जुड़ी तस्वीरें पोस्ट की थीं। ताकि वो बतौर सबूत इसका इस्तेमाल कर सकें। जब से पत्नी ने सोशल मीडिया पर शमी के खिलाफ आरोप लगाना शुरू किए हैं। तब से ही ये खबर मीडिया की सुर्खियां बनी हुई हैं। इस घटना से बतौर क्रिकेटर उनकी छवि को काफी नुकसान पहुंचा है।

हसीन जहां ने कुछ दिन पहले अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पति शमी की कुछ तस्वीरें पोस्ट करते हुए उन पर विवाहेत्तर संबंधों के आरोप लगाए। हसीन जहां ने कई लड़कियों के साथ शमी की तस्वीरें और व्हाट्सऐप चैट फेसबुक पर पोस्ट की थी। जिसके बाद बवाल मच गया। इसके बाद हसीन जहां ने मीडिया में खुलकर पति शमी पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मैंने कई लोगों से मदद मांगी, मगर मदद नहीं मिलने की वजह से मुझे मजबूरी में सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ा। मगर अचानक फेसबुक ने मेरा अकाउंट ब्लॉक कर दिया और बिना मुझसे पूछे उन तस्वीरें को भी डिलीट कर दिया गया।

ये खबर सामने आने के बाद शमी की केवल छवि को नुकसान नहीं पहुंचा है, बल्कि बीसीसीआई ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से शमी को बाहर कर दिया।

गैर जमानती धाराओं में दर्ज हुआ मामला-

हसीन जहां की शिकायत के आधार पर शमी व उनके परिवार के चार सदस्यों के खिलाफ जादवपुर थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए (दहेज से संबंधित घरेलू हिंसा), 323 (मारपीट), 307 (हत्या की कोशिश), 376 (दुष्कर्म), 506 (जान से मारने की धमकी), 328 (जहर देना) और 34 (आपराधिक साजिश के तहत सामूहिक अत्याचार) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

शमी के अलावा उनके परिवार के चार अन्य लोग कौन हैं, इस बारे में पुलिस की ओर से अभी साफ नहीं किया गया है। कानूनी जानकारों के मुताबिक इनमें से धारा 307, 328 और 376 गैरजमानती हैं। ऐसे में शमी व उनके परिवार के सदस्यों की गिरफ्तारी लगभग तय है, बशर्ते उन्हें हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत न मिले।

अयोध्या केसः सुप्रीम कोर्ट ने कहा- समझौते का निर्देश हम नहीं दे सकते

नई दिल्ली। अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बार फिर से कहा कि वो किसी को समझौते के लिए नहीं कह सकते। कोर्ट ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि हम किसी को नहीं कह सकते कि समझौता करो और किसी को समझौता करने से इन्कार भी नहीं कर सकते।

बेंच ने आगे कहा कि अगर दोनों पक्षों के वकील खुद आकर कहें कि हमने समझौता कर लिया है तो हम मुद्दे को रिकॉर्ड कर लेंगे। लेकिन समझौते के लिए हम ना तो किसी को कह सकते हैं और ना नियुक्त कर सकते हैं। हम इस तरह के केस में ऐसा कैसे कर सकते हैं। अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी।

इससे पहले सुनवाई शुरू होते ही सर्वोच्च न्यायालय ने इस केस में हस्तक्षेप करने वाली तीसरे पक्ष की कुल 32 याचिकाएं खारिज कर दीं। इनमें अपर्णा सेन, श्याम बेनेगल और तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका भी शामिल थी।

सभी कागजी कार्रवाई और अनुवाद का काम पूरा हो गया है। आठ मार्च को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार के समक्ष हुई बैठक में सभी पक्षों ने यह जानकारी दी।

हाई कोर्ट आदेश के खिलाफ सबसे पहले सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लिहाजा पहले बहस करने का मौका उन्हें मिल सकता है।

इस मामले से जुड़े 9,000 पन्नों के दस्तावेज और 90,000 पन्नों में दर्ज गवाहियां पाली, फारसी, संस्कृत, अरबी सहित विभिन्न भाषाओं में हैं, जिस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कोर्ट से इन दस्तावेजों को अनुवाद कराने की मांग की थी।

रिटायर्ड फौजी विशेष कार्ड से देश के किसी भी अस्पताल में करा सकेंगे इलाज

बिलासपुर। रक्षा मंत्रालय के निर्देश पर सेवानिवृत फौजियों के लिए विशेष प्रकार का चिप लगा पहचान पत्र बनाया जा रहा है। इस कार्ड के बनने के बाद फौजी देश के किसी भी कोने में संचालित अस्पताल में अपना इलाज करा सकेंगे। खास बात ये कि इलाज के लिए केंद्र सरकार ने कोई लिमिट तय नहीं की है। फौजियों के इलाज में खर्च होने वाली राशि का केंद्र सरकार वहन करेगी।

रिटायर्ड सैनिकों के बुरे वक्त में केंद्र सरकार ने साथ देने की योजना बनाई है। मंत्रालय के निर्देश पर रिटायर्ड फौजियों के लिए चिप लगा विशेष प्रकार का कार्ड बनाया जा रहा है। इस कार्ड को उनके आधार नंबर से लिंक किया जाएगा । विशेष प्रकार के चिप लगे कार्ड में फौजी की पूरी बायोग्रॉफी सहित पत्नी,बेटा,बहू व बेटी अगर अविवाहित है तो उनका भी कार्ड में उल्लेख रहेगा। विशेष प्रकार के कार्ड को स्वेप करते ही रिटायर्ड फौजी की पूरी जानकारी कंप्यूटर के स्क्रीन पर सामने आ जाएगी । चिप युक्त कार्ड से फौजी देश के किसी भी कोने में बेहतर इलाज करा सकेंगे । रिटायर्ड फौजी व परिजनों के इलाज में जितनी राशि खर्च होगी सब केंद्र सरकार वहन करेगी।

बेटी अविवाहित तो चिकित्सा सुविधा की पूरी जिम्मेदारी सरकार की

रिटायर्ड फौजी बेटी अगर अविवाहित है और उसकी उम्र ज्यादा हो गई है तो भी इलाज में खर्च होने वाली राशि का भुगतान केंद्र सरकार करेगी । जबकि 25 वर्ष के बाद बेटे की इलाज की जिम्मेदारी पिता या फिर स्वयं बेटे की होगी ।

इनका कहना है

केंद्र सरकार के निर्देश पर रिटायर्ड सैनिकों के लिए विशेष चिप से देश के किसी भी कोने में इलाज कराने की सुविधा मिलना प्रारंभ हो जाएगा इसकी राशि केंद्र सरकार वहन करेगी – शिवेंद्र पांडेय-कल्याण संयोजक,जिला कल्याण सैनिक बोर्ड बिलासपुर

‘मैं हिन्दू हूं ईद नहीं मनाता…’, ये हैं योगी के 10 सबसे विवादित बयान

लोकल डेस्क. 19 मार्च यानी सोमवार को योगी सरकार के एक साल पूरे हो रहे हैैं। बता दें कि राजनीति में सीएम योगी आदित्यनाथएक कट्टर इमेज वाले हिंदू लीडर के रूप में जाने जाते हैं। अक्सर वे अपने तीखे और विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। जिसका विपक्ष ने जमकर विरोध किया। आपको योगी के अब तक के दिए विवादित बयानों से रूबरू कराने जा रहा है। लोकभवन में होगा जश्न…

सोमवार को योगी सरकार के एक साल पूरे होने पर लोकभवन में जश्न मनाया जाएगा।
– जानकारी के मुताबिक, इस मौके पर सरकार के कामकाज पर बनी फिल्म भी दिखाई जाएगी।
– फिल्म में यूपी सरकार के साल भर में किए गए तमाम कामों का ब्योरा होगा।

इन वेबसाइट पर ‘रेड’ मूवी हुई ऑनलाइन Leak, लोग कर रहे फ्री में डाउनलोड

यूटिलिटी डेस्क। अजय देवगन स्टारर मूवी ‘रेड’ ऑनलाइन लीक हो गई है। ये फिल्म 16 मार्च, शुक्रवार को रिलीज हुई थी, लेकिन रिलीज होने के अगले दिन ही ये लीक हो गई। लीक होने वाली मूवी की लेंथ 120 मिनट की है। हालांकि, इस मूवी का रनिंग टाइम 128 मिनट है। वहीं, फिल्म का डाउनलोड साइज 671.14 MB है। इसे हजारों लोग ऑनलाइन डाउनलोड कर चुके हैं। फिल्म ऑनलाइन डाउनलोड करना पायरेसी लॉ की तहत गैरकानूनी होता है। ऐसे में आप इन वेबसाइट पर जाकर मूवी डाउनलोड करते हैं तब आप मुसीबत में फंस सकते हैं। इस तरह की वेबसाइट पर जाकर मूवी डाउनलोड करने से पायरेसी को बढ़ावा मिलता है।

# 3 साल की सजा

पायरेसी लॉ की तहत अगर कोई ऑनलाइन ऐसी मूवी देखता है जो पायरेसी कंटेंट में आती है। तब उसे इसके लॉ के तहत 3 साल तक की सजा भी हो सकती है। ठीक इस तरह यदि कोई मूवी डाउनलोड करता है तब उसके लिए भी सजा का प्रावधान है। ऐसे में पायरेसी को बढ़ावा देने से बचना चाहिए।

# इन वेबसाइट से हो रही फ्री डाउनलोड

इस फिल्म को इंडिया में कई वेबसाइट से डाउनलोड किया जा रहा है। इसमें rdxhd, moviespur, bigdaddymovies, aeonsource समेत कई अन्य वेबसाइट भी शामिल हैं। इन वेबसाइट पर ये मूवी फ्री डाउनलोड हो रही है। यानी इसके लिए कोई पेमेंट नहीं करना है, सिर्फ डाउनलोडिंग के लिए डाटा खर्च करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, मूवी को ऑनलाइन भी देखा सकता है। ‘रेड’ मूवी ऑनलाइन लीक होने से फिल्म के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर असर हो सकता है।

सामने आया हसीन जहां के धोखेबाजी का ये प्रूफ, उधर शमी के गांव पहुंची पुलिस

अमरोहा.टीम इंडिया के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और हसीन जहां का एक मैरिज सर्टिफिकेट सामने आया है। इसके मुताबिक, शमी के साथ शादी के वक्त जहां ने खुद के तलाकशुदा और दो बेटियां होने की बात छिपाई थी। सर्टिफिकेट में जहां ने अपने मैरिटल स्टेटस में बैचलर पर निशान लगाया है। खुद शमी ने इसे रीट्वीट किया है। बता दें कि 7 अप्रैल, 2014 को शमी और जहां की शादी हुई थी। इस बीच, कोलकाता पुलिस भी यूपी के अमरोहा में शमी के घर परिजनों से पूछताछ करने पहुंची। मुकदमें की तैयारी में शमी…

– क्रिकेटर शमी ने कहा- ‘हसीन ने मुझसे झूठ बोलकर शादी की थी। उसने मुझे धोखा दिया। जिंदगी का सबसे बड़ा राज छिपाया।’
– इसके साथ ही दोनों के बीच सुलह की सारी उम्मीदें भी खत्म हो गई हैं।
– हालांकि, तब तक हसीन जहां पहले पति शेख सैफुद्दीन को डायवोर्स दे चुकीं थीं।
– बता दें कि शमी ने मामले को लेकर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर ली है।
– शमी ने कहा, ‘पत्नी के साथ विवाद को सुलझाने की खूब कोशिश की, लेकिन अब कानूनी लड़ाई लड़ूंगा।’
– ‘मैं और मेरी फैमिली पुलिस को जांच में पूरा सहयोग कर रही है।’

शमी के घर पहुंची कोलकाता पुलिस
– बता दें कि हसीन जहां, शमी और उनके परिजनों पर दहेज उत्पीड़न, जानलेवा हमले और दुष्कर्म जैसे संगीन आरोप लगाते हुए पहले ही कोलकाता में एफआईआर दर्ज करा चुकी हैं।
– इसी सिलसिले में रविवार को कोलकाता पुलिस यूपी के अमरोहा स्थित शमी के घर उससे पूछताछ के लिए पहुंची।
– जहां कोलकाता पुलिस को घर पर परिजनों में से कोई नहीं मिला। तब केवल रिश्तेदार मौजूद थे। पुलिस उनसे ही सवाल-जवाब कर लौट गई।
– रिश्तेदार मुजीब ने के मुताबिक, पुलिस केवल दोनों के बीच हुए झगड़े के बारे में पूछताछ कर चली गई।
– कोलकोता क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर चेतन्य ने बताया कि अभी गांववालों और रिश्तेदारों से साधारण बातचीत हुई है।
– उन्होंने कहा, मामले की जांच चल रही है। इसकी डिटेल अमरोहा एसपी को भी दी गई है।

बुर्का पहने चार महिलाएं मस्जिद के प्रांगण में खेल रही थीं बोर्ड गेम, फोटो वायरल, विवाद

‘हमने तुरंत महिला अधिकारियों को मौके पर भेजा और उन्होंने महिलाओं से ऐसी चीजें जगह की शुचिता को ध्यान में रखते हुए न करने के लिए कहा. महिलाओं ने बात मानते हुए तुरंत इस एरिया को खाली कर दिया था.’

रियाद: मक्का की पवित्र मस्जिद के प्रांगण में बुर्का पहने चार महिलाओं की एक तस्वीर सऊदी अरब में विवादों के घेरे में आ गई है. यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. दरअसल बुर्का पहने ये महिलाएं मस्जिद के प्रांगण में कोई ‘बोर्ड गेम’ खेलती नजर आ रही हैं.

इस तस्वीर के वायरल होने के कुछ ही समय बाद सऊदी अरब अथॉरिटी ने एक स्टेटमेंट जारी कर दिया. स्टेपफीड नामक वेबसाइट के हवाले में न्यूज एजेंसी एएनआई ने बताया कि पवित्र मस्जिद की गवर्निंग अथॉरिटी के एक प्रवक्ता के मुताबिक, सुबह 11 बजे पिछले शुक्रवार कुछ सिक्यॉरिटी अफसरों ने चार महिलाओं को सीक्वेंस नामक बोर्ड गेम खेलते देखा. स्टेटमेंट में कहा गया है- हमने तुरंत महिला अधिकारियों को मौके पर भेजा और उन्होंने महिलाओं से ऐसी चीजें जगह की शुचिता को ध्यान में रखते हुए न करने के लिए कहा. महिलाओं ने बात मानते हुए तुरंत इस एरिया को खाली कर दिया था.

स्टेपफीड एक अंग्रेजी वेबसाइट है जिसका कहना है कि यह मामला ‘अरब जगत में ट्रेंड कर रहा है’. हालांकि इंटरनेट पर लोग इसे अलग अलग तरह से ले रहे हैं. किसी ने महिलाओं के यूं बोर्ड गेम खेलने की निंदा की जबकि किसी ने उनका विरोध करने का वालों से असहमति जताई. इसी बीच बता दें कि साल 2015 में मदीना के मस्जिद-ए-नवाबी में कुछ युवा कार्ड्स खेलते हुए पाए गए थे. रिपोर्ट्स थीं कि सुरक्षागार्डों ने उन्हें अरेस्ट कर लिया था

दलेर से मीका तक, मारपीट-रेप जैसे मामलों में जेल जा चुके ये 10 फेमस सिंगर

मुंबई. हाल ही में पटियाला कोर्ट ने पंजाबी सिंगर दलेर मेहंदी को 2003 के मानव तस्करी के एक मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। मामले में उन्हें दो साल की जेल हुई लेकिन वे जेल गए और करीब 20 मिनट के अंदर ही उनको जमानत भी मिल गई। वैसे ये कोई पहला मामला नहीं है जब कोई सिंगर जेल गया है इससे पहले भी कई सिंगर्स जेल जा चुके हैं। आज इस पैकेज में हम आपको बता रहे हैं ऐसे ही 10 सिंगर्स के बारे में जो कभी मारपीट, शराब पीकर गाड़ी चलाने तो कभी रेप के आरोप में जेल का चुके हैं।

1. मीका सिंह
कई कॉन्ट्रोवर्सी में फंस चुके मीका एक बार तो गिरफ्तार भी हो चुके हैं। ये वाकया उस दौरान का है जब उन्होंने अपना आपा खोकर दिल्ली में एक फैन को थप्पड़ जड़ दिया था।
2. प्राजक्ता शुक्रे
‘इंडियन आइडल’ की एक्स कंटेस्टेंट और बॉलीवुड सिंगर प्राजक्ता को शराब पीकर कार चलाने और दो लोगों को कार से चोटिल करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। बता दें, उस वक्त उनके साथ कार में सिंगर अभिजीत सावंत भी मौजूद थे।

यहां एक ही किचन में बनता है 65 परिवारों का फ्री खाना, 7 साल से चल रही है ये प्रथा

नाथद्वारा(उदयपुर). शहर में बोहरा समाज के 65 घरों में सुबह का भोजन एक साथ बनता है और फिर हर घर टिफिन भेजते हैं। सिलसिला सात साल से चल रहा है। अपने धर्मगुरु की नसीहत पर देश के कई शहरों में बोहरा समाज के लोग इसी प्रकार सामूहिक भोजन बनाकर घर-घर टिफिन पहुंचाने की मिसाल पेश कर रहे हैं। इस व्यवस्था में एक ही मीनू का टिफिन हर घर पहुंचाने के पीछे ऊंच-नीच का भेदभाव खत्म करने की सोच भी है।

– शहर में बोहरा समाज के 65 परिवारों में करीब 350 लोग हैं। अधिकांश परिवार व्यापारी वर्ग से हैं।
– 7 साल पहले इस व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी।
– भोजन समाज के भवन में तैयार होता है। किसी के घर मेहमान हो तो कमेटी को सदस्यों के अनुसार मात्रा बढ़ाने की सूचना दे दी जाती है।
– सामूहिक भोजन बनाने के लिए फैज उल मवाईद बुरहानिया कमेटी बना रखी है, जो भोजन की गुणवत्ता, वितरण की व्यवस्था देखती है।
– दाना कमेटी रसोई का राशन खरीदने की जिम्मेदारी निभाती है। इस कमेटी में 10 सदस्य हैं।

मेन्युकैलेंडर के अनुसार

– सामूहिक भोजन के लिए कैलेंडर तय कर धर्मगुरु के स्तर पर बनाई कमेटी स्थानीय कमेटी को भेज देती है।
– मेन्यु कैलेंडर के अनुसार ही तय होता है। सप्ताह में एक दिन मिठाई तथा पर्व-त्योहार पर मिठाई सहित हर दिन के लिए दाल, सब्जी का मीनू निर्धारित है।

एक-दूसरे की खुशी में शामिल होता है हर परिवार

– खुशी के मौकों पर समाज के लोग अपनी तरफ से रसोई घर में कमेटी को सूचना देकर मिठाई बनवाते हैं और इसे हर घर बंटवाते हैं।
– इससे समाज के लोगों का हर परिवार की खुशी में शामिल होने में जुड़ाव होता है।
– टिफिन दोपहर एक बजे तक घर-घर पहुंचाने की जिम्मेदारी वितरण कमेटी की होती है।
– रसोई सुबह 9 बजे शुरू होती है। कोई सफर पर जा रहा है तो बस स्टैंड, बीमारी में अस्पताल तक भी भोजन पहुंचाया जाता है।
– पर्व, त्योहार, जन्मदिन, सालगिरह सहित अन्य मौकों पर कमेटी के पास अतिरिक्त टिफिन की सूचना पहले ही आ जाती है।

सामर्थ्य के अनुसार देते हैं आर्थिक सहयोग

– इस व्यवस्था के बदले समाज के लोग सामर्थ्य के अनुसार आर्थिक सहयोग देते हैं।
– टिफिन पहुंचाने के बदले कोई शुल्क निर्धारित नहीं है। समाज की कमेटी अपने स्तर पर इसका खर्च वहन करती है।

योगी सरकार का एक साल: 5 बड़े चुनावी वादों में से ज्यादातर अधूरे, कुछ पर काम ही शुरू नहीं हुआ

लखनऊ.भाजपा ने 28 जनवरी, 2017 को उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव-2017 के लिए घोषणा पत्र जारी किया था। इसमें यूपी में अपराध और भ्रष्टाचार को खत्म कर, विकास और गरीबों की बेहतरी के लिए काम करने के दावे किए थे। भाजपा बहुमत के साथ जीती और 19 मार्च, 2017 को योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनकी सरकार का एक साल पूरा होने पर DainikBhaskar.com ने उनके 5 वादों की जमीनी हकीकत जानी।

1) किसानों की कर्जमाफी

वादा: किसानों का पूरा कर्ज माफ होगा। बिना ब्याज कर्ज दिया जाएगा।
सरकार ने क्या किया: योगी ने पहली कैबिनेट मीटिंग में 36 हजार 359 करोड़ रुपए की कर्ज माफी का एलान किया। 78 लाख किसानों को कर्जमाफी का लाभ मिलना था।
हकीकत:अभी तक 17.30 लाख किसानों का कर्ज माफ हुआ। यह कुल टारगेट का सिर्फ 22% है। देवरिया, वाराणसी, गोरखपुर और कुशीनगर को छोड़कर किसी भी जिले में दूसरे चरण की कर्जमाफी के प्रमाण पत्र बांटने का काम शुरू नहीं हुआ है।
दलील:कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही किसानों को कर्जमाफी का लाभ मिला है। दूसरे चरण के प्रमाणपत्र भी जल्द बांटे जाएंगे।
आरोप:नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि कर्जमाफी की आड़ में सरकार ने खेती का बजट 70.13% कम कर दिया। किसानों को छला गया है।

2) शिक्षा और रोजगार
वादा:
 पहली से 8वीं तक के बच्चों को स्वेटर, मौजे और जूते मुफ्त दिए जाएंगे। ग्रेजुएट तक लड़कियों और 12वीं तक लड़कों को लैपटॉप मुफ्त दिया जाएगा।
सरकार ने क्या किया: सरकार ने दो बार टेंडर निकाल, लेकिन दिसंबर 2017 तक प्रॉसेस पूरी नहीं हो पाई। बाद में कलेक्टर को अपने स्तर पर टेंडर कराने को कहा गया। फ्री लैपटॉप वितरण योजना- 2017 शुरू की।
हकीकत:1.5 करोड़ बच्चों में से सर्दी खत्म होने तक सिर्फ 45% बच्चों को स्वेटर बांटे गए। 22 से 23 लाख स्टूडेंट्स में से अभी किसी को भी फ्री लैपटॉप नहीं मिला।
दलील: विभाग की मंत्री अनुपमा जायसवाल ने कहा कलेक्टर को निर्देश दिए थे सभी बच्चों को स्वेटर बांट दिए गए हैं।
आरोप: सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि स्वेटर बांटने में सबसे बड़ा भ्रष्टाचार हुआ। ठंड खत्म होने के बाद दिखावे के लिए स्वेटर बांटे गए।

3) बिजली की समस्या
वादा:
 2019 तक हर घर में बिजली। 5 साल में 24 घंटे बिजली मिलने लगेगी।
सरकार ने क्या किया:राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक, सपा सरकार में 14 घंटे बिजली मिल रही थी, अब 16 से 18 घंटे मिल रही है। हालांकि, लोड बढ़ने से किसानों को ज्यादा राहत नहीं मिली।
हकीकत: बिजली का निजीकरण किया गया। रेट 50 से 150 फीसदी तक बढ़े। गर्मी शुरू होते ही शहरों में भी बिजली कटौती शुरू हो गई है।
दलील: ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा का दावा है कि सपा सरकार ने पांच साल में जितने ट्रांसफार्मर बदले उतने हमने 1 साल में बदल दिए। करीब 37 हजार ट्रांसफार्मर खराब हो गए थे।
आरोप: सपा नेता रामगोविंद चौधरी ने कहा कि केंद्र के सहारे यूपी में बिजली की सप्लाई की जा रही है। बिजली का रेट बढ़ाकर अवैध वसूली की जा रही है।

4) सेहत का ख्याल
वादा:
 राज्य में 25 सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और 6 एम्स बनाएंगे।
सरकार ने क्या किया: बजट में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और एम्स के लिए पहले चरण में 4323.89 करोड़ रुपए रखे गए हैं।
हकीकत:अभी तक किसी भी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल या एम्स के लिए जमीन तक तय नहीं हुई है। गोरखपुर एम्स का शिलान्यास अखिलेश सरकार में किया गया था। डेढ़ साल बीत गया, लेकिन इसका भी निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
दलील: स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह का कहना है कि यूपी में स्वास्थ्य की समस्या बहुत ही जटिल थी। पिछली सरकारों ने स्वास्थ्य के बजट में घोटाले किए। एक साल में हमने बेहतर इंतजाम किए।
आरोप: सपा के सीनियर लीडर और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने कहा कि सरकार काम करने की बजाए अस्पतालों का भगवाकरण करवा रही है। बीआरडी कॉलेज की घटना सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है।

5) गड्ढा मुक्त सड़कें
वादा:
प्रदेश में सभी सड़कें 15 जून 2017 तक गड्ढा मुक्त होंगी।
सरकार ने क्या किया: सरकार ने अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारी सौंपी। कुल 1 लाख 21 हजार 816 किलोमीटर सड़क गड्ढा मुक्त की जानी थी।
हकीकत:सिर्फ 61 हजार 433 किलोमीटर यानी सिर्फ 50% सड़कें ही गड्ढा मुक्त हो पाई। टारगेट पूरा करने के लिए सिर्फ तीन महीने से भी कम वक्त बचा है।
दलील: डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का कहना है कि सड़कों को गड्डा मुक्त करने के लिए हम लगातार काम कर रहे हैं। विभाग के पास उचित बजट नहीं था फिर भी हमने अन्य विभागों के सहयोग से लक्ष्य को पूरा किया है।
आरोप: कांग्रेस प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत का कहना है कि, गड्डे मुक्त सड़क का दावा कुछ ही जिलों में सफल हुआ है। जिन सड़कों को गड्डा मुक्त किया गया है वो फिर से उसी तरह हो गई हैं।

जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला 3 दिन के दौरे पर भारत आए, मोदी ने एयरपोर्ट पर किया रिसीव.

नई दिल्ली.जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला II बिन अल हुसैन अपने दूसरे दौरे पर मंगलवार रात भारत आए। उन्हें रिसीव करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एयरपोर्ट पहुंचे। किंग अब्दुल्ला का दौरा तीन दिन का है, वो 1 मार्च तक भारत में रहेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री और अब्दुल्ला के बीच रक्षा समेत कई अहम करार और दोनों देशों के रिश्तों को बढ़ाने पर चर्चा होगी। किंग ‘इस्लामिक हेरीटेज एंड प्रोमोटिंग अंडरस्टैंडिंग’ विषय पर विज्ञान भवन में स्पीच भी देंगे। बता दें कि भारत और जॉर्डन के बीच 1950 से करीबी रिश्ते हैं।

क्या है अब्दुल्ला का प्रोग्राम?

– विदेश मंत्रालय के मुताबिक, किंग अब्दुल्ला के साथ क्वीन रानिया भी भारत आई हैं, वह 2006 में देश का दौरा कर चुके हैं।
– किंग अब्दुल्ला और नरेंद्र मोदी के बीच दोनों देशों के रिश्तों को मजबूती देने पर बात होगी। इस दौरान रक्षा समेत कई अहम करार हो सकते हैं।
– बुधवार को वह जॉर्डन के टेक्नीकल इंस्टीट्यूट्स में सहयोग बढ़ाने को लेकर आईआईटी दिल्ली जाएंगे।

– इसके बाद दोनों देशों के सीईओ के साथ बिजनेस को ध्यान में रखते हुए बात करेंगे। बता दें कि भारत और जॉर्डन के बीच 2016-17 में करीब 87 हजार 800 करोड़ का कारोबार हुआ।
– जॉर्डन के किंग गुरुवार को इंडियन इस्लामिक सेंटर की ओर से विज्ञान भवन में आयोजित प्रोग्राम में स्पीच देंगे।

– इसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उनके सम्मान में भोज देंगे। इसमें उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ कई लोग मौजूद रहेंगे

मोदी ने दिया था न्योता

– फरवरी में नरेंद्र मोदी फिलिस्तीन दौरे पर गए थे। तब प्रधानमंत्री पहले जॉर्डन पहुंचे थे। मोदी ने इसी दौरान किंग अब्दुल्ला को भारत आने का न्योता दिया।

32 महिलाओं से रेप कर चुका है ये शख्स, मौत की नींद सुलाने सबको देता था साइनाइड

कर्नाटक के इस सीरियल किलर का नाम मोहन कुमार है। उसका जन्म, 1963 में हुआ था। वह पेशे से स्कूल टीचर था। सुनंदा घर से मंदिर जाने के लिए निकली थी। जिसके बाद उसकी लाश मैसूर बस अड्डे पर मिली थी। 2009 में अनीता नाम की महिला की हत्या के बाद इस सीरियल किलर के अपराधों का खुलासा हुआ था.

बेटे ने पहले काटा बुजुर्ग पिता का गला, फिर फेवीक्विक से जोड़ने लगा गर्दन

बस्ती.यहां से एक हैवान बेटे की हैरान कर देने करतूत सामने आई है। बता दें कि पहले तो बेटे ने अपने बुजुर्ग पिता का तेजधार हथियार से गला रेत दिया, फिर उसे फेवीक्विक से जोड़ने की कोशिश करने लगे। पिता की चीखें घर के बाहर ना जाएं, इसलिए लड़के ने टीवी की आवाज तेज कर दी। जब उसने मामला बिगड़ता देखा तो पिता को घर में बंद कर भाग निकला। कराहने की आवाज पड़ोसियों ने सुनी…

मामला जिले के सोनहा थाना क्षेत्र के दरियापुर जंगल टोला के भैसहवा का है। यहां रहने वाले 65 साल के रामदेव मिश्र रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी हैं। बताया जा रहा है कि शनिवार को जब रामदेव मिश्र के कराहने की आवाज पड़ोसियों ने सुनी तो गांव के प्रधान को इसकी जानकारी दी।

नजारा देख सभी रह गए दंग

मौके पर अपने सहयोगियों के साथ पहुंचे प्रधान ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने घर का ताला तोड़ा तो अंदर का नजारा देख सभी दंग रह गए। खून से लतपत रामदेव जमीन पर पड़े हुए थे और उनकी गर्दन में गंभीर चोट का निशान दिखाई दिया।

इसके बाद आनन-फानन में रामदेव को पास के ही हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। यहां उनका इलाज चल रहा है। रामदेव ने इशारों का सहारा लेकर पुलिस का आपबीती सुनाई।

होली पर आया स्पेशल ऑफर, 991 रु. में करें हवाई सफर, ये दो कंपनियां दे रहीं मौका

यूटिलिटी डेस्क।एयर कंपनियां होली के मौके पर डिस्काउंट के स्पेशल ऑफर लाई हैं। गोएयर और जेट एयरवेज की डिस्काउंट सेल शुरू हो चुकी है। इसके तहत सिर्फ 991 रु. में हवाई उड़ान का ऑफर दिया जा रहा है। वहीं जेट एयरवेज 20 परसेंट तक का डिस्काउंट दे रहा है।

गोएयर ‘होली लॉन्ग वीकेंड’ ऑफर लेकर आई है। इसमें कंपनी सिलेक्टेड रूट्स पर लोएस्ट प्राइज में हवाई सफर का ऑफर दे रही है। इसके साथ ही एचडीएफसी बैंक के डेबिट या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने पर 10 परसेंट का अतिरिक्त डिस्काउंट दिया जा रहा है। एयरलाइन की वेबसाइट के जरिए इस ऑफर का आप फायदा उठा सकते हैं।

991 रु. में बागडोगरा से गुवाहाटी के लिए टिकट ऑफर की जा रही है। वहीं चेन्नई से कोच्चि का फेयर 1120 रुपए है। इसी तरह बेंगलुरू से कोच्चि और गुवाहाटी से बागडोगरा के लिए 1291 रुपए में हवाई सफर का मौका है। यह ऑफर लिमिटेड सीट्स के लिए है। एयरलाइन ने सीटों की संख्या की कोई जानकारी नहीं दी है।

गूगल ने आज इन पर बनाया अपना डूडल, जानें कौन थे क़वी?

गूगल आज अपने डूडल के माध्यम से उर्दू के प्रसिद्ध लेखक और साहित्यिक टिप्पणीकार अब्दुल क़वी दसनवी की 87वीं जयंती मना रहा है। 1930 में बिहार के दसना गांव में पैदा हुए अब्दुल क़वी ने भारत में उर्दू साहित्य के प्रोत्साहन में अहम भूमिका निभाई। उनका देहांत 7 जुलाई, 2011 को हुआ।

पांच दशकों से ज्यादा के अपने करियर में दसनवी ने उर्दू साहित्य में कई किताबें लिखीं। उनका प्रमुख काम मौलाना अबुल कलाम आजाद, गालिब और इकबाल पर था। इसके अलावा उन्होंने कई कविताएं और फिक्शन भी लिखे। उनको अपने कामों के लिए कई अवॉर्ड मिले।

दसनवी का जन्म प्रमुख मुस्लिम विद्वान सैयद सुलैमान नदवी के घर हुआ। वह भोपाल के सैफिया पोस्ट ग्रैजुएट कॉलेज से 1990 में सेवानिवृत्त हुए। जावेद अख्तर और इकबाल मसूद समेत उनके कई शागिर्द आज मशहूर कवि एवं शिक्षाविद हैं।

गूगल ने उनके सम्मान में अपने लोगो का डिजाइन उर्दू स्टाइल वाली स्क्रिप्ट में किया है।

दिल्‍ली सब ऑर्डिनेट में इन पदों पर निकली भर्तियां, ऑनलाइन करें आवेदन

नई दिल्‍ली: दिल्‍ली सब ऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्‍शन बोर्ड (DSSSB) ने एलडीसी, फील्‍ड असिस्‍टेंट, फूड सेफ्टी ऑफिसल और लाइब्रेरियन पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर आवेदन आमंत्रित किया है. इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी 21 अगस्‍त, 2017 तक आवेदन कर सकते हैं. दिल्‍ली सब ऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्‍शन बोर्ड ने कुल 1074 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मंगाया है. इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया 1 अगस्‍त 2017 से शुरू होगी.

शैक्षणिक योग्यता :
दिल्‍ली सब ऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्‍शन बोर्ड के एलडीसी, फील्‍ड असिस्‍टेंट, फूड सेफ्टी ऑफिसल और लाइब्रेरियन पदों पर भर्ती के लिए अलग अलग योग्‍यता निर्धारित की गई है. इनकी अधिक जानकारी के लिए आप बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट देखें.

आयु सीमा :
इन पदों पर भर्ती के लिए आवेदक की न्‍यूनतम उम्र अलग-अलग पदों के अनुसार 18/20 साल होनी चाहिए. इसके साथ ही आवेदक की अधिकतम उम्र अलग-अलग पदों के अनुसार 20/30/37 साल से ज्‍यादा नहीं होनी चाहिए.

आवेदन शुल्‍क :
दिल्‍ली सब ऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्‍शन बोर्ड के एलडीसी, फील्‍ड असिस्‍टेंट, फूड सेफ्टी ऑफिसल और लाइब्रेरियन पदों पर आवेदन करने के इच्‍छुक सामान्‍य और ओबीसी वर्ग के आवेदक को 100 रुपये ऑनलाइन माध्‍यम से जमा करना होगा. वहीं एससी/एसटी/पीडब्‍ल्‍यूडी वर्ग के आवेदकों के लिए यह निशुल्‍क होगा.

चयन प्रक्रिया :
दिल्‍ली सब ऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्‍शन बोर्ड के एलडीसी, फील्‍ड असिस्‍टेंट, फूड सेफ्टी ऑफिसल और लाइब्रेरियन पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवारों का चयन परीक्षा और स्‍किल टेस्‍ट के आधार पर किया जाएगा. ऑनलाइन परीक्षा केवल दिल्‍ली में आयोजित की जाएगी.

