Shami refused to meet me: Hasin Jahan

New Delhi [India], Mar. 27 (ANI): Mohammed Shami’s estranged wife Hasin Jahan, who was in Delhi to meet the Indian pacer, on Tuesday alleged that Shami not only refused to see her but also threatened her.

Jahan was in Delhi to see Shami after the fast bowler met with a road accident and suffered injuries.

“I had come to see Shami as he was injured, but he refused to meet me. He threatened me and said ‘I will see you in court now’,” Jahan told reporters here.

Jahan and Shami are currently fighting a legal battle after the former accused the latter of having extra-marital affairs.

“Yes he met and played with our daughter, but he did not acknowledge me, his mother was acting like a bodyguard,” Jahan added.

Shami has been booked under various bailable and non-bailable offences, including an attempt to murder, after Jahan’s complaint. (ANI)

BJP defends its IT head over K’taka poll dates row

Union Minister of Minority Affairs Mukhtar Abbas Naqvion Tuesday defended Bharatiya Janata Party (BJP) IT Cell head Amit Malviya for his tweet on Karnataka assembly election dates.

Naqvi said Malviya had no intention to undermine the stature of the Election Commission (EC).

Talking to media, Naqvi said, “Amit Malviya’s tweet was based on a TV channel’s source. He had no intention to undermine the stature of the EC. A Karnataka Congress leader had also tweeted the same thing. We agree that he (Malviya) should not have tweeted it.”

A delegation led by Naqvi met the EC officials in connection with the case.

Ahead of the announcement of polling and counting dates for Karnataka, Malviya took to Twitter to announce that the polling date would be May 12 and counting would be on May 18.

However, following social media uproar on his knowledge of the dates prior to the official announcement, Malviya deleted the tweet.

On a related note, a delegation led by Naqvi is slated to meet EC officials in connection with Malviya’s tweet on the election dates.

The 224-member Karnataka Assembly will go to polls on May 12, and counting of votes will be held on May 15, as announced by Chief Election Commissioner O P Rawat in a press conference held earlier today. (ANI)

बड़े से बड़ा पुलिस ऑफिसर भी तुरंत सुनेगा आपकी बात, बस जान लें ये 7 बातें

> फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) एक रिटन स्टेटमेंट होता है। कॉग्निजेबल ऑफेंस होने पर पुलिस एफआईआर लिखने के बाद इन्वेस्टिगेशन शुरू करती है। कॉग्निजेबल ऑफेंस वह होता है, जिसमें पुलिस बिना वारंट के संबंधित व्यक्ति को अरेस्ट कर सकती है। ऐसे में पुलिस को कोर्ट से भी किसी तरह की परमीशन नहीं लेना होती।

> वहीं नॉन कॉग्निजेबल ऑफेंस होने पर एफआईआर लिखने से पहले पुलिस को मजिस्ट्रेट की परमीशन लेना होती है। बिना वारंट के पुलिस गिरफ्तारी नहीं कर सकती।

शिकायतकर्ता को होता है कॉपी लेने का अधिकार,

> ऐसा जरूरी नहीं है कि सिर्फ पीड़ित व्यक्ति ही एफआईआर लिखवाए। कोई भी ऐसा व्यक्ति जिसे घटना की जानकारी है वे एफआईआर दर्ज करवा सकता

है। यदि किसी पुलिस अधिकारी को किसी घटना की जानकारी है तो वह खुद भी एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं। वहीं एफआईआर लिखने में देरी नहीं की जा सकती। उचित कारण होने पर ही एफआईआर लिखने में देरी हो सकती है।

> शिकायतकर्ता को एफआईआर की एक कॉपी लेने का अधिकार होता है। पुलिस इसके लिए मना नहीं कर सकती। इसके एवज में किसी तरह का शुल्क भी शिकायतकर्ता से नहीं लिया जा सकता।

> वहीं एफआईआर लिखने के बाद यह पुलिस ऑफिसर की ड्यूटी होती है कि एफआईआर में जो लिखा गया है, वो शिकायतकर्ता को पढ़कर सुनाया जाए। शिकायतकर्ता इससे सहमत हुआ तो वो इस पर हस्ताक्षर कर सकता है। पुलिस अधिकारी एफआईआर में खुद कुछ टिप्पणी नहीं कर सकते। वे किसी पॉइंट को हाइलाइट भी नहीं कर सकते।

> यदि कोई भी पुलिस अधिकारी एफआईआर लिखने से मना करता है तो शिकायतकर्ता क्षेत्र के सीनियर ऑफिसर को इसकी शिकायत कर सकता है। वहां से भी समस्या का समाधान न हो तो मजिस्ट्रेट के पास शिकायत की जा सकती है।

मजिस्ट्रेट पुलिस को एफआईआर लिखने के लिए आदेश दे सकते हैं।

> एफआईआर में घटना की पूरी जानकारी लिखवाना होती है, जैसे अपराध कब हुआ, कहां हुआ, समय क्या था, किसने किया, किसने देखा, क्या नुकसान हुआ आदि। एफआईआर दर्ज होने के शुरुआती एक हफ्ते में प्रारंभिक जांच पुलिस को पूरी करना जरूरी होता है।

सऊदी की गरीबी दिखातीं PHOTOS, अमीर शेखों के देश में भी ऐसे जी रहे लोग

इंटरनेशनल डेस्क.अमीर शेखों के देश सऊदी अरब की आमतौर पर एक ही तस्वीर सामने आती है। जबकि यहां एक तबका ऐसा भी है, जो जबरदस्त गरीबी में जी रहा है। फ्रेंच फोटोग्राफर एरिक लफ्फार्ज ने यहां के दोनों तबके के लोगों की डेली लाइफ कैमरे में कैद की। उन्होंने यहां के शहरी और अमीरों के इलाकों से ज्यादा गांवों और गरीब तबकों वाले इलाकों का दौरा दिया। यहां एक तरफ अमीरी की चकाचौंध है तो दूसरी तरफ जबरदस्त गरीबी दिखती है। उन्होंने हर फोटो के पीछे की कहानी बयां की थी और अपने अनुभव शेयर किए। हर जगह दिखेंगे पुलिस एस्कॉर्ट से घिरे…

– एरिक ने बताया कि यहां टूरिस्ट वीजा के लिए लोकल ट्रैवल एजेंसी या कंपनी से स्पॉन्सरशिप लेने की जरूरत होती है।
– मक्का में तीर्थयात्रियों की जबरदस्त भीड़ आने के चलते एजेंसी गैर मुस्लिमों की मदद में ज्यादा इंट्रेस्ट नहीं दिखाती हैं।
– लिहाजा, एरिक को भी वीजा के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ा और 2012 में वो 15 दिन के टूर पर सऊदी पहुंचे।
– यहां के नियम-कायदे के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि 30 साल से कम उम्र की महिला यहां बिना हसबैंड या भाई के घर से बाहर नहीं निकल सकती है।
– इसके साथ ही एल्कोहल, पोर्नोग्राफी, गैम्बलिंग और पोर्क को लेकर यहां सख्त तौर पर मनाही है। महिलाओं के लिए अबाया पहनना कम्पलसरी है।
– एरिक ने बताया कि यहां हर जगह आपका वेलकम होगा, लेकिन आप हर जगह खुद को पुलिस एस्कॉर्ट से घिरा भी पाएंगे।

पहला अनुभव रहा ऐसा
– एरिक ने बताया कि इस देश में दाखिल होने के वक्त प्लेन में पहला अनुभव ही बहुत दिलचस्प रहा।
– लैंडिंग से पहले लुफ्थांसा एयरलाइन्स के मेरे प्लेन में एल्कोहल की सारी बोतलें एक बॉक्स में भर दी गई थीं।
– साथ ही, सभी पैसेंजर्स को हिदायत दी गई कि अगर किसी पास इजरायली करंसी हो तो उसे छिपाकर रखें।
– एरिक ने कहा, “देश के अंदर पहला अनुभव अच्छा नहीं रहा, क्योंकि इंडोनेशियन वर्कर के साथ लाइन में खड़े होकर यहां एंट्री करनी पड़ी।”

गाजा जैसा दिखता है आधा सऊदी
– एरिक का यहां घूमने के बाद पहला इम्प्रेशन यही था कि देश के कई इलाकों में अब भी काफी गरीबी है।
– उन्होंने कहा कि देश करीब से देखने के बाद उतना अमीर नहीं लगता है, जिसकी हम कल्पना करते हैं।
– एरिक ने कहा, ”मैं यहां के रिच और बिलेनियर्स के इलाकों से ज्यादा ऐसे पिछड़े इलाकों में गया जो गाजा जैसे दिखते हैं। मैंने कुछ रिमोट विलेज का भी दौरा किया।
– उनके मुताबिक, कल्चर के मामले में सऊदी के लोग बहुत अलग हैं। यहां ह्यूमन राइट्स और जस्टिस में बहुत बड़ा गैप है।
– गाइड ने उन्हें यहां रियाद का वो स्क्वेयर भी दिखाया, जहां पब्लिक के बीच में मर्डर के दोषियों का सिर कलम किया जाता है।
– एरिक ने जब गाइड को बताया कि उनके देश में इस तरह मौत देने पर 1881 में ही पाबंदी लग गई थी, तो उसे विश्वास नहीं हो रहा था।

मेहमानवाजी की तारीफ की
– एरिक ने यहां की मेहमानवाजी की तारीफ की और कहा कि इस सफर में मैं सिर्फ पुरुषों से मिला। कभी महिलाओं से मुलाकात नहीं हुई।
– एरिक के मुताबिक, सऊदी में लोग काम नहीं करते। उनकी जिंदगी सरकार से मिली रकम पर चलती है। ऐसे वो खाली रहते हैं और हमेशा आपको गाइड करने और आपके खाने का इंतजाम करने के लिए तैयार रहते हैं।

300 लोगों की लिस्ट में चमकी यह एक बॉलीवुड एक्ट्रेस, फोर्ब्स ने जारी की लिस्ट

मुंबई.बिजनेस मैगजीन फोर्ब्स ने ’30 अंडर 30 एशिया’ की लिस्ट जारी की है। खास बात यह है कि इस लिस्ट में बॉलीवुड से सिर्फ एक एक्ट्रेस ही अपनी जगह बना पाई है। ‘रब ने बना दी जोड़ी’ (2008), ‘पीके’ (2014), ‘एन एच 10’ (2015) और ‘सुल्तान’ (2016) जैसी फिल्मों की एक्ट्रेस रहीं 29 साल की अनुष्का शर्मा ने फोर्ब्स की इस लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। 24 देशों के चेहरों को किया शामिल…

– फोर्ब्स ने अपनी इस लिस्ट में एशिया पैसिफिक के 24 देशों के कई पॉपुलर चेहरों को जगह दी।
– करीब 300 लोगों को इस लिस्ट में शामिल किया गया,जिन्हें आर्ट, एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट और बिजनेस सहित 10 अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया। इन सभी का चयन अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान को ध्यान में रखते हुए किया गया।
– लिस्ट में इंडियन बैडमिंटन प्लेयर पीवी सिंधू का नाम भी शामिल है।

ऐसा रहा अनुष्का का करियर

2007 में अनुष्का शर्मा ने बतौर मॉडल करियर की शुरुआत की थी। इसके करीब एक साल बाद 2008 में यशराज प्रोडक्शन की फिल्म ‘रब ने बना दी जोड़ी’ से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा।
– कई सुपरहिट फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने अपना प्रोडक्शन हाउस क्लीनस्लेट फ्लिम्स खोला और 2015 में इसके बैनर तले पहली फिल्म ‘एनएच 10’ बनाई, जिसकी एक्ट्रेस भी खुद अनुष्का शर्मा ही थीं।
– उन्होंने ‘फिल्लौरी'(2016) और ‘परी’ (2017) को भी प्रोड्यूस किया था।

017 में की अनुष्का ने शादी

यूपी राज्यसभा चुनाव: बीजेपी ने एसपी-बीएसपी गठबंधन को दी मात, 10 में से 9 सीटें जीतीं; एक एसपी के खाते में

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों में से 9 पर बीजेपी ने जीत हासिल की। एक सीट सपा के खाते में गई है। 10वीं सीट के लिए बीएसपी के बीआर अांबेडकर और अनिल अग्रवाल के बीच मुकाबला था, जीत बीजेपी को मिली। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने 9 सीटें जीतने की पुष्टि की। उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी का अवसरवादी चेहरा लोगों ने देखा। आज से नहीं प्रदेश की जनता ने काफी पहले से देखा है। मैं सभी सहयोगियों, विधायकों को बधाई देता हूं। समाजवादी पार्टी दूसरों से ले सकती है दे नहीं सकती है।”

बीजेपी अरुण जेटली (वित्त मंत्री), डॉ. अशोक बाजपेयी, विजयपाल सिंह तोमर, सकलदीप राजभर, कांता कर्दम, डॉ. अनिल जैन, अनिल अग्रवाल जीवीएल नरसिम्हा राव, हरनाथ सिंह यादव।
एसपी जया बच्चन

1) 10वीं सीट पर जीत के लिए मशक्कत क्यों?

– 400 विधायकों ने वोट डाले, यानी राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी पार्टी के पास 37 विधायक जरूरी थे।

– भाजपा गठबंधन के पास 324 सीटें हैं। एक विधायक लोकेन्द्र सिंह का 21 फरवरी को सड़क हादसे में निधन हो गया। वे नूरपुर विधानसभा सीट से चुने गए थे। इस तरह बीजेपी के पास 323 सीटें बचती हैं। 8 सदस्यों को राज्यसभा पहुंचाने के बाद 27 विधायक बचते हैं। ऐसे में एक और सदस्य को अपर हाउस भेजने के लिए 10 विधायकों का समर्थन चाहिए था।

2) बीएसपी की मुश्किल कैसे बढ़ी?

– बसपा के मुख्तार अंसारी और सपा के हरिओम यादव जेल में हैं। हाईकोर्ट ने उनके राज्यसभा चुनाव में वोट डालने पर बैन लगा दिया। बसपा विधायक अनिल सिंह ने भी भाजपा के फेवर में वोटिंग कर दी।

– इसके बाद आंबेडकर को राज्यसभा भेजने के लिए बीएसपी के पास 17, सपा के 8, कांग्रेस के 7, राष्ट्रीय लोकदल के 1 वोट के सहारे थी। इस तरह टोटल 33 विधायक हो रहे हैं। जीत के लिए चार और विधायकों की जरूरत थी।

3) जरूरी वोट नहीं होने के बावजूद समीकरण भाजपा के फेवर में क्यों?
– किसी उम्मीदवार को 37 वोट नहीं मिले, इसके बाद दूसरी वरीयता (सेकंड प्रेफरेंस) के आधार पर जीत का फैसला हुआ। इसमें 10वीं सीट पर बीजेपी का कैंडिडेट जीत गया। बता दें कि राज्यसभा चुनाव में वोटिंग के दौरान हर विधायक तय कर सकता है कि वो पहली, दूसरी, तीसरी वरीयता में किसे मत देगा।

– दूसरी वरीयता वाले वोटों की गिनती होती है तो इसमें सभी 400 विधायकों के प्रिफरेंस को देखा गया। भाजपा के पास 323 विधायक होने के कारण 10वीं सीट पर उसके उम्मीदवार के जीतने की संभावनाएं ज्यादा थीं, जो सही साबित हुईं।

4) क्या है राज्यसभा का गणित?

– राज्यसभा चुनाव का फॉर्मूला है= (खाली सीटें + एक) कुल योग से विधानसभा की सदस्य संख्या से भाग देना। इसका जो जवाब आए उसमें भी एक जोड़ने पर जो संख्या होती है। उतने ही वोट एक सदस्य को राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए चाहिए।
यूपी में विधायक 403 हैं। दो विधायक वोट नहीं करेंगे। एक विधायक का निधन हो गया।

ऐसे में संख्या 400 हो जाती है।

यूपी में एक राज्यसभा सीट के लिए जरूरी वोट इस तरह तय हुए

10 (खाली सीट)+1= 11

400/11= 36.45

36.45 +1= 37.45

5) यूपी में किसके पास कितनी ताकत?
– उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं। एक सीट बीजेपी विधायक का निधन होने की वजह से खाली है।

पार्टी सीट
1 बीजेपी 311
2 अपना दल 9
3 भारतीय समाज पार्टी 4
बीजेपी अलायंस 324
4 समाजवादी पार्टी 47
5 बहुजन समाज पार्टी 19
6 कांग्रेस 7
7 राष्ट्रीय लोक दल 1
8 निषाद पार्टी 1
9 निर्दलीय 03

Facebook अकाउंट नहीं है सिक्योर, तो इन 11 सेटिंग्स को तुरंत करें अप्लाई

फेसबुक CEO मार्क जुकरबर्ग के मुताबिक यूजर्स के डाटा सीक्रेसी को लेकर कंपनी से गलती हुई है।

यूटिलिटी डेस्क। क्या आपका फेसबुक अकाउंट सेफ है? ये सवाल इसलिए बड़ा हो गया है, क्योंकि फेसबुक CEO मार्क जुकरबर्ग के मुताबिक यूजर्स के डाटा सीक्रेसी को लेकर कंपनी से गलती हुई है। ऐसे में अब कंपनी यूजर्स के पर्सनल डाटा का गलत यूज रोकने के लिए प्लानिंग कर रही है। पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें फेसबुक से महिला यूजर्स के फोटो चुराकर उनका गलत इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में हम फेसबुक अकाउंट को सेफ करने के कुछ टिप्स बता रहे हैं।

1. फोटो सेफ्टी टिप

फेसबुक में प्राइवेसी सेटिंग्स का ऑप्शन होता है। इसके लिए सबसे पहले फेसबुक पेज पर ऊपर से राइट साइड में दिए गए आइकॉन पर क्लिक करें। इसके बाद ‘See More Settings’ पर क्लिक करें।

अब आपको ‘Privacy Settings and Tools’ ऑप्शन दिखाई देगा। इसमें सेटिंग्स को बदलकर आप अपनी प्रोफाइल को अनचाहे लोगों से छुपा सकते हैं। इसके लिए आपको ‘Who can see my future posts?’ पर क्लिक करना है। इसके बाद ‘Only Me’ पर क्लिक करें।

2. फॉलोअर्स की सेटिंग

इस सेटिंग्स के बाद आपके पोस्ट कोई अन्य यूजर्स नहीं देख पाएंगे। फेसबुक आपके फ्रेंड्स के साथ फॉलोअर्स को भी आपके पोस्ट देखने की अनुमति देता है। अगर अपने पोस्ट सिर्फ फ्रेंड्स को ही दिखाना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे पहले सेटिंग्स में जाकर Followers ऑप्शन पर क्लिक करें। इसके बाद ‘Who can follow me’ ऑप्शन पर जाकर ‘Everybody’ से ‘Friends’ पर क्लिक करें।

3. कहीं से भी करें लॉगआउट

कई बार हम अपना फेसबुक अकाउंट लॉगआउट करना भूल जाते हैं। ऐसे में इससे कोई भी छेड़छाड़ कर सकता है। हालांकि, इसे कहीं से भी लॉगआउट किया जा सकता है। यूजर फेसबुक अकाउंट ओपन करने के लिए जब भी लॉगइन करता है, उसका रिकॉर्ड सेव हो जाता है। यानी उसने कब, कहां और किस सिस्टम पर लॉगइन किया। अगर किसी सिस्टम पर वो लॉगआउट करना भूल गया है, तो उसे किसी भी सिस्टम से किया जा सकता है। फेसबुक के सिक्युरिटी ऑप्शन में यूजर्स के लिए ये सुविधा होती है। इसके लिए ये स्टेप फॉलो करें।

Settings > Security Settings > Where You’re Logged In

यहां पर आपके लॉगइन से जुड़ी जानकारी में शहर का नाम और डिवाइस टाइप होता है। इसके सामने End activity का ऑप्शन होता है, जिस पर क्लिक करते ही पुरानी डिवाइस से यूजर का अकाउंट लॉगआउट हो जाता है।

4. लॉगइन अलर्ट को ON करें

इसका फायदा ये है कि कोई पर्सन आपके अकाउंट को गलत तरीके से ओपन करने की कोशिश करता है या गलत पासवर्ड डालता है तो उसका अलर्ट आपको ई-मेल ID पर मिल जाता है। फेसबुक के लॉगइन अलर्ट फीचर को ON करने के लिए ये स्टेप फॉलो करें।

Settings >> Security Settings >> Login Alerts

यहां पर यूजर को Notifications और Email address के अलर्ट ऑप्शन को ON करके सेव चेंज करना है।

5. सिक्युरिटी कोड एक्टिव करें

इस फीचर की मदद से आपको अकाउंट से जुड़ी जानकारी मिलती है। फेसबुक का ये फीचर स्मार्टफोन यूजर्स के लिए है। ऐसे यूजर्स जो फेसबुक ऐप का इस्तेमाल करते हैं, वे सिक्युरिटी के लिए कोड एक्टिव कर सकते हैं। इस कोड को ब्राउजर और ऐप दोनों की मदद से अप्लाई किया जाता है। कोड जनरेट करने के लिए इन स्टेप को फॉलो करें।

Settings >> Security Settings >> Code Generator

यहां पर कोड अनेबल का ऑप्शन आएगा। इस पर जैसे ही क्लिक करेंगे, एक बॉक्स आएगा जिसमें सिक्युरिटी नंबर डालना होता है। यूजर को सिक्युरिटी नंबर फेसबुक ऐप से मिलता है। ऐप के Menu में Code Generator का ऑप्शन होता है, जहां से ये नंबर मिलता है। इसे 30 सेकंड के अंदर बॉक्स में सबमिट करना होता है। हर 30 सेकंड में नया कोड जनरेट होता है। इसका फायदा यह होगा कि यदि कोई आपके अकाउंट में बदलाव करता है तो उसके लिए आपके मोबाइल अकाउंट की भी जरूरत पड़ेगी।

6. https सिक्युरिटी चेक करें

फेसबुक की सिक्युरिटी को ध्यान में रखते हुए हमेशा ऐसे ब्राउजर का इस्तेमाल करना चाहिए जिसके एड्रेस बार पर https:// हो। यह हाईपरटैक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल होता है। इसके आगे एक लॉक का साइन होता है, जिससे यूजर के अकाउंट को पूरी सिक्युरिटी मिलती है। आपको ऐसे ब्राउजर पर काम नहीं करना चाहिए जिस पर लॉक नहीं दिख रहा हो। साथ ही यूजर को अपना पुराना वेब ब्राउजर लगातार अपडेट करते रहना चाहिए। यह बात केवल फेसबुक ही नहीं, किसी भी वेबसाइट को ओपन करते समय ध्यान रखनी चाहिए।

7. फ्रेंड रिक्वेस्ट

कई बार हमें ऐसे यूजर्स की फ्रेंड रिक्वेस्ट मिलती है, जिन्हें हम नहीं जानते। साथ ही कई यूजर्स बार-बार रिक्वेस्ट सेंड करते हैं। ये ऐसे यूजर्स हो सकते हैं जिनका मकसद आपके अकाउंट को हैक करना हो सकता है। ऐसे यूजर्स की रिक्वेस्ट को रोका जा सकता है।

इसके लिए सबसे पहले Privacy सेटिंग पर जाएं। इसके बाद Who can contact me? ऑप्शन में आपको ‘Who can send you friend requests’ सेटिंग मिलेगी। इस पर क्लिक करने के बाद आपको ‘Everyone’ to ‘Friends of Friends’ में से अपने मनपसंद ऑप्शन पर क्लिक करना है।

8. मैसेज फिल्टर

अगर आपके इनबॉक्स में रोजाना कई सारे अनवॉन्टेड मैसेज आ रहे हैं, जिससे आपको परेशानी हो रही है, तो ‘Whose messages do I want filtered into my inbox’ पर क्लिक करें। इसमें आपको ‘Basic’ और ‘Strict’ ये दो ऑप्शन मिलेंगे। यह आपको तय करना है कि आप यहां किस तरह की सेटिंग करना चाहते हैं। इन्हें फिल्टर करना भी इसलिए जरूरी है क्योंकि इनसे भी आपकी प्राइवेट इन्फॉर्मेशन लीक हो सकती है।

9. हाइड FB ई-मेल ऐड्रेस

फेसबुक से आपके ई-मेल ऐड्रेस को चुराकर उस पर कई तरह के मैसेज और दूसरे मेल आते हैं। हालांकि, इसे छुपाने का भी ऑप्शन होता है। इसके लिए आपको ‘Who can look you up using the email address you provided?’ पर क्लिक करें। इसके लिए बाद ‘Everyone’ या ‘Friends’ पर क्लिक करें।

10. फोन नंबर

यदि आपने फेसबुक पर फोन नंबर दिया है, तो इसे भी यहां से चुराया जा सकता है। ऐसे में इसे हमेशा दूसरों से छुपाकर रखें। इसे हाइड रखने के लिए ‘Who can look you up using the phone number you provided?’ पर जाकर इसे ‘Everyone’ से हटाकर ‘Friends’ पर क्लिक करें।

11. टाइमलाइन और टैगिंग

कई बार कुछ गलत पोस्ट आपके अकाउंट के साथ शेयर कर दी जाती हैं। ऐसे में इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि कोई आपको टैग नहीं कर सके। इससे बचने के लिए आपको ‘Timeline and Tagging Settings’ में जाना होगा।

इन पर केवल ‘Only Me’ करें :

– ‘Who can post on your timeline’
– ‘Who can see posts you’re tagged in on your timeline’
– ‘Who can see what others post to your timeline’
– ‘When you’re tagged in a post, who do you want to add to the audience if they can already see it’

मुकेश अंबानी की जितनी जिंदगीभर की है कमाई, उतने जुकरबर्ग ने 2 दिन में गंवाए

मुंबई। डाटा लीक के मामले में दुनियाभर में फेसबुक की निंदा हो रही है। कंपनी CEO मार्क जुकरबर्ग ने इस संबंध में यूजर्स से माफी भी मांगी है। दूसरी तरफ यह मामला बाहर आने के पहले ही दो दिनों में फेसबुक का मार्केट केप में करीब 3,80,000 करोड़ रुपए (50 बिलियन डॉलर) का घाटा हुआ है।

# मुकेश अंबानी की है इतनी नेटवर्थ

विवाद के पहले इस सप्ताह की शुरुआत में फेसबुक की मार्केट वेल्यू 34,93,295 करोड़ रुपए थी। इसके बाद 2 ही दिनों में यह घटकर 31,13,565 करोड़ रुपए हो गई। इस तरह से फेसबुक की वेल्यू में 3,80,000 करोड़ की कमी आई। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यह राशि भारत के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी के नेटवर्थ 2,53,000 (38.9 बिलियन डॉलर) से भी डेढ़ गुना यानी 50 प्रतिशत ज्यादा है।

# हर मिनट पर 135 करोड़ का नुकसान

विवाद सामने आने के 48 घंटे में फेसबुक ने 3,80,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इस तरह से दो दिनों के 48 घंटे में फेसबुक ने हर घंटे 8125 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। यदि इसे मिनट में देखें, तो यह राशि 135 करोड़ रुपए प्रति मिनट होती है। वहीं, इसे सेकंड में देखें तो ये 2.26 करोड़ रुपए है

  • # मार्क जुकरबर्ग को 52 हजार करोड़ का नुकसान

    फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग की साख भी दांव पर लगी हुई है। ब्लूमबर्ग बिलियोनर इंटेक्स के अनुसार जुकरबर्ग की नेटवर्थ 4.90 लाख करोड़ में से 52 हजार करोड़ रुपए से घटकर 4.38 लाख करोड़ रह गई है।

     फेसबुक के शेयर में गिरावट

    फेसबुक के शेयर्स में भी भारी कमी देखी गई है। पिछले शुक्रवार 16 मार्च को बंद बाजार में जिस शेयर के भाव 185 डॉलर थे, वहीं मंगलवार 20 मार्च की शाम को घटकर 166.57 डॉलर तक पहुंच गए थे।

     

‘इराक में रहना ख़तरनाक है पर यहां भी तो ग़रीबी जान ले रही थी’

“इराक़ में रहना ख़तरनाक है लेकिन घर पर भी तो ग़रीबी परिवार की जान ही ले रही थी”, इराक़ के मूसल में मारे गए दविंदर सिंह की पत्नी मंजीत कौर के इन शब्दों में उनकी बेबसी साफ झलक रही थी.

52 साल के दविंदर उन 39 भारतीयों में शामिल थे, जिनकी हत्या कथित चरमपंथी संगठन आईएसने इराक के मूसल में कर दी थी.

यादों को आंसुओं में समेटे मंजीत आगे कहती हैं, ” जिस दिन वो जा रहे थे, उस दिन उनकी बहन ने बहुत समझाया कि इराक़ में युद्ध चल रहा है, लेकिन उन्होंने कहा कि चिंता मत करो, कुछ नहीं होगा मुझे.”

इतना कहते ही वो आंखें बंद कर लेती हैं. पलकों से ठोकर खाकर पुरानी यादें समेटे उनके आंसू जमीन पर गिरते हैं और लगता कि उनके तमाम सपने बिखर गए हैं.

मंजीत कौर ने बताया, “वो हमेशा कहते थे कि जहां धमाके और संघर्ष हो रहा है, वो जगह उनसे काफी दूर है और उनके आसपास माहौल ठीक है. जून 2014 में जब उनसे अंतिम बार बात हुई थी तब उनका अपहरण हो चुका था पर उन्होंने हमलोगों को जानकारी नहीं दी. वो हमें परेशान नहीं करना चाहते थे. लेकिन अब वो कुछ नहीं कर सकते हैं.”

दविंदर अपने पैतृक गांव रुड़का कलां में मजदूरी करते थे. वो 200 से 250 रुपए तक एक दिन में कमाते थे लेकिन उन्हें रोज काम नहीं मिलता था.

मंजीत कौर के तीन बच्चे हैं, जिनमें से दो जुड़वा हैं. पेट पालने के लिए मंजीत गांव के एक स्कूल में सिलाई सिखाती हैं. इस काम से वो हर महीने ढाई हज़ार रुपए कमाती हैं.

एक कमरे के जर्जर मकान में रहने वाली मंजीत याद करती हैं, “उन्होंने कहा था कि वो तीन-चार साल के लिए इराक़ जा रहे हैं और वहां से आने के बाद उनका अपना घर होगा.”

