मोदी के तीन सालः दौरे बढ़े, पर नीति वही

बीबीसी ने अपने पाठकों से पूछा था कि मोदी सरकार के तीन साल पर किन पहलुओं पर वो ज्यादा कवरेज चाहेंगे. कई लोगों ने इसमें विदेश नीति का ज़िक्र किया था. ये रिपोर्ट उन्हीं सवालों के जवाब तलाशते हुए तैयार की गई है.

अगर विश्व के बड़े नेताओं के बीच विदेश यात्राओं का कोई मुक़ाबला हो तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे बड़ी आसानी से जीत लेंगे. उन्हें सत्ता में आए तीन साल हो रहे हैं. इस दौरान उन्होंने 45 देशों का 57 बार दौरा किया है.

इसमें शक नहीं कि वे जो जोशीले हैं और पूरी रफ़्तार से आगे बढ़ते हैं.

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में भारत-चीन रिश्तों के विशेषज्ञ स्वर्ण सिंह कहते हैं, “जो रफ़्तार है काम करने का प्रधानमंत्री मोदी का वो पहले के सभी प्रधानमंत्रियों से अलग है. उनकी विदेश यात्राओं का जो सिलसिला है, उनकी जो फ्रीक्वेंसी है, लोगों से मिलने की कोशिश है और उनसे सीधे बात करने का जो तरीक़ा है वो रफ़्तार को बढ़ाता है.”

मोदी के तीन साल: विदेश दौरे तो बहुत किए, पर मिला क्या?

विदेश नीति

लेकिन क्या ये सोच को भी बदलता है? क्या रफ़्तार बढ़ने से भारत की विदेश नीति बदली है, शक्तिशाली हुई है? क्या इसने भारत के प्रोफाइल को दुनिया भर में बढ़ाया है? क्या देश की छवि बेहतर हुई है? क्या विदेशी निवेश बढ़ा है?

तीन साल बाद इन सवालों को मोदी सरकार के सामने रखना वाजिब है लेकिन अफ़सोस कि विदेश मंत्रालय ने हमें इन सवालों को, कई बार गुज़ारिश के बाद भी, पूछने का मौक़ा नहीं दिया.

कांग्रेस पार्टी के नेता मणिशंकर अय्यर के अनुसार नरेंद्र मोदी की यात्राओं से कुछ हासिल नहीं हुआ है. “ये सब बस ड्रामेबाज़ी है. वो खुद को दिखाना चाहते हैं हर जगह. दुनिया भर में घूमते हैं, और क्या होता है? उन्हीं के समर्थक पहुँच जाते हैं और मोदी, मोदी कहते रहते हैं”. वो आगे पूछते हैं, “ये मोदी, मोदी कहलवाना ये कोई विदेश नीति है?”

प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह के विचार में प्रधानमंत्री की इन विदेश यात्राओं का ठोस नतीजा ढूंढना मुनासिब नहीं.

वे कहते हैं, “इन दौरों के नतीजे मूर्त और अमूर्त दोनों हैं. कुछ फायदे आगे चल कर भी नज़र आ सकते हैं. अभी जो नज़र आता है वो ये कि विदेश में भारत का क़द ऊंचा हुआ है.”

विदेश नीति

प्रधानमंत्री के लगातार विदेशी दौरों पर एक नज़र डालें तो एक पैटर्न, एक सोच उभर कर आती है. नेपाल, भूटान, श्रीलंका और यहाँ तक कि पाकिस्तान के कुछ घंटों के दौरों के पीछे साफ़ मक़सद था पड़ोसियों के साथ सम्बन्ध मज़बूत करना.

इन तमाम देशों के साथ चीन क़रीब होता जा रहा है. लेकिन प्रधानमंत्री ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि चीन के इन देशों के सम्बन्ध केवल व्यापारिक हैं जबकि भारत के साथ सदियों से चला आ रहा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ता है जो अधिक महत्वपूर्ण है.