ऐसे करें आवेदन :
दिल्‍ली सब ऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्‍शन बोर्ड के एलडीसी, फील्‍ड असिस्‍टेंट, फूड सेफ्टी ऑफिसल और लाइब्रेरियन पदों पर भर्ती के लिए इच्‍छुक और योग्‍य उम्मीदवार 21 अगस्‍त, 2017 तक बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट (www.dsssbonlie.nic.in) पर जाकर दिए गए निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इन पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 अगस्‍त 2017 से शुरू होगी. ऑनलाइन आवेदन के बाद आवेदक आगे की चयन प्रक्रिया के लिए फॉर्म का प्रिंटआउट निकाल कर रख लें.

बनना चाहते हैं यूपी पुलिस का सिपाही, तो जान लें बदले हुए नियम

यूपी में अधिकतर युवाओं का सपना होता है कि पुलिस की वर्दी पहनें. अभी तक की प्रक्रिया में वर्तमान की बीजेपी ने सरकार ने कुछ बदलाव किए हैं. उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में पुलिस भर्ती के नियमों में फेरबदल करते हुए आज तय किया कि अब कांस्टेबल की भर्ती के लिए केवल लिखित परीक्षा होगी और उसी के आधार पर चयन होगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में यह फैसला किया गया.

बैठक के बाद राज्य सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने कहा, ‘पुलिस भर्ती के कुछ नियम बदले गये हैं. अब पुरूष वर्ग में 18 से 22 वर्ष और महिला वर्ग में 18 से 25 वर्ष आयु के अभ्यर्थी कांस्टेबल पद के लिए आवेदन कर सकते हैं.’ उन्होंने कहा कि पहले दसवीं पास के लिए 100 अंक, 12वीं पास के लिए 200 अंक और शारीरिक दक्षता के लिए 200 अंक जोड़ने की व्यवस्था थी . इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है और अब केवल लिखित परीक्षा होगी . शारीरिक दक्षता परीक्षा भी केवल पास करनी होगी.

यह भी पढ़ें : यूपी पुलिस में 3500 से अधिक सब-इंस्पेक्टर की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी

शर्मा ने कहा कि शारीरिक दक्षता के मानक पूर्ववत रहेंगे लेकिन इसके अंक जुडे़ंगे नहीं बल्कि इसे केवल पास करना भर पर्याप्त होगा. लेकिन यदि इसमें फेल हो गये तो भर्ती प्रक्रिया से बाहर होना पडे़गा. उन्होंने बताया कि लिखित परीक्षा में ‘नेगेटिव मार्किंग’ होगी और इसका अनुपात भर्ती बोर्ड तय करेगा. शर्मा ने बताया कि नयी व्यवस्था में 300 अंक के वस्तुनिष्ठ प्रश्न होंगे, जिनमें नेगेटिव अंक की व्यवस्था होगी .

प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद प्रमुख सचिव (गृह) अरविन्द कुमार ने कहा कि शारीरिक दक्षता परीक्षा में दौड़ के मानक अब पहले से कडे़ कर दिये गये हैं. पुरूष वर्ग में 4.8 किलोमीटर की दौड़ अब 27 मिनट की बजाय 25 मिनट में पूरी करनी होगी. इसी तरह महिला वर्ग में 2.4 किलोमीटर की दौड़ 16 मिनट की बजाय 14 मिनट में पूरी करनी होगी .

नीतीश सरकार के मंत्री बोले- ‘भारत माता की जय’ न कहने वाले पत्रकार पाकिस्तान समर्थक

पटना: बिहार की नई नीतीश सरकार में मंत्री विनोद कुमार सिंह ने मंगलवार को एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया. उन्होंने भाजपा के एक समारोह में उनके साथ ‘भारत माता की जय‘ का नारा न लगाने वाले मीडियाकर्मियों को ‘पाकिस्तान का समर्थक’ करार दे दिया. इससे पहले इसी समारोह में भाजपा की बिहार इकाई के अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि मस्जिदों से अजान और चर्च से घंटियों की आवाज के बजाय ‘भारत माता की जय’ की आवाज आनी चाहिए. राय हालांकि अपनी बात पर ज्यादा देर अडिग न रह सके. बाद में उन्होंने यू-टर्न ले लिया और कहा कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा था. नीतीश कुमार सरकार में खदान एवं भूगर्भीय मामलों के मंत्री व भाजपा नेता विनोद कुमार सिंह ने राज्य की नई सरकार में शामिल भाजपा के 12 मंत्रियों के सम्मान में हुए संकल्प सम्मेलन में लोगों से कहा कि वे उनके साथ ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाएं.

लेकिन, जब कार्यक्रम में मौजूद मीडियाकर्मियों ने यह नारा नहीं लगाया तो सिंह ने इस पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा, “आप पहले भारत माता की संतान हैं, पत्रकार बाद में हैं. अगर आप मेरे साथ जोर से भारत माता की जय का नारा नहीं लगाते तो क्या आप पाकिस्तान माता के समर्थक हैं?” एक-दो को छोड़कर किसी भी पत्रकार ने मंत्री की इस बात पर ऐतराज नहीं जताया

बिहार बीजेपी अध्यक्ष नित्यानंद राय के बयान पर भी विवाद: इससे पहले, समारोह शुरू होने पर बिहार भाजपा के अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि मस्जिद और चर्च से अजान और घंटी के बजाय ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ की आवाज आनी चाहिए.

यह अहसास होने पर कि उन्होंने एक विवादित बयान दे दिया है, राय ने बात बदलते हुए मीडिया से कहा, “मैंने कहा था कि मस्जिद और चर्च से भारत माता की जय और वंदे मातरम् की आवाज आनी चाहिए. मेरा मतलब यह नहीं था कि यह अजान और घंटी की जगह पर आनी चाहिए.”

विपक्षी राजद ने सिंह और राय के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इन्होंने अपने ‘वास्तविक एजेंडे’ को दिखा दिया है.

जबकि जनता दल (युनाइटेड) प्रवक्ता ने कहा कि यह अभिव्यक्ति की निजी आजादी है और उन्हें इस पर कुछ नहीं कहना है.

याद रहे, नीतीश कुमार चार साल पहले अपनी पार्टी का भाजपा से नाता तोड़ने के बाद पाकिस्तान गए थे, ताकि लोग उन्हें धर्मनिरपेक्ष नेता मानें.

प्रेस रिव्यू: सुभाष बराला के भतीजे पर रेप पीड़िता को धमकाने का आरोप

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने ख़बर दी है कि अब हरियाणा भाजपा अध्यक्ष सुभाषा बराला के भतीजे कुलदीप बराला पर एक नाबालिग बलात्कार पीड़िता को केस वापस लेने के लिए धमकाने का मामला सामने आया है.

अख़बार ने लिखा है कि मामला मई का है और इसमें कुलदीप बराला के एक रिश्तेदार पर अपहरण और बलात्कार के आरोप हैं. पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस से मामले पर 31 अगस्त तक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है.

सुभाष बराला के बेटे विकास बराला पहले ही चंडीगढ़ में एक आईएएस अफ़सर की बेटी का पीछा करने के केस में फंसे हैं. भाजपा पर उन्हें बचाने की कोशिश के आरोप भी लगे हैं.

ये सिर्फ़ मेरी जीत नहीं, पैसे और ताकत की हार भी है: अहमद पटेल

गुजरात राज्यसभा चुनावों में भारी उठापटक के बाद अहमद पटेल आख़िरकार अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे. उनके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी चुनाव जीत गए. अहमद पटेल को 44 वोट मिले जबकि स्मृति ईरानी को 46 और अमित शाह को भी 46 वोट मिले. चौथे उम्मीदवार बलवंत सिंह राजपूत को 38 वोट मिले.

क्रॉस वोटिंग की वजह से अहमद पटेल के जीतने पर संशय था. लेकिन फिर कांग्रेस की मांग मानते हुए चुनाव आयोग ने दो बागी कांग्रेस विधायकों के वोट रद्द कर दिए और भाजपा का गणित बिगड़ गया.

कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग करने वाले अपनी ही पार्टी के दो विधायकों राघवजी पटेल और भोला गोहिल के वोट रद्द करने की मांग की थी क्योंकि कथित तौर पर उन्होंने अपने मतपत्र अनाधिकारिक लोगों को दिखा दिए थे.

शाम 5 बजे ही गिनती शुरू होनी थी, लेकिन कांग्रेस की शिकायत के बाद गिनती रोक दी गई थी. देर रात वोटों की गिनती शुरू हुई और 174 वोटों को वैध माना गया.

नतीजों के बाद अहमद पटेल ने ट्विटर पर ‘सत्यमेव जयते’ लिखते हुए अपनी जीत का एलान किया. उन्होंने लिखा, ‘यह सिर्फ मेरी जीत नहीं है. यह पैसे, ताक़त और राज्य की मशीनरी के खुले इस्तेमाल की हार है. मैं उस प्रत्येक विधायक को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने भाजपा की अभूतपूर्व धमकियों और डर के बावजूद मुझे वोट दिया. भाजपा ने अपनी व्यक्तिगत दुश्मनी और राजनीतिक आतंक को ही उजागर किया है. गुजरात के लोग चुनाव में उन्हें जवाब देंगे.’

अहमद पटेल का ट्वीटइमेज कॉपीरइटTWITTER/@AHMEDPATEL

दो वोटों की वजह से फंसा था पेंच

कांग्रेस का आरोप था कि उनकी ही पार्टी के विधायक राघवजी पटेल और भोला गोहिल ने वोट डालने के बाद अपने बैलट आधिकारिक पार्टी प्रतिनिधि के अलावा भाजपा प्रतिनिधि को भी दिखाए थे.

नियमों के मुताबिक, वोट करने वाले विधायकों को अपने बैलट सिर्फ़ अपनी पार्टी के आधिकारिक प्रतिनिधि (चुनाव एजेंट) को दिखाने होते हैं.

देर रात 11:40 पर कांग्रेस नेता अर्जुन मोडवाडिया ने दोनों के वोट रद्द होने की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि जब दोनों विधायकों ने वोट दिया तो कांग्रेस के चुनाव प्रतिनिधि शक्तिसिंह गोहिल ने उसी समय खड़े होकर आपत्ति दर्ज कराई थी.

उन्होंने कहा, ”उस समय अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की. दोनों वोट बैलट बॉक्स में डाल दिए गए. लेकिन तभी रिटर्निंग अफ़सर ने आश्वासन दिया था कि वीडियो देखकर फ़ैसला करेंगे.”

वीडियो सार्वजनिक किया जाए: भाजपा

गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि अगर मतदान का वीडियो सार्वजनिक किया जाए तो सबको पता चल जाएगा कि वोट रद्द करने का फ़ैसला ग़लत है. उन्होंने वीडियो सार्वजनिक करने की मांग की और यह भी कहा कि इससे नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और भाजपा तीनों सीटें जीतेगी.

उन्होंने कहा, ”वीडियो में हमारे चुनाव प्रतिनिधि दिख ही नहीं रहे हैं और दोनों विधायकों का वोट शक्तिसिंह गोहिल के अलावा किसी ने नहीं देखा है, बल्कि नियम का उल्लंघन शक्तिसिंह गोहिल ने किया, जब उन्होंने देखा कि राघवजी पटेल ने कांग्रेस के ख़िलाफ़ वोट दिया है तो वो गुस्से में खड़े हो गए और मतपत्र छीनने की कोशिश की.”

वाघेला खेमे के दोनों विधायक

शंकर सिंह वाघेला
इमेज शंकर सिंह वाघेला ने हाल ही में छोड़ी है कांग्रेस

दोनों विधायक शंकर सिंह वाघेला खेमे के माने जाते हैं जिन्होंने हाल ही में कांग्रेस छोड़ी है. वाघेला ने मंगलवार सुबह समाचार चैनलों से बात करते हुए कहा था कि उन्होंने कांग्रेस को वोट नहीं दिया है क्योंकि अहमद पटेल चुनाव हार रहे हैं और वो अपना वोट ख़राब करना नहीं चाहते.

दोनों पार्टियों के बड़े नेता पहुंचे थे चुनाव आयोग

मंगलवार को मतदान के बाद पहले कांग्रेस शिकायत लेकर चुनाव आयोग गई और उसकी आपत्ति के ख़िलाफ वरिष्ठ भाजपा नेताओं का समूह भी आयोग पहुंच गया. दोनों पार्टियां दिन भर में तीन-तीन बार चुनाव आयोग पहुंचीं. कांग्रेस की तरफ़ से पी चिदंबरम, रणदीप सुरजेवाला और अशोक गहलोत ने चुनाव आयोग में अपनी शिकायत दी.

भाजपा की तरफ़ से अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल, निर्मला सीतारमण समेत छह केंद्रीय मंत्रियों ने चुनाव आयोग पहुंचकर कांग्रेस की शिकायत को बेबुनियाद करार दिया.

अमित शाह
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गुजरात से राज्यसभा चुनावों की तीन सीटें हैं और चार उम्मीदवार खड़े थे. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की जीत की राह आसान मानी जा रही थी, लेकिन तीसरी सीट के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सलाहकार और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी. उनका मुक़ाबला हाल ही में कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए बलवंत सिंह राजपूत से था.

राहुल गांधी, अहमद पटेल

हाल ही में छह कांग्रेस विधायकों के पार्टी छोड़ने से यह चुनाव कांटे का हो गया था. इन छह में से तीन विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे. इसके बाद कांग्रेस विधायकों को प्रभावित किए जाने से बचाने के लिए पार्टी ने उन्हें बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में भेज दिया था. मतदान से एक दिन पहले ही उन्हें एक साथ अहमदाबाद लाया गया.

नज़रिया: अहमद पटेल की जीत कांग्रेस के लिए संजीवनी बूटी

राज्यसभा के चुनाव गुजरात में पहले भी हुए हैं. अहमद पटेल का ये पांचवा राज्यसभा चुनाव था. इससे पहले राज्यसभा का चुनाव एक फ़्रेंडली मैच की तरह होता था जिसका परिणाम आमतौर पर मालूम होता था कि अगर इतनी सीटें हैं तो कौन-कौन लोग चुनकर आएंगे.

इस बार भी गुजरात का राज्यसभा चुनाव कुछ अलग नहीं था. लेकिन दो बातों की वजह से सारा समीकरण बदल गया. एक तो ये कि शंकरसिंह वाघेला ने नेता विपक्ष के पद से इस्तीफ़ा दिया और दूसरा ये कि बीजेपी ने ये मन बना लिया कि इस चुनाव को वो बहुत ऊंचे स्तर पर ले जाएगी और जीतेगी. इन दो कारकों के होने की वजह से ये एक बहुत हाई वोल्टेज ड्रामा की शक्ल में सामने आया.

घटनाक्रम को देखें तो ये बात समझ में आती है कि बीजेपी ने इस चुनाव को इस स्तर तक ले जाने का काफ़ी पहले ही मन बना लिया था.

इस योजना के तहत बीजेपी ने सबसे पहला काम ये किया कि शंकर सिंह वाघेला पर प्रश्न उठाना शुरू किया और ऐसा माहौल तैयार कर दिया जिससे ये लगने लगा कि वाघेला शायद बीजेपी में जा रहे हैं. जबकि हक़ीक़त ये थी कि उस समय तक वाघेला का ऐसा कोई इरादा नज़र नहीं आ रहा था.

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Image captionसोनिया गांधी और राहुल गांधी

इससे ऐसा संकेत भी मिला की बीजेपी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के स्तर पर बहुत कुछ खिचड़ी पक रही है.

जैसे-जैसे वक्त गुज़रता गया, कांग्रेस में घटनाक्रम बदले, बाग़ी खड़े हुए और हालत ये हो गई कि पार्टी को अपने विधायकों को टूट से बचाने के लिए गुजरात से बाहर ले जाना पड़ा.

वहां बेंगलुरु में केंद्र सरकार ने जिस तरह इनकम टैक्स और ईडी की मदद से कथित तौर पर दबाव बनाया उससे ये ज़ाहिर होने लगा कि भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव में अपना सब-कुछ झोंक रही है.

बीजेपी ने क्यों बनाया इतना महत्वपूर्ण?

अब सवाल उठता है कि ऐसा क्या था इस चुनाव में कि भारतीय पार्टी ने अपने समय, रणनीति, ऊर्जा – सबकुछ लगा दिया.

मुझे लगता है कि बीजेपी चाहती थी कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गोवा में सरकार बनाने के बाद मिले राजनीतिक लाभ को और मज़बूत करे और मनोवैज्ञानिक रूप से कांग्रेस को भरपूर नुकसान पहुंचाए.

मनोवैज्ञानिक नुकसान का आशय यहां यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल अगर अपने गढ़ में ये चुनाव हार जाते हैं तो कांग्रेस के काडर के लिए ये एक बहुत बड़ा सदमा होगा और साथ ही बीजेपी के लिए ये एक बहुत बड़ी राजनीतिक जीत वाली स्थिति होगी.

दूसरी बात ये है कि सोनिया गांधी भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकारों के दिमाग़ में एक बगवेयर के रूप में बैठी हुई हैं जिनका उत्तरोत्तर कमज़ोर होना पार्टी के हित में है.

बीजेपी ये बात नहीं भूल पाती कि सोनिया गांधी ने अकेले अपने दम पर 2004 में न केवल पार्टी को खड़ा किया था बल्कि अटल जी के इंडिया शाइनिंग की भी हवा निकाल दी थी.

यही वजह है कि बीजेपी के रणनीतिकार ये कोशिश करते हैं कि सोनिया गांधी और उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस को जितना संभव हो सके नीचे लाया जाए.

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Image captionभारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

दूसरी बात, आरएसएस को ये लगता है कि भारत में हर बात कहीं न कहीं कांग्रेस से जुड़ जाती है. इसलिए वो ऐसे भारत की कल्पना करना चाहती है जिसमें कांग्रेस न हो तभी भारत निर्माण हो सकता है.

यही वजह है कि बीजेपी ने ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा चलाया हुआ है. हालांकि ये बात अलग है कि कांग्रेस मुक्त भारत बनाने की कोशिश में खुद बीजेपी कांग्रेस युक्त होती जा रही है.

नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व वाली बीजेपी की रणनीति ये है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में अगर दक्षिणपंथी विचारधारा को आगे बढ़ाना है तो पुरानी सोच और उसके प्रतीकों को उखाड़ना होगा.

उसी उखाड़ने की प्रक्रिया के तहत अहमद पटेल के बहाने एक सांघातिक प्रहार की कोशिश की गई, लेकिन इसे बीजेपी का दुर्भाग्य कहें या कांग्रेस का सौभाग्य कि बीजेपी का ये पासा उल्टा पड़ गया.

कांग्रेस के लिए अहमद पटेल की जीत के मायने

कांग्रेस के लिए ये जीत बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी क्योंकि कांग्रेस लंबे अरसे से बैकफ़ुट पर चल रही है. अहमद पटेल को हराने के लिए बीजेपी और सरकार दोनों ने मिलकर बेहद आक्रामक रणनीति तैयार की थी. लेकिन अब जबकि अहमद पटेल इस कांटे की टक्कर में विजेता बनकर उभरे हैं तो परसेप्शन के स्तर पर और मनोबल के स्तर पर इसका काफ़ी फ़ायदा कांग्रेस को मिलेगा.

इस साल के आखिर में गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं. अहमद पटेल की जीत से कांग्रेस पार्टी के पास एक मौका आ गया है चीज़ों को ठीक करने का.

शंकर सिंह वाघेलाशंकर सिंह वाघेला

मोदीजी के गुजरात से केंद्र में जाने के बाद गुजरात बीजेपी में वैसी बात नहीं रही है जो पहले होती थी. वैसे भी कहते हैं कि वट वृक्ष के नीचे कुछ नहीं पनपता. तो मोदी जी के समय गुजरात बीजेपी में मोदी ही मोदी नज़र आते थे. दूसरे नंबर के नेता का भरपूर अभाव था.

जब मोदी जी केंद्र की राजनीति में चले गए तो उनकी जगह गुजरात में जो नेता उभरे उनमें वो बात नहीं है जो मोदी जी में थी. और सरकार जिस तरीके से चल रही है उसका भी जनता में कोई बहुत अच्छा संदेश नहीं जा रहा. इसका फ़ायदा कांग्रेस को मिल सकता है.

सामाजिक असंतोष भी बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है. पाटीदार, दलित और अन्य पिछड़े तबकों में सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष है. इसका फ़ायदा कांग्रेस को मिलता नज़र आ रहा था, लेकिन वाघेला के साथ विधायकों के कांग्रेस छोड़कर जाने से पार्टी की चुनाव तैयारियों को एक धक्का लगा था. लेकिन अहमद पटेल की जीत से कांग्रेस को एक संजीवनी बूटी सी मिल गई है.

अगर पार्टी आलस नहीं करती और इस जीत के पैदा हुई ऊर्जा को संजो कर एक नई रणनीति के साथ चुनाव में उतरती है तो सत्ता का खेल बदल भी सकता है क्योंकि कांग्रेस एक इतना विशालकाय प्राण है कि उसको हिलाना मुश्किल होता है और चलाना और और भी मुश्किल. अगर वो अब भी नहीं चेतेगी तो बहुत मुश्किल हो सकती है.

बीजेपी इससे कैसे उबरेगी

बीजेपी का नियंत्रण इस समय नरेंद्र मोदी और अमित शाह के पास है. इन दोनों नेताओं की कार्यशैली ये है कि बड़ा धक्का लगने पर ये ऐसा कुछ नया कर डालते हैं जिससे सेटबैक का असर नहीं रह जाता. कांग्रेस अभी तक इस बात को समझ नहीं पाई है.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाहबीजेपी अध्यक्ष अमित शाह

ब्लैक मनी का इश्यू चला था तो नोटबंदी से आलोचना के पूरे माहौल को बदल दिया गया. कहने का मतलब है कि बीजेपी सदमे को भुलाकर तुरंत खड़ी हो जाने वाली पार्टी हो गई है और गुजरात को पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व बहुत गंभीरता से ले रहा है क्योंकि वो इसी ज़मीन से निकलकर नरेंद्र मोदी केंद्र तक पहुंचे हैं. इसलिए गुजरात का पार्टी के लिए बहुत बड़ा प्रतीकात्मक महत्व है और वो इसे हाथ से निकलता नहीं देख सकते. इसलिए पार्टी ने अभी से ही बूथ लेवल तक अपनी रणनीति बना ली है. जबकि दूसरी ओर कांग्रेस है जो ऊपर-ऊपर की बातों में उलझी पड़ी है.

अगर कांग्रेस को आगामी चुनाव में जीत के सपने को साकार करना है तो उसे नींद से जागना होगा और अहमद पटेल की जीत से मिली ऊर्जा को बहुत छोटे स्तर पर कार्य कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं तक पहुंचाना होगा. छोटी-छोटी जीत से ही बड़ी जीत का सपना साकार होता है.

आने वाले समय में 2019 में लोकसभा के चुनाव होने हैं और कांग्रेस इस जीत से सबक लेकर एक समग्रता वाली रणनीति के साथ पूरी दमखम से काम करती है तो आज जिस हालत में पड़ी है उसका दूसरा पहलू भी देखने को मिल सकता है. लेकिन बीजेपी भी इन बातों को समझती है और वो अपने गढ़ को कमज़ोर होता नहीं देखना चाहेगी.

इटावा: मृत परिजनों को दफनाने के लिए नहीं है कब्रिस्तान, घर में ही बन रही है कब्र

विधानसभा चुनाव के दरम्यान उत्तर प्रदेश मे कब्रिस्तान और शमशान का मुददा बड़े जोर शोर से उछाला गया था लेकिन इस पर अब पूरी तरह से चर्चा बंद हो चुकी है । उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में चंबल नदी के किनारे बसे चकरगनर मे एक ऐसी मुस्लिम बस्ती है जहां के लोग अपने मृत परिजनों को अपने घरों में ही दफनाने मे लगे हैं। चकरनगर के बारे मे कहा जाता है कि महाभारत काल के दौरान पांडवों ने अज्ञातवास यहीं बिताया था  जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित चकरनगर इलाके में एक बस्ती है तकिया। यहां रहने वाली सुशीला बेगम काफी दुखी होकर कहती हैं कि हमें न धन चाहिए , न दौलत, न ही कुछ और। हमें तो सिर्फ दो गज़ जमीन चाहिए लेकिन हम इतने दुर्भाग्यशाली हैं कि हमें वो भी मयस्सर नहीं । यह तकलीफ सिर्फ सुशीला बेगम की नहीं है । बस्ती में रहने वाले करीब 70-80 मुस्लिम परिवारों को भी यही परेशानी है। वे अपने छोटे से घरों या यों कहें कि घरनुमा कमरों में ही अपने पुरखों की कब्र बनाने के लिए मजबूर हैं।

सुशीला बेगम अपने घर मे बनी कब्रों के बारे में बताते हुए वे फूट-फूट कर रोते हुए बताती हैं कि वैसे तो कोई अपना मर जाता है तो इंसान कुछ दिन रोता है, फिर उसकी यादें धुंधली होती जाती हैं लेकिन इन कब्रों के हमेशा सामने होने के कारण हमेशा अपनों के मरने की ही घटना दिखती है। हम जब भी कब्रों को देखते हैं, बातें ताजा हो जाती हैं। यही नहीं, इस बस्ती में कई ऐसे भी घर हैं, जहां कमरे में एक ओर कब्र है तो दूसरी ओर सोने का बिस्तर लगा है। यानी शयन कक्ष और कब्रिस्तान एक साथ हैं ।इसी बस्ती के ही यासीन अली बताते हैं कि हम सभी मजदूरी करते हैं। किसी के पास ज़मीन है ही नहीं । सालों पहले ग्राम समाज से घर के लिए जो जमीन मिली थीं, परिवार बढ़ने के साथ वो कम पड़ने लगीं । पहले हम खाली जमीन पर शव दफनाते थे, लेकिन बाद में जगह नहीं मिलने के कारण घरों में ही दफनाना पड़ रहा है । ऐसा नहीं है कि इस बात की किसी को जानकारी न हो। ये समस्या नई नहीं बल्कि सालों पुरानी है। ये बस्ती फकीर मुसलमानों की है। बस्ती के लोगों का कहना है कि इसके लिए हमने हर जगह दरख्वास्त दी, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

इटावा के प्रशासनिक अधिकारी भी तकिया में कब्रिस्तान न होने की बात से वाकिफ हैं लेकिन वे भी यही समस्या बता रहे हैं जो कि ग्राम प्रधान राजेश यादव ने बताई। इटावा की जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे कहती हैं कि आस-पास खाली जमीन है ही नहीं। किसी की निजी जमीन दी नहीं जा सकती है। कुछ दूर पर जमीन मुहैया कराई गई थी लेकिन वहां ये लोग कब्रिस्तान बनाने को राजी नहीं है। सेल्वा कहती हैं कि डेढ़ किलोमीटर दूर चांदई गांव में कब्रिस्तान के लिए उपलब्ध जमीन पर शव दफनाने के लिए लोगों को मनाने की कोशिश हो रही है। तकिया बस्ती की कुछ महिलाएं बताती हैं कि बच्चे अक्सर रात में जग जाते हैं क्योंकि कई घरों में कब्रें बिस्तर के बिल्कुल पास में ही बनी हुई हैं। बहरहाल, प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि तकिया बस्ती के लोगों के लिए आस-पास ही किसी कब्रिस्तान के इंतजाम में लगे हैं लेकिन अभी तो इनकी यही मांग है कि मरने के बाद अपनी मातृभूमि में दफन होने के लिए इन्हें कम से कम दो गज जमीन तो मिल जाए ।

चंडीगढ़ छेड़छाड़ केस: मायावती ने पूछा, खामोश क्यों हैं भाजपा के नेता

हरियाणा भाजपा प्रमुख के बेटे और उसके साथी द्वारा चंडीगढ़ में एक युवती का पीछा करने के मामले में बसपा प्रमुख मायावती ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग करते हुए पूछा कि इस मामले में भाजपा के बड़े नेता खामोश क्यों हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता इस मामले को दबा देने की कोशिश में हैं। मायावती ने पूछा, ‘क्या भाजपा नेताओं से जुड़े व्यक्तियों पर देश का कानून लागू नहीं होता? यह दोहरा रवैया क्यों?’  मायावती ने हरियाणा सरकार के ‘बेटी बचाओ’ अभियान के नारे पर तंज कसते हुए कहा कि जिस तरीके से विकास बराला प्रकरण को दबा देने की कोशिश चल रही है, वह बेहद चिंतनीय है। लखनऊ में जारी एक बयान में उन्होंने मांग की कि आरोपियों के खिलाफ तुरंत प्रभाव से अपहरण का मामला दर्ज किया जाए और उनकी अविलंब गिरफ्तारी की जाए।

उन्होंने मांग की कि महिला उत्पीड़न के दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। मायावती के मुताबिक जिस तरीके से अभियुक्त विकास बराला को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर बचाने की कोशिश कर रहे हैं, उससे कमजोर वर्ग में उनके खिलाफ असंतोष पैदा हो रहा है। विकास को पुलिस ने थाने से जाने कैसे दिया?’ उन्होंने कहा कि इन हालात में लोगों का गुस्सा बिल्कुल जायज है।  मायावती ने पूछा कि क्या भाजपा के नेता और उनके संबंधी देश के कानून से ऊपर हैं। क्या उन पर कानून लागू नहीं होता? उन्होंने कहा कि हरियाणा की हाल की घटनाओं से स्पष्ट हो गया है कि बेटी बचाओ, लव जेहाद, महिला सुरक्षा, गो रक्षा और एंटी-रोमियो जैसे नारे गढ़कर भाजपा ने मतदाताओं को लुभाया है और सत्ता पाई है। इन नारों का हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।

देश में भर में अपहरण, छेड़छाड़ और पीछा करने के मामले बढ़े

दिल्ली में महिला के प्रति अपराध के मामले सबसे ज्यादा रहे। यहां 17,104 केस प्रति एक लाख महिला आबादी पर 184.3 की अपराध दर से दर्ज हुए। असम इस मामले में दूसरे और हरियाणा छठे नंबर पर रहा।

देशभर में महिलाओं के संग 2015 में अपहरण, छेड़छाड़ और पीछा करने के मामले बढ़े हैं। हालांकि बलात्कार के मामलों में कमी आई है। ऐसा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) का कहना है। एनसीआरबी के मुताबिक अगर 2014 से तुलना करें तो निश्चित रूप से बलात्कार के मामले घटे हैं। एनसीआरबी की 2016 के अपराध आंकड़ों की रिपोर्ट अभी आना बाकी है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार 2014 के मुकाबले 2015 में महिलाओं के प्रति अपराध में 3.1 फीसद की कमी आई। 2015 में जहां 3,27,394 मामले अपराध के दर्ज हुए, वहीं 2014 में यह संख्या 3,37,922 थी। इसी तरह बलात्कार के मामले 2015 में 5.7 फीसद कम हुए। 2014 में 36,735 मामले बलात्कार के दर्ज हुए थे वहीं 2015 में यह संख्या घटकर 3,651 रह गई।

2015 की रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि महिलाओं के यौन प्रताड़ना संबंधी अपराध 2.5 फीसद बढ़ गए। इसमें छेड़छाड़, पीछा करना, घूरना वगैरह शामिल हैं। 2015 में 84,222 ऐसे मामले दर्ज किए गए जबकि 2014 में यह संख्या 82,235 थी। इसी तरह महिलाओं के अपहरण के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2014 में जहां 57,311 अपहरण हुए थे, वहीं 2015 59,277 अपहरण हुए। महिलाओं को शादी के लिए विवश करना अपहरण का प्रमुख कारण है। 2015 में 54 फीसद महिलाएं इसी कारण से अपह्रत की गईं। 2014 में इसी वजह से 50 महिलाएं अगवा की गई थीं। दिल्ली में महिला के प्रति अपराध के मामले सबसे ज्यादा रहे। यहां 17,104 केस प्रति एक लाख महिला आबादी पर 184.3 की अपराध दर से दर्ज हुए। असम इस मामले में दूसरे और हरियाणा छठे नंबर पर रहा।

राज्य मामले राष्ट्रीय हिस्सेदारी दर %
दिल्ली 17,104 52
तेलंगाना 15,135 4.6
ओडीशा 17,144 5.2
राजस्थान 28,165 8.6
हरियाणा 9,446 2.9
पश्चिम बंगाल 33,218 10.1

राज्य घटनाएं प्रति एक लाख महिला आबादी

दिल्ली 2,199 23.7
छत्तीसगढ़ 1,560 12.2
मध्य प्रदेश 4,391 11.9
ओडीशा 2,251 10.8
राजस्थान 3,644 10.5
महाराष्ट्र 4,144 7.3
उत्तर प्रदेश 3,025 3.0

नीतीश को चुनौती देने तैयार हुए शरद यादव? जारी क‍िया ब‍िहार की जनता से सीधा संवाद का कार्यक्रम

बिहार में महागठबंधन की सरकार टूटने के बाद इन दिनों जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव और सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच बढ़ती दूरी साफ दिखाई दे रही है। महागठबंधन टूटने के बाद नीतीश ने भाजपा के साथ मिलकर भले ही सरकार बना ली हो लेकिन शरद यादव ने अब नीतीश को चुनौती देने के लिए कमर कस ली है। शरद यादव बहुत ही जल्द बिहार की जनता के साथ सीधे संवाद करते हुए दिखाई देंगे। इस संवाद की जानकारी शरद यादव ने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट कर दी है। जनता से किए जाने वाले इस संवाद की एक सूची तैयार की गई है कि किस दिन शरद यादव प्रदेश की जनता के साथ रुबरु होंगे।

इस सूची के अनुसार 10 अगस्त को शरद यादव पटना से सोनपुर जाएंगे। सोनपुर के बाद वे हाजीपुर, सराय, भगवानपुर, गोरौल, कुढ़ानी, तुर्की, रामदयालु नगर, गोबरसाही और फिर भगवानपुर चौक जाएंगे। यहां जनता से संवाद कर शरद यादव मुजफ्फरपुर जाएंगे और यहीं पर रात को ठहरेंगे। इसके बाद 11 अगस्त उनका मुजफ्फरपुर में कार्यक्रम होगा। यहां कार्यक्रम खत्म करने के बाद शरद यादव चांदनी चौक, जीरो माइल, गरहा, बोचाहा, मझौली, सर्फुद्दीनपुर, जारंग, गायघाय, बेनीबाद और दरभंगा में आम जनता के साथ रुबरु होंगे और उनसे उनकी तकलीफों के बारे में जानेंगे।

बिहार की जनता से सीधे संवाद कार्यक्रम के आखिरी दिन 12 अगस्त को शरद यादव मधुबनी, सुपौल, सहरसा और मधेपुरा में आम जनता के बीच पहुंचेंगे और रात को मधेपुरी में ही विश्राम करेंगे। अपने इस कार्यक्रम के जरिए शरद यादव शायद नीतीश को बताना चाहते हैं कि जिस पार्टी के साथ मिलकर उन्होंने सरकार बनाने का कदम उठाया है वह बिलकुल गलत है। ऐसा लगता है कि इन कार्यक्रम के तहत शरद यादव नीतीश कुमार से अपनी नाराजगी जाहिर करना चाह रहे हैं। आपको बता दें कि ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि शरद यादव जल्द ही जदयू से अलग हो सकते हैं क्योंकि वे अपने बयान में पहले ही कह चुके हैं कि वे नीतीश कुमार के फैसले से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। इस बयान से शरद यादव की नीतीश के प्रति नाराजगी साफ झलकती है।

गुजरात राज्यसभा चुनाव: अमित शाह की रणनीति फेल, कांग्रेसी अहमद पटेल जीते, चुनाव आयोग में भी बीजेपी की हार

गुजरात राज्यसभा चुनाव 2017 में मंगलवार (8 अगस्त) की रात को नाटकीय ढंग से घटनाक्रम बदले और तीसरी सीट पर कांग्रेस के अहमद पटेल जीत गए। तीन राज्यसभा सीटों में से दो पर भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की जीत हुई लेकिन इन दोनों की जीत की खुशी तीसरी सीट पर हुई हार के आगे फीकी पड़ गई। आखिर तक किसी को नहीं पता था कि तीसरी सीट जिसपर अहमद पटेल और बीजेपी की तरफ से बलवंत राजपूत आमने-सामने थे उसपर कौन जीतेगा। सारा विवाद दो कांग्रेसी विधायकों के वोट को लेकर खड़ा हुआ। दरअसल दोनों ने अपना वोट डालने के बाद यह दिखा दिया था कि उन्होंने किसको वोट दिया। इसपर कांग्रेस ने हंगामा कर दिया।

कांग्रेस का कहना था कि दोनों ने वोट की गोपनीयता का उल्लंघन किया है इसके चलते दोनों (भोलाभाई गोहिल और राघवजी भाई पटेल) का वोट कैंसल होना चाहिए। इस चीज के लिए कांग्रेस चुनाव आयोग पहुंच गई। इसी बीच वोटों की गिनती रुकवा दी गई। फिर आधी रात तक दोनों ही दलों के बड़े-बड़े नेता चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचने लगे। दोनों की तरफ से अपनी-अपनी दलीलें दी जा रही थी।

लेकिन अंत में चुनाव आयोग ने दोनों के वोट को खारिज कर दिया। आयोग ने निर्वाचन अधिकारी से कांग्रेस विधायक भोलाभाई गोहिल और राघवजी भाई पटेल के मतपत्रों को अलग करके मतगणना करने को कहा। आयोग के आदेश के अनुसार मतदान प्रक्रिया का वीडियो फुटेज देखने के बाद पता चला कि दोनों विधायकों ने मतपत्रों की गोपनीयता का उल्लंघन किया था। वोटों की गिनती रात को एक बजे शुरू हुई और लगभग दो बजे नतीजे आए। जीत के बाद अहमद पटेल ने ट्वीट कर ‘सत्यमेव जयते’ लिखा। उन्होंने कांग्रेस का साथ देने वाले सभी लोगों का शुक्रिया भी किया।

यह सीट अमित शाह और अहमद पटेल के लिए नाक का सवाल बन गई थी। दोनों को ही अपनी-अपनी पार्टी का ‘चाणक्य’ कहा जाता है। लेकिन अंत में बीजेपी दो सीट जीतकर भी खुश नहीं थी और चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने की बात कह रही थी।

अजहरुद्दीन को कोर्ट ने मैच फिक्सिंग से किया मुक्त, क्या BCCI उन्हें देगी करोड़ों रुपए बकाया पेंशन?

