17-yr-old junior kabaddi player raped by man posing as stadium official

A 17-year-old national level junior kabaddi player has alleged that she was raped by a man in his thirties in northwest Delhi’s Model Town area on Saturday.

The teenager told police in her statement that on July 9 she was outside a stadium when the man, who runs a wrestling training centre, befriended her posing as a stadium official. She alleged that the man took her to a flat in Rohini on the pretext of introducing her to a few of his friends and then raped her.

The girl alleged that he served her drinks laced with sedatives after which she fell unconscious and realised later that she was sexually abused.

The girl approached police on Monday morning and said that she was traumatised because of which she could not approach police earlier. She alleged the man dropped her on a road outside the stadium and threatened to kill her if she reported the matter.

Police took the girl to a hospital for medical examination, which confirmed rape. Police are yet to make any arrests. Following her complaint, police have registered a case of rape and other sections of POCSO (Protection of children from sexual offences act) and have also detained the man.

“He was identified and has been detained. He is being questioned and will soon be put under arrest,” a police officer said.

According to the Delhi Police crime statistics, a rape case is reported every four hours in the city. In 2016, 2,155 cases of rape were reported. This year the number has already touched 930. The Delhi Police have released a tender inviting experts to conduct a sociological and psychological study on the causes of rape in Delhi.

‘8 murders and notes promising revolution’: Delhi gang claims to be vigilantes

“Long live the revolution”

“We want to correct injustices. We are against crimes in society. We want peace against oppression. If war is the solution then so be it.”

This is the note left by a group whose members claim to be “the saviours of society” and promise to make it crime free. The note was found at a spot where a 32-year- old businessman, identified as Vikas, was gunned down on Monday night in Dwarka’s sector 22.

According to reports, the string of events that led to Vikas’ murder began on July 14 when a 23-year-old youth named Hemant Kumar was shot at by the gang. Hemant allegedly was in a relationship with the sister of one of the gang members and they did not approve of it. It is suspected that Vikas was targeted because he supported the couple.

In the note left after Vikas’ murder, the group claimed that Hemant had been taught a lesson for molesting a girl and said they will not spare rapists.

The group have been allegedly involved in seven to eight murder cases and the car they use for committing crimes is also said to be a stolen one.

The group struck again on Tuesday afternoon. They are suspected to have murdered a 21-year-old man, Pradeep, who had brushed his bike against their car in Kanjhawala, a day after the Dwarka incident.

Pradeep was on his bike with his brother Pawan when it accidentally brushed against a Verna car. After an argument the men in the car allegedly whipped out a pistol and shot Pradeep dead. Pawan, his brother later identified the accused, who is also a suspect in the Dwarka murder case.

The group claim to be fighting against corrupt doctors, molesters,rapists, gamblers, anti-nationals and those with black money. The note signs off with “Jai Hind, Jai Bharat”, however, the police suspect that this may be a way of misleading the investigators.

Dismissing the gang’s claims of wiping out ‘criminals’, the police said the two murders were a result of gang rivalry that took place in Gurgaon, Jhajjar and Chhawla in May. They claimed the killers may have been hired to eliminate rivals.

The one-page note also mentions the names of the group members. The group members claim that the idea behind the killings was to “bring peace to the nation” and that they would gun down all offenders across Delhi using “high tech weapons”.

दान में मिले हाथों से बेसबॉल खेलने वाला लड़का

एक अमरीकी लड़का दुनिया का पहला बच्चा बन गया है जिसके दोनों हाथ प्रत्यारोपित किए गए हैं.

प्रत्यारोपण करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि अब वह बच्चा बेसबॉल बैट आसानी से घूमा रहा है. 10 बरस के ज़ायन हार्वे को नए हाथ मिले हैं और उसके हौंसले को नई उड़ान.

हाथ प्रत्यारोपित करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि यह विस्मित करने वाला है.

ज़ायन अब लिख सकता है, खा सकता है, ख़ुद से कपड़े बदल सकता है और बैट भी पकड़ सकता है. ज़ायन को हाथ एक डोनर से मिला है.

मेडिकल जांच से साबित हुआ है कि ज़ायन के मस्तिष्क ने उस हाथ को अपने हाथ की तरह स्वीकार किया है.

