नरेंद्र मोदी के तीन साल के कार्यकाल में इन पांच फैसलों से बढ़ी जनता की मुश्किलें

Tuesday, May 16th, 2017, 8:40 am

नरेंद्र मोदी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में महंगाई की मार सबसे ज्यादा रेल यात्रियों पर पड़ी।

भारतीय जनता पार्टी ने आज (16 मई) के ही दिन तीन साल पहले 2014 में लोक सभा में पूर्ण बहुमत हासिल किया था। तीन दशकों बाद देश में किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला था।  इस प्रचंड जीत के बाद नरेंद्र मोदी 26 मई को शपथ ग्रहण कर देश के प्रधानमंत्री बने। चुनाव से पहले भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी ने जनता से जो वादे किए थे उनकी वजह से उनसे लोगों की उम्मीदें बहुत बढ़ गयी थीं। चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में जनता से 60 महीने मांगे थे। अब इन 60 में से 36 महीने पूरे होने वाले हैं। आइए देखते हैं इस दौरान मोदी सरकार ने ऐसे कौन से फैसले लिए जिनसे सीधे-सीधे जनता की जेब पर असर पड़ा।

1- रेल का किराया- भारतीय रेलवे को भारत की जीवनरेखा कहा जाता है। नरेंद्र मोदी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में महंगाई की मार सबसे ज्यादा इसी पर पड़ी। चाहे वो फ्लेक्सी फेयर सिस्टिम हो (जिसे बाद में वापस लिया गया) या प्रीमियत तत्काल रेल या साधारण यात्रा  मोदी सरकार के दौरान महंगी हुई है।

2- कच्चे तेल की कीमतें कम होने का कोई फायदा नहीं- केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 135 डॉलर प्रति बैरल से 35 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके लिए खुद को “भाग्यवान” भी बताया था। पेट्रोल और डीजल की कीमतें केंद्र सरकार डीरेगुलेट कर चुकी है। यानी पेट्रोल-डीजल की कीमत बाजार भाव के अनुसार घटनी-बढ़नी चाहिए लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में 10 गुना कम होने के बावजूद आम भारतीयों के भाग्य में कम कीमत देना नहीं लिखा था। केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स बढ़ा दिया जिसकी वजह से उनकी कीमत कच्चे तेल की कीमत गिरने से पहले वाली दर के आसपास ही बनी रहीं। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस कदम के लिए सफाई देते हुए कहा था कि इससे इकट्ठे पैसे को इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में खर्च किया जाएगा। लेकिन बहुत से लोग सरकार के इस फैसले से ठगा हुआ महसूस कर रहे थे।

3- छोटी बचत, पीएफ पर ब्याज दर में कटौती- संगठित क्षेत्र में नौकरी करने वाले ज्यादातर भारतीयों के लिए बचत खाता, पीपीएफ, किसान विकास पत्र पैसे बचाने के सबसे लोकप्रिय साधन हैं। मोदी सरकार ने इन सभी खातों में मिलने वाले ब्याज की तिमाही समीक्षा करने का फैसला लिया है। अप्रैल से जून 2017 तक की तिमाही के लिए केंद्र सरकार ने बचत खाता, पीपीएफ और किसान विकास पत्र पर मिलने वाले ब्याज पर पिछली तिमाही के मुकाबले 0.10 प्रतिशत की कटौती कर दी।