नई दिल्ली: प्रशासकों की समिति और बीसीसीआई पदाधिकारियों की मंगलवार को होने वाली बैठक में भारत के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन की लंबी बकाया राशि पर बातचीत की जायेगी. समझा जाता है कि अजहर ने सीओए को बताया है कि आंध्र उच्च न्यायालय ने पांच साल पहले उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए तमाम आरोपों से बरी कर दिया था. उन्होंने अपने बकाया के बारे में भी पूछताछ की जो कुछ करोड़ रुपए हैं.

बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने कहा ,’हां , अजहरूद्दीन के मसले पर सीओए की बैठक में बात की जायेगी. फिलहाल अजहर पर कोई प्रतिबंध नहीं है और वह बीसीसीआई के समारोहों में भाग ले रहे हैं.

आखिरी बार वह 2000 में भारत के लिये खेले थे. उन्हें 17 साल से पेंशन नहीं मिली और एकमुश्त अनुग्रह राशि भी रूकी हुई है. सीओए इस बारे में फैसला लेगा.’

हि‍दुस्‍तान की ऐसी तस्‍वीर जि‍से आप नहीं देखना चाहेंगे

रात को लगभग 11 बजे एक मित्र का फोन आया. बहुत जरूरी हो तभी इस वक्त फोन कोई फोन करता है. बात की तो उन्होंने मुझे कहा कि व्हाट्सऐप पर एक फोटो देखिए. मैंने डेटा ऑन करके उनका भेजा गया फोटो देखा. जब से यह फोटो देखा, रह—रह कर आंखों के सामने घूम रहा है. यह हिंदुस्तान की उन दर्दनाक तस्वीरों सा ही है जो कभी भोपाल की गैस त्रासदी में सामने आता है, कभी किसी अपने की लाश को कांधों पर उठाए बीसियों किलोमीटर चला जाता है. पूरे नौ माह तक अपनी कोख में एक जीवन पाल रही स्त्री के सामने ठीक अंतिम क्षण इतने भारी पड़ने वाले होंगे किसने सोचा होगा. एक शिशु का जन्म लेते ही धरती पर यूं गिर जाना, और जन्म लेते ही मौत को पा जाना, यह दुखों का कितना बड़ा पहाड़ होगा, क्या हम और आप सोच सकते हैं, इस दर्द को महसूस कर सकते हैं, क्या इस दर्द को दूर कर सकते हैं?

यह मामला दो दिन पहले मध्यप्रदेश के कटनी जिले का है. इस जिले के बारे में एनएफएचएस—4 की रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रसव के दौरान यहां पर लोगों को पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ती है. कटनी के पास ग्राम बरमानी निवासी रामलाल सिंह और बीना बाई के घर अच्छी खबर आने वाली थी. सुरक्षित प्रसव हो इसके लिए मध्यप्रदेश में बहुत काम किया गया है. संस्थागत प्रसव पर जोर दिया गया है. इसका असर हुआ और अब लोग घरों के बजाय अस्पतालों में जाकर प्रसव कराने को प्राथमिकता दे रहे हैं. अस्पताल तक पहुंचाने का जिम्मा आशा कार्यकर्ताओं को भी दिया गया है. इसके लिए उन्हें प्रोत्साहन राशि दी जाती है. अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की सुविधा भी है, इसे जननी एक्सप्रेस नाम दिया गया है. सरकार का दावा है कि अब 80 प्रतिशत से ज्यादा प्रसव अस्पतालों में होने लगे हैं, लेकिन इनमें सुरक्षित प्रसव का प्रतिशत कितना है, यह अभी कहना बाकी है. पर लोगों को उम्मीद तो रहती ही है कि जच्चा—बच्चा का जीवन सुरक्षित रहे.

इसी आस में पति रामलाल सिंह ने प्रसव पीड़ा होने पर बरही अस्पताल पहुंचाने के लिए सुबह 10 बजे जननी एक्सप्रेस को फोन लगाया. समय चलता रहा, पीड़ा बढ़ती रही, लेकिन कोई जननी एक्सप्रेस नहीं आई. हारकर उसने अपनी पत्नी को एक ऑटो में जैसे—तैसे बैठाया और अस्पताल की ओर चल पड़ा. ऑटो अस्पताल से महज 700 मीटर की दूरी पर आकर बंद हो गया. ऐसी अवस्था में प्रसूता के लिए एक कदम में चलना मुश्किल होता है. रामलाल किसी फिल्म का हीरो भी नहीं था, जो अपनी पत्नी को गोद में उठाकर अस्पताल तक पहुंचाने जैसा फिल्मी काम कर सकता. वह दौड़ा, अस्पताल की ओर. रामलाल अस्पताल जाकर कर्मचारियों के सामने एम्बुलेंस भेजने की विनती करता रहा. पत्नी ऑटो में तड़प रही थी.

पति वापस नहीं आया और दर्द जब हद से ज्यादा हुआ तो वह ऑटो से निकल पैदल ही अस्पताल की ओर चलने लगी. कुछ ही दूर चलने पर उसे प्रसव हो गया. उसने एक सुंदर बालक को जन्म दिया, पर—पर—पर वह सड़क पर ऐसे गिरा कि फिर न हिल—डुल सका, न रो सका. आंखें खुलने से पहले ही बंद हो गईं, सांस चलने से पहले रुक गईं, दिल धड़कने से पहले ठिठक कर रूक गया. सड़क पर खून बह रहा था… पता नहीं यह मौत थी या हत्या.

मुझे दस साल पहले संग्राम सिंह की स्टोरी याद आ गई. यह मंडला जिले का मामला था. यहां पर शिशु नहीं मरा था. बैगा महिला थी, जो शिशु को जन्म देते—देते रास्ते में ही मर गई थी. किसी और मसले पर काम करते—करते हमें इस घटना का पता चला था. उसके पिता ने हमें उसकी आपबीती सुनाई थी. इसके कथानक को बदल दीजिए, कुछ दाएं—बाएं होगा, सामने तीन दिन का संग्राम था, यह नाम भी हम पत्रकारों की टोली उस बच्चे को दे आई थी. अगले दस दिन बाद हमने पता किया तो संग्राम भी उसकी मां के पास ही चला गया था. तब से अब तक दस साल का विकास हमारे सामने है. विकास के पैमाने में जिंदगी की सुरक्षा का कोई मानक कितना सुधरा, कैसे कहें, घटनाएं तो निरंतर हमारे सामने है.

हम संसाधनों का हवाला दे सकते हैं, भारत की भिन्न—भिन्न भौगोलिक परिस्थितियों के बीच सुविधाएं पहुंचा पाने की असमर्थकता का भी तर्क मान सकते हैं, पर जो व्यवस्थाएं मौजूद हैं, उनके कुशल संचालन के जिम्मेदारी से कैसे दूर भाग सकते हैं. यदि अस्पताल के ठीक सात सौ मीटर पीछे कोई बच्चा जमीन पर गिरकर मर जाए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा. क्या हमारा समाज भी इतना निष्ठुर हो गया है कि दर्द से तड़प रही एक महिला को वह अस्पताल तक नहीं पहुंचा सकता ? क्‍या यह कि‍सी धर्म के एजेंडे में नहीं है ? क्‍या ऐसे काम देशप्रेम की सूची में समाहि‍त नहीं होंगे !!! क्‍या ऐसे मसलों पर चर्चा कि‍सी राष्ट्रवाद से कम है?

यह घटना हुई इससे ठीक एक दि‍न बाद देश की संसद में स्‍वास्‍थ्‍य एवं परि‍वार कल्‍याण मंत्री फग्‍गन सि‍ह कुलस्‍ते ने एक सवाल के जवाब में बताया था कि भारत के महापंजीयक का नमूना पंजीकरण प्रणाली यानी एसआरएस की रि‍पोर्ट के मुताबि‍क 2015 में देश में प्रति एक हजार शि‍शु जन्‍म पर 37 बच्‍चों की मौत हो जाती है. पांच साल तक के बालकों की  मृत्यु दर यानी अंडर फाइव मोर्टेलि‍टी के मामले में यह आंकडा प्रति हजार जीवि‍त जन्‍म पर 43 है. इसी तरह मात मृत्यु दर के मामले में यह संख्‍या प्रति एक लाख प्रसव पर 167 है.

इसी सवाल के जवाब में बताया गया कि देश में 39 प्रतिशत बच्‍चों की मौत कम वजन या समय से पूर्व प्रसव के कारण, 10 प्रति‍शत बच्‍चों की मौत एक्‍सपीसिया या जन्‍म आघात के कारण, 8 प्रति‍शत बच्‍चों की मौत गैर संचारी रोगों के कारण, 17 प्रति‍शत बच्‍चों की मौत नि‍मोनि‍या के कारण, 7 प्रति‍शत बच्‍चों की मौत डायरि‍या के कारण, 5 प्रतिशत बच्‍चों की मौत अज्ञात कारण, 4 प्रति‍शत बच्‍चों की मौत जन्‍मजात वि‍संगति‍यों के काराण, 4 प्रति‍शत बच्‍चों की मौत संक्रमण के कारण, 2 प्रति‍शत बच्‍चों की मौत चोट के कारण, डेढ प्रति‍शत बच्‍चों की मौत बुखार के कारण और पांच बच्‍चों की मौत अन्‍य कारणों से होती है.

कटनी में हुई बच्‍चे की मौत इसमें से कि‍स श्रेणी में आएगी… सोचना होगा! सोचना यह भी होगा कि सड़क पर जो लहू बह रहा है वह मौत का है या हत्‍या का. और इसका जि‍म्‍मेदार कौन है? आखि‍र ऐसी भी क्‍या परि‍स्‍थि‍ति है कि अस्‍पताल के ठीक सामने एक प्रसूता प्रसव करती है, बच्‍चे की मौत हो जाती है; हमारा समाज उसकी मौत को खड़े-खड़े देखता रहता है. इस मौत का मुकदमा कि‍स अदालत में चलाया जाएगा, और क्‍या कठघरे में हम सभी नहीं होंगे? सरकार की नीति और नीयत का सवाल तो है ही पर क्‍या समाज की संवेदना भी उसी सि‍स्‍टम की भेंट चढ़ गई है.

दुनि‍याभर में इस सदी की शुरुआत में मि‍लेनि‍यम डेवलपमेंट गोल्‍स तय कि‍ए गए थे. इसमें भुखमरी को दूर कर देने, गरीबी को हटा देने, शि‍शु और बाल मृत्‍यु दर को कम करने सहि‍त कई बि‍दु थे. जब 2015 तक यह तय नहीं हो पाए तो अब सतत वि‍कास लक्ष्‍यों का नया एजेंडा तय कि‍या गया है. अब 2030 तक इसमें तय कि‍ए गए लक्ष्यों को हासि‍ल करने का वायदा कि‍या गया है.

पर देखि‍ए कि देश की स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का क्‍या हाल है. ऐसी वीभत्‍स तस्‍वीरें और खबरें जहां से आती हैं, वह एकदम ग्रामीण इलाका ही होता है. ऐसी जगहों पर छोटी-छोटी सेवाएं बड़ा काम करती हैं, मसलन प्राथमि‍क स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र. यह सार्वजनि‍क स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की पहली और महत्‍वपूर्ण कड़ी है. इसके बारे में घटना के ठीक एक दि‍न बाद केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परि‍वार स्‍वास्‍थ्‍य कल्‍याण मंत्री जेपी नड्डा ने जो जवाब दि‍या है वह बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के लि‍ए कतई ठीक नहीं माना जा सकता है. लोकसभा में प्रस्‍तुत जवाब के मुताबि‍क देश में आबादी के हि‍साब से अब भी 22 प्रति‍शत स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों की कमी है. यही जानकारी इन केन्‍द्रों में पदस्‍थ डॉक्‍टरों के बारे में है. देश के प्राथमि‍क स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में 34 हजार 68 डॉक्‍टरों के पद स्‍वीकृत हैं इनमें से 8774 पद खाली पड़े हैं. इस संदर्भ में और जानकारि‍यां हैं, जो लगभग ऐसी ही हैं. अब सवाल यही है कि ऐसी स्‍थितियों में ऐसी कहानि‍यां क्‍यों न सामने आएं.

राकेश कुमार मालवीय एनएफआई के पूर्व फेलो हैं, और सामाजिक सरोकार के मसलों पर शोधरत हैं…

ये हैं इंग्लैंड के मोईन अली, किया ऐसा कारनामा जो क्रिकेट में कभी नहीं हुआ

इंग्लैंड ने दक्षिण अफ्रीका को ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले गए चौथे और अंतिम टेस्ट में 177 रन से हरा दिया. इस जीत के साथ इंग्लैंड ने सीरीज पर 3-1 से कब्जा जमा लिया

नई दिल्ली: दक्षिण अफ्रीका को अपनी धरती पर टेस्ट सीरीज में शिकस्त देने के लिए इंग्लैंड को 19 साल इंतजार करना पड़ा. इस ऐतिहासिक जीत के हीरो रहे इंग्लैंड के ऑलराउंडर मोईन अली. इस ऑलराउंड प्रदर्शन के दम पर यह उपलब्धि हासिल करने वाले मोईन 8वें क्रिकेटर बन गए हैं. इंग्लैंड ने दक्षिण अफ्रीका को ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले गए चौथे और अंतिम टेस्ट में 177 रन से हरा दिया. इस जीत के साथ इंग्लैंड ने सीरीज पर 3-1 से कब्जा जमा लिया. मोईन अली ने दूसरी पारी में 69 रन देकर पांच विकेट लिए. इतना ही नहीं, मोईन अली ने दूसरी पारी में 75 रन की नाबाद पारी खेलकर टीम को 243 के सम्माजनक स्कोर पर पहुंचाया था.

ये भी पढ़ें: 19 साल बाद इंग्लैंड ने अपनी धरती पर दक्षिण अफ्रीका को हराया

मोईन अली से जुड़ी 5 बातें

  1. मोईन अली ने चार मैचों की सीरीज में बल्ले से अहम योगदान देते हुए 252 रन बनाए. उन्होंने अपनी फिरकी के जाल में विपक्षी बल्लेबाजों को फांसते हुए 15.64 के औसत से 25 विकेट लिए. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसी खिलाड़ी ने चार मैचों की सीरीज में 250 से ज्यादा रन बनाने के साथ 25 विकेट भी चटकाए हो.
  2. पांच या उससे ज्यादा मैचों की सीरीज में आठ प्लेयर यह करिश्मा कर चुके हैं.
  3. मोईन इंग्लैंड की तरफ से 8वें ऐसे खिलाड़ी बन गए हैं, जिन्होंने किसी टेस्ट सीरीज में 200 रन बनाए और 20 विकेट भी लिए.
  4. साल 2005 में इंग्लैंड के ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉप ने ऐसा ही कारनामा किया था, यानी मोईन ने 12 साल के बाद एक ऑलराउंडर के तौर पर ऐसे प्रदर्शन को फिर से दोहराया.
  5. मोइन अली ने द. अफ्रीका के खिलाफ पिछले तीन टेस्ट मैचों में 87, 7, 18, 27, 16 और 8 रन की पारी खेली. वहीं इन मैचों में विकेट की बात करें तो उन्होंने क्रमश: 4, 6, 0, 4, 0 और 4 विकेट लिए.

हरियाणा के बीजेपी नेता पर सरेआम भड़क गईं अभिनेत्री रवीना टंडन, बोलीं- तुम कायर हो

हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष रामवीर भट्टी द्वारा IAS की बेटी पर दिये बयान के चलते फिल्म अभिनेत्री रवीना टंडन ने उन्हें खरी-खोटी सुनाई है। रवीना टंडन ने बीजेपी नेता रामवीर भट्टी पर भड़कते हुए कहा है कि ये कायर हैं, इन लोगों का बस चले तो ये सूरज ढलने के बाद अपनी बेटियों को ताले में बंद कर दें। आपको बता दें कि रामवीर भट्टी ने सोमवार को हरियाणा में बीजेपी अध्यक्ष के बेटे द्वारा एक आइएएस की बेटी को रात के अंधेरे में छेड़ने के मामले में विवादित बयान देते हुए कहा था कि उस लड़की को इतनी रात में अकेले नहीं घूमना चाहिए था। रामवीर भट्टी ने ये भी कहा था कि इस समय माहौल बहुत खराब है, इसलिए रात 12 बजो के बाद लड़कियों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। बीजेपी नेता के इस बयान के मीडिया में आने के बाद राजनीतिक दलों से लेकर सोशल मीडिया तक पर उनकी जमकर आलोचना हुई। खुद भारतीय जनता पार्टी के सासंद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि वो रामवीर के इस बयान के लिए उनपर कोर्ट में मुकदमा करेंगे। रामवीर भट्टी की आलोचना करनेवालों में एक नाम रवीना टंडन का भी जुड़ गया है। रवीना ने रामबीर भट्टी के बयान को रिट्वीट करते हुए ट्वीट किया कि ये कायर लोग अब बी उस लड़के की तरफदारी में उलजलूल बातें बोल रहे हैं। रवीना ने लिखा कि ये लोग सूरज ढलने के बाद अपनी बेटियों को ताले में बंद कर देने वाले लोग हैं।

रवीना टंडन के इस ट्वीट को सोशल मीडिया पर लोग खूब पसंद कर रहे हैं। यूजर्स रवीना की बातों से सहमति जताते हुए रामवीर भट्टी जैसे लोगों की मानसिकता पर सवाल उटा रहे हैं।

 

आपको बता दें कि हरियाणा में एक IAS की बटी ने बीजेपी नेता सुभाष बराला के बेटे विकास पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। लड़की का आरोप है कि विकास बराला और उसका दोस्त आशीष कुमार एक पेट्रोल पंप से ही उनकी कार का पीछा कर रहे थे और कार का दरवाज़ा खोलने की कोशिश की। लड़की के कई बार फोन करने पर पुलिस वहां पहुंची और दोनों लड़कों को गिरफ़्तार कर लिया। गिरफ्तार करने के अगले दिन ही उन सबको जमानत मिल गई। पीड़िता ने उस रात की घटना का जिक्र करते हुए अपने फेसबुक पेज पर अपना दर्द बयां करते हुए लिखा कि मैं खुशकिस्मत हूं कि रेप के बाद नाले में नहीं मिली।

पाकिस्तान के कई परिवार गाय के गोश्त को हाथ नहीं लगाते

कुछ दिनों पहले कुछ बड़ों के साथ बैठे थे और भारत में गोमांस पर होने वाली हिंसक घटनाओं पर बात हो रही थी कि अचानक उनमें से एक बुज़ुर्ग ने कहा कि भगवान का लाख-लाख शुक्र है कि जिसने गाय बनाई.

पाकिस्तान के पंजाब सूबे के शहर के बीच हाफ़िज़ाबाद में होने वाली इस बातचीत के दौरान थोड़ी चुप्पी के बाद उदास आंखों के साथ पुरानी यादों को ताज़ा करते हुए बुज़ुर्ग ग़ुलाम हसन कहते हैं कि हमारे यहां बाप-दादा के समय से गाय पाली तो जाती है लेकिन कभी उसके मांस घर की दहलीज के अंदर नहीं आने दिया.

 

उन्होंने कहा, “आने भी क्यों देते … मेरा जिगरी दोस्त डॉक्टर हीरालाल पड़ोसी था, ग़मी व खुशी में बढ़-चढ़ कर शरीक होता था तो किस मुंह से गाय का मांस खाते जिसे वह पवित्र मानता था.”

पाकिस्तान का एक परिवार
पाकिस्तान में अब भी कई परिवार हैं जो दालें खाना पसंद नहीं करते

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शहर हाफ़िज़ाबाद के निवासी ग़ुलाम हसन की बातें आज भी विभाजन से पहले यहां पाई जाने वाली धार्मिक सहिष्णुता के दर्शाती है जिसे सत्तर वर्ष बीतने के बाद आज भी कई परिवार जीवित रखे हुए हैं.

इन परंपराओं के इतिहास के बारे में जिज्ञासा हुई तो पंजाब की तारीख़ और संस्कृति पर कई पुस्तकों के लेखक प्रोफ़ेसर असद सलीम शेख़ से संपर्क किया और अपने प्रश्न उनके सामने रखे.

प्रोफ़ेसर असद सलीम शेख़

प्रोफ़ेसर असद सलीम शेख़ ने बताया कि भारतीय उपमहाद्वीप में मुसलमानों के दो वर्ग हैं जिनमें एक वर्ग स्थानीय नहीं था जो अरब, तुर्की, ईरान और अफ़ग़ानिस्तान आदि से आने वाले मुसलमान थे और उन सभी मुसलमानों के रस्मो-रिवाज, सभ्यता वह संस्कृति वही थी जो वे अपने क्षेत्रों से लाए थे.

 

वो कहते हैं, “दूसरा वर्ग वह था जो स्थानीय हिंदुओं का था और धर्म बदल कर मुसलमान हुआ था. इसमें दूसरे क्षेत्रों से आने वाले मुसलमान हर तरह के मांस का उपयोग करते थे लेकिन दूसरा वर्ग गाय का मांस खाने से परहेज़ करता रहा क्योंकि वह हिंदुओं के साथ सदियों से रह रहे थे और उनकी सभ्यता उनके अंदर रची-बसी रही और मुसलमान होने के बावजूद उन्होंने इन पहलुओं को छोड़ा नहीं.”

लेकिन क्या केवल यही पहलू था जिसकी वजह से बहुत सारे मुसलमान घरों में बकरे का मांस इस्तेमाल किया जाता है लेकिन गोमांस पसंद नहीं किया जाता?

इस पर प्रोफ़ेसर असद ने बताया, “उपमहाद्वीप में अक्सर स्थानों पर हिंदुओं के अनुपात में मुसलमान अल्पसंख्यक थे जिसकी वजह से यह पहलू भी था कि किसी ऐसी परंपरा को नहीं अपनाया जाए जिसके कारण बहुमत की धार्मिक भावनाएं आहत हों या जिससे झगड़े का ख़तरा हो.”

 

उन्होंने कहा कि इसके अलावा “भाईचारा और सहिष्णुता भी थी जिसकी वजह से बाद में किसी क्षेत्र में अगर मुसलमान बहुमत में आ गए तो भी उन्होंने गोमांस खाने परहेज़ ही किया” और इसी वजह से अकबर बादशाह चूँकि सक्योलर था तो उसने धार्मिक सहिष्णुता को बनाए रखने के लिए गाय के ज़बह करने पर पाबंदी भी लगाई.

गाय

प्रोफ़ेसर असद की बातें उस वक़्त साफ़ हुईं जब हाफ़िज़ाबाद की तहसील पिंडी भट्टयाँ के एक घर में जाने का मौक़ा मिला.

गृहिणी शाज़िया तुफ़ैल जब दस्तरख़ान पर खाना परोस रहीं थीं तो मैंने पूछ लिया कि क्या आपने गाय का मांस कभी पकाया है, उस पर उनकी प्रतिक्रिया ऐसे थी जैसे कोई गुस्ताख़ी कर दी हो.

शाज़िया ने दोनों कानों को हाथ लगाते हुए कहा “ना ना हमारे घर कभी गाय का गोश्त नहीं आया. हमारे बुज़ुर्गों से रवायत है कि गाय का मांस कभी घर नहीं लाया गया और न ही इसे पसंद किया जाता है. यह परंपरा दशकों से चली आ रही है और यही कोशिश है कि अगली पीढ़ी भी इसका पालन करे.”

इस इलाक़े में शाज़िया तुफ़ैल ऐसी एकमात्र महिला नहीं जिनके यहाँ गाय का गोश्त इस्तेमाल नहीं किया जाता बल्कि कई ऐसे परिवार हैं जिन्होंने धार्मिक सहिष्णुता की अनमोल यादों को संभाल कर रखा हुआ है.

मोदीजी के राज में संवाद नहीं केवल बल प्रयोग: मेधा पाटकर

मध्य प्रदेश में बांध प्रभावितों के लिए मुआवज़े और पुनर्वास की मांग को लेकर अनशन कर रहीं सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को पुलिस ने अनशन स्थल से हटाकर ज़बरदस्ती अस्पताल में भर्ती करा दिया है.

मेधा पाटकर समेत 12 लोग सरदार सरोवर बांध के प्रभावितों की मांगों को लेकर धार ज़िले के चिखल्दा गांव में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठै थे.

अनशन के 12वें दिन पुलिस ने मेधा पाटकर समेत छह लोगों को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अनशन स्थल से ज़बरदस्ती हटा दिया.

नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया जिसमें कई लोग घायल हुए हैं

‘कील वाले डंडे’

आंदोलनकर्मी
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने बल प्रयोग किया

आंदोलन की कार्यकर्ता हिमशी सिंह उस वक़्त वहां मौजूद थीं. उनका कहना है कि चिखल्दा गांव में इस वक़्त ख़ौफ का माहौल है.

हिमशी सिंह का आरोप है कि पुलिस ने मेधा पाटकर को ले जाने के दौरान भारी बल प्रयोग किया जिसमें कई लोगों को गंभीर चोटें आई हैं.

उन्होंने कहा, ”पुलिस जिन डंडों का इस्तेमाल कर रही थी, उसमें कीलें लगी हुई थीं.”

गिरफ्तारी नहीं, इलाज: शिवराज

मेधा पाटकर

वहीं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मेधा पाटकर को गिरफ्तार नहीं किया गया है बल्कि अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

शिवराज ने ट्वीट कर कहा, ‘मैं संवेदनशील व्यक्ति हूं. चिकित्सकों की सलाह पर मेधा पाटकर जी व उनके साथियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है.’

उन्होंने आगे लिखा कि ‘मेधा पाटकर और उनके साथियों की स्थिति हाई कीटोन और शुगर की वजह से चिंतनीय थी. उनके स्वास्थ्य और दीर्घ जीवन के लिए हम प्रयासरत हैं’.

डूब क्षेत्र से 40 हज़ार लोग प्रभावित

शिवराज चौहान के ट्वीट

उधर अनशन स्थल से हटाए जाने से पहले मेधा पाटकर ने कहा, ”आज मध्य प्रदेश सरकार हमारे 12 दिनों से बैठे 12 साथियों को मात्र गिरफ्तार करके जवाब दे रही है. यह कोई अहिंसक आंदोलन का जवाब नहीं है. मोदी जी के राज में, शिवराज जी चौहान के राज में एक गहरा संवाद नहीं, जो हुआ उस पर जवाब नहीं. आंकड़ों का खेल, कानून का उल्लंघन और केवल बल प्रयोग.”

सरदार सरोवर बांध से 192 गांवों के 40 हज़ार परिवार प्रभावित होंगे. उनका पूरा इल़ाका डूब जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 31 जुलाई तक पूरी तरह पुनर्वास के बाद ही बांध की ऊंचाई बढ़ाई जाए.

लेकिन पुनर्वास के लिए जो जगह बनाई गई है, उसकी हालत भी रहने लायक नहीं है.

गाय के नाम पर गबन: हरियाणा गौसेवा आयोग के सदस्य पर गौशाला संघ के 13 लाख रुपए हड़पने का आरोप

हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने 2015 में गौसेवा आयोग का गठन किया। इसमें कुल 11 सदस्य हैं जिनमे योगेंद्र आर्य भी शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा गौसेवा कल्याण बोर्ड के एक सदस्य पर संस्था का प्रमुख रहने के दौरान 13 लाख रुपये के गबन का आरोप है। कोलकाता से निकलने वाले अंग्रेजी दैनिक द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार पूरे राज्य में गौशालाएं चलाने वाले बोर्ड के पूर्व प्रमुख योगेंद्र आर्य हरियाणा गौ सेवा आयोग के सदसय् हैं। साल 2012 में वो आर्य समाज द्वारा चलाए जाने वाले हरियाणा राज्य गौशाला संघ के प्रमुख थे। करीब एक महीने पहले हरियाणा के कुरुक्षेत्र में 35 गायें मर गई थीं। कहा गया कि ये गायें चारे, पानी और आश्रय के अभाव में मर गईं। गायों की मौत के बाद ही आर्य पर मुकदमा दर्ज किया गया।

योगेंद्र आर्य पर जनवरी 2012 से सितंबर 2012 के बीच गौशाला संघ के बैंक खाते से 11.68 रुपये निकालने का आरोप है। आर्य पर गौशाला के लिए चंदे के रूप में इकट्ठा हुए 1.12 लाख रुपये न जमा करने का भी आरोप है। गौशाला संघ पूरे हरियाणा में करीब 225 गौशालाएं चलाता है। योगेंद्र आर्य के खिलाफ मामला तब दर्ज हुआ जब गौशाला संघ के वर्तमान प्रमुख शमशेर सिंह आर्य ने इस बाबत शिकायत दर्ज करायी। अपनी शिकायत में शमशेर आर्य ने योगेंद्र आर्य की गौसेवा आयोग की सदस्यता समाप्त करने की भी मांग की है। गौसेवा आयोग का गठन राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किया है।

हरियाणा में साल 2015 में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार बनी। बीजेपी सरकार बनने के बाद सीएम खट्टर ने गौसेवा आयोग का गठन किया। इस आयोग में कुल 11 सदस्य हैं जिनमे योगेंद्र भी शामिल हैं। योगेंद्र ने खुद पर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए टेलीग्राफ से कहा कि उनके खिलाफ उनके दुश्मनों ने शिकायत की है।

हरियाणा में खट्टर सरकार ने गौवंश से जुड़ा बेहद कड़ा कानून बनाया है। गौवंश के किसी जानवर की हत्या पर 10 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। राज्य पशुपालन विभाग के निदेशक ने टेलीग्राफ से कहा कि मामले की रिपोर्ट राज्य सरकार के पास भेज दी गयी है। गौसेवा आयोग के चेयरमैन भानी राम मंगल ने अखबार से कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है लेकिन आयोग के सदस्य दोषी होंगे तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।

चरमपंथ के ख़िलाफ़ सेना का साथ क्यों दे रहे कश्मीरी?

पिछले दो महीनों से कश्मीर घाटी में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों को रोकने की कार्रवाइयों में खासा वृद्धि हुई है. खासकर उस दक्षिणी हिस्से में जिसे नई पीढ़ी के चरमपंथ का गढ़ माना जाता है.
जून-जुलाई 2017 के महीने में लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख अबू दुजाना और लश्कर के ही एक और शीर्ष कमांडर बशीर लश्करी समेत कश्मीर घाटी में लगभग 36 चरमपंथी मारे गए, इनमें हिज़बुल मुज़ाहिद्दीन के कई शीर्ष चरमपंथी भी शामिल थे. इस सूची में नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिश में मारे गए चरमपंथी शामिल नहीं हैं.

एक ओर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां चरमपंथ को बेअसर करने में मिली कामयाबी का जश्न मना रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ़ अलगाववादियों को यह पसंद नहीं आ रहा. जेल में बंद आसिया अंद्राबी के नेतृत्व वाले महिलाओं के कट्टरवादी संगठन दुख़्तरान-ए-मिल्लत ने मारे गए चरमपंथियों की संख्या में वृद्धि पर खुलकर अपनी चिंता व्यक्त की है.

दुख़्तरान-ए-मिल्लत की महासचिव नाहिदा नसरीन ने 22 जून को एक बयान में कहा, “मारे जा रहे चरमपंथियों की संख्या बढ़ गई है. हम आज़ादी के समर्थक और चरमपंथी गुटों से आग्रह करते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में मुजाहिदीनों की मौत के पीछे कमियों को तलाशें और साथ ही गोलीबारी के दौरान उन्हें बचाने की कोशिश में लगे युवाओं की पहचान करें.

पुलिस और सेना समेत अन्य सुरक्षाकर्मियों को चरमपंथियों की मौज़ूदगी की अधिक से अधिक सटीक सूचनाएं मिल रही हैं. जहां एक ओर यह उनके संबंधित ख़ुफ़िया विभागों की दक्षता को दिखाता है तो वहीं दूसरी तरफ़ एक कठोर सच को भी ज़ाहिर करता है कि अब पहले की तुलना में कश्मीर के लोग सुरक्षाबलों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं. दुख़्तरान-ए-मिल्लत का बयान यही इशारा करता है.

योगी आदित्यनाथ की सरकार में अपने ही क्यों हैं ख़फ़ा?

उत्तर प्रदेश सरकार स्वच्छ प्रशासन, कार्यकुशलता और जनता के हित में कार्य करने के जहां तमाम दावे कर रही है, वहीं उसकी पार्टी के ही ज़िम्मेदार नेता और मंत्री उस पर सवाल उठाकर सरकार की कार्यप्रणाली पर संदेह खड़े कर रहे हैं.

सरकार को बने अभी चार महीने ही हुए हैं, लेकिन पार्टी के कई नेताओं और विधायकों की तो छोड़िए एक विभाग के कैबिनेट मंत्री ही दूसरे विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी ज़ाहिर कर चुके हैं.