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अभूतपूर्व कामयाबी

फिलाडेल्फिया के चिल्ड्रन हॉस्पिटल में ज़ायन का इलाज चला था. डॉक्टर सांद्रा अमराल ज़ायन का इलाज करने वाले डॉक्टरों की टीम में शामिल थे.

उन्होंने बीबीसी से कहा कि ज़ायन की स्थिति में लगातार तेज़ी से सुधार हो रहा है.

उन्होंने कहा, “वह अब बैट घुमा सकता है और अपना नाम भी लिख पा रहा है. उसकी अनुभूति में लगातार सुधार हो रहा है और यह हमारे लिए विस्मित करने वाला है. अब वह अपने मां के गाल पर हाथ से थपकी दे सकता है.”

डॉक्टर अमराल ने कहा, “यह सबूत है कि उसके मस्तिष्क ने नए हाथों को स्वीकार कर लिया है.”

डॉक्टरों की टीम ने इस अभूतपूर्व कामयाब कहानी का ‘मेडिकल नोट्स द लैन्सेंट चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ जर्नल’ में छापा है.

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ज़ायन का नया हाथ

ज़ायन का जन्म दोनों हाथों के साथ हुआ था, लेकिन जब वह दो साल का था तो दोनों हाथ काटने पड़े थे.

ज़ायन के ही शब्दों में, “जब मैं दो साल का था तो दोनों हाथ काटने पड़े थे क्योंकि मैं बीमार था.”

ज़ायन को जानलेवा इन्फ़ेक्शन हो गया था. डॉक्टरों को ज़ायन के दोनों हाथ काटने पड़े थे. ज़ायन की किडनी ने भी काम करना बंद कर दिया था.

दो साल डायलिसिस पर रहने के बाद चार साल की उम्र में ज़ायन की किडनी का प्रत्यारोपण हुआ. किडनी ज़ायन की मां से ली गई थी. इसके चार साल बाद ज़ायन को नया हाथ मिला.

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जोखिम

ज़ायन के हाथ की सर्जरी जून 2015 में की गई थी. यह अपने आप में एक बड़ा जोखिम था. हालांकि दोनों हाथों का प्रत्यारोपण की ये पहली घटना नहीं थी.

इससे पहले 1998 में भी हुआ था. यह सबसे कम उम्र में किया गया प्रत्यारोपण है. डॉक्टरों का कहना है ज़ायन उनके लिए मिसाल की तरह है.

जिनमें नए अंगों का प्रत्यारोपण किया जाता है उन्हें जीवन भर एंटी-रिजेक्शन दवाई खानी पड़ती है और इन दवाइयों का बुरा साइड इफेक्ट होता है.

इसका मतलब यह हुआ कि सर्जरी पर जोखिम का साया हमेशा बना रहता है. ज़ायन किडनी के लिए दवाई पहले से ही खा रहा है.

18 महीने बाद इसका मूल्यांकन किया जाएगा. हालांकि ज़ायन के मामले में मेडिकल टीम आश्वस्त है कि उसे इसका फ़ायदा होगा.

हमारी जेलें आपकी जेलों की तरह अच्‍छी हैं, विजय माल्‍या यहां ठीक रहेंगे : भारत ने ब्रिटेन से कहा

नई दिल्‍ली: भारत सरकार ने ब्रिटेन सरकार को यह यक़ीन दिला दिया है कि अगर शराब व्यापारी विजय माल्या को वो वापस भारत भेज देते हैं तो उसे भारत की जेल में ठीक से रखा जाएगा और भारत की जेलों में सुविधा यूरोप की जेलों से कम नहीं हैं.

भारत ने ये पक्ष केन्द्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि के द्वारा ब्रिटेन में उनकी काउंटर पार्ट पैटसी विल्किनसन, जोकि ब्रिटेन के होम डिपार्टमेंट की परमानेंट सचिव हैं, को बताया. गृह सचिव पिछले हफ़्ते लंदन के दौरे में थे.

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ब्रिटेन को ये साफ़ तौर पर कहा कि अगर विजय माल्या का प्रत्‍यर्पण किया जाता है तो न सिर्फ़ उसे उचित जेल में रखा जाएगा, बल्कि मेडिकल सुविधाएं भी दी जाएंगी.

