India-Pakistan ties may slide further: U.S. intelligence

‘Easing of tension depends on reduction in terror attacks’

The relations between India and Pakistan is likely to deteriorate further in 2017 and the easing of tension will depend on “a sharp and sustained reduction of cross-border attacks by terrorist groups based in Pakistan and progress in the Pathankot investigation,” according to a U.S. intelligence assessment of the security situation in the region.

Daniel R. Coats, Director of National Intelligence, told the U.S. Senate intelligence committee during a hearing on worldwide threat assessment that New Delhi’s growing intolerance to Islamabad’s “failure to curb support to anti-India militants” led to a deterioration in bilateral ties in 2016 and this could worsen in the current year.

Two major terrorist attacks in 2016 by militants crossing into India from Pakistan led to the slide in ties, and the “perceived lack of progress in Pakistan’s investigations into the January 2016 Pathankot cross-border attack” compounded it, according to the American assessment. “Increasing numbers of fire-fights along the Line of Control, including the use of artillery and mortars, might exacerbate the risk of unintended escalation between these nuclear-armed neighbours,” he said.

The assessment of the global security situation under the Donald Trump administration echoes a concern that dominated the previous Obama administration’s south Asia policy — the risk of Islamist terrorists laying their hand on Pakistan’s nuclear arsenal. “Pakistan’s pursuit of tactical nuclear weapons potentially lowers the threshold for their use. Early deployment during a crisis of smaller, more mobile nuclear weapons would increase the amount of time that systems would be outside the relative security of a storage site, increasing the risk that a coordinated attack by non-state actors might succeed in capturing a complete nuclear weapons,” Mr. Coats told the committee.

India’s military doctrine of cold start that aims to launch low intensity operation into Pakistan, and Pakistan’s declared willingness to respond with tactical nuclear weapons have been under scrutiny of American security strategists for a while. Mr. Obama made a mention of it at his address to the Nuclear Security Summit last year. Officials of the Trump administration have inherited that view of South Asia.

Pakistan-based terrorist groups will present a sustained threat to U.S. interests in the region and continue to plan and conduct attacks in India and Afghanistan, the official told lawmakers. “The threat to the United States and the West from Pakistani-based terrorist groups will be persistent but diffuse. Plotting against the U.S. homeland will be conducted on a more opportunistic basis or driven by individual members within these groups,” he said. Assessing that Pakistan will be able to manage its internal security, the official said anti-Pakistan groups will probably focus more on soft targets. “The emerging China Pakistan Economic Corridor will probably offer militants and terrorists additional targets,” he said.

 Terror supporters

Meanwhile, the U.S. Department of Treasury blacklisted three persons and an organisation based in Pakistan for supporting terrorists.

A statement by the department said Hayat Ullah Ghulam Muhammad (Haji Hayatullah), Ali Muhammad Abu Turab (Abu Turab), Inayat ur Rahman, and a purported charity managed by Inayat ur Rahman, the Welfare and Development Organization of Jamaat-ud-Dawah for Qur’an and Sunnah, were supporting the Taliban, al-Qaeda, Lashkar-e-Tayyiba (LT), the Islamic State, and ISIS – Khorasan.

“These sanctions seek to disrupt the financial support networks of terrorists based in Pakistan who have provided support to the Taliban, al-Qaeda, ISIS, and LT for recruitment and funding of suicide bombers and other violent insurgent operations,” said the department’s Office of Foreign Assets Control Director John E. Smith.

“The United States continues to aggressively target extremists in Pakistan and the surrounding region, including charities and other front groups used as vehicles to facilitate illicit terrorist activities.”

Ransomware infections reported worldwide

A massive ransomware campaign appears to have infected a number of organisations around the world.

Computers in thousands of locations have apparently been locked by a program that demands $300 (£230) in Bitcoin.

There have been reports of infections in as many as 74 countries, including the UK, US, China, Russia, Spain, Italy and Taiwan.

Many security researchers are linking the incidents together.

One cyber-security researcher tweeted that he had detected many thousands of cases of the ransomware, known as WannaCry and variants of that name.

“This is huge,” said Jakub Kroustek at Avast.

Another, at cyber-security firm Kaspersky, said that the ransomware had been spotted cropping up in 74 countries and that the number was still growing.

Several experts monitoring the situation have linked the infections to vulnerabilities released by a group known as The Shadow Brokers, which recently claimed to have dumped hacking tools stolen from the US National Security Agency (NSA).