राज्य के आबकारी मंत्री जय प्रताप सिंह ने पिछले दिनों ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा को पत्र लिखकर उनके इलाक़े में बिजली व्यवस्था की अनियमतितताओं की ओर ध्यान दिलाया तो ये पत्र राजनीतिक जगत में सुर्खियों में आ गया.

बिजली का मुद्दा

जय प्रताप सिंह कहते हैं, “दरअसल, हमें क़रीब डेढ़ दशक से जर्जर व्यवस्था हर क्षेत्र में मिली है. ज़ाहिर है बिजली भी उनमें से एक है. हमारे इलाक़े के कुछ विधायकों ने शिकायत की बिजली की स्थिति ख़राब है. उन लोगों ने इस बारे में मुख्यमंत्री से भी बात की थी. लेकिन जब बात नहीं बनी तो हमने ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखा.”

जय प्रताप सिंह ने अपने पत्र में साफ़-साफ़ लिखा कि मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री के निर्देशों के बावजूद उनके इलाक़े में लोगों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है और यदि यही स्थिति बनी रही तो ये पार्टी और सरकार के लिए ठीक नहीं होगा.

दरअसल, ये अकेला मामला नहीं बल्कि इस तरह के कई मौक़े आए जब पार्टी के जनप्रतिनिधियों ने अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाई. हमीरपुर के एक विधायक अशोक चंदेल तो विधान सभा में कहने लगे कि छोटे-मोटे प्रशासनिक अधिकारी तक उनकी बात नहीं सुनते हैं.

आम आदमी तक…

वहीं बांदा ज़िले के एक विधायक राजकरन पिछले दिनों अवैध खनन के ख़िलाफ़ धरने पर बैठ गए. उनका कहना था कि प्रशासन उनकी बातें नहीं सुनता है और वो पार्टी में या मंत्रियों से शिकायत करते हैं तो उनकी सुनी नहीं जाती.

यही नहीं, पार्टी के कई सांसद भी इस बारे में अक़्सर शिकायत करते रहते हैं.

राज्य सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा इस बात को तो स्वीकार करते हैं कि कुछ जगह असंतोष हो सकता है, लेकिन उनका कहना है कि ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई होती ज़रूर है.

सरकार की छवि

श्रीकांत शर्मा कहते हैं, “पार्टी में लोकतंत्र है और विधायकों से लेकर आम आदमी तक अपनी बात कह सकता है. जब तक लोग समस्याएं बताएंगे नहीं तो सरकार को पता कैसे चलेगा. रही बात उसके बाद की तो सरकार इन्हें दूर करने की पूरी कोशिश करती है. हमें ये भी पता चला है कि प्रशासन में बैठे कुछ लोगों की आदत ख़राब हो चुकी है. उन लोगों को भी चेतावनी दी गई है कि सुधर जाएं नहीं तो कार्रवाई होगी.”

ऐसे ढेरों उदाहरण हैं जब राज्य के बीजेपी नेताओं ने सीधे तौर पर सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी ज़ाहिर की है.

जानकारों का कहना है कि ऐसा न सिर्फ़ अनुभवहीनता के कारण हो रहा है बल्कि इसलिए भी कि सरकार में शक्ति के कई केंद्र हैं.

जनता का पैसा बर्बाद करने की मूर्ख नीति

जनता का पैसा बर्बाद करने वाली 'मूर्ख' नीति की घंटी बजाओ

जनता का पैसा बर्बाद करने वाली 'मूर्ख' नीति की घंटी बजाओ

Posted by ABP News on Wednesday, August 2, 2017

IRCTC से तत्काल टिकट बुक करने पर भी अब मिलेगी ‘पे ऑन डिलिवरी’ की सुविधा

यह सर्विस उन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी है जो टिकट तो ऑनलाइन बुक करना चाहते हैं लेकिन टिकट की पेमेंट ऑनलाइन नहीं करना चाहते, या फिर ऑनलाइन टिकट बुक करने के बाद पेमेंट कैश में करना चाहते हैं।

तत्काल ट्रेन टिकट बुक कराने वालों को अब आईआरसीटीसी ने एक और सर्विस दे दी है। IRCTC से बुक किए गए टिकट पर ‘पे ऑन डिलीवरी’ की सुविधा देने वाली एंड्युरिल टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने बुधवार (3 अगस्त) को ऐलान किया कि अब यूजर तत्काल टिकट बुक करने के दौरान भी ‘बुक नाउ पे लेटर’ का ऑप्शन चुन सकते हैं। अब आईआरसीटीसी से तत्काल रेल टिकट बुक करने के बाद कैश और डेबिट या क्रेडिट कार्ड से बाद में भुगतान कर सकेंगे। पे ऑन डिलीवरी की सर्विस अभी तक जनरल रिजर्वेशन के लिए उपलब्ध थी। अब तत्काल बुकिंग के लिए इस सेवा को उपलब्ध करा दिया गया है। यह सर्विस उन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी है जो टिकट तो ऑनलाइन बुक करना चाहते हैं लेकिन टिकट की पेमेंट ऑनलाइन नहीं करना चाहते या फिर ऑनलाइन टिकट बुक करने के बाद पेमेंट कैश में करना चाहते हैं।

ऐसे करता है तत्काल टिकट के लिए ‘पे ऑन डिलीवरी’ सिस्टम काम
इस सर्विस का फायदा उठाने के लिए यूजर को सबसे पहले irctc.payondelivery.co.in पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा। रजिस्ट्रेशन करने के दौरान यूजर को अपने आधार कार्ड या पैन कार्ड की जानकारी देनी होगी।
इसके बाद जब आईआरसीटीसी पोर्टल पर तत्काल टिकट की बुकिंग करेंगे तो बुकिंग के दौरान यूजर को एंड्युरिल टेक्नोलॉजी के ‘pay-on-delivery’ ऑप्शन को चुनना होगा।

टिकट बुक होने के साथ ही टिकट को एसएमएस/ईमेल द्वारा डिजीटली डिलीवर कर दिया जाता है। इसमें सबसे खास बात यह है कि टिकट बुकिंग के 24 घंटे के अंदर-अंदर भुगतान करना होता है।
ग्राहक ऑनलाइन भुगतान भी कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें बुकिंग के समय एक पेमेंट लिंक भेजा जाता है।

पीएम मोदी को तोहफे में मिली विदेशी घड़ी, ढाई हजार का पैन, जानिए 2017 में मिले कौन-से गिफ्ट

अधिकारियों का कहना है कि ऐसा बहुत की कम होता है कि मंत्री और अधिकारी उपहार को अपने घर ले जाए। तोशखाने के रिकॉर्ड के मुताबिक पीएम मोदी को पहले दस हजार कीमत के दो डिनर सेट मिले थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैन्स और प्रशंसकों का कहना है कि वह कभी न थकने वाले इंसान हैं और बिना समय देंखे लगातार अपने काम में जुटे रहते हैं। बावजूद इसके इस साल पीएम मोदी को विदेश दौरों के दौरान कई गिफ्ट मिले हैं। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक प्रधानमंत्री को ब्रिटिश कंपनी सेकोंडा की घड़ी मिली है। मंत्रियों और अधिकारियों को विदेश मंत्रालय के आधिकारिक भंडार तोशखाने में सारे उपहार जमा करने होते हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक तोशखाने में तैनात के अधिकारी ने बताया कि प्राप्तकर्ता 5 हजार से कम का गिफ्ट रख सकता है। 5000 से ऊपर का गिफ्ट रखने पर उसे अतिरिक्त पैसे चुकाने होते हैं।

पीएम मोदी को Sekonda ‘House of Commons’ हाथ घड़ी गिफ्ट में मिली है, जिसकी कीमत साढे तीन हजार रुपए है। घड़ी के अलावा पीएम को सजावटी चीनी मिट्टी के बरतन भी मिले हैं, इसकी कीमत एक हजार रुपए है। जनवरी से मार्च के बीच मोदी को मिले गिफ्ट में संयुक्त अरब अमीरात के शाही आवास का एक मॉडल, नक्काशी की हुई एक सजावटी मूर्ति और मोंट ब्लांक बॉलपेन पेन शामिल है। पेन की कीमत 2500 रुपए है और वह तोशखाने में रखा है। इसके अलावा रिपॉजिटरी में जमा अमीरती नेशनल हाउस के मॉडल का मूल्य 4500 रुपये है और आर्गिलिट नक्काशी वाली मूर्ति की कीमत 2000 रुपये है। तोशखाने में 83 नवीनतम प्रविष्टियों में ये छह वस्तुएं भी शामिल हैं। बता दें कि जून महीने में नीदरलैंड यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वहां के पीएम ने साइकिल गिफ्ट की थी।

अधिकारियों का कहना है कि ऐसा बहुत की कम होता है कि मंत्री और अधिकारी उपहार को अपने घर ले जाए। तोशखाने के रिकॉर्ड के मुताबिक पीएम मोदी को पहले दस हजार कीमत के दो डिनर सेट मिले थे और पंद्रह हजार रुपए कीमत की कालीन मिली थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उनके कार्यकाल के दस साल में 101 गिफ्ट मिले थे। मनमोहन सिंह को अर्द्ध कीमती पत्थरों से सजा हुआ चांदी का हाथी मिला था। इसके अलावा 10 पेंटिंग, बोस कंपनी का साउंट सिस्टम और एक गोल्ड प्लेटेड लेडिज घड़ी मिली थी। इन सभी गिफ्ट्स में सिर्फ 7 चीजें ऐसी थी जिनकी कीमत 5 हजार से ज्यादा थी।

चीन ने अजीत डोभाल से कहा- बिना किसी शर्त के डोकलाम से अपनी सेना हटाये भारत

चीन ने बुधवार को कहा कि उसने भारत को अपने इस दृढ़ रूख की सूचना दे दी है कि मौजूदा गतिरोध खत्म करने के लिए उसे बिना किसी शर्त के सिक्किम क्षेत्र के डोकलाम से अपनी सेना तत्काल हटा कर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय ने पीटीआई को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के स्टेट काउंसिलर यांग जेइची के बीच 28 जुलाई को हुई मुलाकात का पहली बार ब्योरा देते हुए बताया कि दोनों अधिकारियों ने ब्रिक्स सहयोग, द्विपक्षीय रिश्तों और प्रासंगिक प्रमुख समस्याओं पर चर्चा की थी। डोभाल ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साझे मंच ब्रिक्स में हिस्सा लेने के लिए पिछले माह बीजिंग में थे।

डोभाल और यांग दोनों भारत और चीन के बीच सीमा वार्ता के लिए विशेष प्रतिनिधि भी हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने डोकलाम से संबंधित गतिरोध पर दोनों देशों के बीच चर्चा के बारे में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि यांग ने डोभाल से उनके आग्रह पर और तौर-तरीके के अनुरूप द्विपक्षीय मुलाकात की। डोकलाम पर गतिरोध तब शुरू हुआ जब चीन ने उस इलाके में सड़क बनाना शुरू किया।

चीनी विदेश मंत्रालय ने इंगित किया कि डोभाल और यांग के बीच वार्ता के दौरान कोई प्रमुख प्रगति नहीं हुई। मंत्रालय ने कहा, ‘‘यांग चेइची ने चीन-भारत सीमा के सिक्किम खंड पर चीन की सरजमीन में भारतीय सीमा बल के अतिक्रमण पर चीन के कठोर रूख और सुस्पष्ट अनिवार्यता जताई।’’ इस मुद्दे पर भारत का रूख पिछले माह विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने स्पष्ट किया था। उन्होंने सीमा पर गतिरोध के शांतिपूर्ण समाधान की हिमायत करते हुए कहा था कि इसपर किसी वार्ता के शुरू करने के लिए पहले दोनों पक्षों को अपनी-अपनी सेनाए हटानी चाहिए।

भारत ने चीन सरकार को यह भी सूचित किया है कि उस क्षेत्र में सड़क निर्माण से यथास्थिति में उल्लेखनीय बदलाव आएगा जिसके गंभीर सुरक्षा निहितार्थ होंगे। चीनी विदेश मंत्रालय ने बताया कि डोभाल के साथ वार्ता में यांग ने भारत से आग्रह किया कि वह चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को संचालित करने वाले बुनियादी नियम-कायदों का सम्मान करे और बिना कोई शर्त जोड़े अतिक्रमणकारी भारतीय सीमा बलों को भारतीय सरजमीन में वापस बुला ले और ठोस कार्रवाइयों से मौजूदा प्रकरण हल करे।

नीतीश कुमार से अलग होकर नई पार्टी बनाएंगे शरद यादव, नये कलेवर में सामने आएगा महागठबंधन

वर्मा ने दावा किया कि शरद जी ने जोर देकर कहा है कि वे धर्मनिरपेक्ष शक्ति वाले महागठबंधन में बने रहेंगे।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव के बीच ”मतभेद” की अटकलों के बीच समाजवादी नेता और पूर्व विधान पार्षद विजय वर्मा ने शरद के महागठबंधन में बने रहने के लिए एक नई पार्टी बनाने के संकेत दिए हैं। शरद यादव के विश्वस्त माने जाने वाले और दो बार बिहार विधान परिषद सदस्य रहे विजय वर्मा ने शरद के महागठबंधन में बने रहने के लिए एक नई पार्टी बनाने के संकेत दिए हैं, पर जदयू के प्रधान महासचिव के सी त्यागी ने इसे अफवाह बताया है। जदयू के प्रदेश प्रवक्ता अजय आलोक ने शरद की ”नाराजगी” को आज खारिज कर दिया। वर्मा ने भाषा को मधेपुरा से फोन पर कहा कि शरद जी पुराने साथियों के संपर्क में हैं और राजनीतिक हालात पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए दल का गठन एक विकल्प है और उस पर संजीदगी से विचार किया जा रहा है। वर्मा ने दावा किया कि शरद जी ने जोर देकर कहा है कि वे धर्मनिरपेक्ष शक्ति वाले महागठबंधन में बने रहेंगे और इसी को जेहन रखते हुए वे कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और माकपा नेता सीताराम येचुरी से मिले थे।उन्होंने कहा कि शरद जी ने राजग सरकार में मंत्री के तौर पर शामिल होने से इंकार किया है। यह पूछे जाने पर कि अन्य किन किन लोगों से शरद यादव की बातचीत हुई है वर्मा ने नाम का खुलासा करने से इंकार करते हुए कहा कि उनका सोशल नेटवर्क बहुत बडा है।

यूपी के आगरा में सिपाही को सड़क पर दो बाइक सवारों ने गोली मारी

आगरा: यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान कानून व्यवस्था पर सवाल उठते रहे लेकिन अब यूपी में बीजेपी की सरकार है. इसके बावजूद अपराधियों के हौसले बुलंद हैं. यानी यूपी में क्राइम थमने का नाम नहीं ले रहा है. आगरा में एक सिपाही को बदमाशों ने सिर्फ इसलिए गोली मार दी क्योंकि उसने बाइक को रोकने के लिए हाथ दिया. बताया जा रहा है कि जैसे ही सिपाही ने बाइक से जा रहे दो युवकों को बाइक रोकने का इशारा किया उन्होंने गोली दाग दी.

बता दें कि जब से राज्य में बीजेपी की सरकार आई है और सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ बने है तब से यह दावा किया जा रहा है कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति  में सुधार हो रहा है. लेकिन राज्य में आए दिन अपराध को बेखौफ अंजाम दिया जा रहा है.

वहीं, उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बालोनी थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह खेत में काम कर रही मां-बेटी की बदमाशों ने गोलीमार कर हत्या कर दी. पुलिस तीन नामजद सहित छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच कर रही है. पुलिस के मुताबिक, बालेनी थाना क्षेत्रांतर्गत ग्राम पूरा महादेव निवासी बबिता (45) अपनी मां कृष्णा (65) के साथ शुक्रवार सबुह करीब सवा सात बजे गांव के बाहर स्थित ट्यूबवेल पर चारा काट रही थी. तभी वहां अज्ञात बदमाशों ने हमला बोल दिया और दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी.

जंगल का ‘राजा’ बनने की वैकेंसी, इतने ऑफिसरों की होगी भर्ती

नई दिल्ली: राजस्थान सरकार करीब 20 साल बाद रेंजर के 70 और पांच साल बाद असिस्टेंट कंजर्वेटर आफ फारेस्ट (एसीएफ) के 70 पदों पर भर्ती करने जा रही है. सरकार की ओर से तीन दिन पहले 26 जुलाई को ही प्रस्ताव बनाकर राजस्थान पब्लिक सर्विस कमिशन (आरपीएससी) को भेजा गया है. वन विभाग के इन दोनों सेवाओं में लंबे समय से काफी पद खाली चल रहे हैं, जिसके कारण राज्य में वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा दांव पर लगी हुई है. खास यह है कि वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिहाज से रेंजर एवं एसीएफ को रीढ़ का हड्डी माना जाता है.

राजस्थान में रेंजर ग्रेड प्रथम के 200 पद खाली हैं. हालांकि 258 पद  स्वीकृत हैं. राज्य में फिलहाल 58 रेंजर ग्रेड प्रथम हैं. इनमें से भी आधे से अधिक को प्रमोट कर एसीएफ बनाने की तैयारी हैं.

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राजस्थान में एसीएफ के 156 पद खाली पड़े हैं. इनमें से 268 पद  स्वीकृत हुए हैं. फिलहाल 112 पद भरे हुए हैं. इनमें से भी आधे का जल्द उच्च पदों पर प्रमोशन होने की संभावना है.

बीसीसीआई ने विराट कोहली को दिया फरमान-नौकरी छोड़ो, वरना भुगतना होगा अंजाम

भारतीय कप्तान विराट कोहली को बीसीसीआई ने एक फरमान जारी किया है। एचटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक बोर्ड ने दुनिया में सबसे ज्यादा कमाई करने वाले खिलाड़ी विराट कोहली से अॉयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) में मैनेजर की नौकरी छोड़ने को कहा है। विराट ने कई स्थानीय टूर्नामेंट्स में ओएनजीसी का प्रतिनिधित्व किया है।  भारतीय टीम फिलहाल श्रीलंका में है और पहला टेस्ट मैच खेल रही है। भारतीय क्रिकेट में कॉन्फ्लिक्ट अॉफ इंट्रस्ट का मुद्दा बहुत पुराना है और सुनील गावस्कर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ इसका शिकार बन चुके हैं। दिल्ली के खिलाड़ियों को ओएनजीसी में मानद पद दिए गए थे। गौतम गंभीर, वीरेंद्र सहवाग, इशांत शर्मा भी इसमें शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासक समिति (सीओए) ने बोर्ड को यह साफ कर दिया है कि कोई भी क्रिकेटर किसी भी सरकारी या सार्वजनिक कंपनी में किसी पद पर नहीं हो सकता। सीओए का कहना है कि वह कॉन्फ्लिक्ट अॉफ इंट्रस्ट से बचना चाहती है। बीसीसीआई ने भारतीय कप्तान के अलावा अजिंक्य रहाणे, चेतेश्वर पुजारा और करीब 100 क्रिकेटर्स को सख्त चेतावनी दी है, जो अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में किसी पद पर शुमार हैं। बताया जा रहा है कि नई दिल्ली में होने वाली अगली एसजीएम में यही बैठक का सबसे विवादित मुद्दा होगा।

लालू यादव का दावा- शरद यादव ने फोन कर मुझे कहा- मैं आपके साथ हूं

जनता दल युनाइटेड (जदयू) के सीनियर नेता शरद यादव की चुप्पी सबको खटक रही है। नीतीश कुमार द्वारा गठबंधन को तोड़कर भाजपा के साथ मिल जाने के बाद शरद यादव ने मीडिया से कोई बात नहीं की है। ऐसे में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू यादव ने शरद के बारे में चौंकाने वाला बयान दिया। एनडीटीवी से बात करते हुए लालू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार द्वारा विश्वास मत ( एनडीए 131-108 से जीत गई) हासिल करने के बाद शरद ने उनको फोन किया और कहा कि वह लालू के साथ हैं। पिछले कुछ वक्त से नीतीश कुमार विपक्ष की 18 पार्टियों से बातचीत नहीं कर रहे थे। ऐसे में जदयू की तरफ से शरद यह काम देख रहे थे। उन पार्टियों के साथ मीटिंग्स में शरद यादव लगातार कहते रहे कि जदयू की भी पहली लड़ाई बीजेपी और नरेंद्र मोदी से ही है।

बिहार का महागठबंधन (नीतीश और लालू की पार्टी के बीच) टूटने के बाद शरद यादव की चुप्पी के लोग अपने-अपने मायने लगा रहे हैं। शरद यादव पिछले कुछ महीनों से संसद में भी चुपचाप दिखे। मीटिंग और किसी कार्यक्रम में नेताओं और लोगों से मिलते वक्त वह ज्यादा बातचीत नहीं कर रहे। जिस जिन नीतीश कुमार एनडीए में वापस आए उस दिन शरद यादव एक कार्यक्रम में थे। लेकिन वह वहां ज्यादा देर रुके नहीं।

…तो कश्मीर में तिरंगा पकड़ने वाला कोई नहीं मिलेगा: महबूबा मुफ्ती

जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार (28 जुलाई) को चेतावनी दी कि अगर जम्मू कश्मीर के लोगों को मिले विशेषाधिकारों में किसी तरह का बदलाव किया गया तो राज्य में तिरंगा को थामने वाला कोई नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि एक तरफ ””हम संविधान के दायरे में कश्मीर मुद्दे का समाधान करने की बात करते हैं और दूसरी तरफ हम इसपर हमला करते हैं।” महबूबा ने एक कार्यक्रम में कहा, ””कौन यह कर रहा है। क्यों वे ऐसा कर रहे हैं (अनुच्छेद 35 ए को चुनौती) मुझे आपको बताने दें कि मेरी पार्टी और अन्य पार्टियां जो तमाम जोखिमों के बावजूद जम्मू कश्मीर में राष्ट्रीय ध्वज हाथों में रखती हैं, मुझे यह कहने में तनिक भी संदेह नहीं है कि अगर इसमें कोई बदलाव किया गया तो कोई भी इसे (राष्ट्रीय ध्वज) को थामने वाला नहीं होगा।”

उन्होंने कहा, ””मुझे साफ तौर पर कहने दें। यह सब करके (अनुच्छेद 35 ए) को चुनौती देकर, आप अलगाववादियों को निशाना नहीं बना रहे हैं। उनका (अलगाववादियों का) एजेंडा अलग है और यह बिल्कुल अलगाववादी है।” उन्होंने कहा, ”बल्कि, आप उन शक्तियों को कमजोर कर रहे हैं जो भारतीय हैं और भारत पर विश्वास करते हैं और चुनावों में हिस्सा लेते हैं और जो जम्मू कश्मीर में सम्मान के साथ जीने के लिये लड़ते हैं। यह समस्याओं में से एक है।””

वर्ष 2014 में एक एनजीओ ने रिट याचिका दायर करके अनुच्छेद 35 ए को निरस्त करने की मांग की थी। मामला उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित है। महबूबा ने कहा कि कश्मीर भारत की परिकल्पना है। उन्होंने कहा,””बुनियादी सवाल है कि भारत का विचार कश्मीर के विचार को कितना समायोजित करने को तैयार है। यह बुनियादी निचोड़ है।””

उन्होंने याद किया कि कैसे विभाजन के दौरान मुस्लिम बहुल राज्य होने के बावजूद कश्मीर ने दो राष्ट्रों के सिद्धांत और धर्म के आधार पर विभाजनकारी बंटवारे का उल्लंघन किया और भारत के साथ रहा। उन्होंने कहा, ”भारत के संविधान में जम्मू कश्मीर के लिये विशेष प्रावधान हैं। दुर्भाग्य से समय बीतने के साथ कहीं कुछ हुआ कि दोनों पक्षों ने बेईमानी शुरू कर दी।” उन्होंने केंद्र और राज्य की ओर इशारा करते हुए कहा कि दोनों पक्ष हो सकता है अधिक लालची हो गये हों और पिछले 70 वर्षों में राज्य को भुगतना पड़ा।

उन्होंने कहा, ”समस्या का निवारण करने की बजाय हमने सरकार को बर्खास्त करने या साजिश, राजद्रोह के आरोप लगाने जैसे प्रशासनिक कदम उठाए।” उन्होंने कहा, ”इन प्रशासनिक कदमों ने कश्मीर के विचार का समाधान करने में हमारी मदद नहीं की है।”

नीतीश, सुशील और तेजस्वी: ‘दाग’ सब पर हैं

बिहार में चल रही राजनीतिक उठा-पटक के बीच आरोप-प्रत्यारोपों की झड़ी लगी हुई है.

नीतीश के इस्तीफ़े के बाद आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने नीतीश कुमार पर हत्या के मामले में अभियुक्त होने का आरोप लगाया.

जेडीयू खेमे और भाजपा ने तेजस्वी यादव पर आर्थिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए.

पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर बिहार विधानसभा में लंबे समय तक नेता प्रतिपक्ष रहे और मौजूदा उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सबसे ज़्यादा मुखर दिखे.

आइए देखते हैं कि नीतीश कुमार, सुशील कुमार मोदी और तेजस्वी यादव के चुनावी हलफ़नामे खुद उन पर चल रहे मामलों के बारे में क्या कहते हैं.

बिहार: नीतीश कुमार ने जीता विश्वास मत

बिहार में किसके पास कितना समर्थन

नीतीश कुमारइमेज कॉपीरइटCEOBIHAR.NIC.IN

नीतीश कुमार

2012 के बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए नीतीश ने जो हलफ़नामा दायर किया था, उसमें बाढ़ के पंडारक पुलिस थान में दर्ज एक मामले का ज़िक्र खुद उन्होंने किया है.

1991 के एक मर्डर केस के सिलसिले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 147, 148, 149 (बलवा), 302 (हत्या) और 307 (हत्या की कोशिश) के तहत मामला दर्ज है.

साल 2009 में बाढ़ की एक अदालत ने इस मामले में संज्ञान लेने का आदेश दिया था. निचली अदालत के इस आदेश के ख़िलाफ़ नीतीश कुमार ने पटना हाई कोर्ट में अपील दायर कर रखी है.

मामले पर सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट ने 8 सितंबर, 2009 के फैसले में बाढ़ कोर्ट में आगे की सुनवाई पर रोक लगा दी थी. मामला पटना हाई कोर्ट में अभी लंबित है.

 

सुशील कुमार मोदी

सुशील कुमार मोदी

नीतीश कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री पद पर तेजस्वी यादव की जगह लेने वाले सुशील कुमार मोदी पर भी कुछ मामले दर्ज हैं.

साल 2012 के बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए सुशील कुमार मोदी की तरफ से दायर किए गए हलफ़नामे में भी उन पर दर्ज मामलों का ज़िक्र है.

हलफ़नामे के मुताबिक भागलपुर ज़िले के नौगछिया कोर्ट में उन पर आईपीसी की 500, 501, 502 (मानहानि), 504 (शांति भंग) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत केस दर्ज है.

सुशील कुमार मोदी के ख़िलाफ़ ये मामला आरजेडी नेता डॉक्टर आरके राणा ने दर्ज कराया था. राणा को बाद में चारा घोटाले के एक मामले में दोषी करार दिया गया था.

1999 के इस मामले को ख़त्म कराने के लिए पटना हाई कोर्ट में दायर की गई अपील पर सुशील कुमार मोदी को स्टे ऑर्डर मिला हुआ है. मामाला पटना हाई कोर्ट में अभी भी लंबित है.

 

तेजस्वी यादव

तेजस्वी यादव

तेजस्वी यादव 2015 में पहली बार विधायक बने.

चुनाव आयोग के समक्ष दायर किए गए उनके ही हलफ़नामे के मुताबिक उन पर पटना के कोतलावी थाने में आईपीसी की धारा 147, 149 (दंगा), 341 (गलत तरीके से किसी को रोकना), 323 (मार-पीट करने), 332 (सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी में बाधा डालना), 431 (सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना), 504 (शांति भंग), 506 (धमकाने), 353 (सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी में बलपूर्वक बाधा डालना) और 114 (अपराध के लिए उकसाना) के तहत मामले दर्ज हैं.

7 जुलाई को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने बताया कि आईआरसीटी के एक मामले में तेजस्वी यादव के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 120B (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी और बेईमानी से प्रॉपर्टी हड़पना) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

लिंगायतों को हिन्दू धर्म से अलग कौन करना चाहता है?

कर्नाटक के सीमावर्ती ज़िले बीदर में पिछले हफ़्ते बड़ी तादाद में लोगों की भीड़ जुटी थी. बीदर एक तरफ़ महाराष्ट्र से लगा हुआ है तो दूसरी तरफ तेलंगाना से.

कहा जा रहा है कि इस जनसभा में 75,000 लोग आए थे और वे अपने समुदाय के लिए अलग धार्मिक पहचान की मांग लेकर आए थे.

लिंगायत समाज को कर्नाटक की अगड़ी जातियों में गिना जाता है. कर्नाटक की आबादी का 18 फीसदी लिंगायत हैं. पास के राज्यों जैसे महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी लिंगायतों की अच्छी ख़ासी आबादी है.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी लिंगायतों की मांग का खुलकर समर्थन किया है.

 

लिंगायतों की बीदर रैली

अलग धर्म की मान्यता

इतना ही नहीं सिद्धारमैया सरकार के पांच मंत्री अब इस मसले पर स्वामी जी (लिंगायतों का पुरोहित वर्ग) की सलाह लेने जा रहे हैं और इसके बाद वे मुख्यमंत्री को एक रिपोर्ट भी पेश करेंगे.

इसके पीछे विचार ये है कि लिंगायतों को अलग धर्म की मान्यता देने के लिए राज्य सरकार केंद्र सरकार को लिखेगी.

10 महीने बाद राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाला है. ये साफ़ है कि कांग्रेस मुख्यमंत्री पद के बीजेपी उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा के जनाधार को कमज़ोर करने के मक़सद ये सब कर रही है

लिंगायतों की बीदर रैली

जाति व्यवस्था के ख़िलाफ़

सवाल ये उठता है कि लिंगायत कौन होते हैं और ऐसी क्या बात है जो जिसकी वजह से इस समुदाय की राजनीतिक तौर पर इतनी अहमियत है.

  • बारहवीं सदी में समाज सुधारक बासवन्ना (उन्हें भगवान बासवेश्वरा भी कहा जाता है) ने हिंदू जाति व्यवस्था में दमन के ख़िलाफ़ आंदोलन छेड़ा. उन्होंने वेदों को ख़ारिज किया और वे मूर्तिपूजा के ख़िलाफ़ थे.
  • लिंगायत हिंदुओं के भगवान शिव की पूजा नहीं करते लेकिन अपने शरीर पर इष्टलिंग धारण करते हैं. ये अंडे के आकार की गेंदनुमा आकृति होती है जिसे वे धागे से अपने शरीर पर बांधते हैं. लिंगायत इस इष्टलिंग को आंतरिक चेतना का प्रतीक मानते हैं.
सिद्धारमैया, राहुल गांधीKIRAN/AFP/GETTY IMAGES
Image captionराज्य में येदियुरप्पा के जनाधार को तोड़ने के लिए कांग्रेस को एक मौका मिल गया है
  • आम मान्यता ये है कि वीरशैव और लिंगायत एक ही लोग होते हैं. लेकिन लिंगायत लोग ऐसा नहीं मानते. उनका मानना है कि वीरशैव लोगों का अस्तित्व समाज सुधारक बासवन्ना के उदय से भी पहले से था. वीरशैव भगवान शिव की पूजा करते हैं.
  • कुछ लोगों का कहना है कि लिंगायत भगवान शिव की पूजा नहीं करते लेकिन भीमन्ना खांद्रे जैसे लोग ज़ोर देकर कहते हैं, “ये कुछ ऐसा ही जैसे इंडिया भारत है और भारत इंडिया है. वीरशैव और लिंगायतों में कोई अंतर नहीं है.” भीमन्ना ऑल इंडिया वीरशैव महासभा के अध्यक्ष पद पर 10 साल से भी ज़्यादा अर्से तक रहे हैं.
डॉक्टर एमएम कलबुर्गी
Image captionडॉक्टर एमएम कलबुर्गी को 30 अगस्त, 2015 को उनके घर के बाहर गोली मार दी गई
  • इस विरोधाभास की वजहें भी हैं. बासवन्ना ने जो अपने प्रवचनों के सहारे जो समाजिक मूल्य दिए, अब वे बदल गए हैं. हिंदू धर्म की जिस जाति व्यवस्था का विरोध किया गया था, वो लिंगायत समाज में पैदा हो गया. मरहूम डॉक्टर एमएम कलबुर्गी लिंगायत थे और उन्होंने समाज में जाति व्यवस्था का विरोध करने के लिए पुरजोर अभियान चलाया था.
  • बासवन्ना का अनुयायी बनने के लिए जिन लोगों ने कन्वर्जन किया, वे बनजिगा लिंगायत कहे गए. वे पहले बनजिगा कहे जाते थे और ज़्यादातर कारोबार करते थे. लिंगायत समाज अंतरर्जातीय विवाहों को मान्यता नहीं देता, हालांकि बासवन्ना ने ठीक इसके उलट बात कही थी. लिंगायत समाज में स्वामी जी (पुरोहित वर्ग) की स्थिति वैसी ही हो गई जैसी बासवन्ना के समय ब्राह्मणों की थी.
येदियुरप्पाIMAGES
Image captionयेदियुरप्पा को बीजेपी ने आगामी विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है
  • सामाजिक रूप से लिंगायत उत्तरी कर्नाटक की प्रभावशाली जातियों में गिनी जाती है. राज्य के दक्षिणी हिस्से में भी लिंगायत लोग रहते हैं. सत्तर के दशक तक लिंगायत दूसरी खेतीहर जाति वोक्कालिगा लोगों के साथ सत्ता में बंटवारा करते रहे थे. वोक्कालिगा दक्षिणी कर्नाटक की एक प्रभावशाली जाति है.
  • देवराज उर्स ने लिंगायत और वोक्कालिगा लोगों के राजनीतिक वर्चस्व को तोड़ दिया. अन्य पिछड़ी जातियों, अल्पसंख्यकों और दलितों को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर देवराज उर्स 1972 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने.
इंदिरा गांधी, देवराज उर्स
Image captionइंदिरा गांधी के साथ देवराज उर्स
  • अस्सी के दशक की शुरुआत में लिंगायतों ने रामकृष्ण हेगड़े पर भरोसा जताया. जब लोगों को लगा कि जनता दल राज्य को स्थायी सरकार देने में नाकाम हो रही है तो लिंगायतों ने अपनी राजनीतिक वफादारी वीरेंद्र पाटिल की तरफ़ कर ली. पाटिल 1989 में कांग्रेस को सत्ता में लेकर आए. लेकिन वीरेंद्र पाटिल को राजीव गांधी ने एयरपोर्ट पर ही मुख्यमंत्री पद से हटा दिया और इसके बाद लिंगायतों ने कांग्रेस से मुंह मोड़ लिया. रामकृष्ण हेगड़े लिंगायतों के एक बार फिर से चेहते नेता बन गए.
  • हेगड़े से लिंगायतों का लगाव तब भी बना रहा जब वे जनता दल से अलग होकर जनता दल यूनाइटेड में आ गए. हेगड़े की वजह से ही लोकसभा चुनावों में लिंगायतों के वोट भारतीय जनता पार्टी को मिले और केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी.
रामकृष्ण हेगड़े
Image captionरामकृष्ण हेगड़े वाजपेयी सरकार में मंत्री भी रहे थे
  • रामकृष्ण हेगड़े के निधन के बाद लिंगायतों ने बीएस येदियुरप्पा को अपना नेता चुना और 2008 में वे सत्ता में आए. जब येदियुरप्पा को कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद से हटाया गया तो लिंगायतों ने 2013 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी की हार से अपना बदला लिया.
  • आगामी विधानसभा चुनावों में येदियुरप्पा को एक बार फिर से मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करने की यही वजह है कि लिंगायत समाज में उनका मजबूत जनाधार है. लेकिन लिंगायतों के लिए अलग धार्मिक पहचान की मांग उठने से राज्य में येदियुरप्पा के जनाधार को तोड़ने के लिए कांग्रेस को एक मौक़ा मिल गया है.