“वो इराक जा सकें इसके लिए हमलोगों ने एजेंट को देने के लिए डेढ़ लाख रुपए का कर्ज लिया था. एजेंट ने दावा किया था कि वो इलाका अमरीकी सैनिकों के नियंत्रण में हैं और वहां स्थिति बुरी नहीं है.”

दविंदर 2011 में इराक़ गए थे. उस समय उनका बड़ा बेटा छह साल का था और जुड़वा बच्चे महज आठ महीने के थे.

मंजीत कहती हैं, “अपहरण होने से पहले तक वो हर महीने अपनी कमाई के 25 हजार रुपये में से ज्यादातर भेज देते थे.”

पिछले चार सालों से मंजीत की अपने पति से किसी तरह की बात नहीं हुई पर उनकी आंखों में उनके आने की उम्मीदें बरकार थीं. “जब भी मैं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मिलती थी तो वो हमें उम्मीद नहीं खोने को कहती थीं.”

कुछ महीने पहले सरकार ने उनका डीएनए सैंपल लिया था. वो कहती हैं, “डीएनए लेते वक्त हमलोगों को कुछ नहीं बताया गया था कि वो इसे क्यों ले रहे हैं, पर गांव वाले यह अनुमान लगा रहे थे कि शायद दविंदर वहां बीमार हैं, इसलिए ऐसा किया जा रहा है.”

बच्चे की चाहत

मंगलवार को गांव की कुछ महिलाओं ने जब उन्हें सरकार की ओर से दी गई जानकारी के बारे में बताया तो वो भागती हुई अपने मायके पहुंच गईं. “मैं मौत की बात जानकर हैरान थी. मैं अपने मायके चली आई.”

वो अपने जुड़वा बच्चों में से एक की तरफ देखते हुए कहती हैं, “ये अपने पिता के आने की बात पूछता रहता था और हमलोग हमेशा ये कहते थे कि वो विदेश में रहते हैं. जब वो लौटेंगे तो उनके लिए साइकिल लेकर आएंगे. लेकिन अब वो कभी नहीं आएंगे.”

मूसल में मारे गए 39 लोगों में से 31 पंजाब से थे. बेहतर अवसरों की तलाश में पंजाबियों के विदेश जाने की चाहत जगजाहिर है. राज्य में गरीबी और नौकरियों की कमी के चलते वो युद्ध क्षेत्र में भी जाने से नहीं कतराते हैं.

जाने वालों की मजबूरियां

32 साल के संदीप कुमार का नाम भी उन 39 मृतकों की सूची में शामिल हैं. मल्सियान के नजदीक एक गांव में रहने वाले संदीप भी दिहाड़ी मजदूर थे.

अपनी चार बहनों की परवरिश के लिए वो 2012 में इराक़ गए थे. संदीप के भाई कुलदीप कुमार कहते हैं, “परिवार हर महीने पैसे का इंतजार करता था.”

संदीप के परिवार की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके घर के दरवाजे में किवाड़ तक नहीं हैं.

धूरी के प्रीतपाल शर्मा भी मारे गए 39 लोगों में से एक थे. उनकी पत्नी राज रानी कहती हैं, “वो वहां 2011 में गए थे क्योंकि यहां करने को कुछ नहीं था. हमलोगों को बताया गया था कि इराक़ में बहुत पैसा है लेकिन उन्हें वहां भी कमाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती थी.”

सेक्स वीडियो पर महिला की खुदकुशी

इटली में एक महिला के सेक्स वीडियो पर खुदकुशी करने के मामले में चार लोगों से पूछताछ की जा रही है.

मंगलवार को 31 साल की तिज़याना कैनटोन ने नेपल्स के नज़दीक म्यूनानो में आत्महत्या कर ली थी.

इस महिला ने महीनों तक अपने सेक्स वीडियो को इंटरनेट से हटाने के लिए लड़ाई लड़ी थी.

ये सेक्स वीडियो उसने अपने पुराने पुरूष मित्र और तीन अन्य लोगों को भेजा था, जिन्होंने इसे ऑनलाइन कर दिया.

उनका वीडियो में कहा शब्द “तुम फ़िल्म बना रहे हो ? ब्रावो”, एक ऑनलाइऩ मज़ाक बन गया.

इसे 10 लाख से अधिक लोगों ने देखा और वह हंसी का पात्र तो बनीं ही, उन पर गालियों की बौछार भी होने लगी.

इस मामले में चार लोगों से महिला की मानहानि करने पर पूछताछ की जा रही है.

सेक्स वीडियो के वायरल होने के बाद तिज़याना ने नौकरी छोड़ दी और जगह बदल दी. यहाँ तक कि वह अपना नाम बदलने की प्रक्रिया में थी ,लेकिन ये कहानी उनका पीछा नहीं छोड़ रही थी.

अदालती मामले में तिज़याना ने ” राइट टू बी फॉरगोटन (भुला दिए जाने का अधिकार)” के तहत ये केस जीता और अदालत ने फेसबुक सहित वीडियो को कई साइट्स और सर्च इंजनों से हटाने का आदेश दिया.

उन्हें मुकदमे की फीस के बीस हजार यूरो अदा करने को भी कहा गया, जिसे स्थानीय मीडिया में ” आखिरी अपमान” कहा गया है.

इटली के प्रधानमंत्री मैटियो रेंजी ने कहा,” एक सरकार के तौर पर हम अधिक नहीं कर सकते हैं. ” यह विशेषतः एक सांस्कृतिक लड़ाई है- एक सामाजिक और राजनीतिक लड़ाई भी. हमारी प्रतिबद्धता जो भी हम कर सकते हैं वह करने के प्रयास की है… महिलाओं के खिलाफ़ हिंसा ख़त्म न होने वाली घटना नहीं है.”

उनकी शवयात्रा का सीधा प्रसारण किया गया था.

रोहिंग्या संकट: मुझे नहीं पता था कि मेरे साथ रेप करेंगे

बांग्लादेश के रोहिंग्या शरणार्थी कैंपों से वेश्यावृत्ति के लिए किशोरावस्था में लड़कियों की तस्करी की गई.

इन कैंपों से विदेशियों को आसानी से सेक्स मुहैया कराया जा रहा है. ये लड़कियां म्यांमार में जारी संघर्ष से जान बचाकर अपने परिवार के साथ बांग्लादेश भागकर आई हैं.

अनवरा की उम्र 14 साल हो रही है. म्यांमार में अपने परिवार के मारे जाने के बाद वो बांग्लादेश आ गई थी. वो मदद के लिए बांग्लादेश की सड़क पर भटक रही थी. अनवरा ने कहा, ”एक वैन से महिलाएं आईं. उन्होंने मुझसे साथ आने के लिए कहा.”

मदद स्वीकार लेने के बाद उसे कार में गठरी की तरह डाला दिया गया. अनवरा से सुरक्षित और नई ज़िंदगी का वादा किया गया था. अनवरा को पास के शहर के बजाय कॉक्स बाज़ार ले जाया गया.”

अनवरा ने कहा, ”कुछ ही समय में मेरे पास दो लड़कों को लाया गया. उन्होंने मुझे चाक़ू दिखाकर मेरे पेट पर घूंसा मारा. मेरी पिटाई की गई क्योंकि मैं उन्हें सहयोग नहीं कर रही था. इसके बाद दोनों लड़कों ने मेरे साथ रेप किया. मैं उनके साथ संबंध नहीं बनाना चाहती थी, लेकिन मेरे साथ रेप कभी थमा नहीं.”

यहां के आसपास के शरणार्थी कैंपों में वेश्यावृत्ति के लिए तस्करी के क़िस्से आम है. इसमें महिलाएं और बच्चियां मुख्य रूप से पीड़ित हैं. फाउंडेशन सेंटनल एनजीओ के साथ बीबीसी की टीम बाल शोषण के ख़िलाफ़ इन कैंपो में क़ानूनी मदद पहुंचा रही है.

बांग्लादेश की जांच एजेंसी भी पूरे मामले में शामिल नेटवर्क का पता करने की कोशिश कर रही है.

बच्चों और उनके माता-पिता का कहना है कि उन्होंने विदेशों में नौकरी और राजधानी ढाका में मेड और होटल में काम दिलाने की पेशकश की थी.

सेक्स इंडस्ट्री से इन कैंपों से लड़कियों के लाने के लिए बड़े ऑफर दिए जा रहे हैं. लोगों को मुश्किल घड़ी में अच्छी ज़िंदगी देने की बात कही जा रही है और इसी आधार पर वेश्यावृत्ति के लिए तस्करी हो रही है.

मासुदा की उम्र 14 साल हो रही है. अभी उन्हें एक स्थानीय धर्मशाला में मदद के लिए लाया गया है. उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें कैंप से तस्करों के पास पहुँचा दिया गया.

मासुदा ने कहा, ”मुझे नहीं पता था कि मेरे साथ क्या होने जा रहा है. एक महिला ने मुझे नौकरी देने का वादा किया. सभी को पता है कि वो लोगों को सेक्स के लिए लाती है. वो एक रोहिंग्या है और यहां लंबे समय से है. हमलोग उसे जानते हैं. लेकिन मेरे पास कोई विकल्प नहीं था. यहां मेरे लिए कुछ भी नहीं था.”

मासुदा ने कहा, ”मैं अपने परिवार से बिछड़ गई हूं. मेरे पास कोई पैसा नहीं है. मेरे साथ म्यांमार में भी रेप हुआ था. मैं जंगल में अपने भाई और बहन के साथ खेलने जाती थी. अब मुझे नहीं पता है कि कैसे खेला जाता है.”

कई माता-पिता डरे हुए हैं कि वो अपने बच्चों को फिर कभी नहीं देख पाएंगे. वहीं कई लोगों को लगता है कि कैंप से बाहर की जिंदगी बेहतर होगी.

लेकिन इन बच्चों कौन ले जाता है और कहां ले जाता है? हाल ही में बीबीसी की जांच टीम ने कैंपों में लड़कियों तक पहुंचने की कोशिश की. बीबीसी की टीम ने विदेशी बनकर इसे परखने की कोशिश की.

48 घंटों के भीतर यहां हर चीज़ की व्यवस्थ हो गई. पुलिस को बताकर बीबीसी की टीम ने दलालों से विदेशियों के लिए रोहिंग्या लड़कियों को लेकर बात की. इनमें से एक व्यक्ति ने कहा, ”हमलोग के पास कई जवान लड़कियां हैं, लेकिन आपको रोहिंग्या ही क्यों चाहिए? ये तो बिल्कुल गंदी होती हैं.” वेश्यावृत्ति के पेशे में रोहिंग्या लड़कियों को सबसे सुलभ और सस्ता माना जाता है.

एक नेटवर्क में काम करने वाले कई दलालों ने हमें लड़कियों की पेशकश की. बातचीत के दौरान हमने ज़ोर देकर कहा कि हम लड़कियों के साथ तुरंत रात बिताना चाहते हैं.

तुरंत 13 से 17 साल के बीच की लड़कियों की तस्वीरें हमारे सामने आना शुरू हो गईं. नेटवर्क का फैलाव और लड़कियों की संख्या हैरान करने वाली थी.

अगर हमें तस्वीरों में लड़कियां पसंद नहीं आतीं तो वे और तस्वीरें लेकर हाज़िर हो जाते. अधिकतर लड़कियां दलालों के साथ रहती हैं. जब वो किसी ग्राहक के साथ नहीं होती हैं तो वे खाना बना रही होती हैं या झाड़ू-पोंछा लगा रही होती हैं.

हमें बताया गया, ‘हम लड़कियों को लंबे समय तक नहीं रखते. ज़्यादातर बांग्लादेशी मर्द ही यहां आते हैं. कुछ वक्त के बाद ये लोग बोर हो जाते हैं. छोटी उम्र की लड़कियां काफ़ी हंगामा करती हैं इसलिए हम उनसे जल्द ही छुटकारा पा लेते हैं.’

रिकॉर्डिंग और निगरानी के बाद हमने अपने सबूत स्थानीय पुलिस को दिखाए. एक स्टिंग ऑपरेशन के लिए एक छोटी सी टीम बनाई गई.

पुलिस ने तुरंत दलाल को पहचान लिया, “हम उसे अच्छी तरह से जानते हैं.”

ये समझ नहीं आया कि पुलिस वाला क्या कहना चाहता था. शायद वो दलाल ख़बरी था या एक घोषित अपराधी.

स्टिंग की शुरुआत हमने दलाल से उन दो लड़कियों की मांग से की जिनकी तस्वीरें हमें पहले दिखाई गई थीं.

हमने कहा कि लड़कियां कॉक्स बाज़ार के एक मशहूर होटल में शाम आठ बजे पहुंचाई जाएं.

फ़ाउंडेशन सेंटिनेल संस्था के विदेशी सदस्य को अंडरकवर ग्राहक बनाकर, एक अनुवादक के साथ होटल के बाहर खड़ा कर दिया गया.

जैसे ही मिलने का वक्त क़रीब आया, दलाल और अंडरकवर ग्राहक के बीच फ़ोन पर कई बार बातचीत हुई.

दलाल चाहता था कि ग्राहक होटल से बाहर आए. हमने मना कर दिया. दलाल ने दो लड़कियों को एक ड्राइवर के साथ हमारे पास भेजा.

पैसे के लेन-देन के समय हमारे अंडरकवर ग्राहक ने पूछा, “अगर आज सबकुछ ठीक रहा तो क्या आगे भी इसे जारी रख सकते हैं?”

ड्राइवर ने हां में सिर हिलाया.

इसके बाद पुलिस एक्शन में आ गई. ड्राइवर को गिरफ़्तार किया गया. बच्चों के साथ काम करने वाले विशेषज्ञों और मानव-तस्करी के जानकारों की मदद से लड़कियों के रहने के लिए जगह खोजी गई.

एक लड़की ने वहां जाने से मना कर दिया. लेकिन दूसरी मान गई.

लड़कियां ग़रीबी और वेश्यावृत्ति के बीच फंसी हुई थीं. उनका कहना था कि वेश्यावृत्ति के बिना न तो वो अपना पेट भर पाएंगी और न ही अपने परिवार का.

महिलाओं और बच्चों को अंतरराष्ट्रीय सीमा के आर-पार ले जाने के लिए एक नेटवर्क की ज़रूरत होती है.

इसे इंटरनेट पूरा करता है. इंटरनेट के ज़रिए संगठित अपराध के अलग-अलग सदस्य एक दूसरे के संपर्क में रहते हैं और सेक्स बेचने का धंधा भी होता है.

हमने रोहिंग्या बच्चों को बांग्लादेश के ढाका और चटगाँव, नेपाल के काठमांडू और भारत में कोलकाता ले जाए जाने की मिसालें देखीं.

कोलकाता की सेक्स इंडस्ट्री में उन्हें भारतीय पहचान पत्र दिए जाते हैं जिसकी वजह से उनकी असली पहचान ग़ायब हो जाती है.

ढाका में साइबर क्राइम यूनिट ने हमें बताया कि कैसे मानव तस्कर इंटरनेट के ज़रिए लड़कियों को बेचते हैं.

फ़ेसबुक पर बने ग्रुप सेक्स इंडस्ट्री को लुका-छिपे जारी रखने में मददगार साबित होते हैं.

हमें डार्क वेब के बारे में बताया गया जिसपर मौजूद इनक्रिप्टेड वेबसाइट्स इन गोरखधंधों को आसान बना देती हैं.

डार्क वेब पर एक यूज़र ने शरणार्थी संकट में फंसे रोहिंग्या बच्चों से फ़ायदा उठाने के तरीके बताए.

ये यूज़र आगे ये भी बताता है कि इन बच्चों को खोजने की बेहतर जगह कौन सी है.

इस बातचीत को अब सरकार ने इंटरनेट से हटा दिया है. लेकिन इससे हमें पता चलता है कि कैसे शरणार्थी संकट मानव तस्करों और बच्चों का यौन शोषण करने वालों का केंद्र बनते जा रहे हैं.

बांग्लादेश में ऑनलाइन और ऑफ़लाइन दोनों ही तरीकों से, मानव तस्करों का एक जाल फैलता जा रहा है.

रोहिंग्या संकट ने बांग्लादेश में सेक्स इंडस्ट्री शुरू नहीं की लेकिन इस संकट के बाद इसमें भारी इज़ाफ़ा हुआ है.

It will take longer than the age of the universe for fastest computer to decode Aadhaar data, UIDAI CEO tells SC

Aadhaar data is protected by a 2048-bit encryption and “once biometrics comes to us, it will never go away”, says Ajay Bhushan Pandey.

It will take “more than the age of the universe for the fastest computer on earth, or any supercomputer, to break one key of Aadhaar encryption,” according to CEO of Unique Identification Authority of India (UIDAI) Ajay Bhushan Pandey.

Mr. Pandey, who has been steering the Aadhaar project from its beginnings in 2010, was given the unique opportunity to conduct a presentation in a courtroom presided by a five-judge Constitution Bench led by Chief Justice of India Dipak Misra in the Supreme Court on Thursday.

In the hour-long presentation, which would continue on March 27, Mr. Pandey said the Aadhaar data was protected by a 2048-bit encryption and “once biometrics comes to us, it will never go away”.

Recounting his own life experience as a small town person who did not have a photo identity till he joined the Indian Administrative Service in the late 80s, Mr. Pandey said Aadhaar offered the answer to the ancient question, often asked by sages, i.e., “who am I?”

A “portable entitlement” against poverty

He said that for the first time Aadhaar offered the billion plus population of India a “robust, lifetime, nationally online, verifiable identity”. Through a massive exercise that would benefit mankind, India had “leap-frogged” to Aadhaar identity from proxy and local identification mechanisms like ration card. He termed Aadhaar a “portable entitlement” against poverty.

But Justice A.K. Sikri questioned Mr. Pandey’s narrative about the infallibility of Aadhaar, asking why then did the UIDAI blacklist 49,000 registered operators. The CEO replied that these operators were de-registered for corruption, carelessness and harassment of the public. “Some of them used to take money from the public, others would not enter the details properly. We have a zero-tolerance policy,” he said.

Justice Sikri persisted, “It sounds somehow strange that you blacklisted 49,000 of your operators for harassing people.”

Mr. Pandey said, “Initially we trusted these operators, but they ended up registering trees… Jamun trees.”

Mr. Pandey explained that biometric changes could be updated through a process called ‘Aadhaar update’.

Justice Sikri asked, “Aadhaar update can be done if a person knows there is such an option. You have covered a wide area of the country and brought tribal people and those living in the fringes under the Aadhaar regime. They are poor and illiterate. How will they know what to do.”

Justice Chandrachud said that eventually the onus was on the individual to get an Aadhaar update if she wanted to continue receiving her rightful entitlements. He went on to ask whether the UIDAI had any statistics on the number of Aadhaar authentication failures so far.

Other alternatives to biometric authentication

To this, Mr. Pandey referred to the provisions in the Aadhaar (Authentication) Regulations of 2016 to point out that there were other alternatives to biometric authentication like demographics and electronic One Time PIN (OTP).

He said the UIDAI cannot promise 100% authentication everytime. There may be connectivity or other technological issues across India, especially when the scheme covered over 1.2 billion people. “When biometric authentication does not work, we have instructed our officers to check the Aadhaar card and see that the case is genuine. A person should not be denied benefits because there is failure in authentication.”

Aadhaar, he said, was not the solution for a shopkeeper who refused a woman her ration under the PDS despite the successful authentication of her biometrics.

Justice Chandrachud said, “So you say that failure of service because of failure of authentication can be addressed. But failure of service despite authentication needs to be addressed separately.”

Additional Solicitor General Tushar Mehta answered the judge’s question, saying the conduct of the shopkeeper in question was the “failure of honesty”.

कभी कंगना के पैदा होने से नाखुश थे पेरेंट्स, देखें बचपन से अब तक के

मुंबई।एक्ट्रेस कंगना रनोट 31 साल की होने वाली हैं। 23 मार्च, 1987 को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के पास स्थित सुरजपूर (भाबंला) में जन्मी कंगना अपने बोल्ड किरदार, बड़बोलेपन, एक्टिंग स्किल्स या फिर पर्सनल लाइफ के चलते हमेशा सुर्खियों में रहती हैं। फिलहाल कंगना पर कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड मामले में आरोप लगे हैं। इसके मुताबिक, उन्होंने 2016 में रितिक रोशन का मोबाइल नंबर रिजवान सिद्दीकी से शेयर किया था। कंगना को अनवॉन्टेड चाइल्ड मानते थे पेरेंट्स…

कुछ साल पहले वुमन्स डे के मौके पर दिए इंटरव्यू में कंगना ने बताया था कि जब वे पैदा हुई थीं, तब उनके पेरेंट्स नाखुश थे। दरअसल, जब उनकी बड़ी बहन का जन्म हुआ था तो घरवाले बेहद खुश थे। लेकिन दूसरे बच्चे के तौर पर जब घर में लड़की हुई, तो परिवार वाले नाखुश हो गए। उस दौरान कंगना को अनवॉन्टेड चाइल्ड माना जाता था।
कंगना की फेवरेट हैं उनकी बड़ी बहन…
कंगना के पिता अमरदीप रनोट बिजनेसमैन है और मां आशा रनोट स्कूल में टीचर हैं। उनकी बड़ी बहन रंगोली, उनकी फेवरेट हैं। रंगोली, कंगना की मैनेजर है। एसिड अटैक जैसे दर्दनाक हादसे से गुजरने और नए सिरे से जिंदगी जीने वाली रंगोली की लाइफ पर कंगना बायोपिक बनाने की चाहत भी जाहिर कर चुकी हैं। उनका एक छोटा भाई भी है, जिसका नाम अक्षत है।

– कंगना को शुरु से मॉडलिंग का शौक था। एक्टिंग के लिए वो महज 15 साल की उम्र में बिना परमिशन लिए चंडीगढ़ से दिल्ली आ गईं थीं।
– दिल्ली में इंडिया हैबिटेट सेंटर में काफी मेहनत के बाद एक्टिंग करने को मिला। 5-6 महीने के बाद एक्टिंग वर्कशॉप के अरविंद गौड़ ने कंगना को मौका दिया।
– बैक स्टेज एक्टिंग करते-करते कंगना को एक बार एंकर बनने का मौका मिला। इस एंकरिंग को ही कंगना अपना पहला ब्रेक मानती हैं और इसके बाद वो मुंबई के लिए निकल पड़ी।

– रिपोर्ट्स के मुताबिक कंगना के घर से भागने और फिल्मों में काम करने की वजह से कंगना के पिता ने उनसे सालों तक बात नहीं की थी।
– कंगना ज्योतिष में काफी विश्वास करती हैं। वे जब भी मंडी आती हैं यहां के ज्योतिष लेखराज शर्मा से जरूर मुलाकात करती हैं।

कंगना की बहन रंगोली के मुताबिक, “मुझे याद है, बचपन से उन्हें फैशन के कीड़े ने काट रखा था। भाबंला जैसी छोटी जगह में भी वह पब्लिक जगहों पर अजीबो-गरीब कपड़े पहनती थीं। वह शॉर्ट पेंट्स, व्हाइट शर्ट और हैट पहनकर घूमती थी। छोटी-सी जगह में इस तरह के कपड़े पहनने से लोग सोचते थे कि वह अजीब है। मुझे उसके साथ चलने में शर्मिंदगी महसूस होती थी। तो मैं कंगना के साथ जाना अवॉइड करती थी। उसके ड्रेसिंग की वजह से डैड उसे लेडी डायना बुलाते थे।

कंगना के मुताबिक, ‘बचपन में मैं बहुत आलसी हुआ करती थी। यहां तक कि नहाने में भी आना-कानी किया करती थी। मेरे घर वाले इस आदत से बहुत दुखी थे। अब मैं सोचती हूं कि शायद इसी कारण तब कोई मेरा दोस्त नहीं बना। हालांकि जैसे ही मैंने अपनी सफाई पर ध्यान देना शुरू किया, मेरे जीवन में बहुत कुछ अच्छा होना शुरू हो गया।

कंगना के माता-पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर बनें, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कंगना ने कम उम्र में ही मॉडलिंग की राह अपनाई और दिल्ली में रहकर मशहूर थिएटर डायरेक्टर अरविंद गौड़ से एक्टिंग की ट्रेनिंग ली। वे अरविंद के थिएटर इंडिया हैबिटेट सेंटर का हिस्सा बनीं और कई नाटकों में काम किया। उनका पहला प्ले गिरीश कर्नाड का ‘रक्त कल्याण’ था।

मौत से पहले फोन पर रो-रोकर बेटी ने कही थी मुझसे ये बातें, पिता ने सुनाई आपबीती

नोएडा.टीचर के टॉर्चर और गंदी नीयत से परेशान होकर 9वीं की छात्रा इकिशा शाह ने खुदकुुुशी कर ली। लेकिन उसका परिवार अब भी यह मानने को तैयार नहीं कि उनकी बेटी अब उनके बीच नहीं है। पिता का रो-रो कर बुरा हाल है। वे आरोपी टीचर्स को सलाखों के पीछे देखना चाहते हैं। वहीं, मां का कहना है कि अगर उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो पूरे परिवार के साथ आत्महत्या कर लेंगी। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। मौत से 20 मिनट पहले बेटी ने फोन पर पिता से कही थी ये बातें…

– इकिशा दिल्ली के मयूर विहार स्थित एल्कॉन इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ती थी। उसका परिवार नोएडा सेक्टर-52 में रहता है।
– पिता राघव शाह प्रसिद्ध कथक डांसर और बिरजू महाराज के शिष्य हैं।
– मंगलवार शाम मौत से 20 मिनट पहले इकिशा ने पिता से फोन पर बात कर खुदकुशी कर ली।
– रोते हुए पिता ने बताया- ‘मंगलवार शाम करीब 4.15 मिनट पर मेरी इकिशा से फोन पर बात हुई।’
– ‘पापा कहते ही रोने लगी। कहा- मैंने पूरा कोर्स तैयार कर लिया है।’
– ‘लेकिन ये दोनों बहुत गंदे लोग हैं। मुझे फिर फेल कर देंगे।’
– ‘फोन पर मैं उसे दिलासा देता रहा, बेटी कुछ नहीं हुआ। घर आकर बात करता हूं।’

कमरे का दरवाजा तोड़ा, तो दिखा ऐसा मंजर
– पिता राघव शाह के मुताबिक, जब वे घर पहुंचे तो बेटी के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था।
– ‘मैं बहुत घबराया हुआ था। आवाज लगाने पर भी इकिशा दरवाजा नहीं खोल रही थी।’
– ‘मैंने फिर से आवाज लगाई। फिर दरवाजा तोड़कर भीतर देखा…।’
– ‘वो फंदे से लटकी हुई थी। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि बेटी ने आत्महत्या कर ली है।’
– ‘उसे फौरन फंदे से निकालकर हम पास के अस्पताल पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने उसे डेड डिक्लेयर कर दिया।’

आखिर क्या हुआ था इकिशा के साथ, क्यों थी परेशान?
– पिता के मुताबिक, पिछले कुछ समय से इकिशा बहुत परेशान रह रही थी।
– जब उन्होंने बेटी से पूछा- आखिर क्या बात है, तो उसकी बातें सुन पिता हैरान रह गए।
– इकिशा ने स्कूल के ही दो टीचर राजीव सहगल (एसएसटी) और नीरज आनंद (साइंस) पर गंदी नीयत से देखने और छेड़खानी का आरोप लगाया।
– राघव शाह ने बताया, दोनों टीचर अकेले में उसे गंदी नीयत से छूने की कोशिश करते थे।
– ‘मैंने प्रिंसिपल से इसकी शिकायत की। सुनने की बजाए उलटा उन्होंने मुझे बेटी को स्कूल से निकालने की धमकी दे दी।

एक्जाम में किया फेल
– ‘मेरी बेटी पढ़ाई में बहुत अच्छी थी। शिकायत के बाद से ही टीचर उसे परेशान करने लगे।’
– ’16 मार्च को उसका रिजल्ट आया। हैरानी की बात यह है कि उन्हीं दो सब्जेक्ट में इकिशा फेल हुई थी।’
– राघव शाह ने बताया, इसके बाद मैंने प्रिंसिपल से रि-चेकिंग की बात की। पर उन्होंने मुझे अनसुना कर दिया।
– ‘उसी दिन कॉरिडोर में मुझे वो दोनों टीचर मिले। दोनों मुझे देख कर हंस रहे थे।’
– बेटी बैक पेपर की तैयारी में लगी थी। लेकिन मेंटली टॉर्चर्ड महसूस कर रही थी।
– ‘वह बार-बार मुझसे कहती थी कि वो उसे फिर से फेल कर देंगे। मैं ही उसे समझ नहीं पाया।’

Just keep going: Irrfan Khan shares touching post

New Delhi [India], Mar 20 (ANI): National Award winning actor Irrfan Khan, who is suffering from a rare disease, has posted a touching message on social media.

With a photo of his reflection, the ‘Hindi Medium’ star wrote a philosophical quote by Rainer Maria Rilke.

He shared on Instagram, “God speaks to each of us as he makes us, then walks with us silently out of the night. These are the words we dimly hear: You, sent out beyond your recall, go to the limits of your longing. Embody me.n Flare up like a flame and make big shadows I can move in.”

“Let everything happen to you: beauty and terror. Just keep going. No feeling is final. Don’t let yourself lose me. Nearby is the country they call life. You will know it by its seriousness. Give me your hand #rainermariarilke.”

The 51-year-old revealed last week that he is diagnosed with NeuroEndocrine Tumour. The actor is currently in London for his treatment.

irrfanGod speaks to each of us as he makes us,
then walks with us silently out of the night.

These are the words we dimly hear:

You, sent out beyond your recall,
go to the limits of your longing.
Embody me.

Flare up like a flame
and make big shadows I can move in.

Let everything happen to you: beauty and terror.
Just keep going. No feeling is final.

Don’t let yourself lose me.

Nearby is the country they call life.
You will know it by its seriousness.

ISRO experimenting with potential structures for lunar habitation

In its second mission, Chandrayaan-2 will be made to land on the moon’s yet-unexplored south pole.

The Indian Space Research Organisation is experimenting with potential structures for lunar habitation, the government today told the Lok Sabha.

In a written response to a question in the Lok Sabha, Jitendra Singh, minister of state in the Prime Minister’s Office that looks after the Department of Space, said, “The ISRO, along with academic institutions, is doing experimentation on potential structures for lunar habitation.”

The minister was responding to a question on whether the ISRO has started working on building igloo-like habitats on the lunar surface for potential future missions.