A patch for the vulnerability was released by Microsoft in March, but many systems may not have had the update installed.

Some security researchers have pointed out that the infections seem to be deployed via a worm – a program that spreads by itself between computers.

The UK’s National Health Service (NHS) was also hit by a ransomware outbreak on the same day and screenshots of the WannaCry program were shared by NHS staff.

स्मार्टफोन जैसी दिखती है यह असली बंदूक, जानें कितने में और कहां बिक रही

‘सेलफोन बंदूक’ के निर्माता किर्क केजेलबर्ग के हवाले से फॉक्स45नाऊ की बुधवार की रिपोर्ट में कहा गया, “यह जेम्स बांड की कोई चीज जैसी है जो स्मार्टफोन से एक मारक हथियार के रूप में बदल जाती है. यह लोगों के लिए बिल्कुल सुरक्षित है.”


यार्क: क्या आप ऐसी बंदूक खरीदना चाहते हैं जो बिल्कुल स्मार्टफोन जैसी है, लेकिन जरूरत पड़ने पर यह एक बंदूक के रूप में बदल जाती है, जो कि बिल्कुल असली है. हालांकि पुलिस विभाग को यह बंदूक पसंद नहीं आई और वे इसे ‘सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य में बुरा’ बता रहे हैं.

‘सेलफोन बंदूक’ के निर्माता किर्क केजेलबर्ग के हवाले से फॉक्स45नाऊ की बुधवार की रिपोर्ट में कहा गया, “यह जेम्स बांड की कोई चीज जैसी है जो स्मार्टफोन से एक मारक हथियार के रूप में बदल जाती है. यह लोगों के लिए बिल्कुल सुरक्षित है.”

वे बताते हैं कि इस बंदूक को बनाने और अमेरिका की अल्कोहल, तंबाकू और हथियार ब्यूरो से मंजूरी प्राप्त करने में एक साल लगे.

हालांकि एक पूर्व पुलिस अधिकारी और हथियार निरीक्षक जेफ प्रेडो का मानना है कि यह असुरक्षित है और खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है.

प्रेडो ने कहा, “कुल मिलाकर, मेरी पेशेवर राय यह है कि सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य में यह एक बुरा विचार है. साथ ही किसी आपात स्थिति में यह तेजी से काम करने में सक्षम नहीं होगा.”

केजेलबर्ग ने बताया कि कुछ महीनों में यह व्यापक स्तर पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा.

लेफ्टिनेंट उमर फयाज के हत्यारों का बचना मुश्किल, जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस ने जारी की तस्वीरें

नई दिल्‍ली: सेना के 22 साल के लेफ्टिनेंट उमर फयाज की अगवा कर हत्या करने वाले आतंकियों के संदिग्ध पोस्टर पुलिस ने जारी कर दिए हैं. पुलिस ने तस्वीर जारी कर आम जनता से सहयोग मांगा है. वहीं दक्षिण कश्मीर के युवाओं में फयाज की कायरना पूर्वक हत्या को लेकर गुस्सा भी बढ़ रहा है. उधर ये भी खबर है कि इस घटना को देखते हुए सेना ने जम्मू कश्मीर में अब छुट्टी पर आने वाले अपने जवानों और अधिकारियों को पुलिस तथा सेना को पहले जानकारी देने को कहा है. पुलिस ने जिन तीन आतंकियों की तस्वीर जारी की है इनमें से इशफाक अहमद ठाकोर और गयास-उल-इस्लाम का ताल्लुक दक्षिण कश्मीर के पडरपुरा इलाके से है जबकि अब्बास अहमद भट्ट नाम का आतंकी मंत्रीबाग इलाके का रहने वाला है. ये तीनों आतंकी हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े बताए गए हैं. पुलिस ने इन्हें पकड़ने में मदद करने वालों को ईनाम देने का भी ऐलान किया है.

हलांकि इस मामले की जांच कर रहे एजेंसियों की मानें तो लेफ्टिनेंट उमर फयाज को मारने में हिज्बुल और लश्कर के करीब 10 आतंकियों का हाथ है. इस मामले में जम्मू कश्मीर पुलिस ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार भी किया है. पूरे दक्षिण कश्मीर में सेना के युवा अफसर की हत्या करने वाले आतंकियों की तलाश तेज हो गई है.