पड़ोसी देशों के अलावा प्रधानमंत्री ने अमरीका पर विशेष ध्यान दिया जहाँ वो अब तक चार बार जा चुके हैं और पांचवीं यात्रा तय है. स्वर्ण सिंह कहते हैं कि भारत पिछले 15 सालों में अमरीका के बहुत क़रीब आया है. इसे और आगे बढ़ाने और मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए प्रधानमंत्री ने अमरीका से रिश्ते और भी मज़बूत किए हैं

विदेश नीति

प्रधानमंत्री की तीसरी अहम विदेश यात्रा सऊदी अरब और खाड़ी देशों की रही जिनसे भारत के व्यपारिक रिश्ते चीन और अमरीका की तरह बहुत मज़बूत हैं. इन देशों के पास निवेश के लिए अरबों डॉलर हैं. इनके पास कच्चा तेल भी है. प्रधानमंत्री की कोशिश है ये देश पैसे भारत में निवेश करें। इस तरफ कई समझौते भी हुए हैं

इसी तरह से यूरोप और अफ्रीका के देशों की यात्राएं भी व्यापारिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही हैं.

पूर्व राजनयिक राजीव डोगरा कहते हैं कि प्रधानमंत्री की विदेश पॉलिसी में एक नया जोश और एक नया डायरेक्शन आया है. स्वर्ण सिंह कहते हैं प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से भारत की विजिबिलिटी बढ़ी है. कुछ लोग कहते हैं कि मोदी सरकार ने देश की साख को बेहतर किया है.

विदेश नीति

भारत-चीन व्यापार और रक्षा क्षेत्र में संबंधों के विशेषज्ञ अतुल भारद्वाज नरेंद्र मोदी की विदेश नीति में स्थिरता लाने को एक बड़ी उपलब्धि मानते हैं. हालांकि इसके बिलकुल विपरीत कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि पाकिस्तान और चीन के साथ नरेंद्र मोदी ने अब तक होश से अधिक जोश से काम लिया है जिससे उनकी नीति में अस्थिरता आयी है मगर अतुल भारद्वाज के अनुसार नरेंद्र मोदी की विदेश यात्रायें रंग लाई हैं. कई देशों के साथ रिश्ते मज़बूत और स्थिर हुए हैं

राजीव डोगरा कहते हैं कि भारत का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट का सपना पूरा होगा. “एक वक़्त आता है, एक ज़रुरत होती है तब बदलाव आता है और तब ऑटोमेटिकली भारत सुरक्षा परिषद् का मेंबर बनेगा, इसके लिए हमें चिंता करने की ज़रुरत नहीं है.”

विदेश नीति

भारत संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना में सब से बड़ा योगदान देने वाले देशों में से एक है लेकिन सीरिया, लीबिया और इराक जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत न तो स्पष्ट रूप से अपनी राय देता है और न कोई इसकी राय जानना चाहता है. तो भारत एक वर्ल्ड पावर कैसे बने?

कुछ विशेषज्ञ अब इस बात पर ज़ोर देते हैं कि भारत को रक्षा के मैदान में विश्व शक्ति बनने के बजाये सॉफ्ट पावर के क्षेत्र में वर्ल्ड लीडर बनने की पूरी कोशिश करनी चाहिए.

राजीव डोगरा कहते हैं, ये संभव है. “भारत पारम्परिक रूप से योग और बॉलीवुड इत्यादि जैसे सॉफ्ट पावर के लिए जाना जाता है.”

ये एक नई सोच है. मोदी सरकार ने पिछले साल से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस शुरू किया है.

विदेश नीति

अफ्रीका में चीन ने भारत से कहीं अधिक निवेश कर रखा है लेकिन भारत के प्रति गुडविल और अच्छी भावना चीन से कहीं अधिक है. विश्व भर में भारत की साख चीन से बहुत बेहतर है. उधर भारत के पास बॉलीवुड है, वर्ल्ड क्लास वैज्ञानिक हैं और इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी क्षेत्र में विशेषज्ञता है.