An igloo is a shelter, a place for people to stay warm and dry made from blocks of snow placed on top of each other.

“Various options are being studied about the requirements and complexities of habitats. The study is more towards futuristic developments,” Singh said.

ISRO had first launched its Moon mission Chandrayaan-1 in 2008. In its second mission — the Chandrayaan-2— a rover will be made to land on the moon’s yet-unexplored south pole. The rover will send high-quality pictures that will help in better understanding the moon.

India joins Europe’s satellite data sharing pool

India has joined Europe’s mega global arrangement of sharing data from Earth observation satellites, called Copernicus.

Data from a band of Indian remote sensing satellites will be available to the European Copernicus programme while designated Indian institutional users will in return get to access free data from Europe’s six Sentinel satellites and those of other space agencies that are part of the programme, at their cost.

The space-based information will be used for forecasting disasters, providing emergency response and rescue of people during disasters; to glean land, ocean data; and for issues of security, agriculture, climate change and atmosphere, according to a statement issued by the European Commission here.

The agreement was signed in Bengaluru on Monday by Philippe Brunet, Director for Space Policy, Copernicus and Defence, on behalf of the EC and by P.G. Diwakar, Scientific Secretary, Indian Space Research Organisation.

The multi-billion-euro Copernicus is Europe’s system for monitoring the Earth using satellite data. It is coordinated and managed by the EC.

Wide range

The free and open data policy is said to have a wide range of applications that can attract users in Europe and outside. The Copernicus emergency response mapping system was activated on at least two Indian occasions — during the 2014 floods in Andhra Pradesh in October 2014 and after the 2013 storm in Odisha.

“Under this arrangement, the European Commission intends to provide India with free, full and open access to the data from the Copernicus Sentinel family of satellites using high bandwidth connections. Reciprocally the Department of Space will provide the Copernicus programme and its participating states with a free, full and open access to the data from ISRO’s land, ocean and atmospheric series of civilian satellites (Oceansat-2, Megha-Tropiques, Scatsat-1, SARAL, INSAT-3D, INSAT-3DR) with the exception of commercial high-resolution satellites data,” EC said.

The arrangement includes technical assistance for setting up high bandwidth connections with ISRO sites, mirror servers, data storage and archival facilities.

Husband, wife are not co-owners by default: I-T tribunal

‘Not equal in claiming tax exemptions’

A husband and wife may well be equal partners, sharing the joys and sorrows equally, but they are certainly not equal in claiming tax exemptions. Such exemptions, if any, are only based on relevant documents and not on anything else, according to income tax authorities.

This fact came to the fore recently when a Bengaluru-based couple came knocking at the Income Tax Appellate Tribunal after their joint claim for long-term capital gains (LTCG) exemption on gains arising from the sale of a property was rejected by a tax officer.

While the couple claimed that they jointly invested in the construction of the property and even declared the rent income and sale proceeds equally in their tax returns, the authorities said that since the earlier agreement and the subsequent sale deed were solely in the name of the husband, no such joint claim can be accepted.

The matter dates back to 1986, when the man purchased a land and then constructed a residential property in which he claimed that he and his wife contributed equally.

Thereafter, the property was let out and the rent was again shared equally between the husband and the wife, with both declaring the same in their annual returns as well.

Subsequently, when the property was sold, the gains were shared equally in their filings for tax purposes.

Tax authorities, however, denied the claim of the wife and taxed the entire gains in the hands of the husband. The tax officer’s contention was that the wife’s name was not on the earlier agreement of purchase and also the subsequent sale deed.

According to a note by PwC, which is one of the ‘Big Four’ consultancy firms, the husband stated that the residential property was jointly held, but could not produce any proof to support his claim that his wife contributed towards the purchase.

Malaysian citizen

Further, while the wife was a Malaysian citizen when the property was purchased, she did not have any documents to prove that she sought permission from the Reserve Bank of India (RBI) before purchasing the property.

While hearing the matter, the Bangalore Bench of the Tribunal upheld the tax officer’s stand while noting that the purchase deed and the subsequent sale deed did not mention the wife’s name as either owner or co-owner.

“This ruling of the Tribunal highlights that co-ownership in a property can only be considered from the recitals of the relevant documents and not from any stated intention or claim made, which is legally unsustainable,” tax advisory firm PwC said in the note.

Five militants killed in Kupwara

Two policemen and three jawans also lost their lives in the encounter.

Five militants have been killed and five security personnel lost their lives in an ongoing gunfight in north Kashmir’s Kupwara district on Wednesday.

“Earlier [in the day], three bodies of the militants were recovered. The fourth body of a militant was also spotted at the encounter site in Kupwara. The firing continued [till late Wednesday evening],” said Director General of Police S.P. Vaid.

Late in the evening, a Srinagar-based spokesman confirmed that a fifth militant was “neutralised” at the encounter site. All slain militants, according to the police, were “foreigners and part of a recently infiltrated group”.

“Owing to the thick vegetation and low visibility, the mopping operation is heading slowly in the area and with due caution,” said the police spokesman. “Incriminating documents have also been seized from the slain militants,” he added.

The bodies recovered were strapped with weapons and ammunition, including live grenades, said the police.

A fresh gunfight started on Wednesday morning after an intermittent exchange of fire during the night in Kupwara’s dense forest area of Check Fatehkhan in Halmatpora range.

Officials said the group of militants, which attacked on Army’s domination domination patrol on Tuesday afternoon, “resumed target fire during the day and were holed up in natural caves offered by the mountain range in the area.” The militants fanned out in different directions and “positioned at multiple points”, they said.

According to the spokesmen of the Army and the police, two policeman and three army jawans were also killed in the fierce exchange of fire.

The deceased personnel were identified as Mohammad Ashraf Rather and Naik Ranjeet Singh of 160 battalion of the Territorial Army, and Special Police Officer Mohammad Yousuf Cheche and policeman Deepak Thesoo. The identity of third deceased Army jawan could not be ascertained.

One policeman of the Special Operation Group (SOG) was also injured and “is stated to be stable”.

The Army’s elite force, Para Commandos, have also been brought in to wrap up the encounter. Kupwara is over 110 km north of Srinagar and is a frontier district, close to the Line of Control.

Meanwhile, Chief Minister Mehbooba Mufti expressed solidarity with the bereaved families of the deceased personnel.

Early general election possible in 2018, says Nomura

Political events may stall reform push’

A series of political developments over the last few weeks has placed the Bharatiya Janata Party (BJP) on the back foot and an early general election in the fourth quarter of 2018 cannot be ruled out, according to global financial major Nomura.

In its latest ‘Asia Insights’ report, the Tokya-based financial services firm says that while the Centre may not breach its 2018-19 fiscal deficit target of 3.3% of gross domestic product, greater capital requirements for bank recapitalisation and State-level farm loan waivers could lead to increased debt burden and a higher general government (Centre and States combined) fiscal deficit.

‘Populist overtone’

“From an economic perspective, this suggests that big-ticket reforms are less likely and a populist overtone is more likely as the government raises its pro-farmer, pro-common man profile via higher minimum support prices (MSPs) and fiscal transfers that ensure that MSPs are effective, increasing both inflation and fiscal risks,” Nomura said.

“We were leaning towards the view that concerns over the current account deficit, fiscal slippage and rising inflation were beginning to be priced in, but the risks around politics have turned less favourable for markets after the by-election losses in Uttar Pradesh,” it added.

Interestingly, Nomura is of the view that there is a 25% probability of an early general election, clubbed with State elections scheduled in the fourth quarter of 2018 and the first half of 2019. Rajasthan, Chhattisgarh and Madhya Pradesh will go to the polls in that period.

The financial major opines that the political developments are proving to be irritants for the BJP-led central government due to which big-ticket reforms would be difficult. The focus was instead likely to turn towards implementation along with restrained populism, Nomura added.

आप कभी अमीर बनेंगे या नहीं, इस तरीके से तुरंत हो सकता है मालूम

यूटिलिटी डेस्क. ज्योतिष की मान्यता है कि कुंडली में कुछ विशेष योग होते हैं, जिनके प्रभाव से कोई व्यक्ति धनवान बनता है। यहां जानिए ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार भृगु संहिता में बताए गए कुंडली में कुछ ऐसे योग जो व्यक्ति को धनवान बना सकते हैं…

ये हैं धनवान बनाने वाले कुंडली के योग

– जन्म कुंडली का दूसरा घर या भाव धन को दर्शाता है। कुंडली का दूसरा भाव धन, खजाना, सोना, मोती, चांदी, हीरे आदि से संबंधित है। साथ ही, व्यक्ति के पास कितनी स्थाई संपत्ति जैसे घर, भवन-भूमि होगी, दूसरे भाव से इस बात पर विचार किया जाता है।

– जिस व्यक्ति की कुंडली में द्वितीय भाव में कोई शुभ ग्रह हो या शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, उसे धन प्राप्त होता है।

– अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध द्वितीय भाव में हो और उस पर चंद्र की दृष्टि हो तो व्यक्ति कड़ी मेहनत के बाद भी आसानी से अमीर नहीं बन पाता है।

– अगर किसी व्यक्ति की कुंडली के द्वितीय भाव में चंद्रमा हो तो वह धनवान बनता है।

– यदि द्वितीय भाव के चंद्र पर नीच के बुध की दृष्टि पड़ जाए तो उस व्यक्ति के परिवार का धन नष्ट हो जाता है।

– यदि चंद्रमा अकेला हो और कोई भी ग्रह उससे द्वितीय या द्वादश न हो तो व्यक्ति आजीवन गरीब ही रहता है। ऐसे व्यक्ति को आजीवन अत्यधिक परिश्रम करना होता है, लेकिन वह अधिक पैसा नहीं प्राप्त कर पाता।

– यदि द्वितीय भाव में किसी पाप ग्रह की दृष्टि हो तो व्यक्ति धनहीन होता है।

इस AC को कितना भी करें यूज, नहीं आएगा बिजली बिल, हर महीने बचेंगे हजारों रुपए

यूटिलिटी डेस्क। सोलर प्रोडक्ट मैन्युफैक्चर कंपनी बेलिफल इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने सोलर से चलने वाला एयर कंडीशन (AC) बनाया है। ये AC इलेक्ट्रिसिटी के बिना ही चलता है। यानी इसे यूज करने पर किसी तरह का बिजली बिल नहीं आएगा। कंपनी ने 1 टन और 1.5 टन कैपेसिटी वाले 2 अलग-अलग AC निकाले हैं। यानी कमरे के साइज और जरूरत को देखते हुए इन AC का यूज किया जा सकता है।

# इतने रुपए की होगी सेविंग

इंडिया में बिजली से चलने वाले AC की बड़ी रेंज मौजूद है। इनमें 2 स्टार से लेकर 5 स्टार रेटिंग वाले AC शामिल हैं। 2 स्टार का बिजली बिल ज्यादा आता है, तो वहीं 5 स्टार का कम। यदि AC 2 स्टार है तब वो सिर्फ एक रात में 8 से 10 यूनिट की खपत करता है। यानी महीने में 250 से 300 यूनिट एक्स्ट्रा हो सकती हैं। दूसरी तरफ, 5 स्टार AC से ये यूनिट 200 के अंदर ही रहती हैं।

भोपाल (MP) में 1 यूनिट की कीमत करीब 7 रुपए है। ऐसे में यदि मंथली यूनिट 100 से ज्यादा होती हैं तब उसका चार्ज भी बढ़ जाता है। जैसे, यहां 378 यूनिट पर 2770 रुपए का बिजली बिल आया। यानी एक यूनिट का औसत खर्च 7.33 रुपए है। ऐसे में यदि AC से 300 यूनिट की खपत होती है तब कम से कम 2,199 रुपए का एक्स्ट्रा बिल आएगा।

# इतनी है कीमत

Belifal के 1 टन वाले सोलर AC की कीमत 1.99 लाख रुपए है। वहीं, 1.5 टन वाले सोलर AC की प्राइस 2.49 लाख रुपए है। ये AC पूरी तरह सोलर सिस्टम पर काम करते हैं। यानी इसकी इंडोर और आउटडोर यूनिट DC पर काम करती हैं।

ये AC पूरी तरह से DC वोल्ट पर काम करता है। इसकी दोनों यूनिट DC को सपोर्ट करती हैं। इसके इनवर्टर में लोवर पावर कंजप्शन टेक्नोलॉजी का यूज किया गया है। ये 48VDC के सोलर सिस्टम पर काम करता है। कंपनी इसके साथ 1500वाट्स का सोलर पैनल और 12V 100Ah बैटरी (6 प्लेट्स) दे रही है। सोलर पैनल इतना पावरफुल है कि ये बैटरी को तेजी से चार्ज करता है।

बेड पर आपकी फेवरेट पॉजिशन क्या है? शाहिद कपूर की पत्नी ने दिया ये जवाब

शाहिद कपूर पत्नी मीरा राजपूत के साथ नेहा धूपिया के चैट शो ‘वोग न्यू बीएफएफ’ पर पहुंचे।

मुंबई.शाहिद कपूर पत्नी मीरा राजपूत के साथ नेहा धूपिया के चैट शो ‘वोग न्यू बीएफएफ’ पर पहुंचे। इस दौरान दोनों ने अपनी लाइफ से जुड़ी कई रोचक बातें शेयर की। नेहा धूपिया ने जब दोनों से उनकी सेक्स लाइफ पर सवाल किया तो शाहिद ने शर्माते हुए इसे नजरअंदाज करने की कोशिश की। उन्होंने मीरा को भी चुप रहने का इशारा किया। वे जवाब दिए बगैर नहीं रह सकीं। क्या था नेहा का सवाल और क्या दिया मीरा ने जवाब…

 

– नेहा ने शाहिद और मीरा से सवाल किया था कि बेड पर उनकी फेवरेट पॉजिशन कौन सी होती है? जाहिर सी बात है ऐसे पर्सनल सवालों का जवाब देने में सबको आसानी नहीं होती। इस वजह से शाहिद ने इसे इग्नोर कर दिया और मीरा को इशारा किया कि वे भी सवाल को अवॉयड कर दें।
– लेकिन मीरा ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि वे शाहिद कंट्रोल फ्रीक हैं। वे हमेशा मुझसे कहते हैं कि क्या करना है।”

शाहिद बोले- ‘एक महिला ने मुझे चीट किया’

– शो के दौरान नेहा ने शाहिद से पूछा कि क्या कभी किसी महिला ने उन्हें चीट किया? इस दौरान मीरा ने नेहा से सवाल में कुछ बदलाव करने को कहा।
– तब नेहा ने शाहिद से पूछा कि उन्हें कितनी महिलाओं ने धोखा दिया। जवाब में शाहिद ने कहा, “एक के बारे में मैं निश्चित हूं और दूसरी को लेकर मुझे डाउट है।”
– शाहिद ने नाम नहीं लिया। लेकिन अंदाजा लगाया जा रहा है कि उनका इशारा करीना कपूर की ओर था, जो जब सैफ अली खान के नजदीक आईं, तब शाहिद को डेट कर रही थीं।

ऐसी है मीरा और 13 साल बड़े शाहिद की लव स्टोरी

– शाहिद कपूर और उनके पिता धार्मिक संगठन राधा स्वामी सत्संग व्यास पीठ के फॉलोअर हैं। दोनों सत्संग में हिस्सा लेने दिल्ली जाया करते थे। मीरा और उनकी फैमिली भी इस व्यास पीठ की अनुयायी है। लिहाजा सत्संग के दौरान के दौरान हुईं दोनों की मुलाकातें प्यार में तब्दील गई।
-मीरा राजपूत ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्री राम कॉलेज से इंग्लिश ऑनर्स की पढ़ाई की है। वह शाहिद से 13 साल छोटी हैं। दोनों ने जुलाई, 2015 में शादी की थी।वैसे, एक वक्त था जब मीरा इस शादी के लिए तैयार नहीं थीं। इसका कारण उनकी और शाहिद की उम्र में बड़ा अंतर ही था।

मीरा ने शादी के लिए रखी थी यह शर्त

– एक इंटरव्यू में शाहिद ने खुलासा किया था कि मीरा ने उनसे शादी के पहले एक शर्त रखी थी, जिसमें कहा कि उन्हें अपने बाल पहले की तरह रखने होंगे तभी वह उनसे शादी करेंगी।
– दरअसल दोनों की पहली मुलाकात फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ की शूटिंग के दौरान हुई थी और इसमें शाहिद के बाल काफी बढ़े हुए थे। इसके अलावा मीरा ने शाहिद से प्रॉमिस लिया कि जब उनकी शादी होगी तो शाहिद के बालों का कलर नार्मल होगा।

शाहिद को शादू कहती हैं मीरा

– खबरों की मानें तो मीरा ने शाहिद कपूर को डायरेक्ट नाम से नहीं बुलातीं। वे उन्हें ‘शादू’ कहकर बुलाती हैं।
– मीरा को म्यूजिक सुनना पसंद है और वे बॉलीवुड सिंगर्स के अलावा अवरिल लाविंगे, ब्योंस और डेमी लोवाटो सहित कई विदेशी सिंगर्स की फैन हैं।

तो पोर्न स्टार बन जाती राष्ट्रपति ट्रंप के बच्चे की मां, पोलीग्राफ टेस्ट में सामने आया चौंकाने वाला सच

पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स (असली नाम स्टेफनी क्लिफोर्ड) द्वारा डोनाल्ड ट्रंपर संबंध बनाने के आरोप सच हुए है। हाल ही में इस पोर्न स्टार का लाई डिटेक्टर टेस्ट (पोलीग्राफ टेस्ट) हुआ जिसमें बेहद चौंकाने वाली बाते सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लाई डिटेक्टर टेस्ट में जब पोर्न स्टार से पूछा गया कि क्या उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के साथ सेक्स क्या है तो उनके हां कहते ही पोलीग्राफ ने उन्हें सच साबित कर दिया। पूछे गए ऐसे-ऐसे सवाल…

पोर्न स्टार के वकील ने सीएनन को बताया कि डॉक्टर्स की टीम ने स्टॉर्मी से तीन प्रमुख सवाल पूछे। पहला, कि क्या जुलाई 2006 में आपने डोनाल्ड ट्रंप के साथ सेक्स किया था? दूसरा, कि क्या आपने जुलाई 2006 में डोनाल्ड ट्रंप से असुरक्षित संबंध बनाए थे? तीसरा, कि क्या डोनाल्ड ट्रंप ने आपको अप्रेंटिस में कास्ट करने की बात कही थी?। इन तीनों सवालों के जवाब में पोर्न स्टार ने हां कहा, जो कि सच पाए गए। टेस्ट में उनके झूठ बोलने की संभावना 1 प्रतिशत बताई गई। माना जा रहा है कि इस पोलीग्राफ टेस्ट से अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टेस्ट रिजल्ट के आने के बाद ट्रंप के समर्थक हैरान हैं, वहीं उनके विरोधियों का कहना है कि पोर्न स्टार ट्रंप के बच्चे की मां भी बन सकती थी।

क्या है पूरा मामला

-असल में इसके पीछे की वजह है एक बड़ा खुलासा जो खुद इस पोर्न स्टार ने किया था। आपको बता दें कि स्टेफनी क्लिफोर्ड ने खुलासा किया था कि उनके अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप से संबंध थे। इतना ही नहीं ट्रंप ने मुंह बंद रखने के लिए पोर्न स्टार 130,000 डॉलर (करीब 90 लाख रु) दिए थे। उनका ये अफेयर तब शुरू हुआ जब ट्रंप की वाइफ मेलानिया बेटे को जन्म दिया था। पोर्न स्टार ने कहा कि ट्रंप के बेटे के जन्म के चार महीने बाद दोनों के संबंध बने थे।

होटल में बने थे ट्रंप से संबंध
– क्लिफोर्ड ने बताया था कि उन्होंने 2006 में ट्रंप के साथ एनवी होटल में ट्रंप के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। साथ ही ट्रंप ने उनसे वादा किया था कि वो उन्हें The Apprentice रिऐलिटी शो में भी कास्ट करेंगे। क्लिफोर्ड ने बताया कि ट्रंप ने एक बार मुझे ये भी कहा था कि मैं उनकी बेटी की ही तरह स्मार्ट और खूबसूरत हूं।

बिल ने तीन दिन पहले ही ये कह दिया था कि उनकी बेटी स्टॉर्मी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जरूरी संबंध बनाए होंगे और अब बार-बार ट्रंप का नाम उछालकर वो अपनी जान खतरे में डाल रही है।

बिल ने बताया कि स्ट्रॉमी एक बेहतरीन स्टूडेंट थी लेकिन पैसे और फेम के चक्कर में उसने ये गंदा काम शुरू कर दिया। बिल ने आगे बताया कि 15 साल पहले स्टॉर्मी ने घर से नाता तोड़ लिया था और वो अपनी बच्ची से भी किसी को नहीं मिलने देती।

Bikini-clad Selena Gomez reveals leg scar from complications during her kidney transplant… as she soaks up the sun in Sydney Harbour before playfully MOUNTING her female pal on a boat

Singer, 25, has a scar high up on her inner right thigh from a ruptured artery she had following the kidney transplant that saved her life in September 2017

She was rushed back into surgery to have a vein removed from her right inner thigh to build a new artery and keep the kidney transplant in place

She’s just touched down in Sydney ahead of the Hillsong Church’s Colour Conference – a festival her former beau Justin Bieber attends annually.

But newly-single Selena Gomez was surrounded pals on Monday, as she showed her affections for one female friend in particular on the top deck of a luxury boat in Sydney’s Harbour, playfully mounting her and giggling as they shared an cuddle.

The 25-year-old Texan native showed off her figure in a two-piece bikini, revealing a prominent scar on her inner her right thigh, obtained during a second emergency procedure that followed her 2017 kidney transplant.

Pairing a bright orange bikini top with plain black bottoms, the singing sensation was accompanied by friends on the cruise.

Her former flame Justin Bieber was nowhere to be seen as she laughed and joked with gal pals on the day out.

At one time, Selena was seen crawling over to her friend, and then lying on top of her with arms open, ready for an embrace.

The mischievous brunette then let out a gleeful smile as her friend, who was resting on her back in a black bikini, returned the enthusiastic squeeze.
Though she was clearly besotted with her mate, it was not the same altruistic friend who became Selena’s organ donor in summer 2017.

Actress Francia Raisa gave Selena one of her kidneys in summer 2017, following the singer’s battle with lupus.

Selena, who underwent a kidney transplant in September last year, first showcased her sizable surgery scar while holidaying in Mexico in December.

However Selena was now displaying the mark that the surgery left behind last September.

यहां पर आया गजब का कानून! 2 पत्नियां रखने पर सरकार देगी मकान भत्ता

संयुक्त अरब अमीरात ने एक अजीब कानून शुरु किया है जिसके तहत दो पत्नियां रखने पर सरकार कई तरह की सुविधाएं दे रही है। यहां की सरकार ने दो पत्नियां रखने वाले लोगों के लिए अतिरिक्त मकान भत्ता देने की घोषणा की है।

इस देश में अविवाहित लड़कियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने लोगों को दूसरी शादी करने को प्रोत्साहित करने के लिए यह स्कीम जारी की है। UAE के बुनियादी ढांचा विकास मंत्री डॉ. अब्दुल्ला बेलहैफ अल नुईमी ने फेडरल नेशनल कौंसिंल (FNC) के सत्र के दौरान यह घोषणा की है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने यह निर्णय लिया है कि दो पत्नियां रखने वाले सभी लोगों को शेख जायद हाउसिंग कार्यक्रम के तहत मकान भत्ता दिया जाएगा।

उनके मुताबिक असल में यह दूसरी पत्नी के लिए मकान भत्ता होगा। यह एक पत्नी वाले परिवार को पहले से मिल रहे मकान भत्ते के अतिरिक्त होगा। मंत्री ने कहा कि दूसरी पत्नी के लिए भी उसी तरह के रहन-सहन की व्यवस्था होनी चाहिए, जैसा कि पहली बीवी के लिए होता है।

मंत्री ने कहा कि मकान भत्ता देने से लोग दूसरी शादी करने को प्रोत्साहित होंगे और UAE में अविवाहित महिलाओं की संख्या घटेगी। मंत्रालय यह चाहता है कि दूसरी बीवी को भी पहले बीवी की तरह ही मकान मिले।

गजब है इस चायवाले की इनकम! चाय बेचकर एक महीने में कमाता है 12 लाख

अभी तक आपने चाय वालों के बहुत ही चर्चे सुने होंगे जो आश्चर्य में डाल देने वाले होते हैं। ऐसा ही एक और वाकया सामने आया है जिसके बारे में सुनकर हर कोई हैरान है। यह चाय वाला चाय बेचकर इतनी कमाई कर रहा है जितनी बड़े—बड़े बिजनेसमैन भी नहीं करते है। इतना ही बल्कि यह चायवाला कोई आम चायवाला नहीं बल्कि महाराष्ट्र का सबसे अमीर चायवालाहै। यह चायवाला एक महीने में 12 लाख रुपए कमाता है। आपको बता दें कि यह शख्स पुणे के नवनाथ येवले हैं जिनकी येवले टी स्टॉल नाम से बहुत फेमस टी स्टाल है। इस टी स्टाल पर एक दिन में हजारों कप चाय बिकती है।

उफ! ये गर्मी: भारत में ज्यादातर तीन टंगड़ी वाले पंखे ही क्यों चलते हैं? वजह बेहद दिलचस्प है

गर्मी ने दस्तक दे दी है। पंखे, कूलर और एसी धीरे-धीरे रफ्तार पकडऩे लगे हैं। लेकिन यहां हम बात करेंगे सेलिंग फैन की, जिसका घर-घर प्रशंसक(फैन) है। जी हां, चाहे घर में कूलर चले या एसी, कमरों के ऊपर बेचारे तीन टंगड़ी वाले फैन की सांसें बराबर चलती रहती हैं। इसे सुकून या इसके कलेजे में ठंडक तभी पहुंचती है, जब बिजली (गुल) मेहरबान होती है। आजकल सेलिंग फैन में भी काफी एक्सपेरिमेंट देखने को मिल रहे हैं। इनकी पंखियों को बेहद स्टाइलिश लुक देने में लगी हुई हैं कंपनियां। खैर, पंखियों को चाहे कितना भी स्टाइलिश बना दो, उनका काम  तो सिर्फ ठंडक देना ही है।

फिर बात चाहे देसी पंखे की हो और विदेशी पंखे की…।तक बैंड होती हैं, जो हवा देने का काम करती हैं। अब जरो सोचिए कि सबसे ज्यादा हवा कौन-सा पंखा देगा, तीन पत्ती वाला या चार पत्ती वाला। बता दें कि तीन पत्ती वाली देसी फैन है, जबकि चार पत्ती वाला विदेशी फैन। यहां सवाल यह भी उठता है कि भारत मेंं 99 प्रतिशत तीन पत्ती वाले पंखे ही क्यों चलते हैं और विदेशों में चार पत्ती वाले पंखे?