शोपियां पुलिस की ओर से तीन आतंकियों की तस्वीरे जारी की गई हैं. साथ ही सेना की तरफ से कश्मीर घाटी से जुड़े सेना के जवानों और अफसरों के लिए छुट्टियों से जुड़ी गाइडलाइन भी जारी की गई है. इसमें कहा गया है कि छुट्टियों पर जाने से पहले इलाके में लोकल यूनिट्स को जरूर सूचित करें ताकि कुछ होने पर उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जा सके. मंगलवार को आतंकियों ने सेना के लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की उस वक्त अगवा करके हत्या कर दी थी जब वो अपने एक रिश्तेदार के घर शादी में गए थे.

22 साल के उमर फैयाज कुलगाम के सुरसोना गांव के रहनेवाले थे. शादी में मौजूद लोगों का कहना है कि फयाज दुल्हन के पास ही बैठा था जब आतंकी उसे घर से बाहर खींचकर ले गए और फिर उसकी हत्या कर दी. एक खबर के मुताबिक आतंकी अब्बास एक हत्या के केस में पांच साल की सजा काट चुका है. 2016 में अब्बास जमानत पर बाहर है और फिर वो फरार हो गया. वहीं इशफाक और गयास हिज्बुल में हाल ही में शामिल हुए हैं.

यह भी सच है कि लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या के बाद दक्षिण कश्मीर के युवाओं में आतंकी संगठनों के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है. सुरक्षा एजेंसियों की मानें तो लेफ्टिनेंट फयाज की हत्या आतंकियों ने इसलिए की ताकि सेना की भर्ती रैलियों में कश्मीरी युवकों को शामिल होने से रोका जा सके. आपको ये बता दें कि सेना और पुलिस की भर्ती रैलियों में कश्मीरी युवकों की लगातार बढ़ रही भीड़ से आतंकी संगठन बौखला गए थे और इस वजह से उन्होंने लोगों को डराने के लिए ऐसी हरकत की.

चांद पर जमा है एलियनों की फौज, टैंक से मचाएंगे धरती पर तबाही!

नासा ने हाल ही में अपने स्पेश सेंटर से कुछ तस्वीरें जारी की हैं। इन्हीं तस्वीरों में से एक में टैंक दिखा है, जिसकी लोकेशन चांद पर है। ये टैंक सिक्योरटीम10 नाम के ग्रुप ने ढूंढा है, जो दूसरी दुनिया के जीवों से संबंधित शोधकार्य में लगे हैं।

सिक्योरटीम10 का कहना है कि नासा इस बारे में पूरी जानकारी नहीं दे रहा है, जबकि उसी के द्वारा जारी तस्वीर मे चांद पर एलियनों का टैंक नजर आ रहा है। ये आने वाले समय में हम पृथ्वी वासियों के लिए खतरनाक हो सकता है।

यूट्यूब पर सिक्योरटीम10 नाम से चैनल चलाने वाले ये यूएफओ हंटर अमेरिकी स्पेश एजेंसी की हर गतिविधि पर नजर रखते हैं। इनका दावा है कि वो ब्रह्मांड में हो रही अजीब गतिविधियों पर नजर रखते हैं।
सिक्योरटीम के सदस्य टेलर ग्लॉकनर ने कहा कि हमें टैंक जैसी आकृति नासा की इस तस्वीर में दिखी है। ये दिखने में सामान्य आकार भले ही लग रही हो, पर ये प्राकृतिक नहीं, बल्कि कृत्रिम है। यानि कि एलियनों द्वारा बनाई गई है। ये पूरी तरह से हमारे टैंकों जैसा ही है।

Make cow Indian national animal says Arshad Madani

NEW DELHI: The government should consider declaring the cow as the national animal, Jamiat Ulema-i- Hind president Maulana Syed Arshad Madani suggested as he expressed concern over the “atmosphere of fear” following attacks by gau rakshaks. “The government should give national animal status to the cow and we will support it,” Mr Madani said.

The country has witnessed many incidents of violence by cow vigilantes, he said. “These gau rakshaks are exploiting religion to loot and murder people. We respect the religious sentiments of our Hindu brethren but no one can be allowed to take law and order into their own hands,” he said.

He urged the government to bring a cow protection law that will protect cows so that people’s lives can also be saved.