स्वर्ण सिंह कहते हैं इस क्षेत्र में भारत एक बड़ी शक्ति बन सकता है. कई विशेषज्ञ ये सोचते हैं कि सॉफ्ट पावर के हिसाब से भारत महानता के मुहाने पर खड़ा है. मोदी सरकार इस तरफ कुछ क़दम भी उठा रही है लेकिन इसे अच्छी तरह से कोरियोग्राफ करने की ज़रुरत है और यही भारत की एक बड़ी कमज़ोरी है.

विदेश नीति

मणिशंकर अय्यर कहते हैं कि भारत एक महान देश है इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए, उनके अनुसार मोदी सरकार आत्मविश्वास दिखाने से हिचकिचाती है जिसके कारण उसकी साख पर फ़र्क़ पड़ता है.

विदेश नीतियां आम तौर से सत्ता में पार्टियों और सरकारों के बदलने से प्रभावित नहीं होती हैं. स्वर्ण सिंह कहते हैं कि मोदी सरकार की विदेश नीति पिछली सरकारों से बहुत अलग नहीं है. हाँ नरेंद्र मोदी ने इसमें रफ़्तार और जोश डाल दिया है

‘कनपटी पर बंदूक तानी और औरतों से रेप किया’

दिल्ली से सटे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जेवर थाना क्षेत्र के साबौता गांव के पास हथियारबंद बदमाशों ने कार से जा रहे एक परिवार की चार महिला सदस्यों के साथ कथित रूप से गैंग रेप किया.

गौतमबुद्ध नगर के एसएसपी लव कुमार के मुताबिक, बुधवार की रात कार से जा रहे परिवार की गाड़ी को बदमाशों ने जबरन रोका और लूटपाट की.

पीड़ित परिवार के एक सदस्य ने बीबीसी से बताया, ”हम झेवर से बुलंदशहर जा रहे थे. बुलंदशहर में फूफी का बच्चा होने वाला था और वे ऑपरेशन के लिए पैसे लेकर जा रहे थे. उसी रात क़रीब एक बजे पांच लोगों ने इस परिवार पर हमला किया. हमलावर बिल्कुल अनजान थे.”

नेश्नल हाइवे से उतरकर ये दो किलोमीटर दूर छोटी सड़क पर आ गए थे. यहां बिल्कुल अंधेरा था. चारों तरफ़ सन्नाटा पसरा था. कोई दूसरी गाड़ी नहीं थी और न ही गश्त लगाती पुलिस.

रेप

हमलावरों के पास देसी कट्टे थे. उन्होंने सबको चुप कराने के लिए कनपटी पर तान रखे थे. जब सभी औरतों के साथ रेप किया जाने लगा और चाचा ने रोकने की कोशिश की, तभी हमवावरों ने उनके सीने में गोली मार दी.

आरोप है कि पुलिस ने आने में बहुत देर लगा दी वर्ना उनके चाचा की जान बच सकती थी. मारे गए व्यक्ति की उम्र करीब 40 साल है और उनके सात बच्चे हैं.

बुलंदशहर गैंगरेप: तीन अभियुक्त गिरफ़्तार

बुलंदशहर गैंगरेप: सीबीआई जांच का आदेश

लूटपाट का विरोध करने पर बदमाशों ने परिवार के मुखिया की गोली मार कर हत्या कर दी जबकि परिवार की चार महिला सदस्यों के साथ कथित रूप से बलात्कार किया.

घटना की सूचना पाकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

रेप

बुलंदशहर जा रहा था परिवार

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लव कुमार ने बीबीसी को बताया कि मारा गया व्यक्ति जेवर का रहने वाला था.

उसका एक रिश्तेदार बुलंदशहर के एक अस्पताल में भर्ती था. तबीयत बिगड़ने पर ये लोग मंगलवार की रात करीब दो बजे कार में सवार होकर जेवर से बुलंदशहर के लिए रवाना हुए थे.