एक सीनियर अफ़सर ने एनडीटीवी इंडिया से कहा, “ब्रिटेन को बताया गया कि भारत की जेलों के सेल यूरोप की जेलों के सेल से बड़े हैं”.

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हालांकि ये भी साफ़ कर दिया गया कि माल्या को कोई ख़ास ट्रीटमेंट नहीं दिया जाएगा. प्रतिनिधिमंडल ने ब्रिटिश अधिकारियों से भारत के इस रुख से लंदन स्थित अदालत को भी अवगत करा देने को कहा है।

अधिकारी का कहना है कि “हर जेल में अस्पताल भी है, इसीलिए उन्हें ये भी बताया गया कि जैसा फ़िल्मों में जेल की हालत के बारे में दिखाया जाता है, भारत में वैसा नहीं है”.

ये इसीलिए अहम है, क्‍योंकि विजय माल्या ने भारत की खस्ता जेलों का हवाला देकर ब्रिटेन की कोर्ट से प्रत्यर्पण नहीं करने की गुहार लगाई है.

इस संबंध में केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि ने 23 जून को महाराष्ट्र के गृह सचिव सुमित मुलिक को एक पत्र लिखकर राज्य में जेलों की स्थिति का जायजा लिया था.  सूत्रों की मानें तो विजय माल्या को भारत लाए जाने के बाद मुंबई के ऑर्थर रोड जेल में रखा जा सकता है.

गौरतलब है कि माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस को लोने देने वाले देश के 17 बैंकों ने जब उन्हें देश से बाहर जाने से रोकने की अपील के साथ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया तो माल्या मार्च 2016 में इंग्लैंड भाग गए थे. इन बैंकों का माल्या पर 9,000 करोड़ रुपये बकाया है. भारत में बैंकों से 9,000 करोड़ रुपये के कर्ज की अदायगी नहीं करने के आरोप में माल्या को भारतीय अदालत से भगोड़ा घोषित किया जा चुका है. वह भारत से मार्च 2016 में चोरी छुपे भागकर ब्रिटेन में जा छुपा है.

तो क्या शिक्षा पर ख़र्च ही सबसे बड़ी फ़िज़ूलख़र्ची?

उत्तर प्रदेश सरकार ने मौजूदा बजट में किसानों की कर्ज़माफ़ी के लिए 36 हज़ार करोड़ रुपये का प्रावधान किया और बताया कि इस धनराशि का इंतज़ाम सरकारी ख़र्चों में कटौती और अपव्यय को कम करके किया जाएगा.

वहीं शिक्षा के मद में पिछले बजट की तुलना में नब्बे फ़ीसद तक कटौती करके ये सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या शिक्षा पर ख़र्च करना ही सबसे बड़ी फ़िज़ूलख़र्ची है?

योगी सरकार ने 2017-18 के बजट में माध्यमिक शिक्षा के लिए 576 करोड़ रुपये और उच्च शिक्षा के लिए 272 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं जबकि प्राथमिक शिक्षा के लिए क़रीब 22 हज़ार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

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पिछले साल यानी वित्त वर्ष 2016-17 के बजट को देखा जाए तो उसमें माध्यमिक शिक्षा के लिए साढ़े नौ हज़ार करोड़ रुपये और उच्च शिक्षा के लिए 2742 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए थे.

यानी दोनों ही क्षेत्रों के लिए बजट में नब्बे फ़ीसद तक की कमी कर दी गई है. ये अलग बात है कि प्राथमिक शिक्षा के लिए पिछले साल की तुलना में बजट में 5,867 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी की गई है.

नहीं मानते कि बजट में कटौती हुई

उत्तर प्रदेश विधानसभाइमेज कॉपीरइटSAMEERATMAJ MISHRA

हालांकि यदि कुल बजट की बात की जाए तो ये पिछले साल के मुक़ाबले दस फ़ीसद ज़्यादा है लेकिन शिक्षा के मद में इतनी बड़ी कटौती क्यों है, ये समझ से परे है.

राज्य के उप मुख्यमंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा शिक्षा मंत्री भी हैं और उनके पास उच्च, माध्यमिक और प्राथमिक तीनों ही विभाग हैं. डॉक्टर दिनेश शर्मा ये नहीं मानते कि बजट में कटौती की गई है.