Referring to the issue of triple talaq that will be discussed in the Supreme Court today, he said it was a “religious matter and could have only a religious solution”. “If the Supreme Court comes out with such an acceptable solution, we will welcome it,” he said.
The top court, he added, should ask the ulemas or Islamic scholars, to discuss its objections and come out with solutions before direct intervention in the matter. “… the court should give a chance to the ulemas to discuss and sort out its objections over triple talaq. Then they (Supreme Court) may consider those solutions and give judgement. Such a judgement based on religious interpretation will be acceptable to us,” he added.

The matter was being “blown out of proportion” by the media and now even the Supreme Court was inclined to intervene in it, Mr Madani said. “The way triple talaq is being talked about these days, it appears as though there are divorced women in every household and each Muslim man has four wives.”

The Islamic law gives 14 rights to a married woman who can seek talaq if she feels any of these rights are infringed upon by her husband.

गुड न्यूज : UPSC एग्जाम के बाद सरकारी नहीं, तो प्राइवेट नौकरी पक्की

यूपीएससी ने प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लेने वाले अभ्यर्थियों के अंक और शैक्षणिक योग्यताओं का विवरण ऑनलाइन साझा करने का फैसला किया है।

नई दिल्ली, प्रेट्र: आपने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा दी है और इंटरव्यू मेें छंट गए तो निराश होने की जरूरत नहीं। सरकारी नौकरी नहीं मिली तो प्राइवेट जरूर मिल जाएगी। यूपीएससी ने प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लेने वाले अभ्यर्थियों के अंक और शैक्षणिक योग्यताओं का विवरण ऑनलाइन साझा करने का फैसला किया है।

निजी कंपनियां यूपीएससी के उस डाटा के आधार पर अपने लायक योग्य उम्मीदवार चुन सकेंगी। यानी पूरे देश में नौकरी के योग्य उम्मीदवारों का एक डाटा बैंक तैयार हो जाएगा। यह पहल निजी क्षेत्र में नियुक्तियों को बढ़ावा देने के सरकारी प्रस्ताव का हिस्सा है।

यूपीएससी के मुताबिक, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ये अंक अन्य नियोक्ताओं के लिए बेहद उपयोगी डेटाबेस साबित होंगे, क्योंकि इससे उन्हें नियुक्ति योग्य अभ्यर्थियों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

आयोग ने साफ किया कि उन्हीं अभ्यर्थियों के अंक और शैक्षणिक योग्यताओं का विवरण साझा किया जाएगा जो अंतिम चरण की परीक्षा (साक्षात्कार) में सम्मिलित तो हुए, लेकिन उनके चयन की सिफारिश नहीं की गई।

इन विवरणों को पब्लिक रिक्रूटमेंट एजेंसियों के लिए नेशनल इंफॉरमेटिक्स सेंटर की ओर से तैयार इंटीग्रेटेड इंफॉरमेशन सिस्टम से लिंक किया जाएगा। हालांकि, आवेदन पत्र में इस बात का प्रावधान होगा कि कोई अभ्यर्थी इस योजना का विकल्प चुनना चाहता है अथवा नहीं। यानी आवेदक को पहले ही बताना होगा कि वह खुद के अंक और योग्यता संबंधी विवरण को सार्वजनिक करना चाहता है कि नहीं।

– See more at:

पठानकोट आतंकी हमले के बाद सुरक्षा चाक-चौबंद करने के लिए सैन्‍यबलों को क्‍या मिला… एक रुपया भी नहीं!

नई दिल्‍ली: पिछले साल जनवरी में भारी तादात में हथियारों से लैस कुछ आतंकी पंजाब के पठानकोट स्थित एयरफोर्स बेस में घुस आए थे और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी, जिसमें 7 लोगों की मौत हुई थी. करीब 80 घंटे तक सुरक्षाबलों के ऑपरेशन के बाद उन आतंकियों को मार गिराया गया था. सुरक्षा में चूक की जांच के बाद पता चला कि देशभर के 3000 से भी ज्‍यादा संवेदनशील सैन्‍य ठिकानों में सुरक्षा और पुख्‍ता किए जाने की सख्‍त जरूरत है, जिसके लिए 2000 करोड़ रुपये की मांग की गई. लेकिन सूत्रों के अनुसार अभी तक इस मामले में सरकार ने एक रुपये की भी मंजूरी नहीं दी है.