जब ये लोग साबौता गांव के पास पहुंचे तो आधा दर्जन बदमाशों ने टायर में गोली मार कर कार रोक ली.

लव कुमार ने बताया कि जैसे ही गाड़ी रुकी, बदमाशों ने पूरे परिवार को हथियारों के बल पर बंधक बना लिया.

रेप

 

बदमाशों ने उनके साथ लूटपाट शुरू कर दी. परिवार ने जब लूटपाट का विरोध किया तो बदमाशों ने परिवार के मुखिया को गोली मार दी जिससे उनकी मौत हो गई.

एसएसपी लव कुमार ने कहा, ”पुलिस ने गैंगरेप की शिकायत पर एफ़आईआर दर्ज कर ली है और महिलाओं की मेडिकल जांच की जा रही है.”

उन्होंने ये भी कहा कि पुलिस इस मामले को काफ़ी गंभीरता से ले रही है और अभियुक्तों की तलाश की जा रही है.

पुलिस ने आश्वस्त किया कि अपराध को अंजाम देनेवालों को जल्दी ही पकड़ लिया जाएगा.

चैंपियंस ट्रॉफी : जो कमाल क्रिस गेल,अफ़रीदी और महेंद्र सिंह धोनी नहीं कर पाए वह इस “दादा” ने कर दिया

चैंपियंस ट्रॉफी में कई रिकॉर्ड बने है लेकिन आज एक ऐसे  रिकॉर्ड की बात करते हैं जो क्रिस गेल,शाहिद अफ़रीदी और महेंद्र सिंह धोनी जैसे विस्फोटक बल्लेबाज नहीं बना पाए लेकिन दादा के नाम मशहूर सौरभ गांगुली ने बनाया था

नई दिल्ली: आईपीएल का बुखार ख़त्म हो गया है अब लोगों की नज़र मिनी वर्ल्ड कप यानि चैंपियंस ट्रॉफी पर है जो 1 जून से इंग्लैंड में शुरू होने वाली है. 18 दिन तक चलने वाले इस टूर्नामेंट में आठ टीमें हिस्सा ले रही हैं. पहला मैच इंग्लैंड और बांग्लादेश के बीच होगा.भारत अपना पहला मैच पाकिस्तान के खिलाफ 4 जून को खेलेगा. 2013 में इंग्लैंड में खेली गई चैंपियंस ट्रॉफी का चैंपियन भारत हुआ था. इस टूर्नामेंट में भारत अपना हर मैच जीता था. पहले मैच में साउथ अफ्रीका को 26 रन से हराया था, दूसरे मैच में वेस्टइंडीज को आठ विकेट से , तीसरे मैच में पाकिस्तान को आठ विकेट से मात देकर सेमीफाइनल में पहुंचा था और सेमीफाइनल में श्रीलंका को आठ विकेट से हराकर फाइनल में जगह पक्का की थी. फाइनल मैच भारत और इंग्लैंड के बीच 23 जून को खेला गया था. बारिश से प्रभावित इस मैच को भारत पांच रन से जीतकर पहली बार चैंपियन ट्रॉफी जीतने का गौरव हासिल किया था.