अजीत डोभाल के दौरे को क्यों अहमियत नहीं दे रहा है चीन?

ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक इस हफ्ते चीन में होने जा रही है.

इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भारत की नुमाइंदगी करने वाले हैं.

माना जा रहा है कि 27 और 28 जुलाई को होनी जा रही इस कॉन्फ्रेंस के दौरान डोभाल अपने चीनी समकक्ष से भी मिल सकते हैं.

27 जून को भूटान सीमा पर डोकलाम में चीन ने भारतीय सेना पर सड़क निर्माण में बाधा का आरोप लगाया था.

चीन ने दावा किया था कि सड़क निर्माण का काम उसके अपने इलाके में हो रहा था. भारत ने डोकलाम क्षेत्र में सड़क निर्माण के बहाने चीन के दखल का विरोध किया था.

इस बीच, चीन के सरकारी अख़बार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने डोभाल की प्रस्तावित चीन यात्रा पर संपादकीय लिखा है.

‘चीनी सेना को हिलाना पहाड़ हिलाने से भी कठिन’

भारत-चीन विवाद: अब तक क्या-क्या हुआ?

सिक्किम को भारत का हिस्सा नहीं बनाना चाहते थे चोग्याल

‘भ्रम छोड़े भारत’

संपादकीय में लिखा गया है, “भारत को अपना भ्रम छोड़ देना चाहिए. अजीत डोभाल की चीन यात्रा दोनों देशों के बीच जारी विवाद को भारत की मर्जी से हल करने के लिए सही मौका नहीं है. ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक नियमित तौर पर होनी वाले एक कॉन्फ्रेंस है जिसका मकसद ब्रिक्स समिट की तैयारी करना है. यह प्लेटफॉर्म चीन-भारत सीमा विवाद को सुलझाने के लिए नहीं है.”

यहां तक कि ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि मौजूदा सीमा-विवाद के पीछे ‘सबसे बड़ा दिमाग़’ डोभाल का ही है.

अख़बार का कहना है कि भारतीय मीडिया ये आस लगाए बैठा है कि डोभाल के दौरे से मौजूदा विवाद का हल निकल जाएगा.

चीन को समझने में भूल कर रहे हैं भारतीय?

चीन को चुनौती क्या सोची समझी रणनीति है?

नए सिल्क रूट पर दुनिया की चिंता

‘सौदेबाज़ी न करें तो बेहतर’

सीमा विवाद पर चीन के रुख को दोहराते हुए संपादकीय में कहा गया है, चीन इस बात पर अडिग है कि उसके इलाके से भारतीय सैनिकों को हटाने के बाद ही दोनों देशों के बीच कोई सार्थक बातचीत हो सकेगी.

अख़बार आगे कहता है, “सीमा विवाद पर डोभाल अगर सौदेबाज़ी की कोशिश करते हैं तो उन्हें निराशा हाथ लगेगी. इस मुद्दे पर चीन की सरकार के रुख को सभी चीनी लोगों का समर्थन हासिल है. चीन के लोग इस बात पर अडिग हैं कि हम अपनी ज़मीन का एक इंच भी नहीं छोड़ेंगे.”

‘इतनी भी बुरी हालत नहीं है भारतीय सेना की’

क्या अपने बुने जाल में ही फंस गया है चीन?

‘गर्व है भारतीय होने में’

ग्लोबल टाइम्स ने इस लेख में दोनों देशों की ‘आर्थिक हैसियत’ का भी हवाला दिया है.

अख़बार के मुताबिक, “चीन की जीडीपी भारत से पांच गुना और रक्षा बजट चार गुना है, लेकिन हमारी ताकत का केवल यही एक पैमाना नहीं है. इंसाफ़ चीन के साथ है. भारतीय सैनिकों की सीमा से बिना शर्त वापसी की चीन की मांग पूरी तरह से वाजिब है.”

’28 साल के लड़के से डर गए नीतीश कुमार’

बिहार में महागठबंधन के टूटने के बाद बहुत तेज़ी से राजनीतिक परिदृश्य बिल्कुल उलट गया.

बुधवार तक विपक्ष में बैठी बीजेपी ने नीतीश कुमार का हाथ थाम लिया और नीतीश कुमार बीजेपी के समर्थन के साथ जदयू और बीजेपी विधायकों को लेकर राजभवन पहुंचे और सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया.

पटना में राजभवन से बाहर आकर बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार को सुबह दस बजे शपथ ग्रहण के लिए राज्यपाल ने आमंत्रित किया है.

वहीं महागठबंधन में नीतीश के साथी रहे आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने सरकार बनाने का न्योता नीतीश को देने और शपथ ग्रहण का समय सुबह दस बजे ही कर देने के विरोध में आरजेडी और कांग्रेस के विधायकों ने राजभवन तक मार्च किया.

 

ट्वीट

आरजेडी नेताओं के साथ राज्यपाल से मिलने के बाद तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार के राज्यपाल के पास संविधान बचाने का ऐतिहासिक मौका है.

तेजस्वी यादव ने कहा कि पार्टी ने राज्यपाल से मिलकर नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण को लेकर समीक्षा करने की अपील की.

उन्होंने कहा कि बोम्मई केस में आए आदेश के मुताबिक सबसे बड़े राजनीतिक दल को सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए बुलाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार आख‍िर किस मुंह से बीजेपी के साथ सरकार बनाने जा रहे हैं. वे 28 साल के एक लड़के से डर गए हैं. उनमें हिम्मत है तो फिर से चुनाव का सामना करेंगे.

तेजस्वी यादव ने भाकपा माले, निर्दलीय, कांग्रेस और धर्मनिर्पेक्षता को मानने वाले जदयू के विधायकों के समर्थन का दावा किया.

तेजस्वी औऱ लालू

राष्ट्रीय जनता दल के पास बिहार में 80 विधायक हैं.

उन्होंने नीतीश कुमार महागठबंधन छोड़ने और बीजेपी के साथ जाने के लिए बहाना ढूंढ रहे थे.

तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव के परिवार के खिलाफ़ बेनामी संपत्ति को लेकर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने शिकंजा कसा तब से बिहार में महागठबंधन में खलबली मची थी.

तेजस्वी यादव ने कहा कि उन पर एक साज़िश के तहत आरोप लगाए गए. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार की जनता को धोखा दिया है.

आरजेडी नेता ने कहा कि बिहार की जनता नेता ने बीजेपी के खिलाफ़ जनादेश दिया था लेकिन नीतीश कुमार बिहार के साथ नाइंसाफ़ी करने वालों के साथ गले मिल रहे हैं.

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने उच्च न्यायालय से कहा – AAP सरकार के पास FIR दर्ज कराने का अधिकार नहीं

कंपनी ने कहा कि एसीबी के पास इस तरह के मामलों की जांच का अधिकार नहीं है.

नई दिल्ली: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि उसके खिलाफ केजी 6 बेसिन की गैस के दाम बढ़ाने को कथित अनियमितता के लिए दर्ज कराई गई एफआईआर को रद्द कर दिया जाए, क्योंकि आप सरकार उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की पात्रता नहीं रखती.

कंपनी ने न्यायमूर्ति एके चावला को बताया कि दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार रोधक शाखा (एसीबी) द्वारा उसके खिलाफ 2014 में दर्ज कराई गई एफआईआर के खिलाफ अपील को मंजूर किया जाना चाहिये. कंपनी ने कहा कि एसीबी के पास इस तरह के मामलों की जांच का अधिकार नहीं है.

रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस बारे में उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 4 अगस्त, 2106 के फैसले का भी जिक्र किया. इसमें कहा गया है कि एसीबी के पास सिर्फ उपराज्यपाल के प्रशासनिक नियंत्रण में आने वाले विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच का अधिकार है और उसके पास केंद्र सरकार के कर्मचारियों की जांच का अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि खंडपीठ का फैसला कंपनी के पक्ष में है और यहां तक कि उच्चतम न्यायालय ने भी दिल्ली उच्च न्यायालय के 4 अगस्त, 2016 के फैसले पर रोक नहीं लगाई है

दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता गौतम नारायण ने अदालत को बताया कि 4 अगस्त, 2016 के फैसले को पहले ही उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जा चुकी है. अदालत ने तमाम दलीलों पर गौर करते हुये मामले की अगली सुनवाई की तारीख 22 नवंबर तय की है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी पहले कार्यकाल में एसीबी को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने को कहा था.

मायावती की राह रोकने के लिए केशव प्रसाद मौर्य मोदी सरकार में बन सकते हैं मंत्री!

नई दिल्‍ली: उत्‍तर प्रदेश के सियासी हलकों में इस बात की चर्चाएं तेज हो रही हैं कि उपमुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य केंद्र की सत्‍ता में जा सकते हैं. दरअसल सूत्रों के मुताबिक इसके पीछे मुख्‍य रूप से सियासी वजहों को जिम्‍मेदार माना जा रहा है. दरअसल मायावती के राज्‍यसभा इस्‍तीफे के बाद इन अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. उपमुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को अपने पद पर बने रहने के लिए विधानसभा या विधान परिषद का सदस्‍य बनना जरूरी है. फिलहाल वह फूलपुर से सांसद हैं. यदि वह विधानभवन में पहुंचते हैं तो उनको अपनी संसदीय सीट छोड़नी पड़ सकती है.

सूत्रों के मुताबिक मायावती फूलपुर उपचुनाव में उतर सकती हैं. मायावती ने हालांकि इस तरह का कोई ऐलान तो नहीं किया है लेकिन यह सीट बीएसपी के लिए मुफीद मानी जा रही है क्‍योंकि 1996 में यहां से पार्टी के संस्‍थापक कांशीराम चुनाव लड़ चुके हैं. उस दौरान सपा के जंग बहादुर पटेल ने उनको हरा जरूर दिया था लेकिन इस सीट पर अन्‍य पिछड़े वर्ग, अल्‍सपसंख्‍यक और दलित तबके की बड़ी आबादी है. यह भी सुगबुगाहट है कि मायावती के चुनाव लड़ने की स्थिति में सपा और कांग्रेस जैसे विपक्षी दल एकजुटता दिखाते हुए उनकी उम्‍मीदवारी का समर्थन कर सकते हैं. इस सूरतेहाल में सपा, कांग्रेस और बसपा के गठजोड़ वाले संयुक्‍त वोट से बीजेपी के प्रत्‍याशी को मुकाबला करना होगा.

महागठबंधन का टेस्‍ट
2019 के लोकसभा चुनावों की पृष्‍ठभूमि में इस विपक्षी गठजोड़ को सियासी टेस्‍ट के रूप में भी देखा जा रहा है. इस लिहाज से बीजेपी सतर्क हो गई है और वह किसी भी सूरत में विपक्षी महागठबंधन को फिलहाल कोई मौका देने के मूड में नहीं है. इस‍ लिहाज से सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के रणनीतिकार मान रहे हैं कि केशव प्रसाद मौर्य की सीट फिलहाल उनके पास ही बरकरार बनी रहनी चाहिए.

मंत्रिमंडल विस्‍तार की संभावना
सूत्रों के मुताबिक इस बात की भी संभावना है कि 15 अगस्‍त के बाद पीएम नरेंद्र मोदी अपने मंत्रिमंडल का विस्‍तार कर सकते हैं. लिहाजा केशव प्रसाद मौर्य को केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है. हालांकि इस दशा में यूपी में प्रचंड बहुमत से सत्‍ता में आई बीजेपी को सीएम योगी के मंत्रिमंडल में जातीय समीकरण साधने के लिए किसी अन्‍य ओबीसी चेहरे को केशव प्रसाद मौर्य की जगह लाना होगा.

बांग्लादेश में सड़क पर कत्ल के इस वीडियो को कश्मीर का बता कर रहे हैं वायरल

तस्वीर वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट है।

सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक वीडियो वायरल हो रहा है।  इससे पहले भी ये वीडियो दो बार वायरल हो चुका है। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि हर बार इस वीडियो के बारे में अलग-अलग बातें लिख कर शेयर की गईं। एक बार इस वीडियो पर लिखा गया कि बिहार के नवादा में मुसलमानों ने एक हिंदू को उतारा मौत के घाट। दूसरी बार इस वीडियो के बारे में लिखा गया कि पश्चिम बंगाल में मुसलमानों द्वारा एक हिंदू शख्स का कत्ल। तीसरी बार भी इसी वीडियो को वायरल किया गया और इसके बारे में लिखा गया कि कश्मीरी छात्रों द्वारा सीआरपीएफ जवान का कत्ल। आपको बता दें कि जिस वीडियो को भारत का बता कर बार-बार वायरल किया जा रहा है ये वीडियो भारत का है ही नहीं। दरअसल सोशल मीडिया पर इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा गया – ‘अभी अभी मरे एक मित्र ने वीडियो सेंड की है जो श्रीनगर में पड़ता है। ये आज की वीडियो है ।कृपया इसे किसी न्यूज़ चैनल तक पहुंचआ दे। कश्मीरी स्टूडेंट CRPF जवान को मार रहे है। दोस्तों ईनसानीयत के नाते आपसे हाथ जोड़कर विनती है की यह विड़ीयो ज्यादा से ज्यादा गृपो में भेजना है। कल शाम तक हर एक नयुज चैनल पे आना चाहीऐ।’

श‍िवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का नरेंद्र मोदी पर हमला- झूठे वादों से चुनाव जीते जा सकते हैं, जंग नहीं

ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र सामना को दिए इंटरव्यू में कहा, “पाकिस्तान और चीन की ओर से मिलने वाली धमकियों में हाल के दिनों में वृद्धि हुई है और हमारे पास उनसे लड़ने के लिए पर्याप्त गोला-बारूद नहीं है।”

एनडीए में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने केंद्र की मोदी सरकार पर एक बार फिर से निशाना साधा है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि चीन को उकसाने से पहले देश को अपनी रक्षा तैयारियों को ध्यान में रखना चाहिए। सहयोगी बीजेपी पर निशाना साधते हुए ठाकरे ने कहा कि चुनाव तो झूठे वादों की दम पर जीते जा सकते हैं, लेकिन जंग खुद की प्रशंसा करके नहीं जीती जा सकती। ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र सामना को दिए इंटरव्यू में कहा, “पाकिस्तान और चीन की ओर से मिलने वाली धमकियों में हाल के दिनों में वृद्धि हुई है और हमारे पास उनसे लड़ने के लिए पर्याप्त गोला-बारूद नहीं है।” उद्धव ने बीजेपी से सवाल पूछते हुए कहा कि तीन साल में इस ताकतवर सरकार ने क्या किया?

भारत की ओर से चीन को यह बताने पर कि अब वह 1962 वाला भारत नहीं है, पर निशाना साधते हुए ठाकरे ने कहा कि जब हम चीन को बताते हैं कि आज का भारत, 1962 के भारत से अलग है, तो हमें अपना मुंह खोलने से पहले अपने पास मौजूद गोला-बारूद को याद रखना चाहिए। केंद्र और महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार की सहयोगी शिवसेना ने कहा, “कोई भी झूठे वादों और आत्म-प्रशंसा पर चुनाव जीत सकता है लेकिन युद्ध नहीं।” साथ ही ठाकरे ने कहा कि सरकार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के अपने वादे में असमर्थ साबित हुई है। उन्होंने कहा कि नोटबंद के बाद के 4 महीनों में 15 से 16 लाख लोगों ने अपनी नौकरी गंवाई और भविष्य में स्थितियां और खराब होने वाली है।

दान में मिले हाथों से बेसबॉल खेलने वाला लड़का

एक अमरीकी लड़का दुनिया का पहला बच्चा बन गया है जिसके दोनों हाथ प्रत्यारोपित किए गए हैं.

प्रत्यारोपण करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि अब वह बच्चा बेसबॉल बैट आसानी से घूमा रहा है. 10 बरस के ज़ायन हार्वे को नए हाथ मिले हैं और उसके हौंसले को नई उड़ान.

हाथ प्रत्यारोपित करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि यह विस्मित करने वाला है.

ज़ायन अब लिख सकता है, खा सकता है, ख़ुद से कपड़े बदल सकता है और बैट भी पकड़ सकता है. ज़ायन को हाथ एक डोनर से मिला है.

मेडिकल जांच से साबित हुआ है कि ज़ायन के मस्तिष्क ने उस हाथ को अपने हाथ की तरह स्वीकार किया है.

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अभूतपूर्व कामयाबी

फिलाडेल्फिया के चिल्ड्रन हॉस्पिटल में ज़ायन का इलाज चला था. डॉक्टर सांद्रा अमराल ज़ायन का इलाज करने वाले डॉक्टरों की टीम में शामिल थे.

उन्होंने बीबीसी से कहा कि ज़ायन की स्थिति में लगातार तेज़ी से सुधार हो रहा है.

उन्होंने कहा, “वह अब बैट घुमा सकता है और अपना नाम भी लिख पा रहा है. उसकी अनुभूति में लगातार सुधार हो रहा है और यह हमारे लिए विस्मित करने वाला है. अब वह अपने मां के गाल पर हाथ से थपकी दे सकता है.”

डॉक्टर अमराल ने कहा, “यह सबूत है कि उसके मस्तिष्क ने नए हाथों को स्वीकार कर लिया है.”

डॉक्टरों की टीम ने इस अभूतपूर्व कामयाब कहानी का ‘मेडिकल नोट्स द लैन्सेंट चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ जर्नल’ में छापा है.

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ज़ायन का नया हाथ

ज़ायन का जन्म दोनों हाथों के साथ हुआ था, लेकिन जब वह दो साल का था तो दोनों हाथ काटने पड़े थे.

ज़ायन के ही शब्दों में, “जब मैं दो साल का था तो दोनों हाथ काटने पड़े थे क्योंकि मैं बीमार था.”

ज़ायन को जानलेवा इन्फ़ेक्शन हो गया था. डॉक्टरों को ज़ायन के दोनों हाथ काटने पड़े थे. ज़ायन की किडनी ने भी काम करना बंद कर दिया था.

दो साल डायलिसिस पर रहने के बाद चार साल की उम्र में ज़ायन की किडनी का प्रत्यारोपण हुआ. किडनी ज़ायन की मां से ली गई थी. इसके चार साल बाद ज़ायन को नया हाथ मिला.

…तो फिर बेरोज़गार हो जाएंगे किडनी चोर

अब तो लैब में ही बन गई किडनी

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जोखिम

ज़ायन के हाथ की सर्जरी जून 2015 में की गई थी. यह अपने आप में एक बड़ा जोखिम था. हालांकि दोनों हाथों का प्रत्यारोपण की ये पहली घटना नहीं थी.

इससे पहले 1998 में भी हुआ था. यह सबसे कम उम्र में किया गया प्रत्यारोपण है. डॉक्टरों का कहना है ज़ायन उनके लिए मिसाल की तरह है.

जिनमें नए अंगों का प्रत्यारोपण किया जाता है उन्हें जीवन भर एंटी-रिजेक्शन दवाई खानी पड़ती है और इन दवाइयों का बुरा साइड इफेक्ट होता है.

इसका मतलब यह हुआ कि सर्जरी पर जोखिम का साया हमेशा बना रहता है. ज़ायन किडनी के लिए दवाई पहले से ही खा रहा है.

18 महीने बाद इसका मूल्यांकन किया जाएगा. हालांकि ज़ायन के मामले में मेडिकल टीम आश्वस्त है कि उसे इसका फ़ायदा होगा.

हमारी जेलें आपकी जेलों की तरह अच्‍छी हैं, विजय माल्‍या यहां ठीक रहेंगे : भारत ने ब्रिटेन से कहा

नई दिल्‍ली: भारत सरकार ने ब्रिटेन सरकार को यह यक़ीन दिला दिया है कि अगर शराब व्यापारी विजय माल्या को वो वापस भारत भेज देते हैं तो उसे भारत की जेल में ठीक से रखा जाएगा और भारत की जेलों में सुविधा यूरोप की जेलों से कम नहीं हैं.

भारत ने ये पक्ष केन्द्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि के द्वारा ब्रिटेन में उनकी काउंटर पार्ट पैटसी विल्किनसन, जोकि ब्रिटेन के होम डिपार्टमेंट की परमानेंट सचिव हैं, को बताया. गृह सचिव पिछले हफ़्ते लंदन के दौरे में थे.

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ब्रिटेन को ये साफ़ तौर पर कहा कि अगर विजय माल्या का प्रत्‍यर्पण किया जाता है तो न सिर्फ़ उसे उचित जेल में रखा जाएगा, बल्कि मेडिकल सुविधाएं भी दी जाएंगी.

एक सीनियर अफ़सर ने एनडीटीवी इंडिया से कहा, “ब्रिटेन को बताया गया कि भारत की जेलों के सेल यूरोप की जेलों के सेल से बड़े हैं”.

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हालांकि ये भी साफ़ कर दिया गया कि माल्या को कोई ख़ास ट्रीटमेंट नहीं दिया जाएगा. प्रतिनिधिमंडल ने ब्रिटिश अधिकारियों से भारत के इस रुख से लंदन स्थित अदालत को भी अवगत करा देने को कहा है।

अधिकारी का कहना है कि “हर जेल में अस्पताल भी है, इसीलिए उन्हें ये भी बताया गया कि जैसा फ़िल्मों में जेल की हालत के बारे में दिखाया जाता है, भारत में वैसा नहीं है”.

ये इसीलिए अहम है, क्‍योंकि विजय माल्या ने भारत की खस्ता जेलों का हवाला देकर ब्रिटेन की कोर्ट से प्रत्यर्पण नहीं करने की गुहार लगाई है.

इस संबंध में केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि ने 23 जून को महाराष्ट्र के गृह सचिव सुमित मुलिक को एक पत्र लिखकर राज्य में जेलों की स्थिति का जायजा लिया था.  सूत्रों की मानें तो विजय माल्या को भारत लाए जाने के बाद मुंबई के ऑर्थर रोड जेल में रखा जा सकता है.

गौरतलब है कि माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस को लोने देने वाले देश के 17 बैंकों ने जब उन्हें देश से बाहर जाने से रोकने की अपील के साथ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया तो माल्या मार्च 2016 में इंग्लैंड भाग गए थे. इन बैंकों का माल्या पर 9,000 करोड़ रुपये बकाया है. भारत में बैंकों से 9,000 करोड़ रुपये के कर्ज की अदायगी नहीं करने के आरोप में माल्या को भारतीय अदालत से भगोड़ा घोषित किया जा चुका है. वह भारत से मार्च 2016 में चोरी छुपे भागकर ब्रिटेन में जा छुपा है.

तो क्या शिक्षा पर ख़र्च ही सबसे बड़ी फ़िज़ूलख़र्ची?

उत्तर प्रदेश सरकार ने मौजूदा बजट में किसानों की कर्ज़माफ़ी के लिए 36 हज़ार करोड़ रुपये का प्रावधान किया और बताया कि इस धनराशि का इंतज़ाम सरकारी ख़र्चों में कटौती और अपव्यय को कम करके किया जाएगा.

वहीं शिक्षा के मद में पिछले बजट की तुलना में नब्बे फ़ीसद तक कटौती करके ये सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या शिक्षा पर ख़र्च करना ही सबसे बड़ी फ़िज़ूलख़र्ची है?

योगी सरकार ने 2017-18 के बजट में माध्यमिक शिक्षा के लिए 576 करोड़ रुपये और उच्च शिक्षा के लिए 272 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं जबकि प्राथमिक शिक्षा के लिए क़रीब 22 हज़ार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

नज़रिया: योगी को ताजमहल से नफ़रत क्यों?

पिछले साल यानी वित्त वर्ष 2016-17 के बजट को देखा जाए तो उसमें माध्यमिक शिक्षा के लिए साढ़े नौ हज़ार करोड़ रुपये और उच्च शिक्षा के लिए 2742 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए थे.

यानी दोनों ही क्षेत्रों के लिए बजट में नब्बे फ़ीसद तक की कमी कर दी गई है. ये अलग बात है कि प्राथमिक शिक्षा के लिए पिछले साल की तुलना में बजट में 5,867 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी की गई है.

नहीं मानते कि बजट में कटौती हुई

उत्तर प्रदेश विधानसभाइमेज कॉपीरइटSAMEERATMAJ MISHRA

हालांकि यदि कुल बजट की बात की जाए तो ये पिछले साल के मुक़ाबले दस फ़ीसद ज़्यादा है लेकिन शिक्षा के मद में इतनी बड़ी कटौती क्यों है, ये समझ से परे है.

राज्य के उप मुख्यमंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा शिक्षा मंत्री भी हैं और उनके पास उच्च, माध्यमिक और प्राथमिक तीनों ही विभाग हैं. डॉक्टर दिनेश शर्मा ये नहीं मानते कि बजट में कटौती की गई है.

बीबीसी से ख़ास बातचीत में वो कहते हैं, “कोई कटौती नहीं की गई है, सिर्फ़ अपव्यय को रोका गया है. अभी तक बजट का एक बड़ा हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरी ऐसी जगहों पर ख़र्च होता था जिनकी ज़रूरत नहीं थी, लेकिन अब शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों पर ख़र्च होगा. बड़ी बड़ी इमारतें बना देने से क्या होगा यदि वहां शिक्षक ही नहीं होंगे?”

शिक्षा को निजी हाथों में देने की मंशा

जानकारों का कहना है कि शिक्षा के लिए जितने रुपये इस बजट में निर्धारित किए गए हैं, उतने से तो शायद अध्यापकों के वेतन भी पूरे नहीं होंगे.

लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति और शिक्षाविद प्रोफ़ेसर रूपरेखा वर्मा सीधे तौर पर कहती हैं कि इसके ज़रिए सरकार माध्यमिक और उच्च शिक्षा को निजी हाथों में पूरी तरह सौंप देना चाहती है.

प्राथमिक विद्यालयइमेज कॉपीरइटJITENDRA TRIPATHI

प्रोफ़ेसर रूपरेखा वर्मा कहती हैं, “पांच सौ करोड़ और दो सौ-तीन सौ करोड़ रुपये शिक्षा पर ख़र्च करना तो किसी भी तरह से समझ में ही नहीं आता. इससे कई गुना ज़्यादा तो तीर्थ स्थलों के विकास के लिए आवंटित कर दिया गया है. साफ़ है कि प्राथमिक स्कूलों के निजीकरण के बाद अब सरकार माध्यमिक और उच्च शिक्षा का भी पूर्णतया निजीकरण कर देना चाहती है. जिनके पास पैसा होगा वो पढ़ेंगे, जिनके पास नहीं होगा, नहीं पढ़ेंगे.”

जानकारों का कहना है कि इतनी कम धनराशि में तो इन विभागों का सामान्य ख़र्च चल जाए, वही बड़ी बात है, शोध और सेमिनारों की बात तो दूर की कौड़ी है.

अपव्यय रोकने की बात

हालांकि डॉक्टर दिनेश शर्मा कहते हैं कि शोध के लिए, गुणवत्ता के लिए कोई कटौती नहीं की गई है, सिर्फ़ अपव्यय रोका गया है. लेकिन 272 करोड़ और 576 करोड़ रुपये में कितना शोध हो सकेगा और कितनी गुणवत्ता बनी रहेगी, समझ से परे है.

योगी की प्रेस वार्ताइमेज कॉपीरइटSAMEERATMAJ MISHRA

लेकिन सवाल उठता है कि इतनी बड़ी कटौती कैसे की गई है, वो भी तब जबकि माध्यमिक और उच्च शिक्षा में कर्मचारियों की ही एक बड़ी संख्या है. क्या सरकार सच में शिक्षा पर व्यय को फ़िज़ूलख़र्ची मानती है?

पैसा कहां से आए

वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र कहते हैं, “बीजेपी सरकार के एजेंडे में वैसे तो शिक्षा का मुद्दा सबसे ऊपर रहता है लेकिन किसानों की कर्ज़माफ़ी का इतना बड़ा ‘हाथी पालने’ जैसा उसने जो वादा कर लिया और दबाव में घोषणा भी करनी पड़ी, उसके लिए पैसा कहां से आए, ये बड़ी समस्या है. उन्हें लगता है कि सबसे ज़्यादा फ़िज़ूलख़र्ची शिक्षा पर ही हो रही है, सो सारी कटौती यहीं कर दी. उन्हें पता नहीं है कि इसकी प्रतिक्रिया कितनी बड़ी होगी और ये क़दम कितना आत्मघाती होगा?”

बहरहाल, सरकार आश्वस्त है कि बजट में जितनी धनराशि का निर्धारण किया गया है, वो शिक्षा विभाग के लिए पर्याप्त है और वो फ़िज़ूलख़र्ची रोककर सब ठीक कर लेगी. लेकिन सवाल उठता है कि क्या अब तक इतनी बड़ी धनराशि सिर्फ़ अपव्यय के लिए निर्धारित की जाती थी या फिर नई सरकार शिक्षा पर ख़र्च को अपव्यय समझती है?

क़तर की न्यूज़ एजेंसी को किसने हैक किया?

संयुक्त अरब अमीरात ने मई में क़तर की सरकारी न्यूज़ एजेंसी को हैक किए जाने के आरोपों को ख़ारिज़ किया है.

वाशिंगटन पोस्ट ने अमरीकी ख़ुफिया अधिकारियों के हवाले से कहा कि यूएई ने गुप्त रूप से क़तर के शासकों के ख़िलाफ अपशब्द पोस्ट किए. हालांकि यूएई ने इसे मनगढ़ंत बताया.

इस घटना की वजह से क़तर और उसके पड़ोसी मुल्क़ों के बीच तक़रार शुरू हो गई.

यूएई के विदेश मामलों के मंत्री अनवर गार्गश ने सोमवार को बीबीसी को बताया कि पोस्ट को लेकर आई रिपोर्ट सही नहीं थी.

आरोप

उन्होंने यह भी कहा कि यूएई और पांच अन्य अरब देशों ने फीफा को ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा जिसमें क़तर को 2022 वर्ल्ड कप की मेज़बानी से बाहर करने की बात हो.

स्विस न्यूज़ नेटवर्क ‘द लोकल’ के मुताबिक़, शनिवार को एक वेबसाइट पर फीफा के प्रेसिडेंट गियान्नी इन्फैंटिनो के हवाले से एक फ़र्जी ख़बर लिखी गई थी.

क़तर संकट: सरकारी न्यूज़ एजेंसी हैक करने से UAE का इनकारइमेज कॉपीरइटQNA/INSTAGRAM
Image captionइंस्टाग्राम पर शेयर की गई फ़ेक न्यूज़

रूस के हैकर?

वॉशिंगटन पोस्ट ने अमरीकी खुफिया अधिकारी के नाम का ज़िक्र किए बगैर कहा कि हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट से पता चला कि 23 मई को यूएई सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की एक मीटिंग में क़तर की सरकारी मीडिया वेबसाइट को हैक करने की योजना पर चर्चा हुई थी.

इस मामले में क़तर के एक अधिकारी ने कहा कि एजेंसी को किसी अज्ञात ने हैक किया था.

यूएई, सऊदी अरब, बहराइन और मिस्र ने क़तर की मीडिया पर रोक लगा दी थी. दो सप्ताह बाद चारों देशों ने क़तर पर आतंकवाद का समर्थन करने और ईरान से संबंध रखने के आरोप में अपने संबंध तोड़ लिए.

अमरीकी खुफिया अधिकारियों ने वॉशिंगटन पोस्ट को बताया कि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यूएई ने क़तर की न्य़ूज एजेंसी खुद हैक की है या किसी अन्य को पैसे देकर ये काम करवाया है.

बीते महीने द गार्डियन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमरीकी केंद्रीय जांच एजेंसी (एफ़बीआई) ने पता लगाया है कि इस हैकिंग के पीछे रूस के फ्रीलांस हैकर्स का हाथ है.

क़ब्रिस्तान पर कब्ज़े की अफ़वाह से वाराणसी में सांप्रदायिक संघर्ष

क़ब्रिस्तान पर क़ब्ज़े की कथित अफ़वाह के चलते वाराणसी में रविवार रात दो समुदायों में जमकर संघर्ष हुआ. हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा.

वाराणसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरके भारद्वाज ने बीबीसी को बताया कि अफ़वाह फैलाने के आरोप में मुस्लिम समुदाय के कई अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है और गिरफ़्तारी की कार्रवाई की जा रही है.

पुलिस के मुताबिक हिंसा की शुरुआत इस अफ़वाह के चलते हुए कि सिगरा थाना क्षेत्र में पड़ने वाले क़ब्रिस्तान के बाहर की ज़मीन पर कोई अवैध कब्ज़ा कर रहा है.

इस अफ़वाह के चलते मुस्लिम समुदाय के कई लोग इकट्ठा हो गए और नारेबाज़ी करने लगे. कुछ ही देर में हिन्दू समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए और फिर दोनों पक्षों में टकराव शुरू हो गया.

इस दौरान न सिर्फ़ पत्थरबाज़ी और आगज़नी हुई बल्कि कई वाहनों में भी तोड़-फोड़ की गई.

क़ब्रिस्तान के कब्ज़े की अफ़वाह से वाराणसी में सांप्रदायिक संघर्ष

गाय बांधने के बाद अफ़वाह

वाराणसी के ज़िलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने बीबीसी को बताया कि फ़िलहाल स्थिति नियंत्रण में है और लोगों से अफ़वाहों पर ध्यान न देने की अपील की जा रही है.

बताया जा रहा है कि विवादित ज़मीन पर पास में ही रहने वाले एक वकील महेंद्र सिंह बारिश के चलते टूट गए घर के एक हिस्से की मरम्मत करा रहे थे और इसीलिए उन्होंने क़ब्रिस्तान के पास अपनी गायें बांध दी.

पुलिस के मुताबिक इसी घटना को क़ब्रिस्तान पर कब्ज़े की अफ़वाह के तौर पर प्रचारित किया गया और देखते-देखते इतना बड़ा विवाद हो गया.

इलाक़े में तनाव को देखते हुए कई थानों की पुलिस और पीएसी तैनात की गई है.

दिल्ली में ढहाई गई मस्जिद, डर और ख़ौफ़ में इलाके के मुसलमान

पूर्वोतर दिल्ली के अम्बे विहार में 400 से 500 लोगों की भीड़ ने एक ‘मस्जिद’ को ढहा दिया है.

घटना पिछले बुधवार यानी सात जून की है जब दिल्ली पुलिस के पीसीआर पर सूचना दी गई कि एक भीड़ सोनिया विहार के अम्बे कॉलोनी में मस्जिद को ढहा रही है.

मुश्ताक़ अहमद का घर ढहाई गई मस्जिद के दो घरों के बाद है.

 

मुश्ताक़ अहमद कहते हैं, “हमने पहली रमज़ान से वहां नमाज़ शुरू की थी. तरावीह (रमज़ान में अदा की जाने वाली ख़ास नमाज़) भी वहां अदा हो रही थी कि हमारे कुछ भाइयों ने एक दिन उसे ढहा दिया. यही सच है.”

दिलों में डर

दिल्ली में मस्जिद पर विवाद

रेडीमेड कपड़ों की फ़ैक्ट्री में छोटा-मोटा धंधा करने वाले मुश्ताक़ हालांकि अपनी बात कहना चाहते हैं, लेकिन मिल रही धमकियों से पूरा ख़ानदान बेहद डरा हुआ है.

अहमद की पत्नी आमीना बिना प्लास्टर के दीवारों वाले कमरे में लगी चौकी के पास खड़ी हैं.

आमीना को इस बात का ग़म नहीं कि मस्जिद ढहा दी गई, लेकिन उन्हें ‘पाक क़ुरान की बेहुरमती (बेईज्ज़ती) किए जाने का बेहद ग़म है.’