पठानकोट आतंकी हमले के बाद लेफ्टिनेंट जनरल फिलिप कंपोस के नेतृत्‍व वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसके जरिए सबसे ज्‍यादा संवेदनशील सैन्‍य ठिकानों की पहचान की गई, जहांं सुरक्षा व्‍यवस्‍था को चाक-चौबंद किए जाने की जरूरत थी. थल सेना के तीन सदस्‍य और वायुसेना एवं नौसेना के एक-एक सदस्‍य इस समिति का हिस्‍सा थे. सेना के तीनों अंगों ने करीब 2000 करोड़ रुपये की जरूरत बताई, जिसमें थल सेना ने 1000 करोड़ रुपये की तत्‍काल जरूरत बताई ताकि काम शुरू किया जा सके, लेकिन पठानकोट हमले के 14 महीने बीत जाने के बाद भी सैन्‍यबलों को पैसों का इंतजार है.

रिपोर्ट के अनुसार, सेना ने सैन्‍य ठिकानों की बाउंड्री और संतरी पोस्‍टों को मजबूत करने, सेंसर्स लगाने, कैमरा, प्रवेश बैरियर और मेटल डिटेक्‍टर लगाने का काम शुरू करने के लिए अपने आंतरिक फंड से करीब 325 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.

सूत्र कहते हैं कि सेना की योजना तो तैयार है, लेकिन बिना पैसों के वह उस पर कार्रवाई नहीं कर सकती. इनमें से कुछ हैं सभी सैन्‍य इकाइयों का सुरक्षा ऑडिट, बहु स्‍तरीय सुरक्षा, स्‍टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर स्‍थापित करना, सुरक्षा योजना में फैमिली क्‍वार्टर को भी शामिल करना, बहु स्‍तरीय और कहीं बेहतर परिधि सुरक्षा शामिल हैं.

भारत ने पठानकोट हमले के लिए पाकिस्‍तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद के प्रमुख मसूद अजहर, उसके भाई अब्‍दुल रऊ असगर और दो अन्‍य को जिम्‍मेदार ठहराया है.

एक और वजह जिससे आतंकियों को फायदा पहुंचा, वो थी एयरबेस के 24 किलोमीटर की परिधि की अपर्याप्‍त निगरानी और एक 10 फीट ऊंची दीवार जिसके ऊपर कंटीले तार लगे थे.

Exclusive: क्या इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के साथ छेड़छाड़ मुमकिन है? देखिए खास रिपोर्ट

क्या कोई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन हैक की जा सकती है? एनडीटीवी के साइंस एडिटर पल्लव बागला ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के इंजीनियरों के साथ इसका जायज़ा लिया.

नई दिल्ली: क्या कोई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन हैक की जा सकती है? एनडीटीवी के साइंस एडिटर पल्लव बागला ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के इंजीनियरों के साथ इसका जायज़ा लिया. उनका कहना है कि आप मदरबोर्ड नहीं बदल सकते, लेकिन अगर आप ईवीएम के मदरबोर्ड को ट्रांजिस्टर के मदरबोर्ड से भी बदल डालें तो वो ट्रांजिस्टर बन जाएगा. वह ईवीएम नहीं रह जाएगा. यही नहीं, अगर आप बैलटिंग यूनिट पर कई बटन एक साथ दबा दें तो वह बिल्कुल बेकार हो जाएगा. गौरतलब है कि ईवीएम से छेड़छाड़ के संशय को दूर करने के लिए आज सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसमें सात राष्ट्रीय तथा 35 क्षेत्रीय पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल हुए. आयोग ने राजनीतिक दलों को भरोसा दिलाने की कोशिश की गई कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती. कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आईआईटी के विशेषज्ञों ने भी राजनीतिक दलों के संदेहों को दूर करने की कोशिश की.