सबसे ज्यादा छक्के मारने के मामले में यह खिलाड़ी है आगे : चैंपियंस ट्रॉफी में कई रिकॉर्ड बने है लेकिन आज एक ऐसे  रिकॉर्ड की बात करते हैं जो क्रिस गेल,शाहिद अफ़रीदी और महेंद्र सिंह धोनी जैसे विस्फोटक बल्लेबाज नहीं बना पाए लेकिन दादा के नाम मशहूर सौरभ गांगुली ने बनाया था. एक दिवसीय मैचों में जब सबसे ज्यादा छक्के मारने की बात होती है तो सबसे पहला नाम पाकिस्तान के शाहिद अफ़रीदी का आता है. अफ़रीदी 398 मैच खेलते हुए  कुल मिलाकर 351 छक्के लगाए हैं, दूसरे स्थान पर श्रीलंका के सनथ जयसूर्या है जो 445 मैच खेलते हुए 270 छक्के लगाए हैं. तीसरे स्थान पर वेस्टइंडीज के क्रिस गेल(269 मैचों में 238 छक्के) और चौथे स्थान पर भारत के महेंद्र सिंह धोनी है जो 286 मैच खेलते हुए 204 छक्के लगाए है. इस मामले में सौरभ गांगुली आठवें स्थान पर है।. एकदिवसीय मैचों में सौरभ गांगुली कुल मिलाकर 311 मैच खेले हैं और 190 छक्के लगाए हैं.
लेकिन चैंपियन ट्रॉफी में दादा ने दिखाई है अपनी दादागिरी : लेकिन चैंपियंस ट्रॉफी में सबसे ज्यादा छक्के मारने का रिकॉर्ड न अफ़रीदी, न गेल न धोनी के नाम है. इस मामले में सौरभ गांगुली इन विस्फोटक बल्लेबाज़ों को पीछे छोड़ दिया है. सौरभ गांगुली चैंपियंस ट्रॉफी में सबसे ज्यादा छक्के लगाए हैं. गांगुली चैंपियंस ट्रॉफी में 13 मैच खेले हैं और 11 पारियों में 17 छक्के लगाए हैं. गांगुली के बाद दूसरे स्थान पर क्रिस गेल है जो 17 मैच खेलते हुए 15 छक्के लगाए है,तीसरे स्थान पर ऑस्ट्रेलिया के शेन वॉटसन है जो 17 मैचों में 12 छक्के लगाए है. इस लिस्ट में गांगुली के सिवा दूसरे जो भारतीय बल्लेबाज सबसे ज्यादा छक्के लगाए है वे है सचिन तेंदुलकर जो 13वें  स्थान पर है जो 16 मैचों में सात छक्के लगाए है. शिखर धवन 28वें स्थान पर( पांच मैचों में चार छक्के) और विराट कोहली 30वें स्थान पर हैं.कोहली आठ मैचों में चार छक्के लगाए हैं. चैंपियंस ट्रॉफी में अगर एक पारी में सबसे ज्यादा छक्के मारने की  बात की जाए तो सौरभ गांगुली तीसरे स्थान पर हैं.

गांगुली ने चैंपियंस ट्रॉफी में मारे है सबसे ज्यादा अर्धशतक : चैंपियंस ट्रॉफी में सौरभ गांगुली का रिकॉर्ड काफी अच्छा रहा है। सबसे ज्यादा अर्धशतक मारने के मामले में सौरभ गांगुली पहला स्थान पर है। गांगुली 11 पारियों में छह अर्धशतक लगाए है।  गांगुली के बाद भारत के राहुल द्रविड़ दूसरे स्थान पर है।  द्रविड़ 15 पारियों में छह अर्धशतक लगाए हैं। चैंपियंस ट्रॉफी में अगर सबसे ज्यादा शतक मारने की मामले में सौरभ दूसरे स्थान पर है. गांगुली तीन शतक लगाए है जब की साउथ अफ्रीका के हर्शेल गिब्ब्स ने दस मैच खेलते हुए तीन शतक के साथ पहला स्थान पर है। गांगुली के बाद भारत के तरफ से शिखर धवन सबसे ज्यादा शतक लगाए हैं. धवन पांच मैचों में दो शतक लगाए हैं. भारत के लिए मोहम्मद कैफ,वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर एक-एक शतक लगाए हैं. चैंपियंस ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में सौरभ गांगुली चौथे स्थान पर है । गांगुली 11 पारियों में करीब 74 के औसत से 665 रन बनाये है,. इस मामले में क्रिस गेल पहला स्थान पर है जो 17 मैचों में 791 रन बनाये है।  श्रीलंका के महेला जयवर्धने दूसरे स्थान पर है जो 21 पारियों में 742 रन बनाये है.