वैसे आपने इस बारे में कभी सोचा भी नहीं होगा कि पंखे में तीन और चार पत्ती वाले क्यों होते हैं? बेशक, आपने पंखें की पत्तियों की संख्या पर गौर किया न हो, लेकिन इनकी कम या ज्यादा पत्तियां होने के पीछे ठोस वजह है।के सप्लीमेंट के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनका मकसद एसी की हवा को पूरे कमरे में फैलाना होता है। चूंकि 4 पत्ती वाले पंखे 3 पत्ती वाले पंखे की तुलना में धीमे चलते हैं, इसलिए इनकी वजह से यह काम आसान हो जाता है।

ऐसे में यदि भारत में चार पत्ती वाले पंखे इस्तेमाल होने लगे, तो यहां गर्मी में लोगों का जीना मुहाल हो जाएगा। वैसे भी भारत में पंखा का मतलब ज्यादा से ज्यादा हवा दे। तीन पत्ती वाला फैन हल्का होता है और चलने में इसकी रफ्तार तेज होती है और इससे हवा भी तेज मिलती है। वैसे अब भारत में भी पंखे को एसी के सप्लीमेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा है…। ऐसे में आप अपने एसी वाले कमरे में ४ पत्ती वाला फैल लगवा सकते हैं…यह धीमा चलेगा और इससे बिजली भी ज्यादा खपत नहीं होती।

13 की उम्र में हुआ था सलमान की इस Ex-गर्लफ्रेंड का रेप, अब कर रही ये काम

मुंबई.पॉप सिंगर दलेर मेहंदी को 14 साल पुराने में ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामले में 2 साल कैद की सजा सुनाई गई। हालांकि, उन्हें इसके बाद जमानत भी मिल गई। वैसे, बॉलीवुड की एक एक्ट्रेस ऐसी भी हुई है, जिसने ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसे क्राइम का शिकार हुए लोगों के लिए ‘नो मोर टियर’ नाम की संस्था शुरू की। यह एक्ट्रेस कोई और नहीं, बल्कि सलमान खान की गर्लफ्रेंड रह चुकीं सोमी अली हैं।5 की उम्र में सेक्शुअली अब्यूज तो 13 की उम्र में हुई थीं रेप की शिकार…

– पाकिस्तानी मूल की एक्ट्रेस सोमी अली ने एक इंटरव्यू के दौरान खुलासा किया था, “मैं कई तरह के डोमेस्टिक वायलेंस सहते-सहते बड़ी हुई हूं। जब मैं पांच साल की थी, तब मुझे सेक्शुअली अब्यूज किया गया। 12 साल की उम्र में मैं यूएस शिफ्ट हो गई और 13 की उम्र में मेरा रेप किया गया।”
– “मैं हमेशा ऐसे अब्यूज का सामना किया और गवाह भी बनी। हमेशा से इस तरह के क्राइम से पीड़ित महिला, पुरुष और बच्चों के लिए कुछ करना चाहती थी।”
– बता दें कि 2007 में सोमी ने संस्था ‘नो मोर टियर’ शुरू की। वे कहती हैं कि संस्था की शुरुआत उन्होंने डोमेस्टिक वायलेंस के शिकार लोगों की मदद के लिए की थी।
– बकौल सोमी, “यह संस्था मियामी बेस्ड है और यह ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामले में देश (अमेरिका) का सबसे घटिया शहर है। इसी शहर की वजह से मैंने अपनी संस्था के तहत मैंने सेक्स ट्रैफिकिंग और इसी के जैसे दूसरे क्राइम के शिकार लोगों के लिए भी काम करना शुरू किया।”
– सोमी कहती है कि कई महिलाओं को मिडिल ईस्ट, साउथ एशिया और दुनिया के दूसरे हिस्सों से खरीदकर यूएस लाया जाता है, जो बाद में सेक्शुअल और फिजिकल वायलेंस की शिकार होती हैं।
– सोमी के मुताबिक, पिछले 10 सालों में उनकी संस्था ने हजारों महिलाओं,पुरुषों और बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने का कम किया है। इनमें से कई शादीशुदा महिलाएं, जिन्हें उनके पति ने सेक्स के लिए यूज कर बेच दिया तो कई ऐसे लड़के-लडकियां शामिल हैं, जो अपने ही घर में सेक्शुअली अब्यूज हुए और घर से भागने के बाद दलाओं के हत्थे चढ़ गए। इनमें से ज्यादातर इंडिया,पाकिस्तान और मिडिल ईस्ट के विक्टिम्स शामिल हैं।

एक्ट्रेस का पहला प्यार थे सलमान खान

– एक पुराने इंटरव्यू में सोमी ने सलमान के साथ अपने रिश्ते पर खुलकर बात की थी। सोमी ने इस इंटरव्यू में कहा था कि सलमान उनके पहले ब्वॉयफ्रेंड थे। लेकिन ऐश्वर्या राय बीच में आईं और उनका रिश्ता टूट गया।
– बकौल सोमी, “सलमान पर मेरा क्रश उस वक्त हो गया था, जब मैं टीनेजर थी। यही क्रश मुझे फ्लोरिडा से इंडिया ले आया। मैंने फिल्मों को सिर्फ इसलिए ज्वाइन किया, ताकि सलमान से मेरी शादी हो सके। 15 साल की उम्र में आपके पास कुछ भी इडियटिक करने का लाइसेंस होता है। हालांकि, मुझे अपने पहले प्यार का पीछा करने का कोई भी अफ़सोस नहीं है।”

8 साल तक रहा सलमान से रिलेशनशिप

– जब सोमी महज 15 साल की थीं, तब उन्होंने सलमान की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ देखी और उन्हें दिल दे बैठीं।
– सलमान से शादी की चाहत लिए वे मुंबई आईं और काम की तलाश करने लगीं। इसी दौरान एक स्टूडियो में उनकी मुलाकात सलमान से हुई।
– करीब 8 साल तक सोमी सलमान के साथ रिलेशनशिप में रहीं।
– 1997 में सलमान की नजदीकियां ‘हम दिल दे चुके सनम’ के सेट पर ऐश्वर्या राय से बढीं और सोमी के साथ उनका ब्रेकअप हो गया।
– दोनों ने फिल्म ‘बुलंद’ (1992) में साथ काम किया है, जो आजतक रिलीज नहीं हो सकी। फिल्म 80 प्रतिशत शूट हो चुकी थी। लेकिन किन्हीं कारणों से यह अटक गई। – 2016 में आई ऋतिक रोशन स्टारर ‘काबिल’ को मीडिया रिपोर्ट्स ने ‘बुलंद’ की कॉपी बताया था।

रिश्ता टूटने का नहीं है कोई अफ़सोस

– सोमी ने इंटरव्यू में बताया है, “मुझे इस बात का कोई अफ़सोस नहीं है कि सलमान के साथ मेरा रिश्ता आगे नहीं बढ़ पाया। सलमान और उनकी फैमिली से बहुत कुछ सीखा है।”
– मुझे सीख मिली है कि यह मायने नहीं रखता कि किसी का धर्म क्या है, कल्चर क्या है, वह कहां का रहने वाला है। किसी भी इंसान की पहचान उसके काम से होती है। सलमान आगे बढ़ने के लिए अच्छे रोल मॉडल हैं।”

हसीन जहां ने FB पर साधा निशाना, कहा- बिना मंजूरी ब्लॉक हुआ अकाउंट

कोलकाता। पत्नी हसीन जहां की शिकायत के बाद मोहम्मद शमी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज हुआ है। ऐसे में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस बीच पत्नी हसीन ने कहा है कि उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर मोहम्मद शमी से जुड़ी जो तस्वीरें डाली हैं। वो डिलीट हो गई हैं।

मोहम्मद शमी के खिलाफ पत्नी ने पुलिस में शिकायत करने से पहले अपने फेसबुक अकाउंट पर शमी से जुड़ी तस्वीरें पोस्ट की थीं। ताकि वो बतौर सबूत इसका इस्तेमाल कर सकें। जब से पत्नी ने सोशल मीडिया पर शमी के खिलाफ आरोप लगाना शुरू किए हैं। तब से ही ये खबर मीडिया की सुर्खियां बनी हुई हैं। इस घटना से बतौर क्रिकेटर उनकी छवि को काफी नुकसान पहुंचा है।

हसीन जहां ने कुछ दिन पहले अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पति शमी की कुछ तस्वीरें पोस्ट करते हुए उन पर विवाहेत्तर संबंधों के आरोप लगाए। हसीन जहां ने कई लड़कियों के साथ शमी की तस्वीरें और व्हाट्सऐप चैट फेसबुक पर पोस्ट की थी। जिसके बाद बवाल मच गया। इसके बाद हसीन जहां ने मीडिया में खुलकर पति शमी पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मैंने कई लोगों से मदद मांगी, मगर मदद नहीं मिलने की वजह से मुझे मजबूरी में सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ा। मगर अचानक फेसबुक ने मेरा अकाउंट ब्लॉक कर दिया और बिना मुझसे पूछे उन तस्वीरें को भी डिलीट कर दिया गया।

ये खबर सामने आने के बाद शमी की केवल छवि को नुकसान नहीं पहुंचा है, बल्कि बीसीसीआई ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से शमी को बाहर कर दिया।

गैर जमानती धाराओं में दर्ज हुआ मामला-

हसीन जहां की शिकायत के आधार पर शमी व उनके परिवार के चार सदस्यों के खिलाफ जादवपुर थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए (दहेज से संबंधित घरेलू हिंसा), 323 (मारपीट), 307 (हत्या की कोशिश), 376 (दुष्कर्म), 506 (जान से मारने की धमकी), 328 (जहर देना) और 34 (आपराधिक साजिश के तहत सामूहिक अत्याचार) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

शमी के अलावा उनके परिवार के चार अन्य लोग कौन हैं, इस बारे में पुलिस की ओर से अभी साफ नहीं किया गया है। कानूनी जानकारों के मुताबिक इनमें से धारा 307, 328 और 376 गैरजमानती हैं। ऐसे में शमी व उनके परिवार के सदस्यों की गिरफ्तारी लगभग तय है, बशर्ते उन्हें हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत न मिले।

अयोध्या केसः सुप्रीम कोर्ट ने कहा- समझौते का निर्देश हम नहीं दे सकते

नई दिल्ली। अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बार फिर से कहा कि वो किसी को समझौते के लिए नहीं कह सकते। कोर्ट ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि हम किसी को नहीं कह सकते कि समझौता करो और किसी को समझौता करने से इन्कार भी नहीं कर सकते।

बेंच ने आगे कहा कि अगर दोनों पक्षों के वकील खुद आकर कहें कि हमने समझौता कर लिया है तो हम मुद्दे को रिकॉर्ड कर लेंगे। लेकिन समझौते के लिए हम ना तो किसी को कह सकते हैं और ना नियुक्त कर सकते हैं। हम इस तरह के केस में ऐसा कैसे कर सकते हैं। अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी।

इससे पहले सुनवाई शुरू होते ही सर्वोच्च न्यायालय ने इस केस में हस्तक्षेप करने वाली तीसरे पक्ष की कुल 32 याचिकाएं खारिज कर दीं। इनमें अपर्णा सेन, श्याम बेनेगल और तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका भी शामिल थी।

सभी कागजी कार्रवाई और अनुवाद का काम पूरा हो गया है। आठ मार्च को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार के समक्ष हुई बैठक में सभी पक्षों ने यह जानकारी दी।

हाई कोर्ट आदेश के खिलाफ सबसे पहले सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लिहाजा पहले बहस करने का मौका उन्हें मिल सकता है।

इस मामले से जुड़े 9,000 पन्नों के दस्तावेज और 90,000 पन्नों में दर्ज गवाहियां पाली, फारसी, संस्कृत, अरबी सहित विभिन्न भाषाओं में हैं, जिस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कोर्ट से इन दस्तावेजों को अनुवाद कराने की मांग की थी।

रिटायर्ड फौजी विशेष कार्ड से देश के किसी भी अस्पताल में करा सकेंगे इलाज

बिलासपुर। रक्षा मंत्रालय के निर्देश पर सेवानिवृत फौजियों के लिए विशेष प्रकार का चिप लगा पहचान पत्र बनाया जा रहा है। इस कार्ड के बनने के बाद फौजी देश के किसी भी कोने में संचालित अस्पताल में अपना इलाज करा सकेंगे। खास बात ये कि इलाज के लिए केंद्र सरकार ने कोई लिमिट तय नहीं की है। फौजियों के इलाज में खर्च होने वाली राशि का केंद्र सरकार वहन करेगी।

रिटायर्ड सैनिकों के बुरे वक्त में केंद्र सरकार ने साथ देने की योजना बनाई है। मंत्रालय के निर्देश पर रिटायर्ड फौजियों के लिए चिप लगा विशेष प्रकार का कार्ड बनाया जा रहा है। इस कार्ड को उनके आधार नंबर से लिंक किया जाएगा । विशेष प्रकार के चिप लगे कार्ड में फौजी की पूरी बायोग्रॉफी सहित पत्नी,बेटा,बहू व बेटी अगर अविवाहित है तो उनका भी कार्ड में उल्लेख रहेगा। विशेष प्रकार के कार्ड को स्वेप करते ही रिटायर्ड फौजी की पूरी जानकारी कंप्यूटर के स्क्रीन पर सामने आ जाएगी । चिप युक्त कार्ड से फौजी देश के किसी भी कोने में बेहतर इलाज करा सकेंगे । रिटायर्ड फौजी व परिजनों के इलाज में जितनी राशि खर्च होगी सब केंद्र सरकार वहन करेगी।

बेटी अविवाहित तो चिकित्सा सुविधा की पूरी जिम्मेदारी सरकार की

रिटायर्ड फौजी बेटी अगर अविवाहित है और उसकी उम्र ज्यादा हो गई है तो भी इलाज में खर्च होने वाली राशि का भुगतान केंद्र सरकार करेगी । जबकि 25 वर्ष के बाद बेटे की इलाज की जिम्मेदारी पिता या फिर स्वयं बेटे की होगी ।

इनका कहना है

केंद्र सरकार के निर्देश पर रिटायर्ड सैनिकों के लिए विशेष चिप से देश के किसी भी कोने में इलाज कराने की सुविधा मिलना प्रारंभ हो जाएगा इसकी राशि केंद्र सरकार वहन करेगी – शिवेंद्र पांडेय-कल्याण संयोजक,जिला कल्याण सैनिक बोर्ड बिलासपुर

‘मैं हिन्दू हूं ईद नहीं मनाता…’, ये हैं योगी के 10 सबसे विवादित बयान

लोकल डेस्क. 19 मार्च यानी सोमवार को योगी सरकार के एक साल पूरे हो रहे हैैं। बता दें कि राजनीति में सीएम योगी आदित्यनाथएक कट्टर इमेज वाले हिंदू लीडर के रूप में जाने जाते हैं। अक्सर वे अपने तीखे और विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। जिसका विपक्ष ने जमकर विरोध किया। आपको योगी के अब तक के दिए विवादित बयानों से रूबरू कराने जा रहा है। लोकभवन में होगा जश्न…

सोमवार को योगी सरकार के एक साल पूरे होने पर लोकभवन में जश्न मनाया जाएगा।
– जानकारी के मुताबिक, इस मौके पर सरकार के कामकाज पर बनी फिल्म भी दिखाई जाएगी।
– फिल्म में यूपी सरकार के साल भर में किए गए तमाम कामों का ब्योरा होगा।

इन वेबसाइट पर ‘रेड’ मूवी हुई ऑनलाइन Leak, लोग कर रहे फ्री में डाउनलोड

यूटिलिटी डेस्क। अजय देवगन स्टारर मूवी ‘रेड’ ऑनलाइन लीक हो गई है। ये फिल्म 16 मार्च, शुक्रवार को रिलीज हुई थी, लेकिन रिलीज होने के अगले दिन ही ये लीक हो गई। लीक होने वाली मूवी की लेंथ 120 मिनट की है। हालांकि, इस मूवी का रनिंग टाइम 128 मिनट है। वहीं, फिल्म का डाउनलोड साइज 671.14 MB है। इसे हजारों लोग ऑनलाइन डाउनलोड कर चुके हैं। फिल्म ऑनलाइन डाउनलोड करना पायरेसी लॉ की तहत गैरकानूनी होता है। ऐसे में आप इन वेबसाइट पर जाकर मूवी डाउनलोड करते हैं तब आप मुसीबत में फंस सकते हैं। इस तरह की वेबसाइट पर जाकर मूवी डाउनलोड करने से पायरेसी को बढ़ावा मिलता है।

# 3 साल की सजा

पायरेसी लॉ की तहत अगर कोई ऑनलाइन ऐसी मूवी देखता है जो पायरेसी कंटेंट में आती है। तब उसे इसके लॉ के तहत 3 साल तक की सजा भी हो सकती है। ठीक इस तरह यदि कोई मूवी डाउनलोड करता है तब उसके लिए भी सजा का प्रावधान है। ऐसे में पायरेसी को बढ़ावा देने से बचना चाहिए।

# इन वेबसाइट से हो रही फ्री डाउनलोड

इस फिल्म को इंडिया में कई वेबसाइट से डाउनलोड किया जा रहा है। इसमें rdxhd, moviespur, bigdaddymovies, aeonsource समेत कई अन्य वेबसाइट भी शामिल हैं। इन वेबसाइट पर ये मूवी फ्री डाउनलोड हो रही है। यानी इसके लिए कोई पेमेंट नहीं करना है, सिर्फ डाउनलोडिंग के लिए डाटा खर्च करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, मूवी को ऑनलाइन भी देखा सकता है। ‘रेड’ मूवी ऑनलाइन लीक होने से फिल्म के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर असर हो सकता है।

सामने आया हसीन जहां के धोखेबाजी का ये प्रूफ, उधर शमी के गांव पहुंची पुलिस

अमरोहा.टीम इंडिया के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और हसीन जहां का एक मैरिज सर्टिफिकेट सामने आया है। इसके मुताबिक, शमी के साथ शादी के वक्त जहां ने खुद के तलाकशुदा और दो बेटियां होने की बात छिपाई थी। सर्टिफिकेट में जहां ने अपने मैरिटल स्टेटस में बैचलर पर निशान लगाया है। खुद शमी ने इसे रीट्वीट किया है। बता दें कि 7 अप्रैल, 2014 को शमी और जहां की शादी हुई थी। इस बीच, कोलकाता पुलिस भी यूपी के अमरोहा में शमी के घर परिजनों से पूछताछ करने पहुंची। मुकदमें की तैयारी में शमी…

– क्रिकेटर शमी ने कहा- ‘हसीन ने मुझसे झूठ बोलकर शादी की थी। उसने मुझे धोखा दिया। जिंदगी का सबसे बड़ा राज छिपाया।’
– इसके साथ ही दोनों के बीच सुलह की सारी उम्मीदें भी खत्म हो गई हैं।
– हालांकि, तब तक हसीन जहां पहले पति शेख सैफुद्दीन को डायवोर्स दे चुकीं थीं।
– बता दें कि शमी ने मामले को लेकर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर ली है।
– शमी ने कहा, ‘पत्नी के साथ विवाद को सुलझाने की खूब कोशिश की, लेकिन अब कानूनी लड़ाई लड़ूंगा।’
– ‘मैं और मेरी फैमिली पुलिस को जांच में पूरा सहयोग कर रही है।’

शमी के घर पहुंची कोलकाता पुलिस
– बता दें कि हसीन जहां, शमी और उनके परिजनों पर दहेज उत्पीड़न, जानलेवा हमले और दुष्कर्म जैसे संगीन आरोप लगाते हुए पहले ही कोलकाता में एफआईआर दर्ज करा चुकी हैं।
– इसी सिलसिले में रविवार को कोलकाता पुलिस यूपी के अमरोहा स्थित शमी के घर उससे पूछताछ के लिए पहुंची।
– जहां कोलकाता पुलिस को घर पर परिजनों में से कोई नहीं मिला। तब केवल रिश्तेदार मौजूद थे। पुलिस उनसे ही सवाल-जवाब कर लौट गई।
– रिश्तेदार मुजीब ने के मुताबिक, पुलिस केवल दोनों के बीच हुए झगड़े के बारे में पूछताछ कर चली गई।
– कोलकोता क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर चेतन्य ने बताया कि अभी गांववालों और रिश्तेदारों से साधारण बातचीत हुई है।
– उन्होंने कहा, मामले की जांच चल रही है। इसकी डिटेल अमरोहा एसपी को भी दी गई है।

बुर्का पहने चार महिलाएं मस्जिद के प्रांगण में खेल रही थीं बोर्ड गेम, फोटो वायरल, विवाद

‘हमने तुरंत महिला अधिकारियों को मौके पर भेजा और उन्होंने महिलाओं से ऐसी चीजें जगह की शुचिता को ध्यान में रखते हुए न करने के लिए कहा. महिलाओं ने बात मानते हुए तुरंत इस एरिया को खाली कर दिया था.’

रियाद: मक्का की पवित्र मस्जिद के प्रांगण में बुर्का पहने चार महिलाओं की एक तस्वीर सऊदी अरब में विवादों के घेरे में आ गई है. यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. दरअसल बुर्का पहने ये महिलाएं मस्जिद के प्रांगण में कोई ‘बोर्ड गेम’ खेलती नजर आ रही हैं.

इस तस्वीर के वायरल होने के कुछ ही समय बाद सऊदी अरब अथॉरिटी ने एक स्टेटमेंट जारी कर दिया. स्टेपफीड नामक वेबसाइट के हवाले में न्यूज एजेंसी एएनआई ने बताया कि पवित्र मस्जिद की गवर्निंग अथॉरिटी के एक प्रवक्ता के मुताबिक, सुबह 11 बजे पिछले शुक्रवार कुछ सिक्यॉरिटी अफसरों ने चार महिलाओं को सीक्वेंस नामक बोर्ड गेम खेलते देखा. स्टेटमेंट में कहा गया है- हमने तुरंत महिला अधिकारियों को मौके पर भेजा और उन्होंने महिलाओं से ऐसी चीजें जगह की शुचिता को ध्यान में रखते हुए न करने के लिए कहा. महिलाओं ने बात मानते हुए तुरंत इस एरिया को खाली कर दिया था.

स्टेपफीड एक अंग्रेजी वेबसाइट है जिसका कहना है कि यह मामला ‘अरब जगत में ट्रेंड कर रहा है’. हालांकि इंटरनेट पर लोग इसे अलग अलग तरह से ले रहे हैं. किसी ने महिलाओं के यूं बोर्ड गेम खेलने की निंदा की जबकि किसी ने उनका विरोध करने का वालों से असहमति जताई. इसी बीच बता दें कि साल 2015 में मदीना के मस्जिद-ए-नवाबी में कुछ युवा कार्ड्स खेलते हुए पाए गए थे. रिपोर्ट्स थीं कि सुरक्षागार्डों ने उन्हें अरेस्ट कर लिया था

‘Ready for Summer’: Busty Holly Hagan flaunts her ample cleavage and tiny waist in a bright blue bikini… amid claims she’s returning to Geordie Shore

She’s allegedly set to make a comeback to Geordie Shore.

And keeping her fans guessing, Holly Hagan teased her followers with a sexy bikini snap on Sunday, showing off her incredible figure in her sizzling two-piece.

The reality star flaunted her ample cleavage in the electric blue swimwear, highlighting her enviable figure.

The tiny bikini drew attention to her slender waistline and flat stomach as she posed up a storm.

‘Ready for Summer’, she captioned the snap, tagging the ensemble as Miss Pap.

Holly has been dazzling her fans with an array of Kim Kardashian inspired posts of late, favouring the same long silver wig and faded filter loved by the American star.

This comes amid claims Holly will reportedly return to screens on Geordie Shore for the 17th series, which is set to star show regulars Sophie Kasaei and Chloe Ferry.

Raj Thackeray calls for ‘Modi-mukt Bharat’

Mumbai [Maharashtra] [India], Mar 19 (ANI): Maharashtra Navnirman Sena (MNS) chief Raj Thackeray on Sunday called for a ‘Modi-mukt Bharat.’

Addressing a rally on the occasion of Gudi Padwa in Mumbai‘s Shivaji Park, Thackeray said, ‘Today, we have to gear up for the third independence. All the political parties must unite to make Modi-mukt Bharat a reality.’

In an hour-long speech, the MNS chief also warned about attempts by certain elements to spark nation-wide riots in future.

Voices of a “united opposition” gained even more momentum after the Bharatiya Janata Party‘s (BJP) lost two crucial seats in the Uttar Pradesh by-polls.

According to the experts, joining forces is the only way to dethrone the Modi-led government in 2019 Lok Sabha elections. (ANI)

दलेर से मीका तक, मारपीट-रेप जैसे मामलों में जेल जा चुके ये 10 फेमस सिंगर

मुंबई. हाल ही में पटियाला कोर्ट ने पंजाबी सिंगर दलेर मेहंदी को 2003 के मानव तस्करी के एक मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। मामले में उन्हें दो साल की जेल हुई लेकिन वे जेल गए और करीब 20 मिनट के अंदर ही उनको जमानत भी मिल गई। वैसे ये कोई पहला मामला नहीं है जब कोई सिंगर जेल गया है इससे पहले भी कई सिंगर्स जेल जा चुके हैं। आज इस पैकेज में हम आपको बता रहे हैं ऐसे ही 10 सिंगर्स के बारे में जो कभी मारपीट, शराब पीकर गाड़ी चलाने तो कभी रेप के आरोप में जेल का चुके हैं।

1. मीका सिंह
कई कॉन्ट्रोवर्सी में फंस चुके मीका एक बार तो गिरफ्तार भी हो चुके हैं। ये वाकया उस दौरान का है जब उन्होंने अपना आपा खोकर दिल्ली में एक फैन को थप्पड़ जड़ दिया था।
2. प्राजक्ता शुक्रे
‘इंडियन आइडल’ की एक्स कंटेस्टेंट और बॉलीवुड सिंगर प्राजक्ता को शराब पीकर कार चलाने और दो लोगों को कार से चोटिल करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। बता दें, उस वक्त उनके साथ कार में सिंगर अभिजीत सावंत भी मौजूद थे।

यहां एक ही किचन में बनता है 65 परिवारों का फ्री खाना, 7 साल से चल रही है ये प्रथा

नाथद्वारा(उदयपुर). शहर में बोहरा समाज के 65 घरों में सुबह का भोजन एक साथ बनता है और फिर हर घर टिफिन भेजते हैं। सिलसिला सात साल से चल रहा है। अपने धर्मगुरु की नसीहत पर देश के कई शहरों में बोहरा समाज के लोग इसी प्रकार सामूहिक भोजन बनाकर घर-घर टिफिन पहुंचाने की मिसाल पेश कर रहे हैं। इस व्यवस्था में एक ही मीनू का टिफिन हर घर पहुंचाने के पीछे ऊंच-नीच का भेदभाव खत्म करने की सोच भी है।

– शहर में बोहरा समाज के 65 परिवारों में करीब 350 लोग हैं। अधिकांश परिवार व्यापारी वर्ग से हैं।
– 7 साल पहले इस व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी।
– भोजन समाज के भवन में तैयार होता है। किसी के घर मेहमान हो तो कमेटी को सदस्यों के अनुसार मात्रा बढ़ाने की सूचना दे दी जाती है।
– सामूहिक भोजन बनाने के लिए फैज उल मवाईद बुरहानिया कमेटी बना रखी है, जो भोजन की गुणवत्ता, वितरण की व्यवस्था देखती है।
– दाना कमेटी रसोई का राशन खरीदने की जिम्मेदारी निभाती है। इस कमेटी में 10 सदस्य हैं।

मेन्युकैलेंडर के अनुसार

– सामूहिक भोजन के लिए कैलेंडर तय कर धर्मगुरु के स्तर पर बनाई कमेटी स्थानीय कमेटी को भेज देती है।
– मेन्यु कैलेंडर के अनुसार ही तय होता है। सप्ताह में एक दिन मिठाई तथा पर्व-त्योहार पर मिठाई सहित हर दिन के लिए दाल, सब्जी का मीनू निर्धारित है।

एक-दूसरे की खुशी में शामिल होता है हर परिवार

– खुशी के मौकों पर समाज के लोग अपनी तरफ से रसोई घर में कमेटी को सूचना देकर मिठाई बनवाते हैं और इसे हर घर बंटवाते हैं।
– इससे समाज के लोगों का हर परिवार की खुशी में शामिल होने में जुड़ाव होता है।
– टिफिन दोपहर एक बजे तक घर-घर पहुंचाने की जिम्मेदारी वितरण कमेटी की होती है।
– रसोई सुबह 9 बजे शुरू होती है। कोई सफर पर जा रहा है तो बस स्टैंड, बीमारी में अस्पताल तक भी भोजन पहुंचाया जाता है।
– पर्व, त्योहार, जन्मदिन, सालगिरह सहित अन्य मौकों पर कमेटी के पास अतिरिक्त टिफिन की सूचना पहले ही आ जाती है।

सामर्थ्य के अनुसार देते हैं आर्थिक सहयोग

– इस व्यवस्था के बदले समाज के लोग सामर्थ्य के अनुसार आर्थिक सहयोग देते हैं।
– टिफिन पहुंचाने के बदले कोई शुल्क निर्धारित नहीं है। समाज की कमेटी अपने स्तर पर इसका खर्च वहन करती है।

योगी सरकार का एक साल: 5 बड़े चुनावी वादों में से ज्यादातर अधूरे, कुछ पर काम ही शुरू नहीं हुआ

लखनऊ.भाजपा ने 28 जनवरी, 2017 को उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव-2017 के लिए घोषणा पत्र जारी किया था। इसमें यूपी में अपराध और भ्रष्टाचार को खत्म कर, विकास और गरीबों की बेहतरी के लिए काम करने के दावे किए थे। भाजपा बहुमत के साथ जीती और 19 मार्च, 2017 को योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनकी सरकार का एक साल पूरा होने पर DainikBhaskar.com ने उनके 5 वादों की जमीनी हकीकत जानी।

1) किसानों की कर्जमाफी

वादा: किसानों का पूरा कर्ज माफ होगा। बिना ब्याज कर्ज दिया जाएगा।
सरकार ने क्या किया: योगी ने पहली कैबिनेट मीटिंग में 36 हजार 359 करोड़ रुपए की कर्ज माफी का एलान किया। 78 लाख किसानों को कर्जमाफी का लाभ मिलना था।
हकीकत:अभी तक 17.30 लाख किसानों का कर्ज माफ हुआ। यह कुल टारगेट का सिर्फ 22% है। देवरिया, वाराणसी, गोरखपुर और कुशीनगर को छोड़कर किसी भी जिले में दूसरे चरण की कर्जमाफी के प्रमाण पत्र बांटने का काम शुरू नहीं हुआ है।
दलील:कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही किसानों को कर्जमाफी का लाभ मिला है। दूसरे चरण के प्रमाणपत्र भी जल्द बांटे जाएंगे।
आरोप:नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि कर्जमाफी की आड़ में सरकार ने खेती का बजट 70.13% कम कर दिया। किसानों को छला गया है।

2) शिक्षा और रोजगार
वादा:
 पहली से 8वीं तक के बच्चों को स्वेटर, मौजे और जूते मुफ्त दिए जाएंगे। ग्रेजुएट तक लड़कियों और 12वीं तक लड़कों को लैपटॉप मुफ्त दिया जाएगा।
सरकार ने क्या किया: सरकार ने दो बार टेंडर निकाल, लेकिन दिसंबर 2017 तक प्रॉसेस पूरी नहीं हो पाई। बाद में कलेक्टर को अपने स्तर पर टेंडर कराने को कहा गया। फ्री लैपटॉप वितरण योजना- 2017 शुरू की।
हकीकत:1.5 करोड़ बच्चों में से सर्दी खत्म होने तक सिर्फ 45% बच्चों को स्वेटर बांटे गए। 22 से 23 लाख स्टूडेंट्स में से अभी किसी को भी फ्री लैपटॉप नहीं मिला।
दलील: विभाग की मंत्री अनुपमा जायसवाल ने कहा कलेक्टर को निर्देश दिए थे सभी बच्चों को स्वेटर बांट दिए गए हैं।
आरोप: सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि स्वेटर बांटने में सबसे बड़ा भ्रष्टाचार हुआ। ठंड खत्म होने के बाद दिखावे के लिए स्वेटर बांटे गए।

3) बिजली की समस्या
वादा:
 2019 तक हर घर में बिजली। 5 साल में 24 घंटे बिजली मिलने लगेगी।
सरकार ने क्या किया:राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक, सपा सरकार में 14 घंटे बिजली मिल रही थी, अब 16 से 18 घंटे मिल रही है। हालांकि, लोड बढ़ने से किसानों को ज्यादा राहत नहीं मिली।
हकीकत: बिजली का निजीकरण किया गया। रेट 50 से 150 फीसदी तक बढ़े। गर्मी शुरू होते ही शहरों में भी बिजली कटौती शुरू हो गई है।
दलील: ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा का दावा है कि सपा सरकार ने पांच साल में जितने ट्रांसफार्मर बदले उतने हमने 1 साल में बदल दिए। करीब 37 हजार ट्रांसफार्मर खराब हो गए थे।
आरोप: सपा नेता रामगोविंद चौधरी ने कहा कि केंद्र के सहारे यूपी में बिजली की सप्लाई की जा रही है। बिजली का रेट बढ़ाकर अवैध वसूली की जा रही है।

4) सेहत का ख्याल
वादा:
 राज्य में 25 सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और 6 एम्स बनाएंगे।
सरकार ने क्या किया: बजट में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और एम्स के लिए पहले चरण में 4323.89 करोड़ रुपए रखे गए हैं।
हकीकत:अभी तक किसी भी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल या एम्स के लिए जमीन तक तय नहीं हुई है। गोरखपुर एम्स का शिलान्यास अखिलेश सरकार में किया गया था। डेढ़ साल बीत गया, लेकिन इसका भी निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
दलील: स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह का कहना है कि यूपी में स्वास्थ्य की समस्या बहुत ही जटिल थी। पिछली सरकारों ने स्वास्थ्य के बजट में घोटाले किए। एक साल में हमने बेहतर इंतजाम किए।
आरोप: सपा के सीनियर लीडर और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने कहा कि सरकार काम करने की बजाए अस्पतालों का भगवाकरण करवा रही है। बीआरडी कॉलेज की घटना सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है।

5) गड्ढा मुक्त सड़कें
वादा:
प्रदेश में सभी सड़कें 15 जून 2017 तक गड्ढा मुक्त होंगी।
सरकार ने क्या किया: सरकार ने अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारी सौंपी। कुल 1 लाख 21 हजार 816 किलोमीटर सड़क गड्ढा मुक्त की जानी थी।
हकीकत:सिर्फ 61 हजार 433 किलोमीटर यानी सिर्फ 50% सड़कें ही गड्ढा मुक्त हो पाई। टारगेट पूरा करने के लिए सिर्फ तीन महीने से भी कम वक्त बचा है।
दलील: डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का कहना है कि सड़कों को गड्डा मुक्त करने के लिए हम लगातार काम कर रहे हैं। विभाग के पास उचित बजट नहीं था फिर भी हमने अन्य विभागों के सहयोग से लक्ष्य को पूरा किया है।
आरोप: कांग्रेस प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत का कहना है कि, गड्डे मुक्त सड़क का दावा कुछ ही जिलों में सफल हुआ है। जिन सड़कों को गड्डा मुक्त किया गया है वो फिर से उसी तरह हो गई हैं।

Nidahas trophy India vs Bangladesh final: Karthik’s last-ball six helps India win

India skipper Rohit Sharma won the toss and chose to bowl first against Bangladesh in the Twenty20 tri-series final in Colombo on Sunday.