खास बातें

  1. कंट्रोल यूनिट में EVM का दिल होता है जिसे माइक्रो प्रोसेसर कहते हैं
  2. इसमें वन टाइम प्रोसेसिंग चिप होती है, दोबारा प्रोग्राम नहीं कर सकते
  3. ट्रांजिस्टर का मदर बोर्ड लगा देंगे तो EVM ट्रांजिस्टर की तरह काम करेगा
  4. वॉशिंग मशीन का मदर बोर्ड लगा दें तो वॉशिंग मशीन जैसा काम करेगा
  5. मदर बोर्ड निकालने के बाद ये EVM नहीं रहेगा, कुछ भी बन जाएगा
  6. जो बटन आप दबाएंगे सिर्फ़ उसी की पर्ची VVPAT से निकलेगी’

उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली विधानसभा में ईवीएम टाइप मशीन टेंपरिंग का लाइव डेमो दिखाया. इससे पहले बुधवार को एनडीटीवी से खास बातचीत में सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मैंने ईवीएम जैसी मशीन को हैक करके दिखाया था. हमारी टीम को गिरफ्तारी का डर था इसलिए हमने विधानसभा में डेमो दिया. अगर हम गिरफ्तार हो जाते तो हम जनता को ईवीएम को हैक करके दिखाने का मौका खो देते. सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हम चुनाव आयोग के सामने EVM हैक करके दिखा देंगे. अगर चुनाव आयोग के सामने हैक नहीं कर पाए तो जो सज़ा चुनाव आयोग देगा मंजूर होगी.

तीन तलाक कानूनी दखल का मामला नहीं, महिलाओं को मिला हुआ है इसे नकारने का हक- सुप्रीम कोर्ट को सलमान खुर्शीद ने बताया

तीन तलाक पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (12 मई) को कहा कि मुसलमानों में शादी को खत्म करने का यह तरीका ‘बेहद खराब’ और ‘बर्दाश्त ना करने वाला’ है।

तीन तलाक पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (12 मई) को कहा कि मुसलमानों में शादी को खत्म करने का यह तरीका ‘बेहद खराब’ और ‘बर्दाश्त ना करने वाला’ है। सुप्रीम कोर्ट ने धर्म पर बोलने वाले लोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि उन लोगों ने तीन तलाक को ‘कानूनन सही’ तो बताया है लेकिन वे भी इसको सबसे खराब और ना चाहने वाली चीज मानते हैं। यह बात पांच जजों की बेंच ने कही जो तीन तलाक मे मामले की सुनवाई कर रही है। इसकी अध्यक्षता चीफ जस्टिस जे एस खेहर कर रहे हैं। तीन तलाक के मुद्दे की सुनवाई का आज दूसरा दिन था।

तीन तलाक पर बोलते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और सीनियर वकील सलमान खुर्शीद ने कहा कि तीन तलाक कानूनी दखल का मामला नहीं है। उन्होंने कहा था कि महिलाओं को इसको नकारने का अधिकार मिला हुआ है। उन्होंने कहा कि महिलाएं निकाहनामा (शादी का कॉन्ट्रेक्ट) दिखाकर तीन तलाक को नकार सकती हैं।

इससे पहले कोर्ट ने खुर्शीद को उन इस्लामिक देशों और गैर इस्लामिक देशों की लिस्ट बनाने को कहा था जिनमें तीन तलाक पर बैन लगा हुआ है। इसके बाद बैंच को बताया गया था कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान, मरोक्को और सऊदी अरब जैसे देशों में भी शादी को खत्म करने के लिए तीन तलाक की इजाजत नहीं है।

एक पीड़ित की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील राम जेठमलानी ने संवैधानिक तरीके से तीन तलाक को गलत ठहराया। उन्होंने ‘समानता के अधिकार’ की भी बात की। जेठमलानी ने कहा कि तीन तलाक का हक सिर्फ पति को दिया गया है उसकी पत्नी को नहीं। जेठमलानी ने कहा कि यह समानता के अधिकार (आर्टिकल 14) का उल्लंघन है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को लगाई लताड़, कहा- आप लोगों को मांसाहार से नहीं रोक सकते, बूचड़खाने बनवाइए

याचिका में आरोप लगाया था कि उसका लाइसेंस 31 मार्च को खत्म हो गया लेकिन लाइसेंस के नवीनीकरण का आवेदन देने के बाद भी सरकार उसे रिन्यू नहीं कर रही है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को लताड़ लगाई है। कोर्ट ने कहा है कि आप लोगों को मांसाहार से नहीं रोक सकते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर राज्य में वैध बूचड़खाने नहीं हैं तो यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वो वैध बूचड़खाने बनवाए। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 17 जुलाई तक लोगों को स्लाउटर हाउस का लाइसेंस जारी करे। मामले की अगली सुनवाई अब 17 जुलाई को होगी।