भगोड़े दाऊद के रिश्तेदार की शादी में दिखे महाराष्ट्र के मंत्री और विधायक, सीएम फड़नवीस ने पुलिस से मांगी रिपोर्ट

इस खबर के मीडिया में आने के बाद नाशिक पुलिस कमिश्नर रवींद्र सिंघव ने इन 10 पुलिस आधिकारियों को लेकर जांच के आदेश दिए हैं. इन सभी के बयान दर्ज कर लिए गए हैं. वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने भी सिंघल से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है.

मुंबई: महाराष्ट्र बीजेपी के नेता और राज्य सरकार में चिकित्सा शिक्षा मंत्री गिरीश महाजन और 10 पुलिस अधिकारी एक बड़े विवादत में फंस सकते हैं. ये लोग  भगोड़े दाऊद इब्राहिम के एक रिश्तेदार की शादी में हिस्सा लेने गए थे. मिली जानकारी के मुताबिक नाशिक में 19 मई को यह शादी हुई थी. इन पुलिस अधिकारियों में एक असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर हैं और बाकी नौ इंस्पेक्टर लेवल के हैं. जबकि गिरीश महाजन के साथ बीजेपी विधायक देवयानी फरांडे, बालासाहेब, सीमा हिरे, नाशिक के मेयर रंजना भंसई, और डिप्टी मेयर प्रथमेश गीते भी शादी में हिस्सा लेने पहुंचे थे.

इस खबर के मीडिया में आने के बाद नाशिक पुलिस कमिश्नर रवींद्र सिंघव ने इन 10 पुलिस आधिकारियों को लेकर जांच के आदेश दिए हैं. इन सभी के बयान दर्ज कर लिए गए हैं. वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने भी सिंघल से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है. रवींद्र सिंघल ने बताया है कि ये शादी दाऊद की भतीजी की थी. उनके मुताबिक लड़की की मां और दाऊद की पत्नी आपस में बहने हैं.

वहीं इस बारे में गिरीश महाजन ने माना है कि वह शादी में हिस्सा लेने गए थे लेकिन उनको यह जानकारी नहीं थी कि परिवार का दाऊद से भी को रिश्ता है. महाजन ने बताया कि स्थानीय मुस्लिम नेता शहर-ए-खतीब के बेटे के शादी में गए थे. खतीब ने ही शादी का निमंत्रण भेजा था. खतीब नाशिक और आसपास के इलाकों में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं. वह मेडिकल के क्षेत्र में चलाए जा रहे सामाजिक कामों में काफी मदद करते हैं.

महाजन ने सफाई दी कि वह मंत्री हैं और उनके पास शादी जैसे ढेरों निमंत्रण आते हैं, उनके लिए यह संभव नहीं है कि हर किसी के पिछली जिंदगी और रिश्तों के बारे में जानकारी ले सकें. इस मामले में भी वह सिर्फ इसलिए शादी में गए थे क्योंकि वह खतीब को व्यक्तिगत तौर से जानते हैं. वहीं पुलिस कमिश्नर रवींद्र सिंघल ने का कहना है कि दुल्हन के परिवार के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं है और न ही पहले का भी कोई रिकॉर्ड है. पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कोई जांच शुरू नहीं की गई है बस के सामान्य छानबीन है.

सहारनपुर हिंसाः जो बातें अब तक पता हैं

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पांच मई को ठाकुरों और दलितों के बीच शुरू हुई जातीय हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. इस सप्ताह मंगलवार को बसपा प्रमुख मायावती के दौरे के बाद वहां फिर से हिंसा भड़क गई जिसमें एक दलित की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए हैं.

सहारनपुर ग्राउंड रिपोर्ट: दलित-राजपूत टकराव

सहारनपुर में फिर भड़की हिंसा, हालात तनावपूर्ण

सहारनपुर से 25 किलोमीटर दूर शिमलाना गांव में पांच मई को महाराणा प्रताप जयंती का आयोजन था, जिसमें शामिल होने के लिए पास के शब्बीरपुर गांव से कुछ लोग शोभा यात्रा निकाल रहे थे. विवाद की शुरुआत इसी घटना से हुई.