The youthful Indian team, which reached the final with three wins from four matches, made just one change — with paceman Jaydev Unadkat coming in for Mohammed Siraj.

Bangladesh captain Shakib Al Hasan said his team would have to be at their best against India. The underdogs are unchanged from their previous win against hosts Sri Lanka.

‘It was very hard’ Francia Raisa reveals both she and best friend Selena Gomez went through depression after kidney transplant surgery

Selena Gomez revealed she underwent a kidney transplant due to her lupus in an Instagram post she shared in September 2017.

And Francia Raisa, her best friend who donated her kidney to Selena, said they both ‘went through depression’ post-surgery, according to Self.

The 29-year-old actress told the magazine in a video, which was published on Wednesday, that nothing could have prepared her for how hard it all was during her recovery process.

Love at first swipe!Firefighter and maths teacher who fell for each other on Tinder and now have an adorable one-year-old baby girl reveal their tips for finding ‘the one’ online

When you think of dating app, Tinder, long term commitment is not the first thing which springs to mind.

However, for Perth couple, former maths teacher Christie McClennan, 40, and firefighter Adam Fahey, 43, it was love at first swipe.

Thirty minutes into their first date on a Tasmanian beach, the couple knew they had found ‘the one’.

After moving interstate to be together, starting a business named ‘Tinderly’ in honour of their love and travelling around the world, the couple now has an adorable 14-month old baby named Sasha.

Eastern Ghouta: Syrian government forces clash with rebels.

Hours into second attempt at implementing Russian truce, government shelling intensifies in towns near front lines.

Syrian government forces have clashed with rebels on the outskirts of Eastern Ghouta, despite a Russian-sponsored truce that is now in its second day, a war monitor reported.

Since Wednesday morning, during a second attempt at implementing a ceasefire in the besieged enclave, Syrian President Bashar al-Assad‘s forces have been locked in “fierce” fighting with rebels who have been in control of the area since 2013, according to the Syrian Observatory for Human Rights (SOHR).

The confrontation is part of a ground offensive launched by the government on Sunday. It has been fighting on multiple fronts in an attempt to penetrate the enclave.

The daily, five-hour “humanitarian pause” is meant to evacuate the injured out of the Damascus suburb and allow humanitarian convoys to deliver food and medicine to some 400,000 people trapped inside.

The first attempt to implement the truce on Tuesday was unsuccessful, as aerial bombardment and artillery fire killed at least four people and injured dozens more.

Saudi crown prince to visit UK on March 7.

Saudi crown prince Mohammed bin Salman will visit the United Kingdom (UK) on an official visit from March 7, the Downing Street has announced.

“The visit will also provide an opportunity to enhance our co-operation in tackling international challenges such as terrorismextremism, the conflict and humanitarian crisis in Yemen and other regional issues such as Iraq and Syria,” Al Jazeera quoted a spokesperson for the UK‘s prime minister Theresa May as saying.

“The visit will also provide an opportunity to enhance our co-operation in tackling international challenges such as terrorismextremism, the conflict and humanitarian crisis in Yemen and other regional issues such as Iraq and Syria,” the statement added.

According to the reports, in a separate statement issued after the meeting with her cabinet, May said the crown prince’s visit would allow Britain to talk “frankly and constructively” about areas of concern like Yemen and security in the Middle East.

Meanwhile Reprieve, a UK-based rights group, has objected to the crown prince’s visit, saying that, “The close relationship Theresa May trumpets has led to British police officers training Saudi agents in the kind of cyber-monitoring techniques which have been used to justify death sentences.”

Indonesia: Christian couple caned for gambling.

Authorities caned a Christian married couple on Tuesday after they were arrested for gambling at an entertainment centre in Banda Acehin Indonesia.

The Aceh Sharia Court sentenced the couple, identified as Dahlan Sili Tongga, 61, and Tjia Nyuk Hwa, 45, to eight and seven lashes respectively for violating provincial laws. The caning took place outside the Babussalam Mosque in Lampaseh Aceh in the city, The Straits Times reported.

The couple was found guilty of violating a jinayat (Islamic bylaw) on gambling.

According to the sharia law, each lash is equivalent to a one-month imprisonment. Hence, it is believed that the couple preferred to receive corporal punishment.

The court also sentenced a 67-year-old man named Ridwan to 22 lashes for allowing gambling to take place on the premises. The authorities confiscated coins, vouchers and cash from him as well.

“This punishment shows our commitment (to implementing sharia). We want to create a deterrent so that other people do not violate sharia,” Banda Aceh Mayor Aminullah Usman said, adding that the caning was deliberately carried out in an open space so that the public could see it.

Aceh is the only province in Indonesia that implements the sharia, although non-Muslims, who are found guilty of committing crimes are regulated under the province’s criminal code such as gambling.

India to double state purchases of oilseeds, pulses.

In a bid to give a boost to farmers, the Union Cabinet has doubled state purchases of oilseeds and pulses from them.

The Cabinet Committee on Economic Affairs, chaired by Prime Minister Narendra Modi, approved the regularisation and extension of Government Guarantee provided to lender bank for providing credit limit to National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India (NAFED) Rs 19,000 crore from earlier Rs 9,500 crore for undertaking procurement operation of pulses and oilseeds under Price Support Scheme (PSS) and to Small Farmers Agri-Business Consortium (SFAC) for Rs 45 crore for meeting their existing liability and settlement of extant claims.

These Government Guarantees are valid for a period of five years, till 2021-22.

As the market price of most pulses and oilseeds is below the Government of India prescribed-Minimum Support Price (MSP) these provisions will help farmers in selling their produce at the MSP, and will also help prevent a situation where they are forced to make flash sales of their crops, because of the supply-demand gap, during peak arrival periods.

It will also encourage higher investment in the agro-sector and consequently yield higher production and safeguard the interest of the consumers by making supplies available at a reasonable price.

No evidence of Islamic State hand in Kashmir policeman’s killing: J&K DGP.

A Union Home Ministry official says there was no “physical infrastructure” of terror group in the Kashmir Valley.

The Home Ministry said on Tuesday that an engineering student who recently joined militancy had pushed a message on an Islamic State-affiliated news agency that the outfit had killed a policeman in Srinagar’s Soura area on Sunday. A senior Ministry official said there was no “physical infrastructure” of the IS in the Kashmir Valley and the militant might have used the platform to create confusion.

The militant, Eisa Fazli, who the Home Ministry said was associated with both Lashkar-e-Taiba (LeT) and Hizbul Mujahideen, had pushed the message on news agency Amaq along with a picture of the dead policeman and his rifle.

यहां ऐसे की गई 30 हाथियों की शिफ्टिंग, 300 करोड़ रुपए हुए खर्च.

नैरोबी.केन्या के सोलियो रेंच समेत अलग-अलग जगहों से 30 हाथियों को ट्सावो नेशनल पार्क में शिफ्ट किया गया। केन्या वाइल्ड लाइफ सर्विस के रेंजर्स, वेटनेरियंस और कंजरवेशनिस्ट्स को 3 हाथियों को ही बेहोश करने और लॉरी में लोड करने में 3 घंटे से भी ज्यादा का वक्त लग गया। बेशकीमती दांतों के लिए हाथियों पर शिकार का खतरा मंडरा रहा है। इसके साथ ही ये किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचाते थे, जिसे देखते हुए इन्हें प्राइवेट वाइल्ड लाइफ कंजर्वेंसी से नेशनल पार्क में शिफ्ट करने का फैसला लिया गया। 300 करोड़ रुपए हुए खर्च…

– शुरुआती दौर में सिर्फ तीन हाथियों को तैता तावेता काउंटी के नेशनल पार्क में शिफ्ट किया गया। इसके बाद दो हफ्ते में 30 से ज्यादा हाथियों को देशभर के दूसरे पार्क में शिफ्ट किया गया।

– इस पूरी प्रॉसेज में करीब 3 अरब रुपए खर्च हुए हैं। टूरिज्म कैबिनेट सेक्रेटरी नजीब बलाला ने कहा कि समस्याओं को खत्म करने का यहीं बेस्ट तरीका था।
– उन्होंने कहा कि ट्सावो नेशनल पार्क में इतने हाथी शिफ्ट करने पर उम्मीद है कि जानवर इंसानों की बस्ती में दखल नहीं देंगे।
– उन्होंने बताया कि ट्सावो में करीब 30 हजार हाथी रह सकते हैं, लेकिन इस वक्त यहां सिर्फ 12 हजार हाथी ही रह रहे थे, इसलिए इन्हें यहां शिफ्ट किया गया।

ऐसे दिया ऑपरेशन को अंजाम
– इस ट्रांसलोकेशन ऑपरेशन में ग्राउंड और एरियल टीम के बीच जबरदस्त कोऑर्डिनेशन दिखा। फिक्स्ड विंग वाले एयरप्लेन से एक टीम फील्ड हवा में थी। वहीं, दूसरे एयरक्राफ्ट में सवार एक रेंजर हाथियों पर ट्रैकुलाइजर से फायर कर रहा था। जैसे ही सटीक निशाना लगता और जानवर जमीन पर गिरता ग्राउंड टीम मौके पर पहुंच जाती। सबसे मुश्किल काम 7-7 टन के इन हाथियों को शिफ्टिंग के लिए लॉरी पर चढ़ाना था। साथ ही, इस बात का भी ख्याल रखना था कि उनका इसमें कहीं दम न घुटने लगे।

जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला 3 दिन के दौरे पर भारत आए, मोदी ने एयरपोर्ट पर किया रिसीव.

नई दिल्ली.जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला II बिन अल हुसैन अपने दूसरे दौरे पर मंगलवार रात भारत आए। उन्हें रिसीव करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एयरपोर्ट पहुंचे। किंग अब्दुल्ला का दौरा तीन दिन का है, वो 1 मार्च तक भारत में रहेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री और अब्दुल्ला के बीच रक्षा समेत कई अहम करार और दोनों देशों के रिश्तों को बढ़ाने पर चर्चा होगी। किंग ‘इस्लामिक हेरीटेज एंड प्रोमोटिंग अंडरस्टैंडिंग’ विषय पर विज्ञान भवन में स्पीच भी देंगे। बता दें कि भारत और जॉर्डन के बीच 1950 से करीबी रिश्ते हैं।

क्या है अब्दुल्ला का प्रोग्राम?

– विदेश मंत्रालय के मुताबिक, किंग अब्दुल्ला के साथ क्वीन रानिया भी भारत आई हैं, वह 2006 में देश का दौरा कर चुके हैं।
– किंग अब्दुल्ला और नरेंद्र मोदी के बीच दोनों देशों के रिश्तों को मजबूती देने पर बात होगी। इस दौरान रक्षा समेत कई अहम करार हो सकते हैं।
– बुधवार को वह जॉर्डन के टेक्नीकल इंस्टीट्यूट्स में सहयोग बढ़ाने को लेकर आईआईटी दिल्ली जाएंगे।

– इसके बाद दोनों देशों के सीईओ के साथ बिजनेस को ध्यान में रखते हुए बात करेंगे। बता दें कि भारत और जॉर्डन के बीच 2016-17 में करीब 87 हजार 800 करोड़ का कारोबार हुआ।
– जॉर्डन के किंग गुरुवार को इंडियन इस्लामिक सेंटर की ओर से विज्ञान भवन में आयोजित प्रोग्राम में स्पीच देंगे।

– इसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उनके सम्मान में भोज देंगे। इसमें उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ कई लोग मौजूद रहेंगे

मोदी ने दिया था न्योता

– फरवरी में नरेंद्र मोदी फिलिस्तीन दौरे पर गए थे। तब प्रधानमंत्री पहले जॉर्डन पहुंचे थे। मोदी ने इसी दौरान किंग अब्दुल्ला को भारत आने का न्योता दिया।

32 महिलाओं से रेप कर चुका है ये शख्स, मौत की नींद सुलाने सबको देता था साइनाइड

कर्नाटक के इस सीरियल किलर का नाम मोहन कुमार है। उसका जन्म, 1963 में हुआ था। वह पेशे से स्कूल टीचर था। सुनंदा घर से मंदिर जाने के लिए निकली थी। जिसके बाद उसकी लाश मैसूर बस अड्डे पर मिली थी। 2009 में अनीता नाम की महिला की हत्या के बाद इस सीरियल किलर के अपराधों का खुलासा हुआ था.

Three Steps to a Healthy Home

We all want to relax and be ourselves when we get home. Yet too often that is not so easy. There are responsibilities and burdens which await us, bills to pay, dishes to wash, messes to clean up. For some, home is a place of conflict and unease. Amidst the stress and demands of daily life we all need a refuge.

Your home is meant to be the central oasis of day to day life, a sacred safe space where you can tap in and experience your true inner self, away from the external world. This can only happen when your home is an emotionally healthy space.

Here are 3 essential steps to having an emotionally healthy home:

Make Peaceful Relationships the Soul of Your Home

Peace is not just the absence of conflict, it is the heartfelt soul of a relationship. When we create and live in peace with ourselves, our spouses and family, we strengthen the home as a peaceful space. Everyone benefits. We want to be there. We feel better, calmer, safer.  Our children are happier. The modeling of peace is especially important from parents to children. This modeling happens through displays of mutual respect and through shared values which tie the home together, creating a broad sense of purpose and meaning.

Create a Loving Atmosphere

Space matters. Make your home appear warm and inviting to almost any stranger who may enter it. This does not require lavish furnishings, but only that there is an environment where people would want to gather. The physical aspects of a home should reflect the kind and peaceful spirit that your family aspires to. Dress your home with symbols of care, display images which inspire and affirm your values. The physical layout of a home creates the atmosphere where peace and love can be nurtured.

Unify Time

Time passes quickly and we can each get caught in our own bubble without really being present to the people who share our home. We may even find that some people in the home live a separate life. While respecting personal space, create a sense of togetherness. Structure the day to function in a harmonious way. Create responsibilities in a way that values each person’s contribution and creates a sense of dignity. Unify time in a way which says to each person in the home: “You matter.”

LOVE & MARRIAGE

True love and marriage is the process of two halves of one soul reuniting again for all eternity. This is why everyone is looking for it.

 

I want him to be handsome. I want her to be pretty. I am looking for wit. I am looking for kindness. Should I perform a credit check? My wedding will be on the beach. My marriage is so boring… When it comes to the body of love and marriage, we know exactly what we want. But what about the soul of love and marriage, do I know what I want? What type of spiritual connection am I looking for? How do I put the soul into “soul-mate”? What is the inner meaning of marriage? And what happens once I am married? Is love only at first sight or does it continue? What happens when I have the marital without the bliss?

बेटे ने पहले काटा बुजुर्ग पिता का गला, फिर फेवीक्विक से जोड़ने लगा गर्दन

बस्ती.यहां से एक हैवान बेटे की हैरान कर देने करतूत सामने आई है। बता दें कि पहले तो बेटे ने अपने बुजुर्ग पिता का तेजधार हथियार से गला रेत दिया, फिर उसे फेवीक्विक से जोड़ने की कोशिश करने लगे। पिता की चीखें घर के बाहर ना जाएं, इसलिए लड़के ने टीवी की आवाज तेज कर दी। जब उसने मामला बिगड़ता देखा तो पिता को घर में बंद कर भाग निकला। कराहने की आवाज पड़ोसियों ने सुनी…

मामला जिले के सोनहा थाना क्षेत्र के दरियापुर जंगल टोला के भैसहवा का है। यहां रहने वाले 65 साल के रामदेव मिश्र रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी हैं। बताया जा रहा है कि शनिवार को जब रामदेव मिश्र के कराहने की आवाज पड़ोसियों ने सुनी तो गांव के प्रधान को इसकी जानकारी दी।

नजारा देख सभी रह गए दंग

मौके पर अपने सहयोगियों के साथ पहुंचे प्रधान ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने घर का ताला तोड़ा तो अंदर का नजारा देख सभी दंग रह गए। खून से लतपत रामदेव जमीन पर पड़े हुए थे और उनकी गर्दन में गंभीर चोट का निशान दिखाई दिया।

इसके बाद आनन-फानन में रामदेव को पास के ही हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। यहां उनका इलाज चल रहा है। रामदेव ने इशारों का सहारा लेकर पुलिस का आपबीती सुनाई।

होली पर आया स्पेशल ऑफर, 991 रु. में करें हवाई सफर, ये दो कंपनियां दे रहीं मौका

यूटिलिटी डेस्क।एयर कंपनियां होली के मौके पर डिस्काउंट के स्पेशल ऑफर लाई हैं। गोएयर और जेट एयरवेज की डिस्काउंट सेल शुरू हो चुकी है। इसके तहत सिर्फ 991 रु. में हवाई उड़ान का ऑफर दिया जा रहा है। वहीं जेट एयरवेज 20 परसेंट तक का डिस्काउंट दे रहा है।

गोएयर ‘होली लॉन्ग वीकेंड’ ऑफर लेकर आई है। इसमें कंपनी सिलेक्टेड रूट्स पर लोएस्ट प्राइज में हवाई सफर का ऑफर दे रही है। इसके साथ ही एचडीएफसी बैंक के डेबिट या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने पर 10 परसेंट का अतिरिक्त डिस्काउंट दिया जा रहा है। एयरलाइन की वेबसाइट के जरिए इस ऑफर का आप फायदा उठा सकते हैं।

991 रु. में बागडोगरा से गुवाहाटी के लिए टिकट ऑफर की जा रही है। वहीं चेन्नई से कोच्चि का फेयर 1120 रुपए है। इसी तरह बेंगलुरू से कोच्चि और गुवाहाटी से बागडोगरा के लिए 1291 रुपए में हवाई सफर का मौका है। यह ऑफर लिमिटेड सीट्स के लिए है। एयरलाइन ने सीटों की संख्या की कोई जानकारी नहीं दी है।

This Is How To Date When You’re A Woman With Anxiety

No matter how you try and rationalize it, being a girlfriend with anxiety is hard. Being anyone with anxiety is hard.

I’m not sure anxiety ever gets easier to deal with. From my experience, the second you think you’ve mastered it, it evolves. It begins to take shape in a new form that’s different and scarier than the first. The worst part is, you’re never prepared.

It makes you feel like a bad daughter, a bad sister, a bad friend, a bad girlfriend, and an all-around bad person. You feel defeated.

While being a girlfriend with anxiety is hard, I think I’m learning and I think I’m getting better at. At least I hope so… maybe a little bit each day. So here’s what I’ve learned and I hope you can take it with you as you begin to date with anxiety.

35 Qualities You Should Look For In A Life Partner

1. A strong sense of self, because you can’t be with someone who doesn’t know who they are.

2. Honesty, because your relationship won’t survive without it.

3. Joy, because if you’re going to survive through the struggles, you need to be with someone who makes you happy.

4. Integrity, because you can’t be with a person you don’t respect.

5. Accountability, because you can’t have a strong relationship with someone who isn’t going to be there for you.

6. Sense of humor, because as long as they know how to laugh at life, you’ll be okay.

7. Strength, because sometimes you’re going to feel weak, and you’re going to need someone to hold you up.

8. The ability to trust others, because sometimes they’re going to be weak, and they should be willing to lean on you as much as you lean on them.

9. Maturity, because a relationship needs two adults, not one.

10. Compatibility from the start, because that’s something you can’t really ‘work on.’

11. Independence, because being with another person doesn’t mean you should forget who you are.

12. Commitment, because the only way for a relationship to continue to grow is if you both take it seriously.

13. Vulnerability, because you can’t become close with someone if they don’t let their walls down.

14. An ability to argue in a productive way. Working through a problem will be necessary, but shouting or getting overly defensive will get you both nowhere.

15. Humility, because everyone makes mistakes, and you have to be willing to admit when you’re wrong if you want your relationship to have a chance.

16. Openness, or there will be no room for growth in your partnership.

Kate Hudson shares loved-up photo with Danny Fujikawa

Kate Hudson and boyfriend Danny Fujikawa are the cutest! The loved-up couple were pictured cuddling up together in a group photo with Danny’s brother and Kate’s stylist Sophie Lopez on Kate’s Instagram on Thursday, and fans were quick to label Danny “Mr Right”. Kate, who looked relaxed as she posed for the photo, captioned the photo: “Portrait of The Fujikawa’s and Two Ladies #DutchDoorFarewells @sophielopez.” Comments quickly followed, with one writing: “Aww so sweet,” while another said: “This is Mr Right! I can tell.” A third added: “Beautiful! Do they have another single brother?” Another fan simply posted an engagement ring emoji.

Karen Clifton shares picture of husband Kevin amid split rumours

Karen and Kevin Clifton have been keeping mum about the state of their marriage since rumours of a split surfaced late last year but on Wednesday their fans were finally treated to a rare photo of them together and they could not have been more pleased. Strictly Come Dancing‘s Karen delighted her followers with a picture showing the couple dancing together to promote their new dance tour Kevin and Karen Tour 2018. The 35-year-old captioned the shot: “Starting the day off with a kick ball change along w @keviclifton #kevinandkarentour2018.”

Meghan Markle ‘revealed’ as secret author of anonymous Hollywood blog

Could Meghan Markle be the once struggling Hollywood star who penned the infamous blog The Working Actress? A new report by the Daily Mail says there is conclusive proof that the royal-to-be was the author of the honest diary which appeared online between 2010 and 2012. Having correlated events in Meghan’s life with former blog posts and with sources in California, writer David Jones is certain Prince Harry’s fiancée is the secret writer of the controversial diary. If true, Meghan would have written the blog in her late 20s when she was married to Trevor Engelson, before she created her lifestyle blog The Tig and found fame in TV show Suits.

Bridging the gap from URL to IRL

In May last year, The Hindu published a story about how a social media community was helping people across the globe find catharsis. Founded by Jovanny Varela in 2015, the Internet-based community, the Artidote, began its journey as an Instagram/Snapchat/Facebook presence that shared inspirational poetry attached to art. In 2017, through his Snapchat account, Varela introduced what he calls, SnapThoughts, where fellow Artidotees would send across their deepest emotions and secrets anonymously. The founder would then curate the shared photographs on his Snapchat story, and it soon became a place where people would come to bond, heal, vent, and often just connect with one another.

Gauri Lankesh murder case: Bengaluru Police clarifies ‘no arrest by SIT’

Bengaluru (Karnataka) [India], Feb 23 (ANI): Rebuffing the media reports, the Bengaluru Police on Friday clarified that nobody has been arrested in connection with the murder of journalist Gauri Lankesh.

Police said that the Special Investigation Team (SIT) has not arrested anyone in the case so far.

‘Attack’ on Delhi Chief Secretary: Kejriwal, Ministers meet LG after police ‘raid’

The Delhi Cabinet of Ministers called on Lieutenant Governor (LG) Anil Baijal on Friday hours after the police ”raided” Chief Minister Arvind Kejriwal’s official residence in connection with the investigation related to the alleged attack on Chief Secretary Anshu Prakash earlier this week.

Two shot dead in Zurich, Swiss police see no terror link

ZURICH: Two people died in a shooting in Zurich‘s city centre on Friday that police said did not appear to have any link to terrorism.Police responding to reports of shots fired near the Swiss financial capital’s main railway station shortly after 14:30 (1330 GMT) found one person dead and another gravely wounded. The second person later died, police said in a statement.

Hyderabad man loses vision after hair transplant

A case of medical negligence has been recorded in Hyderabad, wherein a diabetic man lost his vision following a botched hair transplant surgery.

After the surgery, Tariq Khusrou was infected with gas gangrene that had put his life at risk.

He went for the hair transplant in July 2016 at the clinic of the accused, Dr Khan, in Telangana. He fixed an appointment with the doctor who later operated on the victim and transplanted 2700 strands of hair within 6 hours. The entire surgery was priced at Rs 1,25,000.

The very next day, the victim claimed to have a high fever and his head got swollen.

After Florida shooting, people are giving up their weapons

About 40% of Americans say they have a gun. Almost 40% of Americans defend their right to have a gun. But on Saturday, Scott Pappalardo sawed his gun into pieces and he’s not the only one.

After the shooting at a school in Parkland, Florida, last week where 17 died people and many more were injured,teenage survivors have rallied under the #Never Again movement to lobby for an end to gun violence.

They are demanding change and some gun owners have heeded the call.

First Indian woman to fly a fighter aircraft

Flying Officer Avani Chaturvedi became the first Indian woman to fly a fighter aircraft solo when on 19 February she flew a MiG-21 bison
She is one of the three in the first batch of female pilots, besides Bhawana Kanth and Mohana Singh, who were inducted in Indian Air Force fighter squadron on June 18, 2016.

Kamal Haasan takes the plunge, launches Makkal Needhi Maiam

Veteran actor Kamal Haasan on Wednesday launched his political party, the Makkal Needhi Maiam (People’s Justice Centre), projecting himself as a serious alternative to the Dravidian majors in Tamilnadu.

Explaining where his ideology lay, he said, “People are asking me if I am left or right (in ideology). That’s why we have ‘maiam’ (centre) in our party (name). We will absorb all good things from whichever direction they come.”

Judges cannot decide troop deployments, Centre tells Supreme Court

Centre says it is the fundamental job of the government of the day, and not the judiciary, to decide placement of police and armed forces

The Centre told the Supreme Court on Wednesday that judges cannot decide the deployment of troops, and it is the fundamental job of the government of the day, and not the judiciary, to decide placement of police and armed forces to secure the nation’s borders and maintain law and order internally.

The government’s sharp attack was directed at the recent Calcutta High Court order directing the Centre to retain all 15 companies of Central Armed Police Forces, deployed in the restive districts of Darjeeling and Kalimpong in West Bengal, till October 27 or until further orders.

The High Court had countermanded the Centre’s directive to withdraw certain companies from the two districts.

“The direction [Calcutta High Court’s] ignores and virtually obliterates the very concept of separation of powers. The maintenance of order and the security of the country, which includes the deployment of police and armed forces, is a fundamental facet of the governance of the country, and is a core governmental function of the executive wing of the State.

“These matters cannot be the subject matter of judicial review, or adjudication by a court,” the petition, filed by advocate S. Wasim A. Qadri and settled by Attorney General K.K. Venugopal, contended.

The Centre mentioned the petition for urgent hearing before a Bench led by Justice J. Chelameswar, who agreed to refer it for listing before an appropriate Bench of the Supreme Court.

The petition said the demands on the Central Police Forces are “tremendous”, and arise all over the country.

“India has a long border, and in order to effectively prevent cross-border infiltration of terrorists, Central Police Forces are also deployed. Obviously, being a high-priority consideration, the thinning of border deployment has serious national security implications,” the Centre explained.

Noting that 61 officers of the various Central Police Forces were martyred this year alone, the government pointed to the various high-alert theatres like the Valley, the North East and the Red Corridor States affected by naxal extremism which require heightened presence of forces. Even natural disasters and the holding of elections would require the deployment of these forces.

“It would be the exclusive domain of the Central government to decide on the most efficacious deployment of the limited police personnel and resources, to quell pressing situations, varying in gravity, that simultaneously arise in different parts of the country… There is no yardstick by which the Court could assess the need for deployment of Central Police Forces in different States,” the petition said.

Following unrest in the two districts in West Bengal, the Centre had deployed a total of 15 companies of Central Police Forces in June-July 2017. It said the State’s own police force has 73,403 personnel, followed by 20,781 personnel in the State Armed Force, 15,612 in Home Guards, two I.R. Battalions besides the Rapid Action Force, Counter Insurgency Force, Eastern Frontier Rifles (EFR) and ‘STRACO’.

The Centre submitted that its decision to withdraw some of the forces deployed was taken after assessing the ground situation. The State government had also concurred.

EC announces Gujarat Assembly elections date

The term of the 182-member Gujarat Assembly gets over on January 23 next year.

The Election Commission is announcing the schedule for the Gujarat polls. The term of the 182-member Gujarat Assembly gets over on January 23, 2018.

Updates:
All critical events of the polling will be covered by CCTVs.

Model Code of Conduct applicable to Union Government also, insists Mr. Joti.

There will be a total of 50, 128 polling stations for 182 seats. And the polls will be fully VVPAT-based. All EVMs to be attached with VVPATs.

Differently-abled voters have been identified and the kind of help needed has also been identified and necessary arrangements have been made to help them vote, the CEC says.

All-woman managed polling stations to be introduced in Gujarat polls, says Mr. Joti. 102 all-woman polling stations will be there.

CEC A.K. Joti: Total 4.33 crore voters.

The Himachal Pradesh Assembly poll will be held in a single phase on November 9, the EC announced on October 12.

The EC has been under attack from Opposition parties for not having announced the dates for Gujarat Assembly elections along with Himachal Pradesh.