वो कहती हैं कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं कि मामला ठंडा हो जाने के बाद उन्हें अंजाम भुगतना होगा.

परिवार

बताया जा रहा है कि कुछ मुसलमान अम्बे कॉलोनी छोड़ रहे हैं.

शाहरुख़ (बदला हुआ नाम) को अपनी हेयर कटिंग सैलून बंद करनी पड़ी है. उनके मकान मालिक ने उन्हें दुकान ख़ाली करने का नोटिस दे दिया जिसके बाद अब वो उसे घर पर ही शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं.

आमीना के पड़ोस में दो हिंदू परिवार हैं, लेकिन इस वक़्त वो वहां मौजूद नहीं हैं, बताया गया,”सब काम पर गए हैं.’

कब बनी मस्जिद?

यमुना पुश्ता के इलाक़े में बसे सभी लोग कमज़ोर आर्थिक तबक़े से तालुक्क़ रखते हैं और सुबह होते ही काम पर निकल जाते हैं.

उस बुधवार भी कुछ ऐसा ही हुआ था. विमलेश मौर्य ने भी मस्जिद तोड़ने वाली भीड़ को देखा था, वो कहती हैं, “400 से 500 लोगों की भीड़ थी. लोग काम पर गए हुए थे. मैं नहीं बता सकती कहां से आई थी, लेकिन उन लोगों ने मस्जिद गिरा दी.”

विमलेश मौर्य

हालांकि विमलेश साथ-साथ ये भी कहती हैं कि मुसलमान भाई क़ुरान पाक की क़सम ले कर घिरी दीवार पर चटाई डाल दी और नमाज़ पढ़ने लगे.

मुश्ताक़ और कॉलोनी के दूसरे मुसलमान के मुताबिक़ कि मस्जिद बनाने का काम चंद माह पहले ही शुरू हुआ था और नमाज़ भी वहां अदा करने का काम रमज़ान में ही शुरू हुआ था.

मुसलमान वहां एक छोटा मदरसा भी चला रहे थे जहां बच्चों को धार्मिक शिक्षा दी जा रही थी.

मंदिरों की कमाई घटी, मस्जिद में हाल पहले जैसा

मुश्ताक़ कहते हैं कि मस्जिद की ज़मीन के लिए वहीं रहने वाले अकबर अली नाम के व्यक्ति से बातचीत हुई थी कि उन्हें धीरे-धीरे पैसे दे दिए जाएंगे.

मगर इलाक़े में दूसरी तरह की अफ़वाहों का बाज़ार भी चल रहा है.

कृष्णपाल शर्मा कुछ महीने पहले ही बागपत से बेटे के पास आए हैं और उन्हें बताया गया है कि ज़मीन किसी साधू की थी और ज़मीन में शिव लिंग भी मौजूद था, लेकिन साधू हरिद्वार गया और ज़मीन पर नमाज़ पढ़ी जाने लगी.

कृष्णपाल शर्मा

शब्बीर कहते हैं कि अगर हमारे भाइयों को एतराज़ था तो उन्होंने पहले क्यों नहीं कहा और अब मस्जिद को क्यों ढहाया गया है.

व्हाट्सएप पर मस्जिद का विरोध

विमलेश सीधे तौर पर कहती हैं कि गांव के लोगों को एतराज़ है कि वहां मस्जिद बने.

सुरक्षा

इस बीच अम्बे कॉलोनी की गली नंबर दो के प्लॉट नंबर 149 को लेकर अफ़वाहें जारी हैं – व्हाट्सऐप पर शेयर किये जा रहे मैसेजेज़ में हिंदुओं से कहा जा रहा है कि वहां 8-10 घर ही मुसलमानों के हैं तो फिर वो मस्जिद क्यों बना रहे हैं.

हिंदुओं से कहा जा रहा है कि इस इस्लामिक प्रकिया को रोका जाना चाहिए.

लोग

पुलिस ने मामले में ज़मीन के मालिक – अकबर अली की शिकायत पर आठ लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आरआई दर्ज की है और दो लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है.

दर्जन भर पुलिस की टुकड़ी मस्जिद के पास मौजूद एक ख़ाली प्लॉट में खाट और कुर्सियां डालकर चौकीदारी पर लगी है.

पूर्वोतर दिल्ली के अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर देवेंद्र आर्य ने कहा कि पुलिस शाम के वक्त – ख़ासतौर पर इफ़्तार के वक्त वहां रास्तों और गलियों का दौरा कर रही है.

संघ की ही उपज हैं मंदसौर के विद्रोही किसान नेता कक्का जी

खेती के लिए खाद ख़रीदने लाइन में लगे बालक से ज़िले के कलेक्टर साहब ने कहा कि बेटा धूप में क्यों खड़े हो छांव में आ जाओ तो बालक ने जवाब दिया कि साहब किसान का बेटा जब छांव से प्रेम करेगा तो इस देश की जनता का पेट कौन पालेगा…”

यह 11 साल के बालक थे शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी, जो इन दिनों मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं.

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किसानों के प्रमुख नेता के रूप में पहचान रखने वाले कक्का जी इन दिनों मध्य प्रदेश में भारतीय किसान मजदूर संघ के अध्यक्ष और संस्थापक सदस्य के रूप में किसानों की अगुवाई कर रहे है.

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कौन है कक्का जी?

कक्का जी

20 दिसंबर 2010 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को 15 हज़ार किसानों ने अपने ट्रैक्टर-ट्रालियों से घेर लिया था. मुख्यमंत्री निवास से लेकर शहर के सभी प्रमुख रास्तों को किसानों ने जाम कर दिया था.

उस समय आरएसएस से जुड़े किसान संगठन भारतीय किसान संघ की मध्य प्रांत इकाई के अध्यक्ष के रूप में कक्का जी ने मोर्चा संभाला था.

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इसी अंदोलन ने शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी को एक नई पहचान भी दी थी. मध्य प्रदेश के होशंगाबाद ज़िले के वनखेडी के पास ग्राम मछेरा खुर्द में 28 मई 1952 को एक किसान परिवार में जन्में कक्का जी ने अपनी शिक्षा जबलपुर में पूरी की.

जबलपुर विश्वविद्यालय से लॉ ग्रेजुएट और एमए राजनीति शास्त्र की शिक्षा प्राप्त शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी छात्र राजनीति में शरद यादव के साथ जुडे रहे. कई बार जेल जा चुके शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी बताते है कि जेपी आंदोलन और इमरजेंसी के दौरान भी वह कई बार जेल गए.

उन्होंने 1981 में मध्य प्रदेश सरकार की विधि बोर्ड में सलाहकार के रूप में काम किया. लेकिन इस दौरान तत्कालीन मध्यप्रदेश के बस्तर में केंद्र सरकार के कानून 70 (ख) के तहत आदिवासियों की ज़मीन मुक्त करवाने के दौरान वह कई रसूखदारों के निशाने पर आ गए जिसके बाद उनका ट्रांसफर भोपाल कर दिया गया.

कुछ समय नौकरी करने के बाद वह किसान आंदोलन में कूद पड़े. वे भारतीय किसान संघ में पहले महामंत्री और बाद में अध्यक्ष रहे.

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शिवराज का विरोध

मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले की बरेली तहसील में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली लगने से एक किसान की मौत और आगजनी के बाद कक्का जी को गिरफ्तार कर लिया गया था वह दो महीने जेल में भी रहे.

उन पर 12 मुक़दमें भी चल रहे है. कक्का जी के परिवार में उनकी पत्नी डॉ. मंजुला शर्मा हैं, जो शासकीय डिग्री कालेज में प्रिंसिपल है और दो बेटियां निहारिका और आवंतिका हैं. निहारिका स्पोर्ट्स टीचर तो आवंतिका दिल्ली में इंजीनियर है.

कक्का जी बताते है कि दिसंबर 2010 में तीन दिनों के लिए राजधानी भोपाल का घेराव किया था उस समय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की 85 मांगों के माँग पत्र को गीता बताया था. शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कक्का जी कहते है कि शिवराज सिंह चौहान विवेकहीन और दिशाहीन है.

मध्य प्रदेश में कभी बीजेपी सरकार बनवाने में प्रमुख भूमिका रखने वाले और शिवराज सिंह चौहान के शुभचिंतकों में गिने जाने वाले कक्का जी अब उनके सबसे प्रबल विरोधियों में गिने जाते है.

शिवकुमार शर्मा किसानों के लिए बनाए गए स्वामीनाथन आयोग को लागू करने की वकालत करते हैं. 1 जून से मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में शुरू हुए किसान आंदोलन में मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन की अगुवाई शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी कर रहे है जो अब किसी पहचान के मोहताज नहीं.

कज़ाकस्तान में मिले मोदी और शरीफ़, पूछा हालचाल

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ कजाकस्तान में शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ सम्मेलन के स्वागत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का आमना-सामना हुआ. दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया.

अख़बार के मुताबिक़ मोदी ने शरीफ़ और उनकी मां की सेहत का हालचाल लिया.

स्वागत समारोह के लिए रवाना होने से पहले शरीफ़ से सवाल किया गया था कि क्या उनकी मोदी से मुलाक़ात होगी? इस पर वह सिर्फ़ मुस्कुराए और मीडियाकर्मियों की ओर हाथ हिलाया. शरीफ़ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अज़ीज़ ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया.

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले का भी कहना है कि मुलाक़ात के लिए न तो पाकिस्तान की ओर से अनुरोध किया गया है और न ही ऐसा कोई प्रस्ताव भारत ने किया है.

फ़ाइल फोटो

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ तेल कंपनियों ने 16 जून से पूरे देश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में हर रोज़ बदलाव करने का फैसला किया है.

देश की तीन बड़ी तेल कंपनियों- इंडियन ऑयल, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम ने कहा है कि देशभर में 58,000 पेट्रोल पंपों पर 16 जून से पेट्रोल व डीजल के दाम दैनिक आधार पर तय होंगे.

इसके अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी विनियम दर के आधार पर पेट्रोल और डीज़ल के दामों में 16 जून से दैनिक आधार पर कुछ पैसे का बदलाव होगा.

जनरल बिपिन रावत

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ भारत के थलसेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत का कहना है कि भारतीय सेना बाहरी के साथ-साथ आंतरिक खतरों से भी निपटने के लिए बिल्‍कुल तैयार है. उन्‍होंने कहा कि भारत ढाई मोर्चे (पाकिस्‍तान, चीन और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी जरूरतें) पर युद्ध लड़ने के लिए पूरी तरह से सक्षम है.

अखबार ने समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से लिखा है कि सेना प्रमुख रावत ने कहा कि भारत मल्टी-फ्रंट युद्ध के लिए तैयार है. रावत ने कहा कि सेना के पास प्रतिकूल स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी तंत्र उपलब्ध है.

ममता बनर्जी

दैनिक भास्कर के मुताबिक़ पश्चिम बंगाल के दार्जीलिंग में ममता बनर्जी सरकार के ख़िलाफ़ गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का आंदोलन हिंसक हो गया है. गुरुवार को आगजनी और पथराव में नॉर्थ बंगाल के डीआईजी समेत 50 पुलिसकर्मी घायल हुए. हिंसा के बाद हालात काबू करने के लिए सेना बुलानी पड़ी है. जनमुक्ति मोर्चा ममता सरकार के उस फैसले का विरोध कर रहा है, जिसमें सरकारी स्कूलों में पहली से 10वीं तक बंगाली भाषा को पढ़ाना अनिवार्य कर दिया गया है.

सद्दाम को फांसी दिए जाने पर रोए थे अमरीकी सैनिक

सद्दाम हुसैन की सुरक्षा में लगाए गए बारह अमरीकी सैनिक उनकी पूरी ज़िदगी के बेहतरीन मित्र न सही, लेकिन उनके आख़िरी मित्र ज़रूर थे.

सद्दाम के आख़िरी क्षणों तक साथ रहे 551 मिलिट्री पुलिस कंपनी से चुने गये इन सैनिकों को ‘सुपर ट्वेल्व’ कह कर पुकारा जाता था.

इनमें से एक विल बार्डेनवर्पर ने एक किताब लिखी है, ‘द प्रिज़नर इन हिज़ पैलेस, हिज़ अमैरिकनगार्ड्स, एंड व्हाट हिस्ट्री लेफ़्ट अनसेड’ जिसमें उन्होंने सद्दाम की सुरक्षा करते हुए उनके अंतिम दिनों के विवरण को साझा किया है.

विल
विल बार्डेनवर्पर, जो सद्दाम हुसैन की सुरक्षा में रखे गए ‘सुपर ट्वेल्व’ अमरीकी सैनिकों की टीम का हिस्सा थे.

बार्डेनवर्पर मानते हैं कि जब उन्होंने सद्दाम को उन लोगों के हवाले किया जो उन्हें फांसी देने वाले थे, तो सद्दाम की सुरक्षा में लगे सभी सैनिकों की आँखों में आँसू थे.

‘दादा की तरह दिखते थे सद्दाम’

बार्डेनवर्पर अपने एक साथी एडम रोजरसन के हवाले से लिखते हैं कि, ‘हमने सद्दाम को एक मनोविकृत हत्यारे के रूप में कभी नहीं देखा. हमें तो वो अपने दादा की तरह दिखाई देते थे.’

सद्दाम पर अपने 148 विरोधियों की हत्या का आदेश देने के लिए मुक़दमा चलाया गया था.

सद्दाम

उन्होंने इराकी जेल में अपने अंतिम दिन अमरीकी गायिका मेरी जे ब्लाइज़ा के गानों को सुनते हुए बिताए. वो अपनी खचाड़ा एक्सरसाइज़ बाइक पर बैठना पसंद करते थे, जिसे वो ‘पोनी’ कह कर पुकारा करते थे.

उनको मीठा खाने का बहुत शौक था और वो हमेशा मफ़िन खाने के लिए आतुर रहते थे.

बार्डेनवर्पर लिखते हैं कि अपने अंतिम दिनों में सद्दाम का उन लोगों के प्रति व्यवहार बहुत विनम्र था और वो ये आभास कतई नहीं होने देते थे कि वो अपने ज़माने में बहुत क्रूर शासक हुआ करते थे.

कास्त्रो ने सिगार पीना सिखाया

सद्दाम को ‘कोहिबा’ सिगार पीने का शौक था, जिन्हें वो गीले वाइप्स के डिब्बे में रखा करते थे. वो बताया करते थे कि सालों पहले फ़िदेल कास्त्रो ने उन्हें सिगार पीना सिखाया था.

फ़िदेल कास्त्रो और सद्दाम हुसैन
फ़िदेल कास्त्रो और सद्दाम हुसैन

बार्डेनवर्पर ने वर्णन किया है कि सद्दाम को बागबानी का बहुत शौक था और वो जेल परिसर में उगी बेतरतीब झाड़ियों तक को एक सुंदर फूल की तरह मानते थे.

सद्दाम अपने खाने के बारे में बहुत संवेदनशील हुआ करते थे.

वो अपना नाश्ता टुकड़ो में किया करते थे. पहले ऑमलेट, फिर मफ़िन और इसके बाद ताज़े फल. अगर गलती से उनका ऑमलेट टूट जाए, तो वो उसे खाने से इंकार कर देते थे.

बार्डेनवर्पर याद करते हैं कि एक बार सद्दाम ने अपने बेटे उदय की क्रूरता का एक वीभत्स किस्सा सुनाया था जिसकी वजह से सद्दाम आगबबूला हो गए थे.

सद्दाम

हुआ ये था कि उदय ने एक पार्टी में गोली चला दी थी, जिसकी वजह से कई लोग मारे गए थे और कई घायल हो गए थे.

इस पर सद्दाम इतने नाराज़ हुए थे कि उन्होंने हुक्म दिया कि उदय की सारी कारों में आग लगा दी जाए.

सद्दाम ने ठहाका लगाते हुए ख़ुद बताया कि किस तरह उन्होंने उदय की मंहगी रॉल्स रॉयस, फ़रारी और पोर्श कारों के संग्रह में आग लगवा दी थी और उससे उठी लपटों को निहारते रहे थे.

दिलफेंक सद्दाम

सद्दाम की सुरक्षा में लगे एक अमरीकी सैनिक ने उनको बताया था कि उसके भाई की मौत हो गई है. यह सुनकर सद्दाम ने उसे गले लगाते हुए कहा था, ‘आज से तुम मुझे अपना भाई समझो.’

सद्दाम ने एक और सैनिक से कहा था कि अगर मुझे मेरे धन का इस्तेमाल करने की अनुमति मिल जाए, तो मैं तुम्हारे बेटे की कालेज की शिक्षा का ख़र्चा उठाने के लिए तैयार हूँ.

सद्दाम

एक रात सब ने बीस साल के सैनिक डॉसन को एक ख़राब नाप के सूट में घूमते हुए देखा. पता चला कि डॉसन को सद्दाम ने अपना वो सूट तोहफ़े में दिया है.

बार्डेनवर्पर लिखते हैं कि, ‘कई दिनों तक हम डॉसन पर हंसते रहे, क्योंकि वो उस सूट को पहन कर इस तरह चला करता था, जैसे वो किसी फ़ैशन शो की ‘कैटवॉक’ में चल रहा हो.’

सद्दाम और उनकी सरक्षा में लगे गार्डों के बीच दोस्ती पनपती चली गई, हालांकि उन्हें साफ़ आदेश थे कि सद्दाम के नज़दीक आने की बिल्कुल भी कोशिश न की जाए.

हुसैन को उनके मुक़दमे के दौरान दो जेलों में रखा गया था.

जेल

एक तो बग़दाद में अंतर्राष्ट्रीय ट्राइब्यूनल का तहख़ाना था और दूसरा उत्तरी बग़दाद में उनका एक महल था जो कि एक द्वीप पर था, जिस पर एक पुल के ज़रिए ही पहुंचा जा सकता था.

बार्डेनवर्पर लिखते हैं, ‘हमने सद्दाम को उससे ज़्यादा कुछ नहीं दिया जिसके कि वो हक़दार थे. लेकिन हमने उनकी गरिमा को कभी आहत नहीं किया.’

स्टीव हचिंसन, क्रिस टास्कर और दूसरे गार्डों ने एक स्टोर रूम को सद्दाम के दफ़्तर का रूप देने की कोशिश की थी.

‘सद्दाम का दरबार’ बनाने की कोशिश

सद्दाम को ‘सरप्राइज़’ देने की योजना बनाई गई. पुराने कबाड़ ख़ाने से एक छोटी मेज़ और चमड़े के कवर की कुर्सी निकाली गई और मेज़ के ऊपर इराक का एक छोटा सा झंडा लगाया गया.

सद्दाम
Image captionसद्दाम हुसैन को अमरीकी सैनिकों ने एक बंकर से गिरफ़्तार किया था.

बार्डेनवर्पर लिखते हैं, ‘इस सबके पीछे विचार ये था कि हम जेल में भी सद्दाम के लिए एक शासनाध्यक्ष के दफ़्तर जैसा माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहे थे. जैसे ही सद्दाम उस कमरे में पहली बार घुसे, एक सैनिक ने लपक कर मेज़ पर जम आई धूल को झाड़न से साफ़ करने की कोशिश की.’

सद्दाम ने इस ‘जेस्चर’ को नोट किया और वो कुर्सी पर बैठते हुए ज़ोर से मुस्कराए.

सद्दाम

सद्दाम रोज़ उस कुर्सी पर आकर बैठते और उनकी सुरक्षा में लगाए गए सैनिक उनके सामने रखी कुर्सियों पर बैठ जाते. माहौल ये बनाया जाता जैसे सद्दाम अपना दरबार लगा रहे हों.

बार्डेनवर्पर बताते हैं कि सैनिकों की पूरी कोशिश होती थी कि सद्दाम को खुश रखा जाए. बदले में सद्दाम भी उनके साथ हंसी मज़ाक करते और वातावरण को ख़ुशनुमा बनाए रखते.

कई सैनिकों ने बाद में बार्डेनवर्पर को बताया कि उन्हें पूरा विश्वास था कि ‘अगर उनके साथ कुछ बुरा हुआ होता, तो सद्दाम उन्हें बचाने के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा देते.’

सद्दाम को जब भी मौका मिलता, वो अपनी रक्षा कर रहे सैनिकों से उनके परिवार वालों का हालचाल पूछते.

सद्दाम

इस किताब में सबसे चकित कर देने वाला किस्सा वो है जहाँ ये बताया गया है कि सद्दाम के मरने पर इन सैनिकों ने बाक़ायदा शोक मनाया था, जबकि वो अमरीका के कट्टर दुश्मन माने जाते थे.

उन सैनिकों में से एक एडम रौजरसन ने विल बार्डेनवर्पर को बताया कि ‘सद्दाम को फांसी दिए जाने के बाद हमें लगा कि हमने उनके साथ ग़द्दारी की है. हम अपने आप को उनका हत्यारा समझ रहे थे. हमें ऐसा लगा कि हमने एक ऐसे शख़्स को मार दिया जो हमारे बहुत नज़दीक था.’

सद्दाम को फांसी दिए जाने के बाद जब उनके शव को बाहर ले जाया गया था तो वहाँ खड़ी भीड़ ने उनके ऊपर थूका था और उसके साथ बदसलूकी की थी.

अमरीकी सैनिक हैरान थे

बार्डेनवर्पर लिखते हैं कि ये देख कर सद्दाम की अंतिम समय तक सुरक्षा करने वाले ये 12 सैनिक भौंचक्के रह गए थे.

सद्दाम

उनमें से एक शख़्स ने भीड़ से दो-दो हाथ करने की कोशिश भी की थी, लेकिन उनके साथियों ने उन्हें वापस खींच लिया था.

उन सैनिकों में से एक स्टीव हचिन्सन ने सद्दाम को फांसी दिए जाने के बाद अमरीकी सेना से इस्तीफ़ा दे दिया था.

हचिन्सन इस समय जॉर्जिया में बंदूकों और टैक्टिकल ट्रेनिंग का कारोबार करते हैं. उन्हें अभी भी इस बात का रंज है कि उन्हें उन इराकियों से न उलझने का आदेश दिया गया जो सद्दाम हुसैन के शव का अपमान कर रहे थे.

सद्दाम अपने अंतिम दिनों तक ये उम्मीद लगाए बैठे थे कि उन्हें फांसी नहीं होगी.

लेखक और पूर्व अमरीकी सैनिक विल बार्डेनवर्पर
Image captionलेखक और पूर्व अमरीकी सैनिक विल बार्डेनवर्पर

एक सैनिक एडम रोजरसन ने बार्डेनवर्पर को बताया था कि एक बार सद्दाम ने उनसे कहा था कि उनका किसी महिला से प्यार करने का दिल चाह रहा है. जब वो जेल से छूटेंगे तो एक बार फिर से शादी करेंगे.

30 दिसंबर, 2006 को सद्दाम हुसैन को तड़के तीन बजे जगाया गया.

उन्हें बताया गया कि उन्हें थोड़ी देर में फांसी दे दी जाएगी. ये सुनते ही सद्दाम के भीतर कुछ टूट गया. वो चुपचाप नहाए और अपने आप को फांसी के लिए तैयार किया.

सद्दाम

उस समय भी उनकी एक ही चिंता थी, ‘क्या सुपर ट्वेल्व को नींद आई?’

अपनी फांसी से कुछ मिनटों पहले सद्दाम ने स्टीव हचिन्सन को अपनी जेल कोठरी के बाहर बुलाया और सीखचों से अपना हाथ बाहर निकाल कर अपनी ‘रेमंड वील’ कलाई घड़ी उन्हें सौंप दी.

जब हचिन्सन ने विरोध करना चाहा तो सद्दाम ने ज़बरदस्ती वो घड़ी उनके हाथ में पहना दी. हचिन्सन के जॉर्जिया के घर में एक सेफ़ के अंदर वो घड़ी अब भी टिक-टिक कर रही है.

इन पांच ‘राष्ट्रीय भ्रमों’ के शिकार कहीं आप तो नहीं

राजस्थान हाई कोर्ट के जज ने हाल ही में गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की सिफारिश की थी. जस्टिस शर्मा की सिफारिश को लेकर काफ़ी विवाद हुआ. ऐसे विवादों में अक्सर सच कहीं और छिप जाता और लोगों की धारणा हावी हो जाती है.

जिस तरह से राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय चिह्न, राष्ट्र गान और राष्ट्र गीत हैं क्या उसी तरह से वाकई राष्ट्रीय पशु या राष्ट्रीय पक्षी हैं? देश के जाने माने संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज और चिह्न को संविधान सभा ने स्वीकार किया था लेकिन पशु और पक्षी के साथ ऐसा नहीं है.

कश्यप का कहना है कि ऐसे मामलों में नोटिफिकेशन जारी किया जाता है.

गाय राष्ट्रीय पशु घोषित होः राजस्थान हाईकोर्ट

कार्टून

नोटिफ़िकेशन

पर्यावरण और वन मंत्रालय ने इस मामले में 2011 में नोटिफिकेशन जारी किया था. इस नोटिफिकेशन में बाघ को राष्ट्रीय पशु और मोर को राष्ट्रीय पक्षी का दर्जा देने की बात कही गई लेकिन ये दर्जा संवैधानिक हैसियत नहीं रखता.

इस नोटिफिकेशन को पर्यावरण और वन मंत्रालय के वाइल्ड लाइफ विभाग ने जारी किया था. वाइल्ड लाइफ विभाग ने कहा कि किसी पशु को राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिलने का मतलब उसके संरक्षण से है न कि राष्ट्रीय अस्मिता और गर्व से.

कौन बने राष्ट्रीय पशु? गधा!

क्या राष्ट्रीय है और क्या क्षेत्रीय इसे लेकर लोगों की बीच काफ़ी भ्रम की स्थिति रहती है. हम यहां ऐसे ही कुछ ‘राष्ट्रीय झूठ’ के बारे में आपको बता रहे हैं.

हिन्दी राष्ट्र भाषा नहीं है

हिंदी

सुभाष कश्यप का कहना है कि देश की कोई एक राष्ट्रभाषा नहीं है बल्कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाएं राष्ट्रभाषा हैं.

कमल राष्ट्रीय फूल नहीं

कमल का फूल

कमल के राष्ट्रीय फूल होने के संबंध में भी सरकार के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है. कमल बीजेपी का चुनाव चिह्न है, न कि राष्ट्रीय फूल.

महात्मा गांधी राष्ट्रपिता हैं?

आधिकारिक रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रपिता नहीं हैं. महात्मा गांधी के लिए पहली बार राष्ट्रपिता शब्द का इस्तेमाल सुभाषचंद्र बोस ने किया था. इसके बाद से ही उन्हें सम्मान देने के लिए राष्ट्रपिता कहा जाने लगा.

महात्मा गांधी

कोई राष्ट्रीय मिठाई या फल नहीं

लोगों के बीच आम धारणा है कि आम राष्ट्रीय फल है लेकिन यह ग़लत है. देश में पैदा होने वाले किसी भी फल को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय श्रेणी में नहीं रखा गया है.

उसी तरह किसी मिठाई को भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय श्रेणी में नहीं रखा गया है.

हॉकी राष्ट्रीय खेल नहीं है

हॉकी

भारत में हॉकी को लेकर भी एक राष्ट्रीय भ्रम है कि यह राष्ट्रीय खेल है. जब भी हॉकी की स्थिति पर यहां बात होती है तो तो सबसे पहले यह कहा जाता है कि हमारे देश के राष्ट्रीय खेल की ऐसी दुर्दशा हो गई है. 2012 में केंद्र सरकार से युवा मामलों के मंत्रालय ने साफ़ कर दिया था कि हॉकी राष्ट्रीय खेल नहीं है.

क्या हैदराबाद के बाजारों में बिक रहे हैं ‘प्लास्टिक के चावल’? सरकार ने नमूनों को जांच के लिए भेजा

हैदराबाद: सोशल मीडिया पर कई वीडियो इन दिनों वायरल हो रहे हैं जिसमें बताया जा रहा है कि किस तरह लोग घर में पके चावलों की बॉल बनाकर खेल सकते हैं. सुनने और देखने में थोड़ा अजीब लगे, लेकिन यह दिखाया जा रहा है. पिछले सात दिनों में हैदराबाद के अलग-अलग इलाकों से ‘प्लास्टिक के चावल’ की शिकायतें आ रही हैं. जिनमें चार मीनार, यूसुफगुडा, सरूरनगर, मीरपेट के आउटलेट शामिल हैं.

इन शिकायतों के सामने आने के बाद तेलंगाना नागरिक आपूर्ति विभाग को ऐसे नमूनों को जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला भेजना पड़ा. विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खबरें गलत हैं और वे ‘प्लास्टिक वाले चावल’ नहीं हैं, लेकिन उन्होंने विस्तृत जांच के लिए नमूनों को प्रयोगशाला भेजा है और जल्द इसकी रिपोर्ट आ जाएगी. शहर के विभिन्न इलाकों में स्थानीय लोगों और एक हॉस्टल में रहने वाले लोगों ने दावा किया था कि उन्होंने जो चावल खरीदे और खाए वे काफी चिपचिपे थे और सामान्य चावल से उनका स्वाद अलग था. उन्होंने आरोप लगाया कि ये ‘प्लास्टिक वाले चावल’ थे.

एक अधिकारी ने बताया कि बाद में राज्य के नागरिक आपूर्ति आयुक्त सी वी आनंद ने अधिकारियों को यौसुफ्गुदा, सरूरनगर, मीरपेट और अन्य स्थानों से चावल के नमूने एकत्रित करने के निर्देश दिए, जहां से शिकायतें मिल रही थीं. नमूनों को जांच के लिए राज्य की खाद्य प्रयोगशाला में भेजा गया.

उन्होंने कहा, ‘गुरुवार तक एक विस्तृत रिपोर्ट मिलने की संभावना है.’ शहर के नंदनवनम इलाके के निवासी अशोक ने मीरपेट पुलिस थाने में एक शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उसने एक स्थानीय विक्रता से चावल खरीदे और जब उसने उन्हें पकाया तो वे ‘प्लास्टिक के चावल’ निकले. उसने कहा कि वह चिपचिपे हो गए थे और उसमें से अजीब गंध आ रही थी.

बहरहाल, पुलिस ने प्राथमिक जांच के आधार पर कहा कि शिकायतकर्ता ने जो नमूने दिए वे ‘प्लास्टिक वाले चावल’ नहीं थे. पुलिस ने कहा कि उसने इस मामले के बारे में नागरिक आपूर्ति विभाग को सूचना दी और उसे इसके नमूने भेज दिए. एक निजी हॉस्टल में रहने वाले लोगों ने भी ऐसा ही आरोप लगाया कि उन्हें ‘प्लास्टिक वाले चावल’ परोसे गए, जिसका स्वाद सामान्य चावल से अलग था.

मोदी के कृषि मंत्री ने भी ओढ़ी किसानों की मौत पर चुप्पी

बीजेपी शासित मध्य प्रदेश के मंदसौर में गोली लगने से पांच किसानों समेत छह लोगों की मौत हो गई. लेकिन इस पर अब तक देश के कृषि मंत्री और प्रधानमंत्री का कोई बयान नहीं आया है.

किसानों का कहना है कि उन पर पुलिस ने गोलियां चलाईं, लेकिन अधिकारी ‘असामाजिक तत्वों’ को ज़िम्मेदार बता रहे हैं. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर किसानों को भड़काने का आरोप लगाया है.

इस बीच कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह बुधवार को दिल्ली में अपने कार्यक्रमों और गतिविधियों की तस्वीरें ट्विटर पर लगाते रहे, लेकिन मंदसौर घटना पर उन्होंने एक भी ट्वीट नहीं किया.

‘सरकारी कर्मी को कंडोम भत्ता, किसान को लागत भी नहीं’

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के किसान क्यों हैं नाराज़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी इस बीच ऐसे मौक़ों पर चुप्पी ओढ़ने के आरोप बढ़े हैं. लेकिन एकाधिक मौक़ों पर उनके मंत्रियों का बयान आ ही जाता है. इस बार कृषि मंत्री भी चुप हैं.

मंदसौर घटना के अगले दिन 7 जून को अख़बारों में सरकार ने कृषि क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों वाले विज्ञापन छपवाए. न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार ऐलेन बैरी ने इसकी तस्वीर ट्विटर पर साझा की.

ने इसकी तस्वीर ट्विटर पर साझा की.

एलेन बैरी

बुधवार को कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ कार्यक्रम के ‘सफल समापन’ पर कैबिनेट ब्रीफ़िंग और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले थे, लेकिन इसे ‘अपरिहार्य कारणों’ से स्थगित कर दिया गया.

लेकिन इसी दिन उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से उनके दफ़्तर में मुलाक़ात की. बातचीत का विषय था- हिमाचल प्रदेश में कृषि संस्थान और शिक्षा.

राधामोहन सिंह

इसके बाद उन्होंने केरल के कृषि मंत्री से वहां की एक समस्या पर चर्चा की. उनसे इस मसले पर प्रस्ताव मांगा और मदद का आश्वासन दिया. इस बैठक की तस्वीरें भी उनके ट्विटर हैंडल से लगाई गईं.

राधामोहन सिंह

इसके बाद उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूसा (ICAR) में जनजातीय क्षेत्रों में किसानों के सशक्तिकरण के मुद्दे पर एक राष्ट्रीय वर्कशॉप को संबोधित किया.

राधामोहन सिंह

कृषि मंत्री दिन भर ट्विटर पर सक्रिय और व्यस्त रहे, लेकिन मंदसौर की घटना, जिसे विदेशी मीडिया संस्थानों ने भी इतनी प्रमुखता से कवर किया, उस पर उन्होंने कुछ भी नहीं कहा.

बिहार के पूर्वी चंपारण से सांसद राधामोहन सिंह पहले विवादों में भी रह चुके हैं. इससे पहले 2015 में राज्यसभा में दिए एक लिखित जवाब में कह चुके हैं कि किसान की ख़ुदकुशी में क़र्ज़ के साथ-साथ, दहेज़, प्रेम संबंध और नामर्दी भी एक वजह है.

राधामोहन सिंह
Image captionशपथ ग्रहण करते राधामोहन सिंह

उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी बयान का इंतज़ार है. मंदसौर घटना के बाद से वह ट्विटर पर नेपाल के नए प्रधानमंत्री को बधाई, उत्तान मंडूक आसन के फायदे बताने वाला वीडियो और एससीओ सम्मेलन में शामिल होने की सूचना ट्विटर पर पोस्ट कर चुके हैं. लेकिन किसानों की मौत पर अभी तक ‘दुख जताने’ वाली प्रतिक्रिया भी नहीं आई है.

इस बीच विपक्षी सोशल मीडिया कार्यकर्ता प्रधानमंत्री का एक पुराना ट्वीट खूब शेयर कर रहे हैं. जब आम आदमी पार्टी की रैली में गजेंद्र नाम के किसान ने ‘कथित’ ख़ुदकुशी कर ली थी और चंद घंटों में प्रधानमंत्री ने इस पर ट्वीट कर दिया था.

ट्वीट

जानकारों के मुताबिक, इस बार बंपर फ़सल होने से आपूर्ति ज़्यादा है, इसलिए किसानों को उचित दाम नहीं मिल रहे हैं.

इससे पहले महाराष्ट्र में कई ज़िलों के किसान क़र्ज़ माफ़ी और फ़सलों के उचित दाम की मांग करते हुए हड़ताल पर चले गए थे और उन्होंने सब्ज़ियों और दूध की आपूर्ति रोकना शुरू कर दिया था. हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के आश्वासन के बाद हड़ताल वापस ले ली गई.

जंतर-मंतर पर तमिलनाडु के किसानों के बहुचर्चित प्रदर्शन को भी अभी ज़्यादा दिन नहीं बीते हैं.

तमिलनाडु किसान
Image captionतमिलनाडु के किसानों ने इस तरह दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था

क़र्ज़ माफ़ी है इलाज?