इसके बाद भड़की हिंसा में ठाकुर जाति के लोगों ने दलितों के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की. तब से इलाके में तनाव बरक़रार है. तब से लेकर अब तक सहारनपुर में क्या कुछ हुआ, आईए जानते हैं.

शब्बीरपुर के दलित घरों में तोड़फ़ोड़
Image captionशब्बीरपुर के दलित घरों में तोड़फ़ोड़

5 मई, शब्बीरपुर गांव

शिमलाना में आयोजित महाराणा प्रताप जयंती में शामिल होने जा रहे युवकों की शोभा यात्रा पर दलितों ने आपत्ति जताई और पुलिस बुला लिया.

‘हमें तो ये हिंदू ही नहीं मानते वरना ऐसा बर्ताव करते’

विवाद इतना बढ़ा कि दोनों तरफ से पथराव होने लगा, इस दौरान ठाकुर जाति के एक युवा की मौत हो गई, हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना बताया गया.

इसके बाद शिमलाना गांव में जुटे हज़ारों लोग क़रीब तीन किलोमीटर दूर शब्बीरपुर गांव आ गए.

भीड़ ने दलितों के घरों पर हमला कर 25 घर जला दिए. इस हिंसा में 14 दलितों को गंभीर चोटें आईं. पुलिस ने दोनों पक्षों के 17 लोगों को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया.

‘दहशत ऐसी थी कि मैंने भूस के ढेर में छिपकर जान बचाई’

दलित समुदाय के लोगों का कहना है कि उनके मुहल्ले में स्थित रैदास मंदिर में अंबेडकर की मूर्ति लगाने को लेकर गांव के ठाकुर समुदाय ने विरोध जताया था और प्रशासन की इजाज़त न मिलने के कारण मूर्ति नहीं लग पाई थी.

सहारनपुर की सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षिका नीलम गोपाला के मुताबिक, दलितों में इस बात को लेकर रोष था और जब शोभा यात्रा उनके मुहल्ले से होकर निकली तो उन्होंने इसका विरोध किया.

9 मई, सहारनपुर

इस घटना से आक्रोषित दलित युवाओं के संगठन भीम आर्मी ने 9 मई को सहारनपुर के गांधी पार्क में एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया.

इस प्रदर्शन में सहारनपुर ज़िले से क़रीब हज़ार प्रदर्शनकारी इकट्ठा हो गए लेकिन प्रशासन की इजाज़त न होने के कारण पुलिस ने इसे रोकने की कोशिश की.

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद ने बीबीसी को बताया कि प्रशासन की ओर से अनुमति न मिलने के कारण प्रदर्शनकारियों में आक्रोश बढ़ा और कई जगहों पर भीड़ और पुलिस में झड़पें हुईं.

इस दौरान एक पुलिस चौकी फूंक दी गई, एक बस को जला दिया गया और कई वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया.

पुलिस ने इस मामले में भीम आर्मी और उसके संस्थापक चंद्रशेखर पर मुकदमे दर्ज किए गए.

चंद्रशेखर आज़ाद
Image captionभीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद

‘द ग्रेट चमार’ का बोर्ड लगाने वाले भीम आर्मी के ‘रावण’

सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र दुबे के अनुसार, भीम आर्मी के सदस्यों पर कुल 16 मुकदमे दर्ज हैं जिनमें चंद्रशेखर का नाम भी शामिल है.

इनमें से 10 मुकदमे उन पत्रकारों ने दर्ज कराए जिनकी मोटरसाइकिलें क्षतिग्रस्त की गईं.

21 मई, जंतर मंतर, दिल्ली

चंद्रशेखर के मुताबिक नौ मई के प्रदर्शन में क़रीब 37 दलित कार्यकर्ताओं पर मुकदमें दर्ज कर पुलिस ने जेल भेजा है, जबकि क़रीब 300 अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है.

