यहां एक ही किचन में बनता है 65 परिवारों का फ्री खाना, 7 साल से चल रही है ये प्रथा

Monday, March 19th, 2018, 2:45 am

नाथद्वारा(उदयपुर). शहर में बोहरा समाज के 65 घरों में सुबह का भोजन एक साथ बनता है और फिर हर घर टिफिन भेजते हैं। सिलसिला सात साल से चल रहा है। अपने धर्मगुरु की नसीहत पर देश के कई शहरों में बोहरा समाज के लोग इसी प्रकार सामूहिक भोजन बनाकर घर-घर टिफिन पहुंचाने की मिसाल पेश कर रहे हैं। इस व्यवस्था में एक ही मीनू का टिफिन हर घर पहुंचाने के पीछे ऊंच-नीच का भेदभाव खत्म करने की सोच भी है।

– शहर में बोहरा समाज के 65 परिवारों में करीब 350 लोग हैं। अधिकांश परिवार व्यापारी वर्ग से हैं।
– 7 साल पहले इस व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी।
– भोजन समाज के भवन में तैयार होता है। किसी के घर मेहमान हो तो कमेटी को सदस्यों के अनुसार मात्रा बढ़ाने की सूचना दे दी जाती है।
– सामूहिक भोजन बनाने के लिए फैज उल मवाईद बुरहानिया कमेटी बना रखी है, जो भोजन की गुणवत्ता, वितरण की व्यवस्था देखती है।
– दाना कमेटी रसोई का राशन खरीदने की जिम्मेदारी निभाती है। इस कमेटी में 10 सदस्य हैं।

मेन्युकैलेंडर के अनुसार

– सामूहिक भोजन के लिए कैलेंडर तय कर धर्मगुरु के स्तर पर बनाई कमेटी स्थानीय कमेटी को भेज देती है।
– मेन्यु कैलेंडर के अनुसार ही तय होता है। सप्ताह में एक दिन मिठाई तथा पर्व-त्योहार पर मिठाई सहित हर दिन के लिए दाल, सब्जी का मीनू निर्धारित है।

एक-दूसरे की खुशी में शामिल होता है हर परिवार

– खुशी के मौकों पर समाज के लोग अपनी तरफ से रसोई घर में कमेटी को सूचना देकर मिठाई बनवाते हैं और इसे हर घर बंटवाते हैं।
– इससे समाज के लोगों का हर परिवार की खुशी में शामिल होने में जुड़ाव होता है।
– टिफिन दोपहर एक बजे तक घर-घर पहुंचाने की जिम्मेदारी वितरण कमेटी की होती है।
– रसोई सुबह 9 बजे शुरू होती है। कोई सफर पर जा रहा है तो बस स्टैंड, बीमारी में अस्पताल तक भी भोजन पहुंचाया जाता है।
– पर्व, त्योहार, जन्मदिन, सालगिरह सहित अन्य मौकों पर कमेटी के पास अतिरिक्त टिफिन की सूचना पहले ही आ जाती है।

सामर्थ्य के अनुसार देते हैं आर्थिक सहयोग

– इस व्यवस्था के बदले समाज के लोग सामर्थ्य के अनुसार आर्थिक सहयोग देते हैं।
– टिफिन पहुंचाने के बदले कोई शुल्क निर्धारित नहीं है। समाज की कमेटी अपने स्तर पर इसका खर्च वहन करती है।