हाईकोर्ट ने साफ किया कि नए लाइसेंस जारी होने और पुराने लाइसेंस रिन्यू होने तक सभी बूचड़खाने बंद रहेंगे। इसके अलावा कोर्ट ने सभी मीट कारोबारियों को कहा कि वे लोग 17 जुलाई तक अपने-अपने जिले के जिलाधिकारी कार्यालय या जिला पंचायत कार्यालय के पास लाइसेंस के लिए आवेदन करें। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को कहा है कि वो 17 जुलाई को बताए कि इस दौरान कितने लाइसेंस जारी किए गए और कितने लाइसेंस को रिन्यू किया गया।

याचिकाकर्ता ने याचिका में आरोप लगाया था कि उसका लाइसेंस 31 मार्च को खत्म हो गया लेकिन लाइसेंस के नवीनीकरण का आवेदन देने के बाद भी सरकार उसे रिन्यू नहीं कर रही है। याचिकाकर्ता ने मांग की  थी कि उसके लाइसेंसों का नवीनीकरण किया जाए। गौरतलब है कि यूपी में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने अवैध बूचड़खानों को बंद करने का आदेश दिया था।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश समेत अलग-अलग राज्यों में अवैध बूचड़खानों के खिलाफ मुहिम शुरू किये जाने के बीच सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी से पता चला है कि देश में केवल 1,707 बूचड़खाने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत पंजीकृत हैं। सबसे ज्यादा पंजीकृत बूचड़खाने वाले सूबों की फेहरिस्त में क्रमश: तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र शीर्ष तीन स्थानों पर हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश और चंडीगढ़ समेत आठ राज्यों में एक भी बूचड़खाना पंजीकृत नहीं है।

यूपी: संभल में सांप्रदायिक तनाव, मुस्लिम लड़के और शादीशुदा हिंदू महिला के गायब होने के बाद भड़की हिंसा

संभल:  यूपी के संभल में बीती रात कई घरों में आगजनी और लूटपाट हुई है. इलाके का माहौल इतना खराब है कि मुस्लिम समुदाय के लोग हिंसा ग्रस्त गांव से पलायन कर रहे हैं. सांप्रदायिक हिंसा की शुरूआत उस समय हुई जब खबर फैली कि एक मुस्लिम लड़का एक शादीशुदा हिंदू लड़की को लेकर भाग गया.

संभल के गुन्नौर क्षेत्र के नंदरौली गांव के कई घरों में बीती रात आगजनी हुई और कुछ घरों में लूटपाट की भी खबर है. गांव में सांप्रदायिक तनाव की शुरूआत 9 मई को तब हुई जब खबर फैली कि गांव का एक मुस्लिम लड़का एक शादीशुदा हिंदू लड़की को लेकर भाग गया है.

लड़के की मां के मुताबिक, इस बात से नाराज लड़की के घरवालों ने उसे अपने घर में रात भर बिठाये रखा. लड़के की मां को लड़की वालों ने अगले दिन छोड़ दिया, लेकिन उसके बाद देखते देखते गांव में सांप्रदायिक हिंसा शुरू हो गई. गांव में हिंसा और लूटपाट की खबर पाकर पुलिस बल वहां पहुंच गई लेकिन पीड़ित पक्ष के लोग पीएएसी और पुलिस बल पर ही संगीन आरोप लगा रहे हैं.

फिलहाल हिंसा ग्रस्त गांव गुन्नौर छावनी में तब्दील हो चुका है, लेकिन गांव में भारी सुरक्षाबल की मौजूदगी भी खौफजदा लोगों में सुरक्षा का अहसास नहीं करा पा रही है. लिहाजा कई लोग ट्रकों में सामान लादकर गांव से पलायन कर रहे हैं.

दूसरी तरफ जिस परिवार की लड़की को लेकर मुस्लिम लड़का फरार हुआ है, उसका आरोप है कि उनकी लड़की का अपहरण हुआ है. पुलिस मुकदमा दर्ज करके दोनों पक्षों के दावे की जांच कर रही है. उसने हिंसा और आगजनी के आरोप में अबतक छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन जिस लड़के और लड़की की वजह से हिंसा फैली है, उनका अबतक पता नहीं चला है.

पुलिस माहौल को नियंत्रण में रखने की बात कर रही हैस लेकिन अभी भी इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैला हुआ है और लोग खौफजदा हैं कि नफरत की एक और चिंगारी पता नहीं क्या कहर ढा दे?