दलित कार्यकर्ताओं पर एफ़आईआर और गिरफ़्तारी के विरोध में प्रदर्शन

दलितों का प्रदर्शन, ‘संघ’वाद से आज़ादी के नारे

शब्बीरपुर और सहारनपुर की घटना के विरोध में भीम आर्मी ने 21 मई को दिल्ली के जंतर मंतर पर एक प्रदर्शन आयोजित किया था.

इससे एक दिन पहले बीबीसी को दिए साक्षात्कार में चंद्रशेखर ने कहा था कि वो इस प्रदर्शन में सरेंडर करेंगे, हालांकि उन्होंने ऐसा किया नहीं.

जंतर मंतर पर भीम आर्मी के हज़ारों प्रदर्शनकारी पहुंचे और यहां नौ मई के बाद पहली बार चंद्रशेखर सार्वजनिक रूप से सामने आए और भाषण दिया.

23 मई, शब्बीरपुर

शब्बीरपुर गांव में मायावती

इसके तीन दिन बाद बसपा प्रमुख मायावती शब्बीरपुर के पीड़ित दलित परिवारों को देखने गईं.

मायावती सड़क मार्ग से सहारनपुर पहुंचीं और दलित परिवारों से मुलाक़ात की.

जनाधार खिसकने के डर से सहारनपुर पहुंचीं मायावती

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मायावती की सभा से लौट रहे दलितों पर ठाकुर समुदाय के लोगों ने हमला किया, जिसमें एक 24 साल के दलित युवक की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हो गए.

24 मई, सहारनपुर

उत्तर प्रदेश प्रशासन

तनाव और हिंसा पर काबू न पाने के कारण सहारनपुर के दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, एसएसपी और जिलाधिकारी को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने निलंबित कर दिया और कमिश्नर को भी हटा दिया.

ताज़ा हिंसा भड़कने पर उत्तर प्रदेश सरकार ने मायावती के दौरे को ज़िम्मेदार बताया.

पीटीआई ने यूपी पुलिस प्रमुख सुलखान सिंह के हवाले से कहा है, “मैं राजनेताओं को सहारनपुर का दौरा करने की इजाज़त नहीं भी दे सकता हूं.”

इलाक़े में तनाव बरक़ार है और सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गये हैं.

दुबई में ड्यूटी पर रोबोट पुलिस अफ़सर

दुबई पुलिस ने पहली बार रोबोट पुलिस अधिकारी को ड्यूटी पर लगाया है.

फिलहाल इस रोबोट पुलिस अधिकारी को शहर के मॉल्स और पर्यटन स्थलों की गश्त पर लगाया गया है.

लोग इसके जरिए अपराध की सूचना दे सकते हैं. इसका इस्तेमाल जुर्माना भरने में भी हो सकता है और इसकी छाती पर लगे टचस्क्रीन से सूचना हासिल भी की जा सकती है.

ये रोबोट आंकड़े भी जुटाएगा. इस डेटा को ट्रांसपोर्ट और ट्रैफिक विभाग के साथ शेयर भी किया जा सकेगा.

दुबई का प्रशासन चाहता है कि साल 2030 तक पुलिस बल में 25 फीसदी रोबोट शामिल किए जाएं.

लेकिन ये भी साफ किया गया है कि रोबोट पुलिस में इंसानों की जगह नहीं लेंगे.

दुबई पुलिस के स्मार्ट सर्विसेज विभाग के महानिदेशक ब्रिगेडियर खालिद अल रज़ूकी ने बताया, “हम अपने पुलिस अफसरों को इस मशीन के बदले हटाने नहीं जा रहे हैं. लेकिन जिस तादाद में दुबई में लोग बढ़ रहे हैं, हम पुलिस अधिकारियों को सही जगहों पर तैनात करना चाहते हैं ताकि वे शहर की सुरक्षा पर ध्यान दे सकें.”