दिल्‍ली सब ऑर्डिनेट में इन पदों पर निकली भर्तियां, ऑनलाइन करें आवेदन

नई दिल्‍ली: दिल्‍ली सब ऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्‍शन बोर्ड (DSSSB) ने एलडीसी, फील्‍ड असिस्‍टेंट, फूड सेफ्टी ऑफिसल और लाइब्रेरियन पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर आवेदन आमंत्रित किया है. इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी 21 अगस्‍त, 2017 तक आवेदन कर सकते हैं. दिल्‍ली सब ऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्‍शन बोर्ड ने कुल 1074 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मंगाया है. इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया 1 अगस्‍त 2017 से शुरू होगी.

शैक्षणिक योग्यता :
दिल्‍ली सब ऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्‍शन बोर्ड के एलडीसी, फील्‍ड असिस्‍टेंट, फूड सेफ्टी ऑफिसल और लाइब्रेरियन पदों पर भर्ती के लिए अलग अलग योग्‍यता निर्धारित की गई है. इनकी अधिक जानकारी के लिए आप बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट देखें.

आयु सीमा :
इन पदों पर भर्ती के लिए आवेदक की न्‍यूनतम उम्र अलग-अलग पदों के अनुसार 18/20 साल होनी चाहिए. इसके साथ ही आवेदक की अधिकतम उम्र अलग-अलग पदों के अनुसार 20/30/37 साल से ज्‍यादा नहीं होनी चाहिए.

आवेदन शुल्‍क :
दिल्‍ली सब ऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्‍शन बोर्ड के एलडीसी, फील्‍ड असिस्‍टेंट, फूड सेफ्टी ऑफिसल और लाइब्रेरियन पदों पर आवेदन करने के इच्‍छुक सामान्‍य और ओबीसी वर्ग के आवेदक को 100 रुपये ऑनलाइन माध्‍यम से जमा करना होगा. वहीं एससी/एसटी/पीडब्‍ल्‍यूडी वर्ग के आवेदकों के लिए यह निशुल्‍क होगा.

चयन प्रक्रिया :
दिल्‍ली सब ऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्‍शन बोर्ड के एलडीसी, फील्‍ड असिस्‍टेंट, फूड सेफ्टी ऑफिसल और लाइब्रेरियन पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवारों का चयन परीक्षा और स्‍किल टेस्‍ट के आधार पर किया जाएगा. ऑनलाइन परीक्षा केवल दिल्‍ली में आयोजित की जाएगी.

ऐसे करें आवेदन :
दिल्‍ली सब ऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्‍शन बोर्ड के एलडीसी, फील्‍ड असिस्‍टेंट, फूड सेफ्टी ऑफिसल और लाइब्रेरियन पदों पर भर्ती के लिए इच्‍छुक और योग्‍य उम्मीदवार 21 अगस्‍त, 2017 तक बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट (www.dsssbonlie.nic.in) पर जाकर दिए गए निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इन पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 अगस्‍त 2017 से शुरू होगी. ऑनलाइन आवेदन के बाद आवेदक आगे की चयन प्रक्रिया के लिए फॉर्म का प्रिंटआउट निकाल कर रख लें.

बनना चाहते हैं यूपी पुलिस का सिपाही, तो जान लें बदले हुए नियम

यूपी में अधिकतर युवाओं का सपना होता है कि पुलिस की वर्दी पहनें. अभी तक की प्रक्रिया में वर्तमान की बीजेपी ने सरकार ने कुछ बदलाव किए हैं. उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में पुलिस भर्ती के नियमों में फेरबदल करते हुए आज तय किया कि अब कांस्टेबल की भर्ती के लिए केवल लिखित परीक्षा होगी और उसी के आधार पर चयन होगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में यह फैसला किया गया.

बैठक के बाद राज्य सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने कहा, ‘पुलिस भर्ती के कुछ नियम बदले गये हैं. अब पुरूष वर्ग में 18 से 22 वर्ष और महिला वर्ग में 18 से 25 वर्ष आयु के अभ्यर्थी कांस्टेबल पद के लिए आवेदन कर सकते हैं.’ उन्होंने कहा कि पहले दसवीं पास के लिए 100 अंक, 12वीं पास के लिए 200 अंक और शारीरिक दक्षता के लिए 200 अंक जोड़ने की व्यवस्था थी . इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है और अब केवल लिखित परीक्षा होगी . शारीरिक दक्षता परीक्षा भी केवल पास करनी होगी.

यह भी पढ़ें : यूपी पुलिस में 3500 से अधिक सब-इंस्पेक्टर की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी

शर्मा ने कहा कि शारीरिक दक्षता के मानक पूर्ववत रहेंगे लेकिन इसके अंक जुडे़ंगे नहीं बल्कि इसे केवल पास करना भर पर्याप्त होगा. लेकिन यदि इसमें फेल हो गये तो भर्ती प्रक्रिया से बाहर होना पडे़गा. उन्होंने बताया कि लिखित परीक्षा में ‘नेगेटिव मार्किंग’ होगी और इसका अनुपात भर्ती बोर्ड तय करेगा. शर्मा ने बताया कि नयी व्यवस्था में 300 अंक के वस्तुनिष्ठ प्रश्न होंगे, जिनमें नेगेटिव अंक की व्यवस्था होगी .

प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद प्रमुख सचिव (गृह) अरविन्द कुमार ने कहा कि शारीरिक दक्षता परीक्षा में दौड़ के मानक अब पहले से कडे़ कर दिये गये हैं. पुरूष वर्ग में 4.8 किलोमीटर की दौड़ अब 27 मिनट की बजाय 25 मिनट में पूरी करनी होगी. इसी तरह महिला वर्ग में 2.4 किलोमीटर की दौड़ 16 मिनट की बजाय 14 मिनट में पूरी करनी होगी .

नीतीश सरकार के मंत्री बोले- ‘भारत माता की जय’ न कहने वाले पत्रकार पाकिस्तान समर्थक

पटना: बिहार की नई नीतीश सरकार में मंत्री विनोद कुमार सिंह ने मंगलवार को एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया. उन्होंने भाजपा के एक समारोह में उनके साथ ‘भारत माता की जय‘ का नारा न लगाने वाले मीडियाकर्मियों को ‘पाकिस्तान का समर्थक’ करार दे दिया. इससे पहले इसी समारोह में भाजपा की बिहार इकाई के अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि मस्जिदों से अजान और चर्च से घंटियों की आवाज के बजाय ‘भारत माता की जय’ की आवाज आनी चाहिए. राय हालांकि अपनी बात पर ज्यादा देर अडिग न रह सके. बाद में उन्होंने यू-टर्न ले लिया और कहा कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा था. नीतीश कुमार सरकार में खदान एवं भूगर्भीय मामलों के मंत्री व भाजपा नेता विनोद कुमार सिंह ने राज्य की नई सरकार में शामिल भाजपा के 12 मंत्रियों के सम्मान में हुए संकल्प सम्मेलन में लोगों से कहा कि वे उनके साथ ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाएं.

लेकिन, जब कार्यक्रम में मौजूद मीडियाकर्मियों ने यह नारा नहीं लगाया तो सिंह ने इस पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा, “आप पहले भारत माता की संतान हैं, पत्रकार बाद में हैं. अगर आप मेरे साथ जोर से भारत माता की जय का नारा नहीं लगाते तो क्या आप पाकिस्तान माता के समर्थक हैं?” एक-दो को छोड़कर किसी भी पत्रकार ने मंत्री की इस बात पर ऐतराज नहीं जताया

बिहार बीजेपी अध्यक्ष नित्यानंद राय के बयान पर भी विवाद: इससे पहले, समारोह शुरू होने पर बिहार भाजपा के अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि मस्जिद और चर्च से अजान और घंटी के बजाय ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ की आवाज आनी चाहिए.

यह अहसास होने पर कि उन्होंने एक विवादित बयान दे दिया है, राय ने बात बदलते हुए मीडिया से कहा, “मैंने कहा था कि मस्जिद और चर्च से भारत माता की जय और वंदे मातरम् की आवाज आनी चाहिए. मेरा मतलब यह नहीं था कि यह अजान और घंटी की जगह पर आनी चाहिए.”

विपक्षी राजद ने सिंह और राय के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इन्होंने अपने ‘वास्तविक एजेंडे’ को दिखा दिया है.

जबकि जनता दल (युनाइटेड) प्रवक्ता ने कहा कि यह अभिव्यक्ति की निजी आजादी है और उन्हें इस पर कुछ नहीं कहना है.

याद रहे, नीतीश कुमार चार साल पहले अपनी पार्टी का भाजपा से नाता तोड़ने के बाद पाकिस्तान गए थे, ताकि लोग उन्हें धर्मनिरपेक्ष नेता मानें.

प्रेस रिव्यू: सुभाष बराला के भतीजे पर रेप पीड़िता को धमकाने का आरोप

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने ख़बर दी है कि अब हरियाणा भाजपा अध्यक्ष सुभाषा बराला के भतीजे कुलदीप बराला पर एक नाबालिग बलात्कार पीड़िता को केस वापस लेने के लिए धमकाने का मामला सामने आया है.

अख़बार ने लिखा है कि मामला मई का है और इसमें कुलदीप बराला के एक रिश्तेदार पर अपहरण और बलात्कार के आरोप हैं. पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस से मामले पर 31 अगस्त तक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है.

सुभाष बराला के बेटे विकास बराला पहले ही चंडीगढ़ में एक आईएएस अफ़सर की बेटी का पीछा करने के केस में फंसे हैं. भाजपा पर उन्हें बचाने की कोशिश के आरोप भी लगे हैं.

ये सिर्फ़ मेरी जीत नहीं, पैसे और ताकत की हार भी है: अहमद पटेल

गुजरात राज्यसभा चुनावों में भारी उठापटक के बाद अहमद पटेल आख़िरकार अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे. उनके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी चुनाव जीत गए. अहमद पटेल को 44 वोट मिले जबकि स्मृति ईरानी को 46 और अमित शाह को भी 46 वोट मिले. चौथे उम्मीदवार बलवंत सिंह राजपूत को 38 वोट मिले.

क्रॉस वोटिंग की वजह से अहमद पटेल के जीतने पर संशय था. लेकिन फिर कांग्रेस की मांग मानते हुए चुनाव आयोग ने दो बागी कांग्रेस विधायकों के वोट रद्द कर दिए और भाजपा का गणित बिगड़ गया.

कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग करने वाले अपनी ही पार्टी के दो विधायकों राघवजी पटेल और भोला गोहिल के वोट रद्द करने की मांग की थी क्योंकि कथित तौर पर उन्होंने अपने मतपत्र अनाधिकारिक लोगों को दिखा दिए थे.

शाम 5 बजे ही गिनती शुरू होनी थी, लेकिन कांग्रेस की शिकायत के बाद गिनती रोक दी गई थी. देर रात वोटों की गिनती शुरू हुई और 174 वोटों को वैध माना गया.

नतीजों के बाद अहमद पटेल ने ट्विटर पर ‘सत्यमेव जयते’ लिखते हुए अपनी जीत का एलान किया. उन्होंने लिखा, ‘यह सिर्फ मेरी जीत नहीं है. यह पैसे, ताक़त और राज्य की मशीनरी के खुले इस्तेमाल की हार है. मैं उस प्रत्येक विधायक को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने भाजपा की अभूतपूर्व धमकियों और डर के बावजूद मुझे वोट दिया. भाजपा ने अपनी व्यक्तिगत दुश्मनी और राजनीतिक आतंक को ही उजागर किया है. गुजरात के लोग चुनाव में उन्हें जवाब देंगे.’

अहमद पटेल का ट्वीटइमेज कॉपीरइटTWITTER/@AHMEDPATEL

दो वोटों की वजह से फंसा था पेंच

कांग्रेस का आरोप था कि उनकी ही पार्टी के विधायक राघवजी पटेल और भोला गोहिल ने वोट डालने के बाद अपने बैलट आधिकारिक पार्टी प्रतिनिधि के अलावा भाजपा प्रतिनिधि को भी दिखाए थे.

नियमों के मुताबिक, वोट करने वाले विधायकों को अपने बैलट सिर्फ़ अपनी पार्टी के आधिकारिक प्रतिनिधि (चुनाव एजेंट) को दिखाने होते हैं.

देर रात 11:40 पर कांग्रेस नेता अर्जुन मोडवाडिया ने दोनों के वोट रद्द होने की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि जब दोनों विधायकों ने वोट दिया तो कांग्रेस के चुनाव प्रतिनिधि शक्तिसिंह गोहिल ने उसी समय खड़े होकर आपत्ति दर्ज कराई थी.

उन्होंने कहा, ”उस समय अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की. दोनों वोट बैलट बॉक्स में डाल दिए गए. लेकिन तभी रिटर्निंग अफ़सर ने आश्वासन दिया था कि वीडियो देखकर फ़ैसला करेंगे.”

वीडियो सार्वजनिक किया जाए: भाजपा

गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि अगर मतदान का वीडियो सार्वजनिक किया जाए तो सबको पता चल जाएगा कि वोट रद्द करने का फ़ैसला ग़लत है. उन्होंने वीडियो सार्वजनिक करने की मांग की और यह भी कहा कि इससे नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और भाजपा तीनों सीटें जीतेगी.

उन्होंने कहा, ”वीडियो में हमारे चुनाव प्रतिनिधि दिख ही नहीं रहे हैं और दोनों विधायकों का वोट शक्तिसिंह गोहिल के अलावा किसी ने नहीं देखा है, बल्कि नियम का उल्लंघन शक्तिसिंह गोहिल ने किया, जब उन्होंने देखा कि राघवजी पटेल ने कांग्रेस के ख़िलाफ़ वोट दिया है तो वो गुस्से में खड़े हो गए और मतपत्र छीनने की कोशिश की.”

वाघेला खेमे के दोनों विधायक

शंकर सिंह वाघेला
इमेज शंकर सिंह वाघेला ने हाल ही में छोड़ी है कांग्रेस

दोनों विधायक शंकर सिंह वाघेला खेमे के माने जाते हैं जिन्होंने हाल ही में कांग्रेस छोड़ी है. वाघेला ने मंगलवार सुबह समाचार चैनलों से बात करते हुए कहा था कि उन्होंने कांग्रेस को वोट नहीं दिया है क्योंकि अहमद पटेल चुनाव हार रहे हैं और वो अपना वोट ख़राब करना नहीं चाहते.

दोनों पार्टियों के बड़े नेता पहुंचे थे चुनाव आयोग

मंगलवार को मतदान के बाद पहले कांग्रेस शिकायत लेकर चुनाव आयोग गई और उसकी आपत्ति के ख़िलाफ वरिष्ठ भाजपा नेताओं का समूह भी आयोग पहुंच गया. दोनों पार्टियां दिन भर में तीन-तीन बार चुनाव आयोग पहुंचीं. कांग्रेस की तरफ़ से पी चिदंबरम, रणदीप सुरजेवाला और अशोक गहलोत ने चुनाव आयोग में अपनी शिकायत दी.

भाजपा की तरफ़ से अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल, निर्मला सीतारमण समेत छह केंद्रीय मंत्रियों ने चुनाव आयोग पहुंचकर कांग्रेस की शिकायत को बेबुनियाद करार दिया.

अमित शाह
GETTY IMAGES

गुजरात से राज्यसभा चुनावों की तीन सीटें हैं और चार उम्मीदवार खड़े थे. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की जीत की राह आसान मानी जा रही थी, लेकिन तीसरी सीट के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सलाहकार और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी. उनका मुक़ाबला हाल ही में कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए बलवंत सिंह राजपूत से था.

राहुल गांधी, अहमद पटेल

हाल ही में छह कांग्रेस विधायकों के पार्टी छोड़ने से यह चुनाव कांटे का हो गया था. इन छह में से तीन विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे. इसके बाद कांग्रेस विधायकों को प्रभावित किए जाने से बचाने के लिए पार्टी ने उन्हें बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में भेज दिया था. मतदान से एक दिन पहले ही उन्हें एक साथ अहमदाबाद लाया गया.

नज़रिया: अहमद पटेल की जीत कांग्रेस के लिए संजीवनी बूटी

राज्यसभा के चुनाव गुजरात में पहले भी हुए हैं. अहमद पटेल का ये पांचवा राज्यसभा चुनाव था. इससे पहले राज्यसभा का चुनाव एक फ़्रेंडली मैच की तरह होता था जिसका परिणाम आमतौर पर मालूम होता था कि अगर इतनी सीटें हैं तो कौन-कौन लोग चुनकर आएंगे.

इस बार भी गुजरात का राज्यसभा चुनाव कुछ अलग नहीं था. लेकिन दो बातों की वजह से सारा समीकरण बदल गया. एक तो ये कि शंकरसिंह वाघेला ने नेता विपक्ष के पद से इस्तीफ़ा दिया और दूसरा ये कि बीजेपी ने ये मन बना लिया कि इस चुनाव को वो बहुत ऊंचे स्तर पर ले जाएगी और जीतेगी. इन दो कारकों के होने की वजह से ये एक बहुत हाई वोल्टेज ड्रामा की शक्ल में सामने आया.

घटनाक्रम को देखें तो ये बात समझ में आती है कि बीजेपी ने इस चुनाव को इस स्तर तक ले जाने का काफ़ी पहले ही मन बना लिया था.

इस योजना के तहत बीजेपी ने सबसे पहला काम ये किया कि शंकर सिंह वाघेला पर प्रश्न उठाना शुरू किया और ऐसा माहौल तैयार कर दिया जिससे ये लगने लगा कि वाघेला शायद बीजेपी में जा रहे हैं. जबकि हक़ीक़त ये थी कि उस समय तक वाघेला का ऐसा कोई इरादा नज़र नहीं आ रहा था.

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Image captionसोनिया गांधी और राहुल गांधी

इससे ऐसा संकेत भी मिला की बीजेपी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के स्तर पर बहुत कुछ खिचड़ी पक रही है.

जैसे-जैसे वक्त गुज़रता गया, कांग्रेस में घटनाक्रम बदले, बाग़ी खड़े हुए और हालत ये हो गई कि पार्टी को अपने विधायकों को टूट से बचाने के लिए गुजरात से बाहर ले जाना पड़ा.

वहां बेंगलुरु में केंद्र सरकार ने जिस तरह इनकम टैक्स और ईडी की मदद से कथित तौर पर दबाव बनाया उससे ये ज़ाहिर होने लगा कि भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव में अपना सब-कुछ झोंक रही है.

बीजेपी ने क्यों बनाया इतना महत्वपूर्ण?

अब सवाल उठता है कि ऐसा क्या था इस चुनाव में कि भारतीय पार्टी ने अपने समय, रणनीति, ऊर्जा – सबकुछ लगा दिया.

मुझे लगता है कि बीजेपी चाहती थी कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गोवा में सरकार बनाने के बाद मिले राजनीतिक लाभ को और मज़बूत करे और मनोवैज्ञानिक रूप से कांग्रेस को भरपूर नुकसान पहुंचाए.

मनोवैज्ञानिक नुकसान का आशय यहां यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल अगर अपने गढ़ में ये चुनाव हार जाते हैं तो कांग्रेस के काडर के लिए ये एक बहुत बड़ा सदमा होगा और साथ ही बीजेपी के लिए ये एक बहुत बड़ी राजनीतिक जीत वाली स्थिति होगी.

दूसरी बात ये है कि सोनिया गांधी भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकारों के दिमाग़ में एक बगवेयर के रूप में बैठी हुई हैं जिनका उत्तरोत्तर कमज़ोर होना पार्टी के हित में है.

बीजेपी ये बात नहीं भूल पाती कि सोनिया गांधी ने अकेले अपने दम पर 2004 में न केवल पार्टी को खड़ा किया था बल्कि अटल जी के इंडिया शाइनिंग की भी हवा निकाल दी थी.

यही वजह है कि बीजेपी के रणनीतिकार ये कोशिश करते हैं कि सोनिया गांधी और उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस को जितना संभव हो सके नीचे लाया जाए.

नरेंद्र मोदीइमेज कॉपीरइटEPA
Image captionभारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

दूसरी बात, आरएसएस को ये लगता है कि भारत में हर बात कहीं न कहीं कांग्रेस से जुड़ जाती है. इसलिए वो ऐसे भारत की कल्पना करना चाहती है जिसमें कांग्रेस न हो तभी भारत निर्माण हो सकता है.

यही वजह है कि बीजेपी ने ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा चलाया हुआ है. हालांकि ये बात अलग है कि कांग्रेस मुक्त भारत बनाने की कोशिश में खुद बीजेपी कांग्रेस युक्त होती जा रही है.

नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व वाली बीजेपी की रणनीति ये है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में अगर दक्षिणपंथी विचारधारा को आगे बढ़ाना है तो पुरानी सोच और उसके प्रतीकों को उखाड़ना होगा.

उसी उखाड़ने की प्रक्रिया के तहत अहमद पटेल के बहाने एक सांघातिक प्रहार की कोशिश की गई, लेकिन इसे बीजेपी का दुर्भाग्य कहें या कांग्रेस का सौभाग्य कि बीजेपी का ये पासा उल्टा पड़ गया.

कांग्रेस के लिए अहमद पटेल की जीत के मायने

कांग्रेस के लिए ये जीत बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी क्योंकि कांग्रेस लंबे अरसे से बैकफ़ुट पर चल रही है. अहमद पटेल को हराने के लिए बीजेपी और सरकार दोनों ने मिलकर बेहद आक्रामक रणनीति तैयार की थी. लेकिन अब जबकि अहमद पटेल इस कांटे की टक्कर में विजेता बनकर उभरे हैं तो परसेप्शन के स्तर पर और मनोबल के स्तर पर इसका काफ़ी फ़ायदा कांग्रेस को मिलेगा.

इस साल के आखिर में गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं. अहमद पटेल की जीत से कांग्रेस पार्टी के पास एक मौका आ गया है चीज़ों को ठीक करने का.

शंकर सिंह वाघेलाशंकर सिंह वाघेला

मोदीजी के गुजरात से केंद्र में जाने के बाद गुजरात बीजेपी में वैसी बात नहीं रही है जो पहले होती थी. वैसे भी कहते हैं कि वट वृक्ष के नीचे कुछ नहीं पनपता. तो मोदी जी के समय गुजरात बीजेपी में मोदी ही मोदी नज़र आते थे. दूसरे नंबर के नेता का भरपूर अभाव था.

जब मोदी जी केंद्र की राजनीति में चले गए तो उनकी जगह गुजरात में जो नेता उभरे उनमें वो बात नहीं है जो मोदी जी में थी. और सरकार जिस तरीके से चल रही है उसका भी जनता में कोई बहुत अच्छा संदेश नहीं जा रहा. इसका फ़ायदा कांग्रेस को मिल सकता है.

सामाजिक असंतोष भी बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है. पाटीदार, दलित और अन्य पिछड़े तबकों में सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष है. इसका फ़ायदा कांग्रेस को मिलता नज़र आ रहा था, लेकिन वाघेला के साथ विधायकों के कांग्रेस छोड़कर जाने से पार्टी की चुनाव तैयारियों को एक धक्का लगा था. लेकिन अहमद पटेल की जीत से कांग्रेस को एक संजीवनी बूटी सी मिल गई है.

अगर पार्टी आलस नहीं करती और इस जीत के पैदा हुई ऊर्जा को संजो कर एक नई रणनीति के साथ चुनाव में उतरती है तो सत्ता का खेल बदल भी सकता है क्योंकि कांग्रेस एक इतना विशालकाय प्राण है कि उसको हिलाना मुश्किल होता है और चलाना और और भी मुश्किल. अगर वो अब भी नहीं चेतेगी तो बहुत मुश्किल हो सकती है.

बीजेपी इससे कैसे उबरेगी

बीजेपी का नियंत्रण इस समय नरेंद्र मोदी और अमित शाह के पास है. इन दोनों नेताओं की कार्यशैली ये है कि बड़ा धक्का लगने पर ये ऐसा कुछ नया कर डालते हैं जिससे सेटबैक का असर नहीं रह जाता. कांग्रेस अभी तक इस बात को समझ नहीं पाई है.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाहबीजेपी अध्यक्ष अमित शाह

ब्लैक मनी का इश्यू चला था तो नोटबंदी से आलोचना के पूरे माहौल को बदल दिया गया. कहने का मतलब है कि बीजेपी सदमे को भुलाकर तुरंत खड़ी हो जाने वाली पार्टी हो गई है और गुजरात को पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व बहुत गंभीरता से ले रहा है क्योंकि वो इसी ज़मीन से निकलकर नरेंद्र मोदी केंद्र तक पहुंचे हैं. इसलिए गुजरात का पार्टी के लिए बहुत बड़ा प्रतीकात्मक महत्व है और वो इसे हाथ से निकलता नहीं देख सकते. इसलिए पार्टी ने अभी से ही बूथ लेवल तक अपनी रणनीति बना ली है. जबकि दूसरी ओर कांग्रेस है जो ऊपर-ऊपर की बातों में उलझी पड़ी है.

अगर कांग्रेस को आगामी चुनाव में जीत के सपने को साकार करना है तो उसे नींद से जागना होगा और अहमद पटेल की जीत से मिली ऊर्जा को बहुत छोटे स्तर पर कार्य कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं तक पहुंचाना होगा. छोटी-छोटी जीत से ही बड़ी जीत का सपना साकार होता है.

आने वाले समय में 2019 में लोकसभा के चुनाव होने हैं और कांग्रेस इस जीत से सबक लेकर एक समग्रता वाली रणनीति के साथ पूरी दमखम से काम करती है तो आज जिस हालत में पड़ी है उसका दूसरा पहलू भी देखने को मिल सकता है. लेकिन बीजेपी भी इन बातों को समझती है और वो अपने गढ़ को कमज़ोर होता नहीं देखना चाहेगी.

इटावा: मृत परिजनों को दफनाने के लिए नहीं है कब्रिस्तान, घर में ही बन रही है कब्र

विधानसभा चुनाव के दरम्यान उत्तर प्रदेश मे कब्रिस्तान और शमशान का मुददा बड़े जोर शोर से उछाला गया था लेकिन इस पर अब पूरी तरह से चर्चा बंद हो चुकी है । उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में चंबल नदी के किनारे बसे चकरगनर मे एक ऐसी मुस्लिम बस्ती है जहां के लोग अपने मृत परिजनों को अपने घरों में ही दफनाने मे लगे हैं। चकरनगर के बारे मे कहा जाता है कि महाभारत काल के दौरान पांडवों ने अज्ञातवास यहीं बिताया था  जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित चकरनगर इलाके में एक बस्ती है तकिया। यहां रहने वाली सुशीला बेगम काफी दुखी होकर कहती हैं कि हमें न धन चाहिए , न दौलत, न ही कुछ और। हमें तो सिर्फ दो गज़ जमीन चाहिए लेकिन हम इतने दुर्भाग्यशाली हैं कि हमें वो भी मयस्सर नहीं । यह तकलीफ सिर्फ सुशीला बेगम की नहीं है । बस्ती में रहने वाले करीब 70-80 मुस्लिम परिवारों को भी यही परेशानी है। वे अपने छोटे से घरों या यों कहें कि घरनुमा कमरों में ही अपने पुरखों की कब्र बनाने के लिए मजबूर हैं।

सुशीला बेगम अपने घर मे बनी कब्रों के बारे में बताते हुए वे फूट-फूट कर रोते हुए बताती हैं कि वैसे तो कोई अपना मर जाता है तो इंसान कुछ दिन रोता है, फिर उसकी यादें धुंधली होती जाती हैं लेकिन इन कब्रों के हमेशा सामने होने के कारण हमेशा अपनों के मरने की ही घटना दिखती है। हम जब भी कब्रों को देखते हैं, बातें ताजा हो जाती हैं। यही नहीं, इस बस्ती में कई ऐसे भी घर हैं, जहां कमरे में एक ओर कब्र है तो दूसरी ओर सोने का बिस्तर लगा है। यानी शयन कक्ष और कब्रिस्तान एक साथ हैं ।इसी बस्ती के ही यासीन अली बताते हैं कि हम सभी मजदूरी करते हैं। किसी के पास ज़मीन है ही नहीं । सालों पहले ग्राम समाज से घर के लिए जो जमीन मिली थीं, परिवार बढ़ने के साथ वो कम पड़ने लगीं । पहले हम खाली जमीन पर शव दफनाते थे, लेकिन बाद में जगह नहीं मिलने के कारण घरों में ही दफनाना पड़ रहा है । ऐसा नहीं है कि इस बात की किसी को जानकारी न हो। ये समस्या नई नहीं बल्कि सालों पुरानी है। ये बस्ती फकीर मुसलमानों की है। बस्ती के लोगों का कहना है कि इसके लिए हमने हर जगह दरख्वास्त दी, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

इटावा के प्रशासनिक अधिकारी भी तकिया में कब्रिस्तान न होने की बात से वाकिफ हैं लेकिन वे भी यही समस्या बता रहे हैं जो कि ग्राम प्रधान राजेश यादव ने बताई। इटावा की जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे कहती हैं कि आस-पास खाली जमीन है ही नहीं। किसी की निजी जमीन दी नहीं जा सकती है। कुछ दूर पर जमीन मुहैया कराई गई थी लेकिन वहां ये लोग कब्रिस्तान बनाने को राजी नहीं है। सेल्वा कहती हैं कि डेढ़ किलोमीटर दूर चांदई गांव में कब्रिस्तान के लिए उपलब्ध जमीन पर शव दफनाने के लिए लोगों को मनाने की कोशिश हो रही है। तकिया बस्ती की कुछ महिलाएं बताती हैं कि बच्चे अक्सर रात में जग जाते हैं क्योंकि कई घरों में कब्रें बिस्तर के बिल्कुल पास में ही बनी हुई हैं। बहरहाल, प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि तकिया बस्ती के लोगों के लिए आस-पास ही किसी कब्रिस्तान के इंतजाम में लगे हैं लेकिन अभी तो इनकी यही मांग है कि मरने के बाद अपनी मातृभूमि में दफन होने के लिए इन्हें कम से कम दो गज जमीन तो मिल जाए ।