फ़सलों के ख़राब होने पर किसान क़र्ज़ लेते हैं, लेकिन उसे चुकाने के लिए फ़सलों से उन्हें वैसी आमदनी नहीं होती. इस तरह ये क़र्ज़ बढ़ता जाता है.

ज़्यादातर मामलों में किसानों की तरफ से क़र्ज़ माफ़ी की मांग को पुरजोर तरीके से रखा जा रहा है, लेकिन किसानों की समस्याओं के स्थायी इलाज के लिहाज से यह तरीका सवालों के घेरे में है.

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने दो करोड़ से ज़्यादा लघु और सीमांत किसानों के एक लाख रुपये तक का क़र्ज़ माफ़ करने का ऐलान किया. लेकिन आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने इस फ़ैसले की आलोचना की और कहा कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक नुकसान होगा.

उन्होंने कहा था, ‘मुझे लगता है कि ऐसी क़र्ज़ माफियों से परहेज़ करने पर हमें सहमति बनाने की ज़रूरत है. वरना ऐसी चुनौतियों का असर देश की बैलेंस शीट पर दिखाई देगा.’

‘मैं हिंदू हूँ और 30 साल से बीफ़ का कारोबार कर रहा हूँ’

भारत में ‘बीफ़’ के व्यापार और उसके निर्यात से जुड़े लोगों का कहना है कि जिस ‘बीफ़’ का व्यापार भारत में होता है वो गोमांस नहीं है, बल्कि भैंस का मांस है.

गाय राष्ट्रीय पशु घोषित होः राजस्थान हाईकोर्ट

क्या भारत ‘फूड फासीवाद’ की तरफ बढ़ रहा है

बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक लाइव के दौरान चर्चा करते हुए ऑल इण्डिया मीट एंड लाइवस्टॉक एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन के महासचिव एसपी सभरवाल ने दावा किया कि भारत में ‘बीफ़’ यानी भैंस के कारोबार से जुड़े 70 प्रतिशत लोग मुसलमान नहीं हैं.

गाय

सभरवाल ने कहा, ”मैं हिंदू हूं और पिछले 30 साल ले बीफ के कारोबार में हूं.”

उनका कहना है कि ना तो भारत में मौजूद बूचड़खानों में गोहत्या होती है और ना ही गोमांस का निर्यात ही किया जाता है. वो कहते हैं, “बीफ का निर्यात भारत में चार अरब अमरीकी डॉलर का उद्योग है.”

वो कहते हैं इस उद्योग पर सरकार द्वारा पशुओं से क्रूरता को रोकने के लिए बने क़ानून में हाल ही में किये गए संशोधन से बुरा असर पड़ा है.

इसके अलावा इससे ही जुड़े चमड़े के उद्योग ने भी 13 अरब अमरीकी डॉलर का व्यवसाय किया है.

मसला बीफ़ का नहीं

गाय

वहीं, बीबीसी हिंदी के फेसबुक लाइव के दौरान हो रही चर्चा में मौजूद इतिहासकार प्रोफेसर पुष्पेश पंत का कहना था कि मसला ‘बीफ़’ का है ही नहीं.

उनका कहना था कि ‘बीफ़’ के नाम पर जो कुछ हो रहा है वो पिछले 10-15 साल के आपसी सद्भाव को ख़त्म करने के प्रयास हो रहे हैं – यह उसका परिणाम है.

रहा सवाल क़ानून का तो प्रोफेसर पंत कहते हैं कि अगर ऐसा कोई क़ानून है जो कहता है कि जानवर इस तरह कटेगा और बिकेगा, तो उसका पालन भी सख़्ती के साथ होना चाहिए.

उत्तर प्रदेश का उदहारण देते हुए प्रोफेसर पंत कहते हैं कि राज्य में नयी सरकार के आने से पहले अवैध बूचड़खाने चल रहे थे जिनपर रोक लगनी चाहिए थी. मगर पिछली सरकार ने उन्हें नियंत्रित करने के लिए कोई पहल नहीं की, जिससे घूसखोरी को बढ़ावा मिला.

नहीं बेच पाएंगे अब भैंसें

beef

फेसबुक लाइव में मौजूद ‘बीफ़’ की निर्यातक कंपनी के निदेशक फ़ौज़ान अल्वी कहते हैं कि देश में दूध का उत्पादन भी इसीलिए बढ़ रहा था क्योंकि मांस का निर्यात बढ़ रहा था.

वो कहते हैं कि किसान के लिए एक दूध देने वाली भैंस की उपयोगिता सिर्फ छह से सात साल तक की होती है.

वो कहते हैं कि जब भैंस दूध देना बंद कर देती है तो किसान उसे पशु बाज़ार में बेच देते हैं और दूसरी दूध देने वाली भैंस ले आते हैं. मगर अब क़ानून में संशोधन के बाद वो ऐसा नहीं कर सकेंगे.

भारतीय मूल के वराडकर होंगे आयरलैंड के पहले समलैंगिक प्रधानमंत्री

आयरलैंड में लियो वराडकर को सत्ताधारी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी फ़ाइन गेल का नेता चुना गया है.

वराडकर ने 60 प्रतिशत वोट लेकर अपने प्रतिद्वंद्वी और हाउसिंग मिनिस्टर साइमन कोवेनी को हराया.

वो आयरलैंड के पहले समलैंगिक प्रधानमंत्री होंगे.

वो अगले कुछ सप्ताह में फ़ाइन गेल के पूर्व नेता एंडा केनी से ये ज़िम्मेदारी ले लेंगे.

38 वर्षीय वराडकर आयरलैंड के अब तक के सबसे युवा प्रधानमंत्री भी होंगे.

लियो वराडकरलियो वराडकर ने 2015 में अपने समलैंगिक होने की बात सार्वजनिक की थी.

वराडकर ने 2015 में अपने समलैंगिक होने की बात सार्वजनिक की थी.

वो आयरलैंड के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख हैं.

आयरलैंड में 1993 तक समलैंगिकता को अपराध माना जाता था.

वराडकर यूरोप के सबसे रूढ़िवादी देश माने जाने वाले आयरलैंड में उदारवाद का चेहरा बनकर उभरे हैं.

हालांकि उन्हें श्रमिक अधिकारों और प्रगतिशील मुद्दों पर अपने विचारों को लेकर आलोचना का सामना भी करना पड़ा है.

‘पाकीजा’ की एक्‍ट्रेस करती रही अस्‍पताल में बेटे का इंतजार, अब वृद्धाश्रम में मिला सहारा

एक महीने से अस्पताल में भर्ती गीता के लंबे बिल का भुगतान निर्माता अशोक पंड़ित और रमेश तौरानी ने किया और उन्होंने ही गीता को अंधेरी स्थित जीवन आशा वृद्धाश्रम भेजने का इंतजाम भी किया.

नई दिल्‍ली: बीते जमाने की मशहूर एक्‍ट्रेस गीता कपूर को एक महीने बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और उन्हें अब वृद्धाश्रम भेज दिया गया. गीता कपूर का बेटा उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के बाद दोबारा उनकी सुध लेने वापस नहीं आया. एक महीने से अस्पताल में भर्ती गीता के लंबे बिल का भुगतान निर्माता अशोक पंड़ित और रमेश तौरानी ने किया और उन्होंने ही गीता को अंधेरी स्थित जीवन आशा वृद्धाश्रम भेजने का इंतजाम भी किया. अशोक पंडित ने ट्वीट किया, ‘गीता कपूर जी को अंधेरी के जीवनआशा वृद्धाश्रम में शिफ्ट कराने के बाद राहत महसूस कर रहा हूं. वह मुस्कुरा रहीं हैं और जल्दी ही ठीक हो जाएंगी.’ ‘पाकीजा’ और ‘रजिया सुल्तान’ में अभिनय करने वाली गीता को अनियमित रक्तचाप की शिकायत के चलते उनके बेटे ने गोरेगांव के एसआरवी अस्पलात में 21 अप्रैल को भर्ती कराया था. मां को भर्ती कराने के बाद एटीएम से पैसा निकालने की बात कह कर गया बेटा इसके बाद कभी नहीं लौटा.

पंड़ित ने अपने ट्वीट में कहा, ‘डा त्रिपाठी, जीवनआशा वृद्धाश्रम और रमेश तौरानी जी गीता कपूर जी को आपने जो सहयोग दिया उसके लिए शुक्रिया. हम मिल कर उनका गौरव वापस लाएंगे.’

नई दिल्‍ली: बीते जमाने की मशहूर एक्‍ट्रेस गीता कपूर को एक महीने बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और उन्हें अब वृद्धाश्रम भेज दिया गया. गीता कपूर का बेटा उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के बाद दोबारा उनकी सुध लेने वापस नहीं आया. एक महीने से अस्पताल में भर्ती गीता के लंबे बिल का भुगतान निर्माता अशोक पंड़ित और रमेश तौरानी ने किया और उन्होंने ही गीता को अंधेरी स्थित जीवन आशा वृद्धाश्रम भेजने का इंतजाम भी किया. अशोक पंडित ने ट्वीट किया, ‘गीता कपूर जी को अंधेरी के जीवनआशा वृद्धाश्रम में शिफ्ट कराने के बाद राहत महसूस कर रहा हूं. वह मुस्कुरा रहीं हैं और जल्दी ही ठीक हो जाएंगी.’ ‘पाकीजा’ और ‘रजिया सुल्तान’ में अभिनय करने वाली गीता को अनियमित रक्तचाप की शिकायत के चलते उनके बेटे ने गोरेगांव के एसआरवी अस्पलात में 21 अप्रैल को भर्ती कराया था. मां को भर्ती कराने के बाद एटीएम से पैसा निकालने की बात कह कर गया बेटा इसके बाद कभी नहीं लौटा.

पंड़ित ने अपने ट्वीट में कहा, ‘डा त्रिपाठी, जीवनआशा वृद्धाश्रम और रमेश तौरानी जी गीता कपूर जी को आपने जो सहयोग दिया उसके लिए शुक्रिया. हम मिल कर उनका गौरव वापस लाएंगे.’

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न्‍यूज एजेंसी पीटीआई को कुछ समय पहले दिए अपने इंटरव्‍यू में फिल्‍ममेकर अशोक पंडित ने कहा, ‘अस्‍पताल का बिल देना कोई बड़ी बात नहीं है, मेरा असली उद्देश्‍य है कि उनका सम्‍मान उन्‍हें वापिस मिलना चाहिए. उनका बेटा अभी भी भागा हुआ है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है.’ उन्‍होंने कहा, ‘ उनका परिवार अचानक गायब हो गया है, बेटे ने अपना फोन स्‍विच ऑफ कर लिया है. सबसे ज्‍यादा दुख की बात है कि वह अब भी उसका ही नाम ले रही हैं और उन्‍हें लगता है कि वह नीचे ही है.’ उन्‍हें इस हालत में देखना मेरी लिए काफी दुखद है.’

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पिछले हफ्ते गीता कपूर ने मिड-डे को दिए अपने एक इंटरव्‍यू में बताया कि उनका बेटा उन्‍हें प्रताड़ित करता है और भूखा रखता है. उन्‍होंने कहा, ‘ वह मुझे मारता है. वह मुझे चार दिन में एक बार खाना देता था और कई बार कई दिनों के लिए कमरे में बंद कर देता था. मैं वृद्धाश्रम में जाने को तैयार नहीं थी इसलिए उसने यह सब योजना बनाई. उसने मुझे जानबूझकर भूखा रखा ताकी मैं बीमार पड़ जाउं और वह मुझे अस्‍पताल में भर्ती कर सके.’

गीता का इलाज करने वाले डॉक्‍टरों का कहना है कि गीता को विश्वास था कि उनका बेटा उनके लिए वापस लौट कर आएगा. एसआरवी अस्पताल के डा दिपेन्द्र त्रिपाठी ने कहा, ‘जब वह गया वह वहीं थीं, तो उनको वही सब याद है और कहती हैं, कि वह पैसे ले कर वापस आएगा. यह बहुत दुखद घटना है. सबसे आश्चर्य वाली बात तो यह है कि मीड़िया में रिपोर्ट आने के बाद भी उनका कोई रिश्तेदार नहीं आया.’

सिंदूर लेकर दूल्हा मांग भरने ही जा रहा था, तभी वाट्सअप पर आया एक मैसेज…

नई दिल्ली: दुल्हन मंडप के नीचे बैठी थी. दूल्हा हाथों में सिंदूर लेकर मांग भरने ही जा रहा था….तभी वाट्सअप एक मैसेज आया कि तुम जिससे शादी करने जा रहे हो उससे तो मेरी शादी हो चुकी है. इसके बाद तो हंगामा शुरू हो गया और बात यहां तक पहुंच गई कि बारात बिन दुल्हन वापस हो गई.  मामला उत्तर प्रदेश के जिले मऊ के सोहिया गांव की है. मीडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक दूल्हा और दुल्हन लेखपाल तो है हीं, लेकिन जिसने मैसेज किया था वह भी लेखपाल है.

इस मैसेज के आने के बाद पूरी बारात में हंगामा मच गया और मारपीट की नौबत आ गई. काफी समझाने-बुझाने के बाद भी दूल्हा शादी करने के लिए राजी नहीं हो रहा था. इसके बाद फैसला लिया गया कि दुल्हन से ही पूरे मामले की सच्चाई पता की जाए. इसके बाद दुल्हन के पिता ने घर के अंदर अपनी बेटी से पूछा कि आखिर सच्चाई क्या है तो उसने सकुचाते हुए जवाब दिया कि हां, 26 मई यानी जिस दिन तिलक था उसी दिन उसने उस दूसरे लेखपाल के साथ कोर्ट में शादी कर ली थी. इसके बाद तो वधु पक्ष के लोग सन्न रह गए. सबका यही कहना था कि अगर ऐसी बात थी तो बताया क्यों नहीं. बारातियों और दूल्हे को भी नहीं समझ आ रहा था कि क्या करें. आखिकार सबने फैसला किया और बारात वापस लौट गई.

इस घटना के बाद सब लोगों का यही कहना था कि सोशल मीडिया भले ही काम की चीज हो लेकिन कई बार यह जी का जंजाल बन जाता है. वहीं शादियों में कई बार ऐसे अजीब हालात सामने आ जाते हैं जिससे रिश्ते टूटने की नौबत हो जाती है. कुछ दिन पहले ही एक शादी में रसगुल्लों की वजह से बारात वापस हो गई थी.

अमित शाह के मिशन 2019 का दांव और पशु कारोबार पर रोक का पेंच

अमित शाह मिशन 2019 के मद्देनजर तकरीबन 100 दिनों के राष्‍ट्रव्‍यापी दौरे पर निकल गए हैं. इस कड़ी में त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल के बाद शुक्रवार से वह तीन दिनों के केरल दौरे पर जा रहे हैं. दरअसल 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी उन राज्‍यों पर अधिक फोकस करना चाहती है जहां पिछली बार उसका प्रदर्शन कमजोर रहा था. इस कड़ी में केरल, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना जैसे राज्‍य हैं. अमित शाह इन राज्‍यों में बीजेपी को मजबूत करने की कोशिशें कर रहे हैं.

इसकी एक बड़ी वजह यह है कि पिछली बार बीजेपी ने 280 से भी अधिक सीटें अधिकतर हिंदी भाषी राज्‍यों से जीती थीं. जानकारों के मुताबिक इस बार बीजेपी की रणनीति यह है कि यदि पार्टी को हिंदी भाषी राज्‍यों में सत्‍ता विरोधी लहर का कुछ खामियाजा भुगतना पड़ा तो वह उसकी भरपाई गैर हिंदी राज्‍यों में अपनी पहुंच बढ़ाकर करना चाहती है. इसीलिए अपने तीन माह के दौरे पर अमित शाह का पूरा ध्‍यान गैर हिंदी ऐसे राज्‍यों में पार्टी और संगठन को मजबूत करने का होगा जहां बीजेपी अपेक्षाकृत कमजोर स्थिति में है. केरल के बाद अमित शाह तेलंगाना और लक्षद्वीप के दौरे पर जाएंगे और उसके बाद अगस्‍त में आंध्र प्रदेश जाएंगे.

दरअसल शाह चाहते हैं कि उत्तर-पूर्व राज्यों, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, आंध प्रदेश जैसे राज्यों में बीजेपी ज्यादा सीटें जीते, लेकिन मवेशियों के कारोबार पर केंद्र सरकार की हालिया अधिसूचना का इन सभी राज्यों में जबर्दस्त विरोध किया जा रहा है. पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा राज्य सरकारों ने इसे लागू न करने की बात कही है. इसी पृष्‍ठभूमि में अमित शाह केरल जा रहे हैं. वहां इस अधिसूचना का सबसे ज्‍यादा विरोध हो रहा है. मेघालय में बीजेपी नेताओं ने ही इसका विरोध किया है और राज्य के एक वरिष्ठ नेता ने इस अधिसूचना के विरोध में इस्तीफा भी दे दिया है. बीजेपी की सहयोगी एनपीपी ने इसका विरोध करते हुए पीएम मोदी से दखल की मांग की. जबकि तमिलनाडु में विपक्षी दल डीएमके ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है.

गौरतलब है कि इनमें कई ऐसे राज्य हैं जहां गोहत्या पर पाबंदी नहीं है और गोमांस लोगों के आहार का हिस्सा है. हालांकि बीजेपी नेताओं का मानना है कि जिस तरह से युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केरल में चौराहे पर बछड़े की हत्या की उससे हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस को नुकसान हो सकता है. बीजेपी इसे बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है. इस साल गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. यही वजह है कि गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने इस घटना पर तुरंत ही प्रतिक्रिया दे दी. लेकिन यह भी सही है कि गैर हिंदी राज्‍यों ऐसे राज्‍यों में जहां बीजेपी अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहती है वहां मवेशियों के कारोबार से संबंधित अधिसूचना के बाद अमित शाह को अब ज्‍यादा मेहनत करनी पड़ेगी.

बेटी को रेप से बचाने के लिए ‘राष्ट्रीय बेटी’?

राजस्थान हाई कोर्ट के एक जज ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की सिफारिश कर इससे जुड़े विवादों को और हवा दी है.

जस्टिस महेश चंद्र शर्मा जिस दिन रिटायर होने वाले थे उसी दिन उन्होंने यह सिफारिश की.

जस्टिस शर्मा की सिफारिश को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा गर्म है. आम आदमी पार्टी की विधायक अलका लांबा ने इसे लेकर कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया है.

लांबा ने पूछा कि गाय को हत्या से बचाने के लिए राष्ट्रीय पशु घोषित करोगे और बेटी अगर कोख में बच जाए तो उसे बलात्कार से बचाने के लिए क्या करोगे?

जिस जस्टिस शर्मा को गाय पसंद है

ट्विटर

अलका लांबा के इस ट्वीट का कई लोगों ने समर्थन किया है तो कई लोगों ने उन पर ही हमला भी बोला है.

वरिष्ठ पत्रकार मृणाल पांडे ने लिखा है, ”माता को जानवर कहोगी तो माता राणी का शाप लगेगा. सुना नहीं इब तो मोर भी ब्रह्मचारी बटुक सै.”

ट्विटर

लांबा के ट्वीट पर कई लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. कई लोगों ने उन्हीं की बात को आगे बढ़ाया है.

मनीष खंडेलवाल ने लिखा है, ”फिर तो राष्ट्रमाता ही घोषित कर दिया जाना चाहिए.” ज्ञानचंद गांगुली नाम के एक शख़्स ने अलका के ट्वीट पर टिप्पणी की है, ”तो लड़कियों को राष्ट्रीय बहन घोषित कर दो.”

ट्विटर

वहीं बिक्रम सिंह नाम के एक व्यक्ति ने इस ट्वीट पर अपनी टिप्पणी में लिखा है, ”ये भाजपा वालों के दिखाने के दांत और हैं और खाने के और हैं. दिखाने के लिए बनते हैं देशभक्त, पर हैं देशद्रोही.

मांस के लिए मवेशियों के कारोबार पर पाबंदी के दायरे से बाहर हो सकती है भैंस

नई दिल्ली: मांस के लिए मवेशियों के कारोबार पर पाबंदी के फैसले को लेकर सरकार बहुत सारे समूहों के निशाने पर है. अब माना जा रहा है कि इस पाबंदी से भैसों को बाहर किया जा सकता है. सोमवार को एनडीए सरकार के फैसले के खिलाफ मद्रास आईआईटी में कम से कम 80 छात्रों ने बीफ समारोह मनाया. जबकि राष्ट्रीय चमड़ा परिषद ने सरकार से फैसले पर फिर से विचार करने को कहा. अब माना जा रहा है कि सरकार मवेशियों पर आया नया नियम बदल सकती है. मवेशियों के दायरे से भैंस को बाहर किया जा सकता है.

वैसे इस फैसले को लेकर सरकार पर राजनीतिक दबाव लगातार पड़ता रहा. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले को असंवैधानिक और गैर-कानूनी करार दिया. इस विरोध में कुछ अप्रिय तस्वीरें भी देखने को मिलीं. केरल के कन्नूर में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने एक बछड़ा काट दिया, जिसके बाद कांग्रेस को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि दोषी कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को निलंबित कर दिया गया है.

जल्द ही दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता ताजिंदर पाल सिंह बग्गा ने दोषी कार्यकर्ता के साथ राहुल का फोटो भी जारी कर दिया.  कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वे इस घटना की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हैं.

लेकिन बीफ बैन और गौरक्षा के नाम पर तमाशे और हिंसा जारी है. महाराष्ट्र के वाशिम में 26 मई को मालेगांव के शिरपुर गांव के तीन कारोबारी महज अफवाह पर पीट दिए गए. वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस ने सात लोगों को पकड़ा. उघर मेघालय में बीजेपी सांसद बर्नार्ड मराक ने सस्ता बीफ बेचने का वादा कर बताया कि पार्टी के गौवंश प्रेम की भी अपनी राजनीति है.

दरअसल गौरक्षा और मवेशियों का कारोबार बेहद संजीदा राजनीतिक मसला हो चुका है. सरकार को एक-एक कदम फूंक-फूंक कर उठाना होगा. मवेशियों के कारोबार पर नए नियमों को लेकर पैदा बेचैनी यही बता रही है.

सहारनपुर में दलित-ठाकुर हिंसा का असल कारण क्या है?

“मुसलमान हमें हिंदू समझ कर काटते हैं, हिंदू चमार समझ कर. हम कटते ही रहते हैं.”

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शब्बीरपुर गांव के शिव राज के इन शब्दों ने हमें हिला कर रख दिया.

उन्होंने ऐसे ही ये बात नहीं कही थी. उनके शब्दों में मायूसी भी थी और नाउम्मीदी का एहसास भी.

शिव राज दलित का जीवन जीते-जीते अब थक चुके हैं. पांच मई को गांव में हुई हिंसा में उनके घर को आग लगा दी गई थी.

उन्हें पीटा गया था. उनके जैसे 50 से अधिक दलित पड़ोसियों के घर भी जला दिए गए थे.

दलित-ठाकुर हिंसा
Image captionशिव राज गांव से पलायन करना चाहते हैं

विवाद की शुरुआत

हुआ ये था कि 5 मई को पास के शिमलाना गांव में महाराणा प्रताप जयंती का आयोजन था.

इस आयोजन में शामिल होने के लिए शब्बीरपुर गांव से कुछ ठाकुर शोभा यात्रा निकाल रहे थे. ठाकुरों का आरोप है कि दलितों ने इसे रोक दिया और पुलिस बुलाई गई.

विवाद की शुरुआत इसी घटना से हुई.

शिव राज हों या उनके पड़ोसी दल सिंह या फिर शिमला देवी, ये सभी लोग 60 से ऊपर के हैं लेकिन उनके अनुसार उन्होंने अब तक शब्बीरपुर में खुद को इतना असुरक्षित कभी महसूस नहीं किया.

सहारनपुर से 25 किलोमीटर दूर इस गांव के दलितों के घरों के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस वाले तैनात हैं. जले-गिरे घरों के आस-पास स्पेशल फोर्सेज की पूरी ड्यूटी है.

दलित-ठाकुर हिंसा
Image captionशिमला देवी का आरोप है कि ठाकुरों ने उनके घर को आग लगाई

डर के कारण

कई घरों की छतें गिरी हुई हैं. जो बची हैं उस पर चढ़कर नीचे देखें तो पुलिस की वर्दी हर तरफ नज़र आती है.

इसके बावजूद शिव राज डरे हुए भी हैं और बेहद नाराज़ भी.

क्यों भड़की सहारनपुर में हिंसा

वो कहते हैं कि सवाल आज की हिंसा का नहीं है. मुद्दा है दलितों के खिलाफ अत्याचार और भेद भाव के बढ़ने का.

शिव राज कहते हैं, “हम यहाँ से कहीं और चले जाएंगे और अपना धर्म परिवर्तन भी कर सकते हैं.”

कई युवा दलित मर्द गांव से बाहर रह रहे हैं. ये कहना कठिन था कि वो डर के कारण गांव छोड़ कर गए थे या गिरफ़्तारी से बचने के कारण.

दलित-ठाकुर हिंसा
Image captionशब्बीरपुर का एक दलित घर

स्पेशल टास्क फ़ोर्स

शब्बीरपुर में जहाँ दलितों का मोहल्ला ख़त्म होता है वहीं से राजपूतों के घर शुरू होते हैं.

बाहर वाले लोगों को दोनों मोहल्लों के दिखावे में या आकार में कोई फ़र्क़ नहीं महसूस होगा.

आर्थिक रूप से दलितों और ठाकुरों की बस्तियां और घर ग़रीब लोगों के लगते हैं. उनकी शक्लें और पोषक भी एक जैसी है.

ठाकुरों वाले मोहल्ले में केवल इक्का-दुक्का पुलिस वाले ही पहरे पर थे. लेकिन यह एक ज़ाहरी फ़र्क़ था.

मैंने लखनऊ से आए उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स के उच्च अधिकारी अमिताभ यश से पूछा कि इसका क्या मतलब निकाला जाए?

दलित-ठाकुर हिंसा
Image captionठाकुरों के घर भी जलाये गए. मधु के अनुसार उनका काफी नुक्सान हुआ है

दलित युवक की हत्या

अमिताभ यश ने कहा कि दलितों की सुरक्षा के लिए उनके घरों के आगे भारी संख्या में फ़ोर्स लगाई गई है.

मैंने कहा कि इसका मतलब ये हुआ कि दलित समुदाय पीड़ित है, इसीलिए उन्हें सुरक्षा की अधिक ज़रूरत है, तो उन्होंने कहा मेरा ये निष्कर्ष ग़लत है.

सच तो ये है कि अंदर जाने पर नज़र आया कि ठाकुरों के भी कई घर जले हुए थे.

अगर एक दलित युवक की हत्या हुई थी तो हिंसा में रसूलपुर गांव के एक ठाकुर युवक को भी पीट-पीट कर मार डाला गया था. ठाकुरों के घरों में भी आग लगाई गई थी.

ऐसे ही एक ठाकुर परिवार की महिला मधु ने कहा, “उनसे मैंने कहा, बच्चे सीधे अपने घरों को लौट जाओ लेकिन तीन लड़के आए और घर के अंदर आग लगा दी.”

दलित-ठाकुर हिंसा
Image captionशब्बीरपुर के दलित आबादी को प्रशासन ने मुनासिब सुरक्षा दे रखी है

भीम आर्मी

ठाकुरों के कई युवाओं ने कहा कि भीम आर्मी ने मोहल्ले में काफी दहशत मचाई थी.

एक युवती रेखा कहती हैं, “वो मायावती के आने के समय सड़कों पर अपने झंडे लहराते हुए भीम आर्मी ज़िंदाबाद के नारे लगा रहे थे.”

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद समेत संगठन के कई युवाओं की पुलिस को तलाश है.

भीम आर्मी के 30 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी किया गया. पुलिस अधिकारी अमिताभ यश इस बात की पुष्टि करते हैं कि भीम आर्मी का हिंसा में हाथ था.

लेकिन भीम आर्मी के जितने लोगों से हमने बातें कीं वो इस बात से इंकार करते हैं कि हिंसा में उनका हाथ था.

वो तो ये कहते हैं कि भीम आर्मी दलित लोगों की एकता और दलित युवाओं की शिक्षा के लिए काम करते हैं.

दलित-ठाकुर हिंसा
Image captionशब्बीरपुर के दलित इलाक़ों में पुलिस का पहरा

भाजपा सरकार

गांव के दलित बुज़ुर्ग दल सिंह और दूसरे पीड़ित दलित कहते हैं कि आदित्यनाथ सरकार के बनने के बाद ठाकुर “इतराने लगे हैं, खुद को ताक़तवर मानने लगे हैं.”

भीम आर्मी के लोग जो खुद को प्रधानमंत्री मोदी का कुछ दिन पहले तक समर्थक कहते थे, अब भाजपा सरकार से मायूस हैं.

सहारनपुर से भाजपा के युवा सांसद राघव लखनपाल शर्मा कहते हैं ये हिंसा राज्य सरकार के खिलाफ एक साज़िश है और इशारों में वो इसकी साज़िश का आरोप मायावती पर लगाते हैं.

उन्होंने कहा, “एक षड्‍यंत्र के तहत इसे जातिगत हिंसा का रूप देने का प्रयास किया गया. जिन संगठनों के नाम आ रहे थे उन में एक राजनीतिक संगठन भी है. जिनको ये लग रहा था कि उनकी खोई हुई ज़मीन वापस लेनी है. मुझे लगता है राज्य सरकार को बदनाम करने की एक साज़िश है और इस साज़िश का पर्दा जल्द ही फाश होगा.”

दलित-ठाकुर हिंसा
Image captionदलित-ठाकुर हिंसा में ठाकुर भी पीड़ित। सुनीता के पति की हत्या कर दी गयी

लेकिन दलितों और ठाकुरों के बीच हिंसा के ये सब तात्कालिक कारण हैं, असल मुद्दा क्या है?

अमिताभ यश कहते हैं, “जो पुराने संबंध थे वो अब बदल रहे हैं. हर समुदाय बदल रहा है, हर समुदाय प्रगति कर रहा है. अब सभी की इच्छा है कि वो दूसरों के बराबर देखे जाएँ.”

शब्बीरपुर के दलित हों या दलितों की भीम आर्मी, भीम सेना और दलित सेना जैसे संगठन, ये अपने अधिकारों को मनवाने के लिए अब आवाज़ उठाने के लिए आगे आ रहे हैं.

‘कभी भारतीय कश्मीरी से शादी मत करना’

“मैं पाकिस्तानी साइड (पाकिस्तान प्रशासित) के कश्मीर से हूं लेकिन भारत के कश्मीर से आए हिज़्बुल मुजाहिदीन के एक मिलिटेंट से मेरी शादी हुई .

फिर उमर अब्दुल्लाह सरकार के वक़्त 2011 में ‘सरेंडर स्कीम’ के चक्कर में मेरे पति ने भारत लौटने की ज़िद की और इनके साथ मैं और हमारे बच्चे भी भारत वाले कश्मीर आ गए.

पर अब यहां फंस गए हैं, चाहकर भी वापस उस तरफ़ वाले कश्मीर में नहीं जा पा रहे हैं.

मैं पाकितान की तरफ़ वाले कश्मीर की सभी औरतों को कहूंगी कि कभी अपना रिश्ता इधर न करें, और अगर अभी है तो उसे फ़ौरन तोड़ दें.

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#UnseenKashmir: कश्मीरी बच्चों की यह चित्रकारी विचलित कर देगी

सरकार मेरे पति को आतंकवादी मानती है पर हमारा क्या कसूर है. हमने तो इन्हें आतंकवादी नहीं बनाया.

हमने तो सिर्फ़ शादी की और फिर यहां चले आए. हमें बांधकर क्यों रखा है?

शहनाज़ भट्ट का परिवार

मौक़ा नहीं मिला

इन साढ़े पांच सालों में एक बार भी वापस अपने वतन, अपने परिवार के पास जाने का मौका नहीं मिला.

इस दौरान मेरे वालिद चल बसे और मुझे एक साल बाद ख़बर मिली.

मेरे जैसी हज़ारों लड़कियां हैं मुज़फ़्फ़राबाद में, जिन्होंने भारतीय कश्मीरियों से शादी की है.

आख़िर दोनों हिस्से हैं तो एक ही कश्मीर के.

कश्मीर में फंसी पाकिस्तानी दुल्हन

सरेंडर स्कीम

भारत से ये सब कश्मीरी कम उम्र में मिलिटेंट बनने पाकिस्तान आते हैं और फिर कुछ साल में वो सब छोड़कर आम ज़िंदगी बिताने लगते हैं.

मेरे पति भी सब्ज़ी-फल की दुकान लगाने लगे थे. मां-बाप की रज़ामंदी से हमारी शादी हो गई.

फिर साल 2011 में ‘सरेंडर स्कीम’ आई और इन्होंने ज़िद की कि वे अपने मां-बाप, भाई-बहन से मिलना चाहते हैं.

मेरे मां-बाप ने बहुत मना किया और कहा कि उन्हें डर है कि वापस आने का रास्ता नहीं मिलेगा.

मुझे यक़ीन नहीं हुआ. मुझे भारत का कश्मीर देखने का बड़ा शौक भी था. तो इनकी बात मान ली.

यूसुफ़ भट्ट

मुक़दमा

ये चाहते थे कि इनके घरवाले भी मुझसे मिलें, एक शादीशुदा औरत के पास और क्या चारा था. ना कहने से घर टूट सकता था जिससे बच्चों की ज़िंदगी बर्बाद हो जाती.

हम 10 दिसंबर 2011 को नेपाल के रास्ते से कश्मीर आए.

‘सरेंडर स्कीम’ में बताए गए चार आधिकारिक रास्तों में ये नहीं था पर उन रास्तों से हमें पाकिस्तानी प्रशासन जाने ही नहीं दे रहा था.

यहां भारत के कश्मीर में आने के बाद हमें गिरफ़्तार कर लिया गया और ग़ैर-क़ानूनी तरीके से सीमा पार करने का मुकदमा दायर कर दिया. वो आज भी चल रहा है.

शहनाज़ भट्ट का घर

मैं जब यहां आई थी तो सोचा था एक महीने बाद लौट जाउंगी, पर थाने और अदालत के ही चक्कर काट रही हूं.

अब तक पहचान का कोई कार्ड नहीं मिला है.

जब भी कोई बात उठाते हैं आने-जाने की, पासपोर्ट बनवाने की, तो कह दिया जाता है कि आप ग़ैरक़ानूनी हैं.

अगर हम इतने ही ग़ैरक़ानूनी हैं तो हमें वापस क्यों नहीं भेज देते? और सारे मुल्कों में भी तो यही किया जाता है.

एक तरफ़ तो भारत-पाकिस्तान दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं, और फिर हम आम जनता को मुकदमों में उलझाया जाता है.

भारत प्रशासित कश्मीर

भरोसा नहीं

यहां के लोगों पर भरोसा नहीं होता. यहां सहेलियां हैं पर दिल की बात किसी से नहीं कर पाती हूं. लोगों के चेहरे कुछ और हैं और लगता है कि अंदर से वो कुछ और हैं.

साढ़े पांच सालों से हमें लग रहा है कि हमें किसी जेल में बंद कर दिया है. इस बीच छोटे भाई की शादी हो गई और मुझे पता ही नहीं चला.

अभी क़रीब आठ महीने से इंटरनेट और व्हाट्सऐप के ज़रिए उस तरफ़ बात हो जाती है.

पर यहां सरकार बार-बार इंटरनेट बंद कर देती है तो उसका भी आसरा नहीं रहता.

हर व़क्त यहां हिंसा होती रहती है, हर व़क्त ख़तरे का अहसास रहता है. टेंशन रहती है.

शहनाज़ भट्ट का परिवार

परिजनों की कमी

खेत में काम करना पड़ता है जो पहले कभी नहीं किया था.