In Shocking Video, Burning Man Didn’t Stop Traffic On Maharashtra Highway

BEED (MAHARASHTRA): A man is engulfed in flames on the highway as cars, two-wheelers and people go past without stopping to help, in a horrific video that appears to have been taken by one of many thoughtless bystanders at the spot. The man, a biker, was involved in an accident yesterday with another biker. Both have died.

The video, say the police, was taken on the highway in Maharashtra’s Beed district, at a point some eight hours from Mumbai. When the two bikers collided, one of them was trapped under the wrecked bikes, which caught fire.

The police say the man probably didn’t shout for help as he was unconscious from a head injury. By the time help arrived and the police put out the fire, he was charred beyond recognition. The other biker died in hospital today.

The burning man made little difference to the flow of traffic, and no pedestrian rushed to help put out the blaze either. In one visual, a small crowd watches the grisly spectacle; some have their mobile cameras trained on it.
The police are investigating whether one of the bikers was carrying bottles of alcohol which could have started the fire.

“We are yet to establish who the victim is,” senior police officer G Sreedhar told NDTV.

“Since the number plates on the bike were burnt, we are unable to get much details about the victim. All we could tell from the plates was that the bike was registered in Parbhani (a town nearby). We have given the plate to the Regional Transport Office, which can give us details,” Mr Sreedhar said.

U.P. declines sanction to prosecute CM

The Uttar Pradesh government has refused to sanction the prosecution of Chief Minister Yogi Adityanath in a communal riots case, Chief Secretary Rahul Bhatnagar told the Allahabad High Court on Thursday.

Riots broke out in Gorakhpur in January 2007 allegedly after a provocative speech by Adityanath, then the local MP, over the killing of a Hindu youth in clashes between two groups during a Moharram procession.

He was arrested and jailed for 10 days before he got bail.

An affidavit stating that sanction had been “refused” for prosecuting Yogi Adityanath was filed before the court by Mr. Bhatnagar.

The sanction is needed to file a charge sheet against Yogi Adityanath under Section 153A of the Indian Penal Code on the charge of promoting enmity on grounds of religion and caste. This offence is punishable with imprisonment of up to five years.

The police request to t Home Department for sanction to prosecute Yogi Adityanath and four others, including BJP MLA from Gorakhpur Radhamohan Das Agarwal, has been hanging fire for two years.

On May 7, a Division Bench of Justices Ramesh Sinha and Umesh Chandra Srivastava asked the Chief Secretary to appear in court on Thursday. In his affidavit, Mr. Bhatnagar said the CB-CID, which was investigating the case, proposed to submit its closure report, and it would be submitted to the trial court.

The development came at the hearing of a petition for an independent probe into the violence. The petition was filed by Parvez Parwaz, the complainant in the FIR filed at the Cantonment police station in Gorakhpur in connection with the riots, and Asad Hayat, a witness.

If god finds triple talaq sinful, can laws validate it, asks Supreme Court

“Triple talaq is inherently unequal to women. The practice is abhorrent to god and no amount of advocacy by man can cure it,” senior advocate Ram Jethmalani told a five-judge Constitution Bench of the Supreme Court, headed by Chief Justice J.S. Khehar, on the second day of hearing on the matter on Friday.

“No discrimination against a woman is possible just because she is a woman. Law can be made only to improve the lot of women,” he said.

“Secularism is the subjection of religion to the rule of law,” he said. He urged the court not to shy away from bringing triple talaq under Article 13 (Laws inconsistent with or in derogation of the fundamental rights). “as any customary usage enforceable by court comes under the article.”

Justice Khehar said that if triple talaq comes to an end, whatever the consequences would be decided then. “There is no mutual consent in triple talaq.”

When Justice Khehar said, “Article 15 [Prohibition of discrimination on grounds of religion, race, caste, sex or place of birth] talks about State law and we are on personal law here,” Mr. Jethmalani asked: “Can any law allow a man to get rid of a woman on a whim.”

When former Union Minister and senior advocate Salman Khurshid, who is assisting the court in his personal capacity, said, “Islam says triple talaq is sinful but permissible,”

Justice Kurian Joseph retorted: “Can something found sinful by god be validated by laws of man?”

Mr. Khurshid said: “The AIMPLB [All India Muslim Personal Law Board] is the best body to guide the court on the varying philosophies of schools of Islam about triple talaq.”