चंडीगढ़ छेड़छाड़ केस: मायावती ने पूछा, खामोश क्यों हैं भाजपा के नेता

हरियाणा भाजपा प्रमुख के बेटे और उसके साथी द्वारा चंडीगढ़ में एक युवती का पीछा करने के मामले में बसपा प्रमुख मायावती ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग करते हुए पूछा कि इस मामले में भाजपा के बड़े नेता खामोश क्यों हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता इस मामले को दबा देने की कोशिश में हैं। मायावती ने पूछा, ‘क्या भाजपा नेताओं से जुड़े व्यक्तियों पर देश का कानून लागू नहीं होता? यह दोहरा रवैया क्यों?’  मायावती ने हरियाणा सरकार के ‘बेटी बचाओ’ अभियान के नारे पर तंज कसते हुए कहा कि जिस तरीके से विकास बराला प्रकरण को दबा देने की कोशिश चल रही है, वह बेहद चिंतनीय है। लखनऊ में जारी एक बयान में उन्होंने मांग की कि आरोपियों के खिलाफ तुरंत प्रभाव से अपहरण का मामला दर्ज किया जाए और उनकी अविलंब गिरफ्तारी की जाए।

उन्होंने मांग की कि महिला उत्पीड़न के दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। मायावती के मुताबिक जिस तरीके से अभियुक्त विकास बराला को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर बचाने की कोशिश कर रहे हैं, उससे कमजोर वर्ग में उनके खिलाफ असंतोष पैदा हो रहा है। विकास को पुलिस ने थाने से जाने कैसे दिया?’ उन्होंने कहा कि इन हालात में लोगों का गुस्सा बिल्कुल जायज है।  मायावती ने पूछा कि क्या भाजपा के नेता और उनके संबंधी देश के कानून से ऊपर हैं। क्या उन पर कानून लागू नहीं होता? उन्होंने कहा कि हरियाणा की हाल की घटनाओं से स्पष्ट हो गया है कि बेटी बचाओ, लव जेहाद, महिला सुरक्षा, गो रक्षा और एंटी-रोमियो जैसे नारे गढ़कर भाजपा ने मतदाताओं को लुभाया है और सत्ता पाई है। इन नारों का हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।

देश में भर में अपहरण, छेड़छाड़ और पीछा करने के मामले बढ़े

दिल्ली में महिला के प्रति अपराध के मामले सबसे ज्यादा रहे। यहां 17,104 केस प्रति एक लाख महिला आबादी पर 184.3 की अपराध दर से दर्ज हुए। असम इस मामले में दूसरे और हरियाणा छठे नंबर पर रहा।

देशभर में महिलाओं के संग 2015 में अपहरण, छेड़छाड़ और पीछा करने के मामले बढ़े हैं। हालांकि बलात्कार के मामलों में कमी आई है। ऐसा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) का कहना है। एनसीआरबी के मुताबिक अगर 2014 से तुलना करें तो निश्चित रूप से बलात्कार के मामले घटे हैं। एनसीआरबी की 2016 के अपराध आंकड़ों की रिपोर्ट अभी आना बाकी है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार 2014 के मुकाबले 2015 में महिलाओं के प्रति अपराध में 3.1 फीसद की कमी आई। 2015 में जहां 3,27,394 मामले अपराध के दर्ज हुए, वहीं 2014 में यह संख्या 3,37,922 थी। इसी तरह बलात्कार के मामले 2015 में 5.7 फीसद कम हुए। 2014 में 36,735 मामले बलात्कार के दर्ज हुए थे वहीं 2015 में यह संख्या घटकर 3,651 रह गई।

2015 की रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि महिलाओं के यौन प्रताड़ना संबंधी अपराध 2.5 फीसद बढ़ गए। इसमें छेड़छाड़, पीछा करना, घूरना वगैरह शामिल हैं। 2015 में 84,222 ऐसे मामले दर्ज किए गए जबकि 2014 में यह संख्या 82,235 थी। इसी तरह महिलाओं के अपहरण के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2014 में जहां 57,311 अपहरण हुए थे, वहीं 2015 59,277 अपहरण हुए। महिलाओं को शादी के लिए विवश करना अपहरण का प्रमुख कारण है। 2015 में 54 फीसद महिलाएं इसी कारण से अपह्रत की गईं। 2014 में इसी वजह से 50 महिलाएं अगवा की गई थीं। दिल्ली में महिला के प्रति अपराध के मामले सबसे ज्यादा रहे। यहां 17,104 केस प्रति एक लाख महिला आबादी पर 184.3 की अपराध दर से दर्ज हुए। असम इस मामले में दूसरे और हरियाणा छठे नंबर पर रहा।

राज्य मामले राष्ट्रीय हिस्सेदारी दर %
दिल्ली 17,104 52
तेलंगाना 15,135 4.6
ओडीशा 17,144 5.2
राजस्थान 28,165 8.6
हरियाणा 9,446 2.9
पश्चिम बंगाल 33,218 10.1

राज्य घटनाएं प्रति एक लाख महिला आबादी

दिल्ली 2,199 23.7
छत्तीसगढ़ 1,560 12.2
मध्य प्रदेश 4,391 11.9
ओडीशा 2,251 10.8
राजस्थान 3,644 10.5
महाराष्ट्र 4,144 7.3
उत्तर प्रदेश 3,025 3.0

नीतीश को चुनौती देने तैयार हुए शरद यादव? जारी क‍िया ब‍िहार की जनता से सीधा संवाद का कार्यक्रम

बिहार में महागठबंधन की सरकार टूटने के बाद इन दिनों जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव और सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच बढ़ती दूरी साफ दिखाई दे रही है। महागठबंधन टूटने के बाद नीतीश ने भाजपा के साथ मिलकर भले ही सरकार बना ली हो लेकिन शरद यादव ने अब नीतीश को चुनौती देने के लिए कमर कस ली है। शरद यादव बहुत ही जल्द बिहार की जनता के साथ सीधे संवाद करते हुए दिखाई देंगे। इस संवाद की जानकारी शरद यादव ने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट कर दी है। जनता से किए जाने वाले इस संवाद की एक सूची तैयार की गई है कि किस दिन शरद यादव प्रदेश की जनता के साथ रुबरु होंगे।

इस सूची के अनुसार 10 अगस्त को शरद यादव पटना से सोनपुर जाएंगे। सोनपुर के बाद वे हाजीपुर, सराय, भगवानपुर, गोरौल, कुढ़ानी, तुर्की, रामदयालु नगर, गोबरसाही और फिर भगवानपुर चौक जाएंगे। यहां जनता से संवाद कर शरद यादव मुजफ्फरपुर जाएंगे और यहीं पर रात को ठहरेंगे। इसके बाद 11 अगस्त उनका मुजफ्फरपुर में कार्यक्रम होगा। यहां कार्यक्रम खत्म करने के बाद शरद यादव चांदनी चौक, जीरो माइल, गरहा, बोचाहा, मझौली, सर्फुद्दीनपुर, जारंग, गायघाय, बेनीबाद और दरभंगा में आम जनता के साथ रुबरु होंगे और उनसे उनकी तकलीफों के बारे में जानेंगे।

बिहार की जनता से सीधे संवाद कार्यक्रम के आखिरी दिन 12 अगस्त को शरद यादव मधुबनी, सुपौल, सहरसा और मधेपुरा में आम जनता के बीच पहुंचेंगे और रात को मधेपुरी में ही विश्राम करेंगे। अपने इस कार्यक्रम के जरिए शरद यादव शायद नीतीश को बताना चाहते हैं कि जिस पार्टी के साथ मिलकर उन्होंने सरकार बनाने का कदम उठाया है वह बिलकुल गलत है। ऐसा लगता है कि इन कार्यक्रम के तहत शरद यादव नीतीश कुमार से अपनी नाराजगी जाहिर करना चाह रहे हैं। आपको बता दें कि ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि शरद यादव जल्द ही जदयू से अलग हो सकते हैं क्योंकि वे अपने बयान में पहले ही कह चुके हैं कि वे नीतीश कुमार के फैसले से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। इस बयान से शरद यादव की नीतीश के प्रति नाराजगी साफ झलकती है।

गुजरात राज्यसभा चुनाव: अमित शाह की रणनीति फेल, कांग्रेसी अहमद पटेल जीते, चुनाव आयोग में भी बीजेपी की हार

गुजरात राज्यसभा चुनाव 2017 में मंगलवार (8 अगस्त) की रात को नाटकीय ढंग से घटनाक्रम बदले और तीसरी सीट पर कांग्रेस के अहमद पटेल जीत गए। तीन राज्यसभा सीटों में से दो पर भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की जीत हुई लेकिन इन दोनों की जीत की खुशी तीसरी सीट पर हुई हार के आगे फीकी पड़ गई। आखिर तक किसी को नहीं पता था कि तीसरी सीट जिसपर अहमद पटेल और बीजेपी की तरफ से बलवंत राजपूत आमने-सामने थे उसपर कौन जीतेगा। सारा विवाद दो कांग्रेसी विधायकों के वोट को लेकर खड़ा हुआ। दरअसल दोनों ने अपना वोट डालने के बाद यह दिखा दिया था कि उन्होंने किसको वोट दिया। इसपर कांग्रेस ने हंगामा कर दिया।

कांग्रेस का कहना था कि दोनों ने वोट की गोपनीयता का उल्लंघन किया है इसके चलते दोनों (भोलाभाई गोहिल और राघवजी भाई पटेल) का वोट कैंसल होना चाहिए। इस चीज के लिए कांग्रेस चुनाव आयोग पहुंच गई। इसी बीच वोटों की गिनती रुकवा दी गई। फिर आधी रात तक दोनों ही दलों के बड़े-बड़े नेता चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचने लगे। दोनों की तरफ से अपनी-अपनी दलीलें दी जा रही थी।

लेकिन अंत में चुनाव आयोग ने दोनों के वोट को खारिज कर दिया। आयोग ने निर्वाचन अधिकारी से कांग्रेस विधायक भोलाभाई गोहिल और राघवजी भाई पटेल के मतपत्रों को अलग करके मतगणना करने को कहा। आयोग के आदेश के अनुसार मतदान प्रक्रिया का वीडियो फुटेज देखने के बाद पता चला कि दोनों विधायकों ने मतपत्रों की गोपनीयता का उल्लंघन किया था। वोटों की गिनती रात को एक बजे शुरू हुई और लगभग दो बजे नतीजे आए। जीत के बाद अहमद पटेल ने ट्वीट कर ‘सत्यमेव जयते’ लिखा। उन्होंने कांग्रेस का साथ देने वाले सभी लोगों का शुक्रिया भी किया।

यह सीट अमित शाह और अहमद पटेल के लिए नाक का सवाल बन गई थी। दोनों को ही अपनी-अपनी पार्टी का ‘चाणक्य’ कहा जाता है। लेकिन अंत में बीजेपी दो सीट जीतकर भी खुश नहीं थी और चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने की बात कह रही थी।

अजहरुद्दीन को कोर्ट ने मैच फिक्सिंग से किया मुक्त, क्या BCCI उन्हें देगी करोड़ों रुपए बकाया पेंशन?

नई दिल्ली: प्रशासकों की समिति और बीसीसीआई पदाधिकारियों की मंगलवार को होने वाली बैठक में भारत के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन की लंबी बकाया राशि पर बातचीत की जायेगी. समझा जाता है कि अजहर ने सीओए को बताया है कि आंध्र उच्च न्यायालय ने पांच साल पहले उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए तमाम आरोपों से बरी कर दिया था. उन्होंने अपने बकाया के बारे में भी पूछताछ की जो कुछ करोड़ रुपए हैं.

बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने कहा ,’हां , अजहरूद्दीन के मसले पर सीओए की बैठक में बात की जायेगी. फिलहाल अजहर पर कोई प्रतिबंध नहीं है और वह बीसीसीआई के समारोहों में भाग ले रहे हैं.

आखिरी बार वह 2000 में भारत के लिये खेले थे. उन्हें 17 साल से पेंशन नहीं मिली और एकमुश्त अनुग्रह राशि भी रूकी हुई है. सीओए इस बारे में फैसला लेगा.’

हि‍दुस्‍तान की ऐसी तस्‍वीर जि‍से आप नहीं देखना चाहेंगे

रात को लगभग 11 बजे एक मित्र का फोन आया. बहुत जरूरी हो तभी इस वक्त फोन कोई फोन करता है. बात की तो उन्होंने मुझे कहा कि व्हाट्सऐप पर एक फोटो देखिए. मैंने डेटा ऑन करके उनका भेजा गया फोटो देखा. जब से यह फोटो देखा, रह—रह कर आंखों के सामने घूम रहा है. यह हिंदुस्तान की उन दर्दनाक तस्वीरों सा ही है जो कभी भोपाल की गैस त्रासदी में सामने आता है, कभी किसी अपने की लाश को कांधों पर उठाए बीसियों किलोमीटर चला जाता है. पूरे नौ माह तक अपनी कोख में एक जीवन पाल रही स्त्री के सामने ठीक अंतिम क्षण इतने भारी पड़ने वाले होंगे किसने सोचा होगा. एक शिशु का जन्म लेते ही धरती पर यूं गिर जाना, और जन्म लेते ही मौत को पा जाना, यह दुखों का कितना बड़ा पहाड़ होगा, क्या हम और आप सोच सकते हैं, इस दर्द को महसूस कर सकते हैं, क्या इस दर्द को दूर कर सकते हैं?

यह मामला दो दिन पहले मध्यप्रदेश के कटनी जिले का है. इस जिले के बारे में एनएफएचएस—4 की रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रसव के दौरान यहां पर लोगों को पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ती है. कटनी के पास ग्राम बरमानी निवासी रामलाल सिंह और बीना बाई के घर अच्छी खबर आने वाली थी. सुरक्षित प्रसव हो इसके लिए मध्यप्रदेश में बहुत काम किया गया है. संस्थागत प्रसव पर जोर दिया गया है. इसका असर हुआ और अब लोग घरों के बजाय अस्पतालों में जाकर प्रसव कराने को प्राथमिकता दे रहे हैं. अस्पताल तक पहुंचाने का जिम्मा आशा कार्यकर्ताओं को भी दिया गया है. इसके लिए उन्हें प्रोत्साहन राशि दी जाती है. अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की सुविधा भी है, इसे जननी एक्सप्रेस नाम दिया गया है. सरकार का दावा है कि अब 80 प्रतिशत से ज्यादा प्रसव अस्पतालों में होने लगे हैं, लेकिन इनमें सुरक्षित प्रसव का प्रतिशत कितना है, यह अभी कहना बाकी है. पर लोगों को उम्मीद तो रहती ही है कि जच्चा—बच्चा का जीवन सुरक्षित रहे.

इसी आस में पति रामलाल सिंह ने प्रसव पीड़ा होने पर बरही अस्पताल पहुंचाने के लिए सुबह 10 बजे जननी एक्सप्रेस को फोन लगाया. समय चलता रहा, पीड़ा बढ़ती रही, लेकिन कोई जननी एक्सप्रेस नहीं आई. हारकर उसने अपनी पत्नी को एक ऑटो में जैसे—तैसे बैठाया और अस्पताल की ओर चल पड़ा. ऑटो अस्पताल से महज 700 मीटर की दूरी पर आकर बंद हो गया. ऐसी अवस्था में प्रसूता के लिए एक कदम में चलना मुश्किल होता है. रामलाल किसी फिल्म का हीरो भी नहीं था, जो अपनी पत्नी को गोद में उठाकर अस्पताल तक पहुंचाने जैसा फिल्मी काम कर सकता. वह दौड़ा, अस्पताल की ओर. रामलाल अस्पताल जाकर कर्मचारियों के सामने एम्बुलेंस भेजने की विनती करता रहा. पत्नी ऑटो में तड़प रही थी.

पति वापस नहीं आया और दर्द जब हद से ज्यादा हुआ तो वह ऑटो से निकल पैदल ही अस्पताल की ओर चलने लगी. कुछ ही दूर चलने पर उसे प्रसव हो गया. उसने एक सुंदर बालक को जन्म दिया, पर—पर—पर वह सड़क पर ऐसे गिरा कि फिर न हिल—डुल सका, न रो सका. आंखें खुलने से पहले ही बंद हो गईं, सांस चलने से पहले रुक गईं, दिल धड़कने से पहले ठिठक कर रूक गया. सड़क पर खून बह रहा था… पता नहीं यह मौत थी या हत्या.

मुझे दस साल पहले संग्राम सिंह की स्टोरी याद आ गई. यह मंडला जिले का मामला था. यहां पर शिशु नहीं मरा था. बैगा महिला थी, जो शिशु को जन्म देते—देते रास्ते में ही मर गई थी. किसी और मसले पर काम करते—करते हमें इस घटना का पता चला था. उसके पिता ने हमें उसकी आपबीती सुनाई थी. इसके कथानक को बदल दीजिए, कुछ दाएं—बाएं होगा, सामने तीन दिन का संग्राम था, यह नाम भी हम पत्रकारों की टोली उस बच्चे को दे आई थी. अगले दस दिन बाद हमने पता किया तो संग्राम भी उसकी मां के पास ही चला गया था. तब से अब तक दस साल का विकास हमारे सामने है. विकास के पैमाने में जिंदगी की सुरक्षा का कोई मानक कितना सुधरा, कैसे कहें, घटनाएं तो निरंतर हमारे सामने है.

हम संसाधनों का हवाला दे सकते हैं, भारत की भिन्न—भिन्न भौगोलिक परिस्थितियों के बीच सुविधाएं पहुंचा पाने की असमर्थकता का भी तर्क मान सकते हैं, पर जो व्यवस्थाएं मौजूद हैं, उनके कुशल संचालन के जिम्मेदारी से कैसे दूर भाग सकते हैं. यदि अस्पताल के ठीक सात सौ मीटर पीछे कोई बच्चा जमीन पर गिरकर मर जाए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा. क्या हमारा समाज भी इतना निष्ठुर हो गया है कि दर्द से तड़प रही एक महिला को वह अस्पताल तक नहीं पहुंचा सकता ? क्‍या यह कि‍सी धर्म के एजेंडे में नहीं है ? क्‍या ऐसे काम देशप्रेम की सूची में समाहि‍त नहीं होंगे !!! क्‍या ऐसे मसलों पर चर्चा कि‍सी राष्ट्रवाद से कम है?

यह घटना हुई इससे ठीक एक दि‍न बाद देश की संसद में स्‍वास्‍थ्‍य एवं परि‍वार कल्‍याण मंत्री फग्‍गन सि‍ह कुलस्‍ते ने एक सवाल के जवाब में बताया था कि भारत के महापंजीयक का नमूना पंजीकरण प्रणाली यानी एसआरएस की रि‍पोर्ट के मुताबि‍क 2015 में देश में प्रति एक हजार शि‍शु जन्‍म पर 37 बच्‍चों की मौत हो जाती है. पांच साल तक के बालकों की  मृत्यु दर यानी अंडर फाइव मोर्टेलि‍टी के मामले में यह आंकडा प्रति हजार जीवि‍त जन्‍म पर 43 है. इसी तरह मात मृत्यु दर के मामले में यह संख्‍या प्रति एक लाख प्रसव पर 167 है.

इसी सवाल के जवाब में बताया गया कि देश में 39 प्रतिशत बच्‍चों की मौत कम वजन या समय से पूर्व प्रसव के कारण, 10 प्रति‍शत बच्‍चों की मौत एक्‍सपीसिया या जन्‍म आघात के कारण, 8 प्रति‍शत बच्‍चों की मौत गैर संचारी रोगों के कारण, 17 प्रति‍शत बच्‍चों की मौत नि‍मोनि‍या के कारण, 7 प्रति‍शत बच्‍चों की मौत डायरि‍या के कारण, 5 प्रतिशत बच्‍चों की मौत अज्ञात कारण, 4 प्रति‍शत बच्‍चों की मौत जन्‍मजात वि‍संगति‍यों के काराण, 4 प्रति‍शत बच्‍चों की मौत संक्रमण के कारण, 2 प्रति‍शत बच्‍चों की मौत चोट के कारण, डेढ प्रति‍शत बच्‍चों की मौत बुखार के कारण और पांच बच्‍चों की मौत अन्‍य कारणों से होती है.

कटनी में हुई बच्‍चे की मौत इसमें से कि‍स श्रेणी में आएगी… सोचना होगा! सोचना यह भी होगा कि सड़क पर जो लहू बह रहा है वह मौत का है या हत्‍या का. और इसका जि‍म्‍मेदार कौन है? आखि‍र ऐसी भी क्‍या परि‍स्‍थि‍ति है कि अस्‍पताल के ठीक सामने एक प्रसूता प्रसव करती है, बच्‍चे की मौत हो जाती है; हमारा समाज उसकी मौत को खड़े-खड़े देखता रहता है. इस मौत का मुकदमा कि‍स अदालत में चलाया जाएगा, और क्‍या कठघरे में हम सभी नहीं होंगे? सरकार की नीति और नीयत का सवाल तो है ही पर क्‍या समाज की संवेदना भी उसी सि‍स्‍टम की भेंट चढ़ गई है.

दुनि‍याभर में इस सदी की शुरुआत में मि‍लेनि‍यम डेवलपमेंट गोल्‍स तय कि‍ए गए थे. इसमें भुखमरी को दूर कर देने, गरीबी को हटा देने, शि‍शु और बाल मृत्‍यु दर को कम करने सहि‍त कई बि‍दु थे. जब 2015 तक यह तय नहीं हो पाए तो अब सतत वि‍कास लक्ष्‍यों का नया एजेंडा तय कि‍या गया है. अब 2030 तक इसमें तय कि‍ए गए लक्ष्यों को हासि‍ल करने का वायदा कि‍या गया है.

पर देखि‍ए कि देश की स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का क्‍या हाल है. ऐसी वीभत्‍स तस्‍वीरें और खबरें जहां से आती हैं, वह एकदम ग्रामीण इलाका ही होता है. ऐसी जगहों पर छोटी-छोटी सेवाएं बड़ा काम करती हैं, मसलन प्राथमि‍क स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र. यह सार्वजनि‍क स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की पहली और महत्‍वपूर्ण कड़ी है. इसके बारे में घटना के ठीक एक दि‍न बाद केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परि‍वार स्‍वास्‍थ्‍य कल्‍याण मंत्री जेपी नड्डा ने जो जवाब दि‍या है वह बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के लि‍ए कतई ठीक नहीं माना जा सकता है. लोकसभा में प्रस्‍तुत जवाब के मुताबि‍क देश में आबादी के हि‍साब से अब भी 22 प्रति‍शत स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों की कमी है. यही जानकारी इन केन्‍द्रों में पदस्‍थ डॉक्‍टरों के बारे में है. देश के प्राथमि‍क स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में 34 हजार 68 डॉक्‍टरों के पद स्‍वीकृत हैं इनमें से 8774 पद खाली पड़े हैं. इस संदर्भ में और जानकारि‍यां हैं, जो लगभग ऐसी ही हैं. अब सवाल यही है कि ऐसी स्‍थितियों में ऐसी कहानि‍यां क्‍यों न सामने आएं.

राकेश कुमार मालवीय एनएफआई के पूर्व फेलो हैं, और सामाजिक सरोकार के मसलों पर शोधरत हैं…

ये हैं इंग्लैंड के मोईन अली, किया ऐसा कारनामा जो क्रिकेट में कभी नहीं हुआ

इंग्लैंड ने दक्षिण अफ्रीका को ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले गए चौथे और अंतिम टेस्ट में 177 रन से हरा दिया. इस जीत के साथ इंग्लैंड ने सीरीज पर 3-1 से कब्जा जमा लिया

नई दिल्ली: दक्षिण अफ्रीका को अपनी धरती पर टेस्ट सीरीज में शिकस्त देने के लिए इंग्लैंड को 19 साल इंतजार करना पड़ा. इस ऐतिहासिक जीत के हीरो रहे इंग्लैंड के ऑलराउंडर मोईन अली. इस ऑलराउंड प्रदर्शन के दम पर यह उपलब्धि हासिल करने वाले मोईन 8वें क्रिकेटर बन गए हैं. इंग्लैंड ने दक्षिण अफ्रीका को ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले गए चौथे और अंतिम टेस्ट में 177 रन से हरा दिया. इस जीत के साथ इंग्लैंड ने सीरीज पर 3-1 से कब्जा जमा लिया. मोईन अली ने दूसरी पारी में 69 रन देकर पांच विकेट लिए. इतना ही नहीं, मोईन अली ने दूसरी पारी में 75 रन की नाबाद पारी खेलकर टीम को 243 के सम्माजनक स्कोर पर पहुंचाया था.

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मोईन अली से जुड़ी 5 बातें

  1. मोईन अली ने चार मैचों की सीरीज में बल्ले से अहम योगदान देते हुए 252 रन बनाए. उन्होंने अपनी फिरकी के जाल में विपक्षी बल्लेबाजों को फांसते हुए 15.64 के औसत से 25 विकेट लिए. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसी खिलाड़ी ने चार मैचों की सीरीज में 250 से ज्यादा रन बनाने के साथ 25 विकेट भी चटकाए हो.
  2. पांच या उससे ज्यादा मैचों की सीरीज में आठ प्लेयर यह करिश्मा कर चुके हैं.
  3. मोईन इंग्लैंड की तरफ से 8वें ऐसे खिलाड़ी बन गए हैं, जिन्होंने किसी टेस्ट सीरीज में 200 रन बनाए और 20 विकेट भी लिए.
  4. साल 2005 में इंग्लैंड के ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉप ने ऐसा ही कारनामा किया था, यानी मोईन ने 12 साल के बाद एक ऑलराउंडर के तौर पर ऐसे प्रदर्शन को फिर से दोहराया.
  5. मोइन अली ने द. अफ्रीका के खिलाफ पिछले तीन टेस्ट मैचों में 87, 7, 18, 27, 16 और 8 रन की पारी खेली. वहीं इन मैचों में विकेट की बात करें तो उन्होंने क्रमश: 4, 6, 0, 4, 0 और 4 विकेट लिए.

हरियाणा के बीजेपी नेता पर सरेआम भड़क गईं अभिनेत्री रवीना टंडन, बोलीं- तुम कायर हो

हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष रामवीर भट्टी द्वारा IAS की बेटी पर दिये बयान के चलते फिल्म अभिनेत्री रवीना टंडन ने उन्हें खरी-खोटी सुनाई है। रवीना टंडन ने बीजेपी नेता रामवीर भट्टी पर भड़कते हुए कहा है कि ये कायर हैं, इन लोगों का बस चले तो ये सूरज ढलने के बाद अपनी बेटियों को ताले में बंद कर दें। आपको बता दें कि रामवीर भट्टी ने सोमवार को हरियाणा में बीजेपी अध्यक्ष के बेटे द्वारा एक आइएएस की बेटी को रात के अंधेरे में छेड़ने के मामले में विवादित बयान देते हुए कहा था कि उस लड़की को इतनी रात में अकेले नहीं घूमना चाहिए था। रामवीर भट्टी ने ये भी कहा था कि इस समय माहौल बहुत खराब है, इसलिए रात 12 बजो के बाद लड़कियों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। बीजेपी नेता के इस बयान के मीडिया में आने के बाद राजनीतिक दलों से लेकर सोशल मीडिया तक पर उनकी जमकर आलोचना हुई। खुद भारतीय जनता पार्टी के सासंद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि वो रामवीर के इस बयान के लिए उनपर कोर्ट में मुकदमा करेंगे। रामवीर भट्टी की आलोचना करनेवालों में एक नाम रवीना टंडन का भी जुड़ गया है। रवीना ने रामबीर भट्टी के बयान को रिट्वीट करते हुए ट्वीट किया कि ये कायर लोग अब बी उस लड़के की तरफदारी में उलजलूल बातें बोल रहे हैं। रवीना ने लिखा कि ये लोग सूरज ढलने के बाद अपनी बेटियों को ताले में बंद कर देने वाले लोग हैं।

रवीना टंडन के इस ट्वीट को सोशल मीडिया पर लोग खूब पसंद कर रहे हैं। यूजर्स रवीना की बातों से सहमति जताते हुए रामवीर भट्टी जैसे लोगों की मानसिकता पर सवाल उटा रहे हैं।

 

आपको बता दें कि हरियाणा में एक IAS की बटी ने बीजेपी नेता सुभाष बराला के बेटे विकास पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। लड़की का आरोप है कि विकास बराला और उसका दोस्त आशीष कुमार एक पेट्रोल पंप से ही उनकी कार का पीछा कर रहे थे और कार का दरवाज़ा खोलने की कोशिश की। लड़की के कई बार फोन करने पर पुलिस वहां पहुंची और दोनों लड़कों को गिरफ़्तार कर लिया। गिरफ्तार करने के अगले दिन ही उन सबको जमानत मिल गई। पीड़िता ने उस रात की घटना का जिक्र करते हुए अपने फेसबुक पेज पर अपना दर्द बयां करते हुए लिखा कि मैं खुशकिस्मत हूं कि रेप के बाद नाले में नहीं मिली।

पाकिस्तान के कई परिवार गाय के गोश्त को हाथ नहीं लगाते

कुछ दिनों पहले कुछ बड़ों के साथ बैठे थे और भारत में गोमांस पर होने वाली हिंसक घटनाओं पर बात हो रही थी कि अचानक उनमें से एक बुज़ुर्ग ने कहा कि भगवान का लाख-लाख शुक्र है कि जिसने गाय बनाई.

पाकिस्तान के पंजाब सूबे के शहर के बीच हाफ़िज़ाबाद में होने वाली इस बातचीत के दौरान थोड़ी चुप्पी के बाद उदास आंखों के साथ पुरानी यादों को ताज़ा करते हुए बुज़ुर्ग ग़ुलाम हसन कहते हैं कि हमारे यहां बाप-दादा के समय से गाय पाली तो जाती है लेकिन कभी उसके मांस घर की दहलीज के अंदर नहीं आने दिया.

 

उन्होंने कहा, “आने भी क्यों देते … मेरा जिगरी दोस्त डॉक्टर हीरालाल पड़ोसी था, ग़मी व खुशी में बढ़-चढ़ कर शरीक होता था तो किस मुंह से गाय का मांस खाते जिसे वह पवित्र मानता था.”

पाकिस्तान का एक परिवार
पाकिस्तान में अब भी कई परिवार हैं जो दालें खाना पसंद नहीं करते

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शहर हाफ़िज़ाबाद के निवासी ग़ुलाम हसन की बातें आज भी विभाजन से पहले यहां पाई जाने वाली धार्मिक सहिष्णुता के दर्शाती है जिसे सत्तर वर्ष बीतने के बाद आज भी कई परिवार जीवित रखे हुए हैं.