बीबीसी से ख़ास बातचीत में वो कहते हैं, “कोई कटौती नहीं की गई है, सिर्फ़ अपव्यय को रोका गया है. अभी तक बजट का एक बड़ा हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरी ऐसी जगहों पर ख़र्च होता था जिनकी ज़रूरत नहीं थी, लेकिन अब शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों पर ख़र्च होगा. बड़ी बड़ी इमारतें बना देने से क्या होगा यदि वहां शिक्षक ही नहीं होंगे?”

शिक्षा को निजी हाथों में देने की मंशा

जानकारों का कहना है कि शिक्षा के लिए जितने रुपये इस बजट में निर्धारित किए गए हैं, उतने से तो शायद अध्यापकों के वेतन भी पूरे नहीं होंगे.

लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति और शिक्षाविद प्रोफ़ेसर रूपरेखा वर्मा सीधे तौर पर कहती हैं कि इसके ज़रिए सरकार माध्यमिक और उच्च शिक्षा को निजी हाथों में पूरी तरह सौंप देना चाहती है.

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प्रोफ़ेसर रूपरेखा वर्मा कहती हैं, “पांच सौ करोड़ और दो सौ-तीन सौ करोड़ रुपये शिक्षा पर ख़र्च करना तो किसी भी तरह से समझ में ही नहीं आता. इससे कई गुना ज़्यादा तो तीर्थ स्थलों के विकास के लिए आवंटित कर दिया गया है. साफ़ है कि प्राथमिक स्कूलों के निजीकरण के बाद अब सरकार माध्यमिक और उच्च शिक्षा का भी पूर्णतया निजीकरण कर देना चाहती है. जिनके पास पैसा होगा वो पढ़ेंगे, जिनके पास नहीं होगा, नहीं पढ़ेंगे.”

जानकारों का कहना है कि इतनी कम धनराशि में तो इन विभागों का सामान्य ख़र्च चल जाए, वही बड़ी बात है, शोध और सेमिनारों की बात तो दूर की कौड़ी है.

अपव्यय रोकने की बात

हालांकि डॉक्टर दिनेश शर्मा कहते हैं कि शोध के लिए, गुणवत्ता के लिए कोई कटौती नहीं की गई है, सिर्फ़ अपव्यय रोका गया है. लेकिन 272 करोड़ और 576 करोड़ रुपये में कितना शोध हो सकेगा और कितनी गुणवत्ता बनी रहेगी, समझ से परे है.

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लेकिन सवाल उठता है कि इतनी बड़ी कटौती कैसे की गई है, वो भी तब जबकि माध्यमिक और उच्च शिक्षा में कर्मचारियों की ही एक बड़ी संख्या है. क्या सरकार सच में शिक्षा पर व्यय को फ़िज़ूलख़र्ची मानती है?

पैसा कहां से आए

वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र कहते हैं, “बीजेपी सरकार के एजेंडे में वैसे तो शिक्षा का मुद्दा सबसे ऊपर रहता है लेकिन किसानों की कर्ज़माफ़ी का इतना बड़ा ‘हाथी पालने’ जैसा उसने जो वादा कर लिया और दबाव में घोषणा भी करनी पड़ी, उसके लिए पैसा कहां से आए, ये बड़ी समस्या है. उन्हें लगता है कि सबसे ज़्यादा फ़िज़ूलख़र्ची शिक्षा पर ही हो रही है, सो सारी कटौती यहीं कर दी. उन्हें पता नहीं है कि इसकी प्रतिक्रिया कितनी बड़ी होगी और ये क़दम कितना आत्मघाती होगा?”

बहरहाल, सरकार आश्वस्त है कि बजट में जितनी धनराशि का निर्धारण किया गया है, वो शिक्षा विभाग के लिए पर्याप्त है और वो फ़िज़ूलख़र्ची रोककर सब ठीक कर लेगी. लेकिन सवाल उठता है कि क्या अब तक इतनी बड़ी धनराशि सिर्फ़ अपव्यय के लिए निर्धारित की जाती थी या फिर नई सरकार शिक्षा पर ख़र्च को अपव्यय समझती है?