भाषा और तौर-तरीके भी अलग हैं. पाकिस्तान में छूट गए परिवार की कमी उन्हें बहुत खलती है.

कई और लड़कियां भी हैं जो आज़ाद कश्मीर से बाहर के देशों में शादी कर जाती हैं पर उन्हें वापस आने में कोई दिक्कत नहीं होती.

हम यही सोचते हैं कि भारत क्यों आए? इन लोगों पर गुस्सा आता है कि क्यों लाए थे? हमें झूठ बोलकर वहां से क्यों ले आए?

मन करता है कि इनके साथ (अपने पति के साथ) कुछ ऐसा करूं, ऐसा इलाज करूं कि याद रखें. फिर सोचती हूं कि उससे क्या होगा? सब कुछ बस झूठ ही लगता है.

मोदी की ही दलील से उन्हें मात देना चाहते हैं विजयन

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन बीफ़ मामले पर केंद्र के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई को और एक क़दम आगे ले गए हैं.

उन्होंने देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखी है जिनमें भारतीय जनता पार्टी शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री भी शामिल हैं.

1980 के दशक की शुरुआत के बाद पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने ऐसा क़दम उठाया है.

उन्होंने इस चिट्ठी में लिखा है कि केंद्र सरकार ने मवेशियों के व्यापार पर क़ानून बनाकर राज्यों के अधिकारों का हनन किया है.

ये राज्यों के अधिकारों में दख़ल की शुरुआत हो सकती हैः विजयन

‘रमज़ान पर जानवर की ख़रीद-फरोख़्त पर रोक सही नहीं’

उन्होंने इसमें लिखा है कि मवेशी बाज़ारों के लिए केंद्र के बनाए नए नियम किसी भी तरह का व्यापार या पेशा करने के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं.

उन्होंने कहा कि इसलिए “ये संवैधानिकता के मापदंड पर खरा नहीं उतरेगा. इनसे किसी व्यक्ति के अपनी पसंद के भोजन करने के मौलिक अधिकार का भी उल्लंघन होता है.”

पिनाराई विजयनFACEBOOK

लंबे समय बाद ऐसा क़दम

भारत में 80 के दशक के आरंभिक वर्षों के बाद से, जब कई राज्यों में ग़ैर-कांग्रेसी सरकारें हुआ करती थीं, पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने इस तरह किसी मुद्दे पर देश के सभी मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखने का क़दम उठाया है.

उन दिनों में कर्नाटक में रामकृष्ण हेगड़े, पश्चिम बंगाल में ज्योति बसु, आंध्र प्रदेश में एनटी रामाराव और तमिलनाडु में एमजी रामचंद्रन और एम करूणानिधि जैसे मुख्यमंत्री राज्यों के अधिकारों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आवाज़ उठाया करते थे.

दरअसल, बेंगलुरू और चेन्नई में अक्सर मुख्यमंत्रियों की बैठकें आयोजित होती रही हैं, जिनमें दक्षिण भारत के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ ग़ैर-कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी हिस्सा लेते रहे हैं.

और ये बैठकें तब हुईं जब दिल्ली में इंदिरा गांधी बहुमत के साथ सत्ता में थीं, और उनपर राज्यों के अधिकारों का हनन करने के आरोप लगते थे.

अब तीन दशकों बाद, जब दिल्ली में मोदी बहुमत में हैं, विजयन ने इसी तरह का मुद्दा उठाया है.

नरेंद्र मोदी

मोदी की ही दलील को दोहरा रहे हैं विजयन

विजयन ने लिखा है, “जब तक हम एक नहीं होते और इस संघ-विरोधी, लोकतंत्र-विरोधी और धर्मनिरपेक्षता-विरोधी क़दम का विरोध नहीं करते, इससे ऐसी शृंखला की शुरूआत होगी जब इसी तरह के क़दमों से देश के संघीय लोकतांत्रिक ढांचे और धर्मनिरपेक्ष संस्कृति को नष्ट करने की कोशिश की जाएगी. “

सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने बीबीसी हिंदी से कहा, “उनकी दलील में दम है. ये वही दलील है जो नरेंद्र मोदी ने रखी थी, जब उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद विरोधी इकाई बनाने के कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी. विजयन ठीक वही कर रहे हैं.”

विजयन ने दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसी मुद्दे पर एक सख़्त चिट्ठी लिखी थी.

उनका ये क़दम ऐसे समय आया है जब दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने मवेशियों के व्यापार के बारे में केंद्र सरकार के नए नियमों के बारे में अपनी कैबिनेट में चर्चा भी नहीं की है.

जब मक्का पहुँचे दुनिया के सबसे महंगे फुटबॉलर!

दुनिया के सबसे महंगे फ़ुटबॉल खिलाड़ी रमज़ान शुरू होने के मौक़े पर इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल की यात्रा पर हैं.

फ़्रांस के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पॉल पोग्बा ने शनिवार को मक्का में ली गई अपनी एक तस्वीर साझा की.

इस तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा, “ये सबसे ख़ूबसूरत है जो मैंने अब तक देखा है.”

पोग्बा ने सभी को रमज़ान की मुबारकबाद देते हुए एक ट्वीट भी किया.

वीडियो मक्का में हैं कई पवित्र स्थान

ओबामा की दादी मक्का की यात्रा पर

पॉल पूग्बा
Image captionस्टॉकहोम में हुए यूरोपा लीग के फ़ाइनल में मैनचेस्टर यूनाइटेड की जीत के बाद जश्न मनाते पॉल पोग्बा.

24 वर्षीय पॉल पोग्बा को बीते साल मैनचेस्टर यूनाइटेड ने 8.9 करोड़ पाउंड में ख़रीदा था.

इस क़रार के साथ वो इतिहास के सबसे महंगे फ़ुटबॉलर बन गए थे.

पॉल पोग्बा

बीते बुधवार को जब यूरोपा लीग कप फ़ाइनल में मैनचेस्टर यूनाइटेड ने एजैक्स को हराया तो उन्होंने ही कप उठाया था.

पॉल पोग्बा
पॉल पोग्बा

इस्लाम धर्म में हज सभी स्वस्थ और यात्रा का ख़र्च उठाने में सक्षम मुसलमानों के लिए जीवन में कम से कम एक बार करना अनिवार्य है.

मक्का पैगंबर मोहम्मद का जन्मस्थान है और यहां ग़ैर मुसलमानों को आने की अनुमति नहीं है.

तेजस्वी यादव ने साधा सुशील मोदी पर निशाना, अब क्यों नहीं PM नरेंद्र मोदी को खत लिखते, पूछे 7 सवाल

नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में इन दिनों आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है. बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने पिछले दिनों लालू प्रसाद यादव पर कई घोटालों का आरोप लगाया. उन्होंने इससे जुड़े दस्तावेज भी मीडिया में जारी किए थे. अब सुशील मोदी भी तेजस्वी यादव के निशाने पर आ गए हैं. फेसबुक पर तेजस्वी ने लिखा है सुशील मोदी पर राजद ने जितने भी आरोप लगाए हैं उस वह कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं. खुद साधु होने का ढोंग रचकर नैतिकता और ईमानदारी का ढोल पीटते हैं, पर अपने घर में ही व्याप्त भ्रष्टाचार पर एक शब्द नहीं बोलते हैं और ना ही कोई स्पष्टीकरण देते है. तेजस्वी यादव ने सुशील मोदी से 7 सवाल पूछे हैं.

1- सुशील मोदी यह बताएं कि आर.के.मोदी उनके सगे भाई हैं कि नहीं? सुशील मोदी ज़रा बिहार की जनता को यह तो स्पष्ट करें कि कैसे इतने कम समय में सुशील मोदी परिवार ने हज़ारों-हज़ार करोड़ की सम्पत्ति अर्जित कर ली?

2- ललित छाछवरिया जैसे मनी लॉन्ड्रिंग के बेताज बादशाहों का उनके भाई की कम्पनी से क्या लेना देना है? आरके मोदी के ललित छाछवरिया से व्यावसायिक सम्बन्ध हैं कि नहीं?

3.इनके भाई की कम्पनी में जिस तरह 400-400 करोड़ की बेनामी एंट्री घुमाई गईं हैं, मनी लॉन्ड्रिंग की गई है, मनी लेयरिंग की गईं हैं. क्यों नहीं सुशील मोदी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहते हैं कि मैं तो ईमानदारी का देवता हूं, पर मेरे ही परिवार की अनेकों रियल इस्टेट कंपनियों और तो और मेरे ही सगे भाई की कम्पनियां मसलन आशियाना होम्स प्रा० लि०, आशियाना लैंड्सक्राफ़्ट प्रा० लि० समेत अनेकों कंपनियों में की गई अब तक की कारगुज़ारियों के ख़िलाफ़ हूं. मेरे भाई की कंपनियों के बेमानी लेनदेन की भी जांच हो, भले ही मैं आपकी ही पार्टी का ही क्यों ना होऊं?

4.क्यों नहीं सुशील मोदी ED और अन्य एजेंसियों को लिखते कि उनके भाई की सभी कम्पनियों में धन के अर्जन, आवाजाही और स्रोतों तथा आर्थिक अनियमितताओं की पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से जांच की जाए?

5- जिस प्रकार राजद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए वीडियो में साफ-साफ दिखाया कि सुशील मोदी के भाई आरके मोदी की कम्पनी के प्रोजेक्ट आशियाना मलबेरी, गुड़गांव के सेल्स मैनेजर अंकित मोदी ने स्पष्ट रूप से उक्त कंपनी को सुशील मोदी से जुड़ा बताया. क्यों नहीं सुशील मोदी अपने भाई पर मानहानि का केस दर्ज कराते?

6- जिस प्रकार उनके भाई की कंपनी का सेल्स मैनेजर अंकित मोदी साफ साफ ग्राहक को विश्वास दिलाने के लिए सुशील मोदी का नाम लेकर सत्ता का दंभ भर रहा है. क्या यह सच नहीं है कि गुडगांव और बाकि जगह के सारे फ्लैट सुशील मोदी के नाम पर ही बेचे जा रहे हैं? क्या सुशील मोदी ने अब तक इस बात का खंडन किया? क्या खंडन नहीं करने का स्पष्ट मतलब नहीं है कि इनके भाई की कंपनी में बेमानी निवेश किया गया है?

7- दूसरों के पंजीकरण किए हुए, कानूनी, वैध, हर प्रक्रिया की कसौटी पर कसे, जन सामान्य के लिए उपलब्ध सम्पत्ति की जानकारी को घोटाला बनाकर पेश करने वाले सनसनी के स्वामी सुशील मोदी हमारे आरोपों पर स्पष्टीकरण देने की हिम्मत क्यों नहीं जुटाते? अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देने के वक़्त उनकी ज़ुबान बंद क्यों हो जाती है?

मेट्रो स्टेशन के बाहर पेशाब करने से रोका, ई-रिक्शा ड्राइवर को बेरहमी से पीटकर मार डाला

नई दिल्ली: सार्वजनिक स्थान पर पेशाब करने से रोकना एक ई-रिक्शा ड्राइवर को भारी पड़ गया और जिंदगी गंवानी पड़ी.  उत्तर पश्चिमी दिल्ली के मेट्रो स्टेशन जीटीबी नगर के बाहर कुछ बदमाशों ने एक रिक्शा ड्राइवर को सिर्फ इस बात पर पीट-पीटकर मार डाला कि उसने वहां खुले में पेशाब करने से रोका था. घटना शनिवार रात की बताई जा रही है. ड्राइवर का नाम रविंद्र कुमार बताया गया है. रविंद्र के भाई विजेंदर कुमार का कहना है कि उसने कुछ लड़कों को स्टेशन की दीवार पर कथित तौर पर पेशाब करने से रोका था.

पुलिस ने बताया कि कल शाम मृतक रवींद्र ने दो लोगों को मेट्रो स्टेशन के बाहर पेशाब करते हुए देखा और इस पर आपत्ति जताई. तब वे वहां से रविंद्र को बाद में सबक सिखाने की धमकी देकर चले गए. दोनों रात करीब आठ बजे दस और लोगों के साथ वापस आए और उसे बुरी तरह से पीटा. एक दूसरे ई-रिक्शा चालक ने बीचबचाव करने की कोशिश की लेकिन आरोपियों ने उसे भी पीटा. रवींद्र को अस्पताल ले जाया गया जहां उसने दम तोड़ दिया. पुलिस सूत्रों ने कहा कि दोनों व्यक्तियों की तस्वीरें वहां लगे सीसीटीवी में कैद हैं.

ऐसा संदेह है कि आरोपी एक प्रतियोगी परीक्षा में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली आए थे और हरियाणा के रहने वाले हैं.  रवींद्र मेट्रो स्टेशन के पास एक झुग्गी बस्ती में रहता था. उसकी पिछले साल शादी हुई थी और उसकी पत्नी सात महीने की गर्भवती है.  उधर, स्थानीय पुलिस अधिकारी सुरिंदर कुमार का कहना है कि जांच जारी है. आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीम का गठन किया गया है.

रामपुर में लड़कियों से छेड़छाड़ की घटना के बाद आजम खान ने महिलाओं को दे डाली सलाह

आजम खान ने कहा कि रेप और छेड़छाड़ से बचने के लिए महिलाओं को घरों में ही रहना चाहिए. लड़कियों को ऐसी जगहों पर नहीं जाना चाहिए, जहां बेशर्मी का नंगा नाच हो रहा हो.

रामपुर: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में दो लड़कियों के साथ 14 लोगों द्वारा सरेआम छेड़छाड़ करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने महिलाओं के लिए एक अजीबोगरीब सलाह दी है. उन्होंने कहा कि रेप और छेड़छाड़ से बचने के लिए महिलाओं को घरों में ही रहना चाहिए. लड़कियों को ऐसी जगहों पर नहीं जाना चाहिए, जहां बेशर्मी का नंगा नाच हो रहा हो.

आजम खान ने कहा, ‘पिछले दिनों लगातार महिलाओं के साथ छेड़छाड़ एवं अभद्रता, लूट, डकैती और हत्या की घटना हुई है. विधानसभा चुनावों से पहले मैंने लोगों से आग्रह किया था कि सपा की कानून-व्यवस्था की स्थिति को दिमाग में रखें। मैंने कहा था कि यदि भाजपा को मौका दिया गया तो कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो जाएगी.’ उन्होंने आरोप लगाया कि जबसे भाजपा सत्ता में आई है तबसे उत्तर प्रदेश में महिलाएं सुरक्षित नहीं रह गई हैं.

गौरतलब है कि रामपुर जिले में वहशीपन का सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां दो लड़कियों के साथ सरेआम 14 लोगों ने छेड़खानी की. ये लड़के काफ़ी देर तक इन लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार करते रहे, उनके कपड़े खींचते रहे. यहां तक कि एक आरोपी ने तो एक लड़की को उठाकर ले जाने की भी कोशिश की. लड़कियां इन दरिंदों के सामने हाथ जोड़ती रही लेकिन उनका दिल नहीं पसीजा. लड़के छेड़छाड़ करते समय हंस रहे थे. इन लड़कों में से ही कुछ ने फोन पर घटना का वीडियो बना लिया और व्हाट्स ऐप पर भी शेयर कर दिया. छेड़छाड़ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

इस घटना से साफ है कि यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर से बनाए गए एंटी रोमियो स्क्वॉड का असर सूबे के मनचलों पर नहीं दिख रहा है. हालांकि पुलिस ने इस मामले में 14 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर इनमें से कुछ को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है.

इस घटना को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सवाल किया कि क्या यह वही कानून और व्यवस्था है, जिसका वायदा भाजपा ने सत्ता में आने से पहले किया था.

‘अमरीका की नज़र में सऊदी अरब है दुधारू गाय’

ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई ने सऊदी अरब के ख़िलाफ़ कड़ा बयान दिया है और कहा है कि सऊदी अरब सरकार कुरान का पालन नहीं कर रही.

शनिवार को इस्लामी महीने रमज़ान की शुरुआत के मौके पर एक समारोह में ख़ामेनेई ने कहा “सऊदी सरकार अयोग्य है और कुरान की शिक्षाओं के ख़िलाफ़ काम कर रही है”.

उन्होंने कहा कि अमरीका सऊदी अरब का इस्तेमाल “दूध देने वाली गाय” की तरह कर रहा है.

सऊदी अरब पर बोले आयतुल्लाह

हज यात्रा पर ख़मेनेई ने सऊदी को आड़े हाथों लिया

अमरीका की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “ये बेवकूफ़ समझते हैं कि पैसा खर्च कर के वो इस्लाम के दुश्मनों से दोस्ती कर लेंगे- लेकिन इनके बीच ऐसी कोई दोस्ती नहीं है. सऊदी अरब दुधारू गाय की तरह हैं. जब उनसे सारा दूध दुह लिया जाएगा तो उन्हें कत्ल कर दिया जाएगा. आज की इस्लामी दुनिया की यही स्थिति है.”

उन्होंने कहा, “देखिए उन्होंने यमन और बहरीन के लोगों के साथ कैसा अधर्मी व्यवहार किया. वो ज़रूर ख़त्म हो जाएंगे.”

डोनल्ड ट्रंप का सऊदी अरब दौरा

हाल ही में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब का दौरा किया था. इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच हथियारों का सौदा हुआ, जिसके तहत सऊदी अरब अमरीका से 350 अरब डॉलर के हथियार खरीदेगा.

बीते साल ख़ामेनेई ने अमरीका पर आरोप लगाया था कि “वह पश्चिम में ईरान के साथ परमाणु समझौते पर वादा ख़िलाफ़ी कर रहा है और अमरीका पर भरोसा करना उसकी ग़लती थी.”

मध्यपूर्व में ईरान की बढ़ता प्रभाव रोकने के लिए अमरीका सऊदी अरब को अपने ख़ास सहयोगी के रूप में देखता है.

ईरान और सऊदी अरब के बीच गंभीर तनाव है और क्षेत्रीय स्तर पर दोनों एक दूसरे के ख़िलाफ़ कई मोर्चों पर शामिल हैं जिनमें सीरिया और यमन शामिल हैं.

कश्मीर की अनदेखी, अनसुनी कहानियां

साल 2016 की गर्मियों में हुए हिंसक प्रदर्शनों और कई लोगों की मौत के बाद अब एक और गर्मी आई है.

आशंका है कि भावनाएं फिर ना भड़कें, भारत से ‘आज़ादी’ के नारे फिर ना बुलंद हों.

12 साल का मृत बच्चा बना कश्मीर समस्या का चेहरा …

कश्मीर की ये ‘पत्थरबाज़ लड़कियां’

ऐसे में भारत और पाकिस्तान के बीच बंटी हुई कश्मीर वादी में लोगों को आखिर क्या जोड़ता है?

बच्चे और युवा अपने आने वाले कल के लिए क्या ख़्वाब देख रहे हैं?

वहां की बच्चियों का जीवन, वादी के बाहर रह रही बच्चियों की ज़िंदगी से कितना अलग है?

कश्मीर की लड़कियां

ऐसे ही सवालों के जवाब जानने बीबीसी संवाददाताओं की टीमें भारत प्रशासित और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर गईं.

आने वाले दिनों में हम आप तक लाएंगे वादी में रह रही एक बच्ची की दिल्ली में रह रही एक लड़की से चिट्ठियों के ज़रिए बातचीत.

कश्मीर का इलाका जहां कोई वोट देने नहीं आया

16 साल के ज़ेयान का फ़ेसबुक की तर्ज़ पर काशबुक!

दो हिस्सों में बँटे कश्मीर से जब लड़कियाँ शादी करके ‘दूसरी तरफ़’ यानी भारत और पाकिस्तान गईं तो उन पर क्या गुज़री, ये भी हम आप तक पहुँचाएँगे.

साल 2012 में हिंसक प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरे पत्थरबाज़ों के बदलते जीवन का ब्योरा भी होगा.

कश्मीर में सुरक्षा बल

तस्वीर का दूसरा पहलू भी होगा, वादी में तैनात सुरक्षा बलों की चुनौतियां और नज़रिया भी होगा. परिवार से दूर और पत्थरबाज़ों के सामने खड़े सिपाही की बात होगी.

वादी छोड़ भारत में नौकरी और काम के लिए बस गए कश्मीरी लोगों से मुलाकात होगी.

कश्मीर पर अब सवाल नरेंद्र मोदी से पूछा जाएगा

अपने ही समाज में आज कहां खड़ी हैं कश्मीरी औरतें?

साथ ही वादी में गूंजते संगीत की भी झलक होगी.

जिसमें वानवुन की धुनों से लेकर हिंसा के ख़िलाफ़ आवाज़ के तौर पर उभरे संगीत की गूंज होगी.

तीन गोलियाँ जिन्होंने भारत को हिला कर रख दिया

27 अप्रैल, 1959 का दिन था. बंबई पुलिस के उप कमिश्नर जॉन लोबो मुंबई की चिपचिपाती गर्मी से बचने के लिए नीलगिरि के पहाड़ों में जाने की योजना बना रहे थे.

लेकिन तभी शाम पांच बजे उनके फ़ोन की घंटी बजी. नौसेना के कमांडर सैमुअल लाइन पर थे. ‘कमांडर नानावती आप से मिलने आ रहे हैं. अभी वो मेरे पास ही थे.’

लोबो ने पूछा, ‘हुआ क्या है?’ सैमुअल का जवाब आया, ‘उनका एक आदमी से झगड़ा हुआ था, जिसे उन्होंने गोली मार दी है.’

कुछ देर बाद लोबो को अपने कमरे के बाहर एक आवाज़ सुनाई दी, ‘लोबो साहब का कमरा कहाँ है?’

नौसेना की सफ़ेद वर्दी पहने हुए एक लंबा शख़्स उनके कमरे में दाखिल हुआ. उसने अपना परिचय कमांडर नानावती कह कर कराया.

नानावती ने बिना कोई वक्त ज़ाया करते हुए कहा, ‘मैंने एक शख़्स को गोली मार दी है.’

नानावटी केस पर आधारित पत्रकार बची करकरिया की किताब ‘इन हॉट ब्लड’ पर रेहान फ़ज़ल की विवेचना

नानावटी को झटका

लोबो ने जवाब दिया, ‘वो मर चुका है. अभी-अभी गामदेवी पुलिस स्टेशन से मेरे पास एक संदेश आया है.’

ये सुनते ही नानावती का मुंह पीला पड़ गया. कुछ सेकेंड तक कोई कुछ नहीं बोला.

लोबो ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा, ‘आप एक प्याला चाय पीना पसंद करेंगे?’ ‘नहीं मुझे सिर्फ़ एक ग्लास पानी चाहिए,’ पसीने से तर नानावती ने जवाब दिया.

किस्सा कुछ यूँ था कि उस दिन आईएनएस मैसूर के सेकेंड-इन-कमान लेफ़्टिनेंट कमांडर नानावती कुछ दिन बाहर रहने के बाद जब वापस अपने घर लौटे तो उन्होंने अपनी अंग्रेज़ पत्नी सिल्विया का हाथ अपने हाथों में लेना चाहा, तो उन्होंने उसे झटक दिया.

आहत नानावती ने जब सिल्विया से पूछा, ‘क्या अब तुम मुझे प्यार नहीं करतीं?’, सिल्विया ने कोई जवाब नहीं दिया.

नानावती ने फिर ज़ोर दे कर पूछा, ‘क्या हमारे बीच कोई दूसरा शख़्स आ गया है?’ इसका जो जवाब सिल्विया ने दिया, उसको न सुनने के लिए नानावती पूरी दुनिया क़ुर्बान कर सकते थे.

बची करकरिया की किताबइमेज कॉपीरइटJUGGERNAUT
Image captionबची करकरिया की किताब ‘इन हॉट ब्लड द नानवती केस दैट शुक इंडिया’

बची करकरिया की किताब

लेकिन कवास नानावती ने अपनी पत्नी से एक शब्द भी नहीं कहा. इसके बाद वो दोनों अपने कुत्ते को दिखाने डॉक्टर के पास ले कर गए.

लौट कर उन्होंने शोरबेदार कटलेट्स और प्रॉन करी और चावल का भोजन किया और पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार नानावती ने सिल्विया और बच्चों को अंग्रेज़ी फ़िल्म ‘टॉम थंब’ का मैटिनी शो दिखाने के लिए मेट्रो सिनेमा पर छोड़ दिया.

इसके बाद नानावती अपने पोत पर गए जहाँ से उन्होंने .38 स्मिथ एंड बेसन रिवॉल्वर निकाली और अपनी पत्नी के प्रेमी प्रेम आहूजा को उनके घर जा कर गोली से उड़ा दिया.

उस समय आहूजा, नहाने के बाद कमर पर तौलिया लपेटे, आईने के सामने अपने बालों में कंधी कर रहे थे.

‘इन हॉट ब्लड द नानवती केस दैट शुक इंडिया’ की लेखिका बची करकरिया बताती हैं, ”मुझे इस केस में सबसे ख़ास बात ये लगी कि ये मामूली हत्या का केस इतनी ऊँचाई तक पहुंच गया कि प्रधानमंत्री नेहरू तक को इसके बारे में प्रेस को जवाब देना पड़ा. जब हाईकोर्ट ने नानावती को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई तो चार घंटे के भीतर बंबई के राज्यपाल ने आदेश दे दिया कि इस फ़ैसले को तब तक स्थगित रखा जाए जब तक नानावती की अपील पर फ़ैसला नहीं आ जाता. इसकी समीक्षा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ को बैठना पड़ा. एक अडल्ट्री के केस में ऐसा पहली बार हुआ था. इस केस में रक्षा मंत्री से ले कर प्रधानमंत्री तक को बीच में पड़ना पड़ा. ये एक अजीब-सा केस था जिसमें प्रेम था, दग़ाबाज़ी थी, ऊँचे समाज का अपराध था. यही वजह है कि इस घटना को हुए 58 साल बीत चुके हैं, लेकिन लोगों की दिलचस्पी अभी तक इस केस में बनी हुई है.”

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Image captionराम जेठमलानी को नानावती केस ने राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर दिया

नामचीन वकील

उस समय भारत के चोटी के वकीलों ने दोनों पक्षों की ओर से अपनी अपनी दलीलें रखीं. नानावती ने मशहूर क्रिमिनल वकील कार्ल खंडालवाला की सेवाएं लीं.

खंडालवाला ने ये कहते हुए अपने तर्कों का अंत किया कि वो अपने मुवक्किल के लिए सहानुभूति या दया की मांग नहीं करेंगे क्योंकि उनकी नज़रों में उन्होंने कोई अपराध किया ही नहीं है.

बाद में रजनी पटेल, वाई वी चंद्रचूड़, ननी पालखीवाला, एम सी सीतलवाड, सी के दफ़्तरी और गोपाल स्वरूप पाठक ने एक न एक पक्ष की ओर से बहस में हिस्सा लिया.

उस ज़माने में अपना करियर शुरू कर रहे राम जेठमलानी को तो इस केस ने राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर दिया.

करकरिया बताती हैं, ”उस समय राम जेठमलानी काफ़ी जूनियर वकील थे और पब्लिक प्रॉसीक्यूटर नहीं थे. प्रेम आहूजा की बहन मैमी ने एक पर्यवेक्षक की तरह उनकी सेवाएं ली थीं. जेठमलानी उस समय भी बहुत होशियार वकील थे. उनका तर्क था कि अगर खंडालवाला की इस दलील को सही माना जाए कि गोलियाँ हाथापाई के बाद चलीं, तो प्रेम भाटिया का तौलिया गोलियाँ लगने के बाद भी उनकी कमर से चिपका क्यों रह गया? उनकी दलीलों की वजह से ही डिफ़ेस की इतनी बड़ी कहानी धराशाई हो गई.”

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Image captionनानावती और सिल्विया

नौसेना के बड़े अधिकारी

प्रेम आहूजा की तरफ़ से बहस कर रहे सी एम त्रिवेदी ने कार्ल खंडालवाला की उस दलील की काट पेश की कि ये गोलियाँ दुर्घटनावश चली थीं और नानावती का इरादा प्रेम अहूजा को मौत के घाट उतारने का नहीं था.

अदालत में बोलते हुए त्रिवेदी ने कहा, ”मेरे प्रतिद्वंदी की बातें ठोस तथ्यों और दलीलों की जगह नहीं ले सकतीं. मुझे तो बहुत शक है कि वो अदालत में बोल रहे हैं या किसी नाटक के मंच पर. मैं जूरी को आगाह करना चाहता हूँ कि इस शख़्स के दिखावे और बड़े तमग़ों की कतारों से प्रभावित न हों. वो इस बात से भी प्रभावित न हों कि नौसेना के बड़े से बड़े अधिकारी इस शख़्स के चरित्र को सही ठहराने के लिए इस अदालत में आ कर गवाही दे रहे हैं. मुझे तो ऐसा लग रहा है कि पूरी नौसेना, नागरिक प्रशासन से लड़ाई पर उतर गई है. सच मानिए, ये पूरा मामला एक प्रेम त्रिकोण का है और ये आदम और हव्वा के ज़माने से होता आ रहा है.”

ललिता रामदास पूर्व नौसेनाध्यक्ष ऐडमिरल रामदास की पत्नी हैं. जिस समय ये घटना हुई थी, वो कॉलेज में पढ़ रही थीं. उस समय के नौसेनाध्यक्ष ऐडमिरल रामदास कटारी उनके पिता थे. चूंकि नानावती उनके पिता के प्रिय अफ़सर थे, ललिता उन्हें अंकल कह कर बुलाती थी.

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आर्थर रोड जेल

ललिता रामदास याद करती हैं, ‘जब मैं पहली बार नानावती से मिली तो वो लेफ़्टिनेंट हुआ करते थे. ये सब हमारे घर पर आते थे, खाना खाते थे और गप्पें लगाते थे. मेरे पिता ऐडमिरल रामदास आज़ादी के बाद पहले भारतीय नौसेनाध्यक्ष बनाए गए थे. मेरी नज़र में नानावती बहुत ही पेशेवर नौसैनिक अधिकारी थे. मुझे याद है जब इन दोनों की शादी हुई थी. सिल्विया बहुत सुंदर थीं. नानावती बहुत डैशिंग थे और लोग हम उनको हीरो वरशिप किया करते थे. गज़ब के कपल थे वो दोनों.’

दिलचस्प बात ये थी कि कमांडर नानावती को उनकी गिरफ़्तारी के बाद आर्थर रोड जेल में न रख कर नौसेना की जेल में रखा गया था.

कहा तो यहाँ तक जाता था कि उनके कुत्ते तक को उनसे मिलवाने नौसेना की उस जेल में ले जाया जाता था.

जब भी नानावती अदालत में सुनवाई के लिए आते, वो नौसेना की सफ़ेद बुर्राक वर्दी पहने हुए होते और उनको मिले तमग़े उन पर चमक रहे होते. मैंने बची करकरिया से पूछा, ”क्या उन्होंने ऐसा अपने वकीलों की सलाह पर किया था?”

ब्लिट्ज़ अख़बार की सुर्खीइमेज कॉपीरइटJUGGERNAUT

‘ब्लिट्ज़’ का समर्थन

बची का जवाब था, ”ऐसा लगता है कि ऐसा उन्होंने जानबूझ कर किया था. एक तो वो लंबे-चौड़े थे… छह फ़ीट से ऊँचा उनका कद था. अदालत में ये चीज़ बारबार कही गई कि नानावती की गिनती भारतीय नौसेना के सबसे काबिल अफ़सरों में होती है. ऐसा लग रहा था कि प्रेम ने उनकी बीबी को अपने प्रेम जाल में फंसा कर ग़ैर देशभक्तिपूर्ण काम किया था.”

इस पूरे मामले में बंबई से छपने वाला अंग्रेज़ी टैबलॉएड ‘ब्लिट्ज़’ खुल कर नानावती के समर्थन में उतर आया.

आजकल आमतौर से अपराधी का मीडिया ट्रायल किया जाता है, लेकिन तब ‘ब्लिट्ज़’ ने पीड़ित का मीडिया ट्रायल कर एक नई मिसाल कायम की थी.

सबीना गडियोक जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के एके किदवई मीडिया रिसर्च सेंटर में प्रोफ़ेसर हैं जिन्होंने इस हत्याकांड के उस समय के मीडिया कवरेज पर एक लेख लिखा है.

सबीना बताती हैं, ”टेलीविज़न युग से पहले नानावती केस एक तरह का मीडिया इवेंट था. प्रेम आहूजा के नाम पर तौलिए बिकने लगे और हॉकर आवाज़ें लगाने लगे, आहूजा का तौलिया… मारेगा तो भी नहीं गिरेगा.”

सबीना गडियोक, रेहान फ़ज़ल

राष्ट्रीय महत्व

जब नानावती कोर्ट में जाते थे तो लड़कियाँ खड़े हो कर उन पर फूल फेंकती थीं. ब्लिट्ज़ ने सुनिश्चित किया कि हर क़ानूनी लड़ाई हारने के बावजूद नानावती दिमाग़ और दिल की लड़ाई जीतें.

शायद इसी वजह से उन्हें माफ़ी भी मिली, लेकिन उन्हें अपने ऊँचे उठते करियर से हाथ धोना पड़ा. इस तरह से एक स्कैंडल को राष्ट्रीय महत्व मिल गया.

ये एक ऐसा समय नहीं था जिसे राजनीतिक रूप से ठंडा कहा जा सके. पाकिस्तान के साथ भारत का तनाव बढ़ रहा था. चीन के साथ भी भारत के मतभेद शुरू हो चुके थे.

नए राज्यों का गठन हो रहा था. केरल में पहली कम्युनिस्ट सरकार का गठन हो चुका था. लेकिन इसके बावजूद हर जगह नानावती केस की चर्चा हो रही थी. दिल्ली के अख़बारों में भी इसका काफ़ी ज़िक्र था.’

मीडिया कवरेज का ही असर था कि अपराध करने के बावजूद पूरे देश की सहानुभूति नानावती के साथ थी. यहाँ तक कि कुछ हलकों में इस मुक़दमे की तुलना महात्मा गांधी की हत्या के मुक़दमे से की गई थी.

नेहरू और कृष्ण मेनन

गांडी हत्याकांड से तुलना

सबीना बताती हैं, ‘इंडियन एक्सप्रेस ने न सिर्फ़ इसकी गांधी हत्याकांड बल्कि बंगाल के भुवाल संन्यासी मुकदमे, मेरठ कॉन्सपिरेसी केस और यहाँ तक कि भगत सिंह के मुकदमे से भी इसकी तुलना की.’

ब्लिट्ज़ इस हद तक गया कि उसने ये तर्क भी दे डाला कि कमांडर नानावती को सिर्फ़ इसलिए छोड़ दिया जाए कि चीन के साथ युद्ध में उनके विशाल अनुभव का फ़ायदा उठाया जा सके.

ये पहला मौका था जब नौसेनाध्यक्ष ऐडमिरल कटारी ख़ुद अपने कैनबरा विमान से उड़ कर नानावती के पक्ष में गवाही देने बंबई पहुंचे थे. पूरी नौसेना और यहाँ तक कि रक्षा मंत्री वी के कृष्ण मेनन भी खुल कर नानावती के समर्थन में आ गए थे.

बची करकरिया बताती हैं, ”रक्षा मंत्री ने कई कदम आगे बढ़ कर नानावती का समर्थन किया. नानावती लंदन में भारतीय उच्चायोग में नैवेल अटाशी के पद पर काम कर चुके थे. शायद उस समय से मेनन उनको जानते थे. नेहरू तक ने सफाई दी कि नानावती के किसी परिवार वाले ने उनकी सिफ़ारिश उनसे नहीं की थी. लेकिन नौसेनाध्यक्ष ने ज़रूर कहा था कि नानावती बहुत काबिल अफ़सर हैं, इसलिए उनके साथ इतनी सख़्ती से पेश नहीं आया जाए.’