इन परंपराओं के इतिहास के बारे में जिज्ञासा हुई तो पंजाब की तारीख़ और संस्कृति पर कई पुस्तकों के लेखक प्रोफ़ेसर असद सलीम शेख़ से संपर्क किया और अपने प्रश्न उनके सामने रखे.

प्रोफ़ेसर असद सलीम शेख़

प्रोफ़ेसर असद सलीम शेख़ ने बताया कि भारतीय उपमहाद्वीप में मुसलमानों के दो वर्ग हैं जिनमें एक वर्ग स्थानीय नहीं था जो अरब, तुर्की, ईरान और अफ़ग़ानिस्तान आदि से आने वाले मुसलमान थे और उन सभी मुसलमानों के रस्मो-रिवाज, सभ्यता वह संस्कृति वही थी जो वे अपने क्षेत्रों से लाए थे.

 

वो कहते हैं, “दूसरा वर्ग वह था जो स्थानीय हिंदुओं का था और धर्म बदल कर मुसलमान हुआ था. इसमें दूसरे क्षेत्रों से आने वाले मुसलमान हर तरह के मांस का उपयोग करते थे लेकिन दूसरा वर्ग गाय का मांस खाने से परहेज़ करता रहा क्योंकि वह हिंदुओं के साथ सदियों से रह रहे थे और उनकी सभ्यता उनके अंदर रची-बसी रही और मुसलमान होने के बावजूद उन्होंने इन पहलुओं को छोड़ा नहीं.”

लेकिन क्या केवल यही पहलू था जिसकी वजह से बहुत सारे मुसलमान घरों में बकरे का मांस इस्तेमाल किया जाता है लेकिन गोमांस पसंद नहीं किया जाता?

इस पर प्रोफ़ेसर असद ने बताया, “उपमहाद्वीप में अक्सर स्थानों पर हिंदुओं के अनुपात में मुसलमान अल्पसंख्यक थे जिसकी वजह से यह पहलू भी था कि किसी ऐसी परंपरा को नहीं अपनाया जाए जिसके कारण बहुमत की धार्मिक भावनाएं आहत हों या जिससे झगड़े का ख़तरा हो.”

 

उन्होंने कहा कि इसके अलावा “भाईचारा और सहिष्णुता भी थी जिसकी वजह से बाद में किसी क्षेत्र में अगर मुसलमान बहुमत में आ गए तो भी उन्होंने गोमांस खाने परहेज़ ही किया” और इसी वजह से अकबर बादशाह चूँकि सक्योलर था तो उसने धार्मिक सहिष्णुता को बनाए रखने के लिए गाय के ज़बह करने पर पाबंदी भी लगाई.

गाय

प्रोफ़ेसर असद की बातें उस वक़्त साफ़ हुईं जब हाफ़िज़ाबाद की तहसील पिंडी भट्टयाँ के एक घर में जाने का मौक़ा मिला.

गृहिणी शाज़िया तुफ़ैल जब दस्तरख़ान पर खाना परोस रहीं थीं तो मैंने पूछ लिया कि क्या आपने गाय का मांस कभी पकाया है, उस पर उनकी प्रतिक्रिया ऐसे थी जैसे कोई गुस्ताख़ी कर दी हो.

शाज़िया ने दोनों कानों को हाथ लगाते हुए कहा “ना ना हमारे घर कभी गाय का गोश्त नहीं आया. हमारे बुज़ुर्गों से रवायत है कि गाय का मांस कभी घर नहीं लाया गया और न ही इसे पसंद किया जाता है. यह परंपरा दशकों से चली आ रही है और यही कोशिश है कि अगली पीढ़ी भी इसका पालन करे.”

इस इलाक़े में शाज़िया तुफ़ैल ऐसी एकमात्र महिला नहीं जिनके यहाँ गाय का गोश्त इस्तेमाल नहीं किया जाता बल्कि कई ऐसे परिवार हैं जिन्होंने धार्मिक सहिष्णुता की अनमोल यादों को संभाल कर रखा हुआ है.

मोदीजी के राज में संवाद नहीं केवल बल प्रयोग: मेधा पाटकर

मध्य प्रदेश में बांध प्रभावितों के लिए मुआवज़े और पुनर्वास की मांग को लेकर अनशन कर रहीं सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को पुलिस ने अनशन स्थल से हटाकर ज़बरदस्ती अस्पताल में भर्ती करा दिया है.

मेधा पाटकर समेत 12 लोग सरदार सरोवर बांध के प्रभावितों की मांगों को लेकर धार ज़िले के चिखल्दा गांव में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठै थे.

अनशन के 12वें दिन पुलिस ने मेधा पाटकर समेत छह लोगों को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अनशन स्थल से ज़बरदस्ती हटा दिया.

नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया जिसमें कई लोग घायल हुए हैं

‘कील वाले डंडे’

आंदोलनकर्मी
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने बल प्रयोग किया

आंदोलन की कार्यकर्ता हिमशी सिंह उस वक़्त वहां मौजूद थीं. उनका कहना है कि चिखल्दा गांव में इस वक़्त ख़ौफ का माहौल है.

हिमशी सिंह का आरोप है कि पुलिस ने मेधा पाटकर को ले जाने के दौरान भारी बल प्रयोग किया जिसमें कई लोगों को गंभीर चोटें आई हैं.

उन्होंने कहा, ”पुलिस जिन डंडों का इस्तेमाल कर रही थी, उसमें कीलें लगी हुई थीं.”

गिरफ्तारी नहीं, इलाज: शिवराज

मेधा पाटकर

वहीं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मेधा पाटकर को गिरफ्तार नहीं किया गया है बल्कि अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

शिवराज ने ट्वीट कर कहा, ‘मैं संवेदनशील व्यक्ति हूं. चिकित्सकों की सलाह पर मेधा पाटकर जी व उनके साथियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है.’

उन्होंने आगे लिखा कि ‘मेधा पाटकर और उनके साथियों की स्थिति हाई कीटोन और शुगर की वजह से चिंतनीय थी. उनके स्वास्थ्य और दीर्घ जीवन के लिए हम प्रयासरत हैं’.

डूब क्षेत्र से 40 हज़ार लोग प्रभावित

शिवराज चौहान के ट्वीट

उधर अनशन स्थल से हटाए जाने से पहले मेधा पाटकर ने कहा, ”आज मध्य प्रदेश सरकार हमारे 12 दिनों से बैठे 12 साथियों को मात्र गिरफ्तार करके जवाब दे रही है. यह कोई अहिंसक आंदोलन का जवाब नहीं है. मोदी जी के राज में, शिवराज जी चौहान के राज में एक गहरा संवाद नहीं, जो हुआ उस पर जवाब नहीं. आंकड़ों का खेल, कानून का उल्लंघन और केवल बल प्रयोग.”

सरदार सरोवर बांध से 192 गांवों के 40 हज़ार परिवार प्रभावित होंगे. उनका पूरा इल़ाका डूब जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 31 जुलाई तक पूरी तरह पुनर्वास के बाद ही बांध की ऊंचाई बढ़ाई जाए.

लेकिन पुनर्वास के लिए जो जगह बनाई गई है, उसकी हालत भी रहने लायक नहीं है.

गाय के नाम पर गबन: हरियाणा गौसेवा आयोग के सदस्य पर गौशाला संघ के 13 लाख रुपए हड़पने का आरोप

हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने 2015 में गौसेवा आयोग का गठन किया। इसमें कुल 11 सदस्य हैं जिनमे योगेंद्र आर्य भी शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा गौसेवा कल्याण बोर्ड के एक सदस्य पर संस्था का प्रमुख रहने के दौरान 13 लाख रुपये के गबन का आरोप है। कोलकाता से निकलने वाले अंग्रेजी दैनिक द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार पूरे राज्य में गौशालाएं चलाने वाले बोर्ड के पूर्व प्रमुख योगेंद्र आर्य हरियाणा गौ सेवा आयोग के सदसय् हैं। साल 2012 में वो आर्य समाज द्वारा चलाए जाने वाले हरियाणा राज्य गौशाला संघ के प्रमुख थे। करीब एक महीने पहले हरियाणा के कुरुक्षेत्र में 35 गायें मर गई थीं। कहा गया कि ये गायें चारे, पानी और आश्रय के अभाव में मर गईं। गायों की मौत के बाद ही आर्य पर मुकदमा दर्ज किया गया।

योगेंद्र आर्य पर जनवरी 2012 से सितंबर 2012 के बीच गौशाला संघ के बैंक खाते से 11.68 रुपये निकालने का आरोप है। आर्य पर गौशाला के लिए चंदे के रूप में इकट्ठा हुए 1.12 लाख रुपये न जमा करने का भी आरोप है। गौशाला संघ पूरे हरियाणा में करीब 225 गौशालाएं चलाता है। योगेंद्र आर्य के खिलाफ मामला तब दर्ज हुआ जब गौशाला संघ के वर्तमान प्रमुख शमशेर सिंह आर्य ने इस बाबत शिकायत दर्ज करायी। अपनी शिकायत में शमशेर आर्य ने योगेंद्र आर्य की गौसेवा आयोग की सदस्यता समाप्त करने की भी मांग की है। गौसेवा आयोग का गठन राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किया है।

हरियाणा में साल 2015 में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार बनी। बीजेपी सरकार बनने के बाद सीएम खट्टर ने गौसेवा आयोग का गठन किया। इस आयोग में कुल 11 सदस्य हैं जिनमे योगेंद्र भी शामिल हैं। योगेंद्र ने खुद पर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए टेलीग्राफ से कहा कि उनके खिलाफ उनके दुश्मनों ने शिकायत की है।

हरियाणा में खट्टर सरकार ने गौवंश से जुड़ा बेहद कड़ा कानून बनाया है। गौवंश के किसी जानवर की हत्या पर 10 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। राज्य पशुपालन विभाग के निदेशक ने टेलीग्राफ से कहा कि मामले की रिपोर्ट राज्य सरकार के पास भेज दी गयी है। गौसेवा आयोग के चेयरमैन भानी राम मंगल ने अखबार से कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है लेकिन आयोग के सदस्य दोषी होंगे तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।

‘We need to talk about male rape’: DR Congo survivor speaks out

“If I talked about it, I would have been separated from the people. Even those who treated me would not have shaken my hands.”

Stephen Kigoma was raped during the conflict in his home country, the Democratic Republic of Congo.

He described his ordeal in an interview with the BBC’s Alice Muthengi, calling for more survivors to come forward.

“I hid that I was a male rape survivor. I couldn’t open up – it’s a taboo,” he said.

“As a man, I can’t cry. People will tell you that you are a coward, you are weak, you are stupid.”

The rape took place when men attacked Stephen’s home in Beni, a city in north-eastern DR Congo.

“They killed my father. Three men raped me, and they said: ‘You are a man, how are you going to say you were raped?’

“It’s a weapon they use to make you silent.”

After fleeing to Uganda in 2011, Stephen got medical help – but only after a physiotherapist treating him for a back problem realised there was more to his injuries.

He was taken to see a doctor treating survivors of sexual violence, where he was the only man in the ward.

“I felt undermined. I was in a land I didn’t belong to, having to explain to the doctor how it happened. That was my fear.”

Stephen was able to get counselling through the Refugee Law Project, an NGO in Uganda’s capital, Kampala, where he was one of six men speaking about their ordeal.

But they’re far from being the only ones.

Police not an option

The Refugee Law Project, which has investigated male rape in DR Congo, has also published a report on sexual violence among South Sudanese refugees in northern Uganda.

It found that more than 20% of women reported being raped – compared to just 4% of men.

“The main reason that fewer men come forward is that people assume they should be invulnerable, they should fight back. They have allowed it so they must be homosexual,” Dr Chris Dolan, director of the organisation, told the BBC’s Focus on Africa programme.

Legal challenges pose a problem when it comes to men reporting rape, he added.

“In the Rome Statute [which established the International Criminal Court] you have a definition of rape that is wide enough to include women and men, but in most domestic legislation, the definition of rape involves the penetration of the vagina by the penis. That means if a man comes forward, they’ll be told it wasn’t rape, it was sexual assault.

“There’s the problem of criminalisation of same-sex activity – it revolves around penetration of the male body, not around consent or lack of consent.”

In 2016, Uganda took in more refugees than any other country in the world, and has been praised for having some of the world’s most welcoming policies towards them.

But for male rape survivors like Stephen, life there can be tough. Homosexual acts are illegal in Uganda, and going to the police to report rape is not always an option.

“When I asked the police, they said that if it has anything to do with penetration between a man and a man, it is gay,” he said.

“If it happens to a woman, we listen to them, treat them, care and listen to them – give them a voice. But what happens to men?”

Modi taking no chances with V-P elections

NDA MPs to take part in mock voting.

The vice-presidential election, scheduled for Saturday, may look like it is in the bag for the ruling NDA, but Prime Minister Narendra Modi is taking no chances.

On Friday evening, he will meet all MPs of the NDA and the parties that have pledged support to its candidate M. Venkaiah Naidu at the G.M.C. Balayogi Auditorium in the Parliament House complex. The meeting will be different from the routine as it involves an exercise of mock voting with replicas of the ballot.

Two names

“There were 21 invalid votes polled in the presidential election, and many of them were from the BJP. It was felt, therefore, that there should be a demo of the voting process again,” said a senior office-bearer of the BJP.

The ballot will have the names of the two candidates in the fray: Mr. Naidu and Gopalkrishna Gandhi, who has been put up by the Opposition. Mr. Modi will also take part in the exercise as an MP.

At the meeting, all parties of the NDA will express their support for Mr. Naidu. This will be followed by a cultural programme and a dinner. The cultural programme is being arranged by Union Minister Mahesh Sharma.

Drug companies flock to supercharged T-cells in fight against autoimmune disease

Researchers in both academia and industry are turning to immune-suppressing cells to clamp down on autoimmune disorders, and the effort is building to a fever pitch.

On 24 July, pharmaceutical firm Eli Lilly of Indianapolis, Indiana, announced that it would pay up to US$400 million to support the development of a drug — which entered clinical trials in March — that stimulates these cells, called regulatory T cells. And in January, Celgene of Summit, New Jersey, announced plans to buy a company working on a similar therapy for $300 million.

Other companies, from tiny biotechs to pharmaceutical heavyweights, are also investing in an approach that could yield treatments for a variety of disorders caused by an immune attack on the body’s own cells. Such conditions include type 1 diabetes, lupus and rheumatoid arthritis.

“It’s a field that’s just, like, crazy,” says David Klatzmann, an immunologist at Pierre and Marie Curie University in Paris, who has been studying regulatory T cells and advises a Paris company called ILTOO Pharma. “The competition is coming very hard. It’s going to be exciting to see where it goes.”

Booster molecule

T cells are often thought of as key foot soldiers in the immune system’s battle against foreign invaders. But there are many kinds of T cell, each armed with a different set of skills. Regulatory T cells serve to dampen immune responses — rather than attack invaders — and are important for preventing autoimmunity.

People with disorders caused by an autoimmune attack often also have reduced levels of regulatory T-cell activity, leading scientists to suspect that bolstering such cells could reduce the immune system’s attack on the body.

To boost these cells, many researchers — now including those at Lilly and Celgene — are turning to a molecule called interleukin-2 (IL-2). High doses of IL-2 stimulate the ‘effector’ T cells that attack invaders, and in 1992, US regulators approved the treatment for some people with cancer, to prompt immune responses against the tumours. But low doses of IL-2 — roughly ten times lower than those used to treat cancer — instead stimulate regulatory T cells, and have relatively little effect on effector T cells.

This observation was made in the 1990s, but some researchers resisted the idea of using IL-2 to treat people with autoimmune disorders, even at low doses. The high doses used in cancer treatment are notoriously toxic, and can be fatal. “Initially, lots of people were so afraid to use it,” says Di Yu, an immunologist at the Australian National University in Canberra. “They have some bitter memories of IL-2.”

Molecular tweaks

Gradually, a handful of promising small clinical trials have begun to overcome those concerns. And in 2011, a pair of studies provided the first clinical evidence that the approach could work. One of these was in graft-versus-host disease1, a condition that can occur when transplanted bone marrow produces immune cells that attack its new host, and the other was in an autoimmune disorder caused by hepatitis C virus infection2. Researchers have also launched other studies in type 1 diabetes and lupus. The lower doses seem, so far, to be much safer than the doses used for cancer treatment.

Even so, there are still concerns about how specific the IL-2 treatment can be — any potential stimulation of effector T-cell responses in a patient who is already undergoing an autoimmune attack could be dangerous. “It’s a robust field, but a challenging field,” says Jeffrey Bluestone, an immunologist at the University of California, San Francisco, who has advised several companies on regulatory T-cell projects. “It’s still unclear that you can get a regulatory T-specific response without any other effects.”

Instead, many companies are interested in tweaking IL-2 to make it more specific. Lilly’s $400-million investment went to Nektar Therapeutics, a biotech company in San Francisco, California, that has produced chemically modified IL-2 that is less likely to bind to effector T cells. Delinia, the company that Celgene bought, which is based in Cambridge, Massachusetts, was developing a mutated form of IL-2 that has a similar effect.

Other researchers are investigating possible cell therapies, for example extracting regulatory T cells from a patient’s blood, expanding and activating the cells in the laboratory, and then reintroducing them into the patient. Another approach, still in the early stages of development, is to engineer regulatory T cells taken from the body to help the cells better recognize the molecules that are provoking an autoimmune response and to shut that response down.

And basic researchers are still discovering more about the biology of regulatory T cells that could aid the development of future therapies. Hongbo Chi, an immunologist at St. Jude Children’s Research Hospital in Memphis, Tennessee, has been studying how the metabolism of regulatory T cells differs from that of other T cells. And Alexander Rudensky, an immunologist at the Memorial Sloan Kettering Cancer Center in New York City, and his colleagues, this year reported a new subset of regulatory T cell that may have a more specific function[3].

Although Chi is not directly seeking out new drugs, he has noted industry’s enthusiasm with interest. “It’s really encouraging to see those therapeutics go into clinical trials,” he says. “That motivates us basic researchers to understand the mechanism.”

चरमपंथ के ख़िलाफ़ सेना का साथ क्यों दे रहे कश्मीरी?

पिछले दो महीनों से कश्मीर घाटी में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों को रोकने की कार्रवाइयों में खासा वृद्धि हुई है. खासकर उस दक्षिणी हिस्से में जिसे नई पीढ़ी के चरमपंथ का गढ़ माना जाता है.
जून-जुलाई 2017 के महीने में लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख अबू दुजाना और लश्कर के ही एक और शीर्ष कमांडर बशीर लश्करी समेत कश्मीर घाटी में लगभग 36 चरमपंथी मारे गए, इनमें हिज़बुल मुज़ाहिद्दीन के कई शीर्ष चरमपंथी भी शामिल थे. इस सूची में नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिश में मारे गए चरमपंथी शामिल नहीं हैं.

एक ओर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां चरमपंथ को बेअसर करने में मिली कामयाबी का जश्न मना रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ़ अलगाववादियों को यह पसंद नहीं आ रहा. जेल में बंद आसिया अंद्राबी के नेतृत्व वाले महिलाओं के कट्टरवादी संगठन दुख़्तरान-ए-मिल्लत ने मारे गए चरमपंथियों की संख्या में वृद्धि पर खुलकर अपनी चिंता व्यक्त की है.

दुख़्तरान-ए-मिल्लत की महासचिव नाहिदा नसरीन ने 22 जून को एक बयान में कहा, “मारे जा रहे चरमपंथियों की संख्या बढ़ गई है. हम आज़ादी के समर्थक और चरमपंथी गुटों से आग्रह करते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में मुजाहिदीनों की मौत के पीछे कमियों को तलाशें और साथ ही गोलीबारी के दौरान उन्हें बचाने की कोशिश में लगे युवाओं की पहचान करें.

पुलिस और सेना समेत अन्य सुरक्षाकर्मियों को चरमपंथियों की मौज़ूदगी की अधिक से अधिक सटीक सूचनाएं मिल रही हैं. जहां एक ओर यह उनके संबंधित ख़ुफ़िया विभागों की दक्षता को दिखाता है तो वहीं दूसरी तरफ़ एक कठोर सच को भी ज़ाहिर करता है कि अब पहले की तुलना में कश्मीर के लोग सुरक्षाबलों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं. दुख़्तरान-ए-मिल्लत का बयान यही इशारा करता है.

योगी आदित्यनाथ की सरकार में अपने ही क्यों हैं ख़फ़ा?

उत्तर प्रदेश सरकार स्वच्छ प्रशासन, कार्यकुशलता और जनता के हित में कार्य करने के जहां तमाम दावे कर रही है, वहीं उसकी पार्टी के ही ज़िम्मेदार नेता और मंत्री उस पर सवाल उठाकर सरकार की कार्यप्रणाली पर संदेह खड़े कर रहे हैं.

सरकार को बने अभी चार महीने ही हुए हैं, लेकिन पार्टी के कई नेताओं और विधायकों की तो छोड़िए एक विभाग के कैबिनेट मंत्री ही दूसरे विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी ज़ाहिर कर चुके हैं.

राज्य के आबकारी मंत्री जय प्रताप सिंह ने पिछले दिनों ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा को पत्र लिखकर उनके इलाक़े में बिजली व्यवस्था की अनियमतितताओं की ओर ध्यान दिलाया तो ये पत्र राजनीतिक जगत में सुर्खियों में आ गया.

बिजली का मुद्दा

जय प्रताप सिंह कहते हैं, “दरअसल, हमें क़रीब डेढ़ दशक से जर्जर व्यवस्था हर क्षेत्र में मिली है. ज़ाहिर है बिजली भी उनमें से एक है. हमारे इलाक़े के कुछ विधायकों ने शिकायत की बिजली की स्थिति ख़राब है. उन लोगों ने इस बारे में मुख्यमंत्री से भी बात की थी. लेकिन जब बात नहीं बनी तो हमने ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखा.”

जय प्रताप सिंह ने अपने पत्र में साफ़-साफ़ लिखा कि मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री के निर्देशों के बावजूद उनके इलाक़े में लोगों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है और यदि यही स्थिति बनी रही तो ये पार्टी और सरकार के लिए ठीक नहीं होगा.

दरअसल, ये अकेला मामला नहीं बल्कि इस तरह के कई मौक़े आए जब पार्टी के जनप्रतिनिधियों ने अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाई. हमीरपुर के एक विधायक अशोक चंदेल तो विधान सभा में कहने लगे कि छोटे-मोटे प्रशासनिक अधिकारी तक उनकी बात नहीं सुनते हैं.

आम आदमी तक…

वहीं बांदा ज़िले के एक विधायक राजकरन पिछले दिनों अवैध खनन के ख़िलाफ़ धरने पर बैठ गए. उनका कहना था कि प्रशासन उनकी बातें नहीं सुनता है और वो पार्टी में या मंत्रियों से शिकायत करते हैं तो उनकी सुनी नहीं जाती.

यही नहीं, पार्टी के कई सांसद भी इस बारे में अक़्सर शिकायत करते रहते हैं.

राज्य सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा इस बात को तो स्वीकार करते हैं कि कुछ जगह असंतोष हो सकता है, लेकिन उनका कहना है कि ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई होती ज़रूर है.

सरकार की छवि

श्रीकांत शर्मा कहते हैं, “पार्टी में लोकतंत्र है और विधायकों से लेकर आम आदमी तक अपनी बात कह सकता है. जब तक लोग समस्याएं बताएंगे नहीं तो सरकार को पता कैसे चलेगा. रही बात उसके बाद की तो सरकार इन्हें दूर करने की पूरी कोशिश करती है. हमें ये भी पता चला है कि प्रशासन में बैठे कुछ लोगों की आदत ख़राब हो चुकी है. उन लोगों को भी चेतावनी दी गई है कि सुधर जाएं नहीं तो कार्रवाई होगी.”

ऐसे ढेरों उदाहरण हैं जब राज्य के बीजेपी नेताओं ने सीधे तौर पर सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी ज़ाहिर की है.

जानकारों का कहना है कि ऐसा न सिर्फ़ अनुभवहीनता के कारण हो रहा है बल्कि इसलिए भी कि सरकार में शक्ति के कई केंद्र हैं.

जनता का पैसा बर्बाद करने की मूर्ख नीति

जनता का पैसा बर्बाद करने वाली 'मूर्ख' नीति की घंटी बजाओ

जनता का पैसा बर्बाद करने वाली 'मूर्ख' नीति की घंटी बजाओ

Posted by ABP News on Wednesday, August 2, 2017

IRCTC से तत्काल टिकट बुक करने पर भी अब मिलेगी ‘पे ऑन डिलिवरी’ की सुविधा

यह सर्विस उन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी है जो टिकट तो ऑनलाइन बुक करना चाहते हैं लेकिन टिकट की पेमेंट ऑनलाइन नहीं करना चाहते, या फिर ऑनलाइन टिकट बुक करने के बाद पेमेंट कैश में करना चाहते हैं।

तत्काल ट्रेन टिकट बुक कराने वालों को अब आईआरसीटीसी ने एक और सर्विस दे दी है। IRCTC से बुक किए गए टिकट पर ‘पे ऑन डिलीवरी’ की सुविधा देने वाली एंड्युरिल टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने बुधवार (3 अगस्त) को ऐलान किया कि अब यूजर तत्काल टिकट बुक करने के दौरान भी ‘बुक नाउ पे लेटर’ का ऑप्शन चुन सकते हैं। अब आईआरसीटीसी से तत्काल रेल टिकट बुक करने के बाद कैश और डेबिट या क्रेडिट कार्ड से बाद में भुगतान कर सकेंगे। पे ऑन डिलीवरी की सर्विस अभी तक जनरल रिजर्वेशन के लिए उपलब्ध थी। अब तत्काल बुकिंग के लिए इस सेवा को उपलब्ध करा दिया गया है। यह सर्विस उन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी है जो टिकट तो ऑनलाइन बुक करना चाहते हैं लेकिन टिकट की पेमेंट ऑनलाइन नहीं करना चाहते या फिर ऑनलाइन टिकट बुक करने के बाद पेमेंट कैश में करना चाहते हैं।

ऐसे करता है तत्काल टिकट के लिए ‘पे ऑन डिलीवरी’ सिस्टम काम
इस सर्विस का फायदा उठाने के लिए यूजर को सबसे पहले irctc.payondelivery.co.in पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा। रजिस्ट्रेशन करने के दौरान यूजर को अपने आधार कार्ड या पैन कार्ड की जानकारी देनी होगी।
इसके बाद जब आईआरसीटीसी पोर्टल पर तत्काल टिकट की बुकिंग करेंगे तो बुकिंग के दौरान यूजर को एंड्युरिल टेक्नोलॉजी के ‘pay-on-delivery’ ऑप्शन को चुनना होगा।

टिकट बुक होने के साथ ही टिकट को एसएमएस/ईमेल द्वारा डिजीटली डिलीवर कर दिया जाता है। इसमें सबसे खास बात यह है कि टिकट बुकिंग के 24 घंटे के अंदर-अंदर भुगतान करना होता है।
ग्राहक ऑनलाइन भुगतान भी कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें बुकिंग के समय एक पेमेंट लिंक भेजा जाता है।

पीएम मोदी को तोहफे में मिली विदेशी घड़ी, ढाई हजार का पैन, जानिए 2017 में मिले कौन-से गिफ्ट

अधिकारियों का कहना है कि ऐसा बहुत की कम होता है कि मंत्री और अधिकारी उपहार को अपने घर ले जाए। तोशखाने के रिकॉर्ड के मुताबिक पीएम मोदी को पहले दस हजार कीमत के दो डिनर सेट मिले थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैन्स और प्रशंसकों का कहना है कि वह कभी न थकने वाले इंसान हैं और बिना समय देंखे लगातार अपने काम में जुटे रहते हैं। बावजूद इसके इस साल पीएम मोदी को विदेश दौरों के दौरान कई गिफ्ट मिले हैं। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक प्रधानमंत्री को ब्रिटिश कंपनी सेकोंडा की घड़ी मिली है। मंत्रियों और अधिकारियों को विदेश मंत्रालय के आधिकारिक भंडार तोशखाने में सारे उपहार जमा करने होते हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक तोशखाने में तैनात के अधिकारी ने बताया कि प्राप्तकर्ता 5 हजार से कम का गिफ्ट रख सकता है। 5000 से ऊपर का गिफ्ट रखने पर उसे अतिरिक्त पैसे चुकाने होते हैं।

पीएम मोदी को Sekonda ‘House of Commons’ हाथ घड़ी गिफ्ट में मिली है, जिसकी कीमत साढे तीन हजार रुपए है। घड़ी के अलावा पीएम को सजावटी चीनी मिट्टी के बरतन भी मिले हैं, इसकी कीमत एक हजार रुपए है। जनवरी से मार्च के बीच मोदी को मिले गिफ्ट में संयुक्त अरब अमीरात के शाही आवास का एक मॉडल, नक्काशी की हुई एक सजावटी मूर्ति और मोंट ब्लांक बॉलपेन पेन शामिल है। पेन की कीमत 2500 रुपए है और वह तोशखाने में रखा है। इसके अलावा रिपॉजिटरी में जमा अमीरती नेशनल हाउस के मॉडल का मूल्य 4500 रुपये है और आर्गिलिट नक्काशी वाली मूर्ति की कीमत 2000 रुपये है। तोशखाने में 83 नवीनतम प्रविष्टियों में ये छह वस्तुएं भी शामिल हैं। बता दें कि जून महीने में नीदरलैंड यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वहां के पीएम ने साइकिल गिफ्ट की थी।

अधिकारियों का कहना है कि ऐसा बहुत की कम होता है कि मंत्री और अधिकारी उपहार को अपने घर ले जाए। तोशखाने के रिकॉर्ड के मुताबिक पीएम मोदी को पहले दस हजार कीमत के दो डिनर सेट मिले थे और पंद्रह हजार रुपए कीमत की कालीन मिली थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उनके कार्यकाल के दस साल में 101 गिफ्ट मिले थे। मनमोहन सिंह को अर्द्ध कीमती पत्थरों से सजा हुआ चांदी का हाथी मिला था। इसके अलावा 10 पेंटिंग, बोस कंपनी का साउंट सिस्टम और एक गोल्ड प्लेटेड लेडिज घड़ी मिली थी। इन सभी गिफ्ट्स में सिर्फ 7 चीजें ऐसी थी जिनकी कीमत 5 हजार से ज्यादा थी।