कभी कंगना के पैदा होने से नाखुश थे पेरेंट्स, देखें बचपन से अब तक के

Thursday, March 22nd, 2018, 4:58 pm

मुंबई।एक्ट्रेस कंगना रनोट 31 साल की होने वाली हैं। 23 मार्च, 1987 को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के पास स्थित सुरजपूर (भाबंला) में जन्मी कंगना अपने बोल्ड किरदार, बड़बोलेपन, एक्टिंग स्किल्स या फिर पर्सनल लाइफ के चलते हमेशा सुर्खियों में रहती हैं। फिलहाल कंगना पर कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड मामले में आरोप लगे हैं। इसके मुताबिक, उन्होंने 2016 में रितिक रोशन का मोबाइल नंबर रिजवान सिद्दीकी से शेयर किया था। कंगना को अनवॉन्टेड चाइल्ड मानते थे पेरेंट्स…

कुछ साल पहले वुमन्स डे के मौके पर दिए इंटरव्यू में कंगना ने बताया था कि जब वे पैदा हुई थीं, तब उनके पेरेंट्स नाखुश थे। दरअसल, जब उनकी बड़ी बहन का जन्म हुआ था तो घरवाले बेहद खुश थे। लेकिन दूसरे बच्चे के तौर पर जब घर में लड़की हुई, तो परिवार वाले नाखुश हो गए। उस दौरान कंगना को अनवॉन्टेड चाइल्ड माना जाता था।
कंगना की फेवरेट हैं उनकी बड़ी बहन…
कंगना के पिता अमरदीप रनोट बिजनेसमैन है और मां आशा रनोट स्कूल में टीचर हैं। उनकी बड़ी बहन रंगोली, उनकी फेवरेट हैं। रंगोली, कंगना की मैनेजर है। एसिड अटैक जैसे दर्दनाक हादसे से गुजरने और नए सिरे से जिंदगी जीने वाली रंगोली की लाइफ पर कंगना बायोपिक बनाने की चाहत भी जाहिर कर चुकी हैं। उनका एक छोटा भाई भी है, जिसका नाम अक्षत है।

– कंगना को शुरु से मॉडलिंग का शौक था। एक्टिंग के लिए वो महज 15 साल की उम्र में बिना परमिशन लिए चंडीगढ़ से दिल्ली आ गईं थीं।
– दिल्ली में इंडिया हैबिटेट सेंटर में काफी मेहनत के बाद एक्टिंग करने को मिला। 5-6 महीने के बाद एक्टिंग वर्कशॉप के अरविंद गौड़ ने कंगना को मौका दिया।
– बैक स्टेज एक्टिंग करते-करते कंगना को एक बार एंकर बनने का मौका मिला। इस एंकरिंग को ही कंगना अपना पहला ब्रेक मानती हैं और इसके बाद वो मुंबई के लिए निकल पड़ी।

– रिपोर्ट्स के मुताबिक कंगना के घर से भागने और फिल्मों में काम करने की वजह से कंगना के पिता ने उनसे सालों तक बात नहीं की थी।
– कंगना ज्योतिष में काफी विश्वास करती हैं। वे जब भी मंडी आती हैं यहां के ज्योतिष लेखराज शर्मा से जरूर मुलाकात करती हैं।

कंगना की बहन रंगोली के मुताबिक, “मुझे याद है, बचपन से उन्हें फैशन के कीड़े ने काट रखा था। भाबंला जैसी छोटी जगह में भी वह पब्लिक जगहों पर अजीबो-गरीब कपड़े पहनती थीं। वह शॉर्ट पेंट्स, व्हाइट शर्ट और हैट पहनकर घूमती थी। छोटी-सी जगह में इस तरह के कपड़े पहनने से लोग सोचते थे कि वह अजीब है। मुझे उसके साथ चलने में शर्मिंदगी महसूस होती थी। तो मैं कंगना के साथ जाना अवॉइड करती थी। उसके ड्रेसिंग की वजह से डैड उसे लेडी डायना बुलाते थे।

कंगना के मुताबिक, ‘बचपन में मैं बहुत आलसी हुआ करती थी। यहां तक कि नहाने में भी आना-कानी किया करती थी। मेरे घर वाले इस आदत से बहुत दुखी थे। अब मैं सोचती हूं कि शायद इसी कारण तब कोई मेरा दोस्त नहीं बना। हालांकि जैसे ही मैंने अपनी सफाई पर ध्यान देना शुरू किया, मेरे जीवन में बहुत कुछ अच्छा होना शुरू हो गया।

कंगना के माता-पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर बनें, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कंगना ने कम उम्र में ही मॉडलिंग की राह अपनाई और दिल्ली में रहकर मशहूर थिएटर डायरेक्टर अरविंद गौड़ से एक्टिंग की ट्रेनिंग ली। वे अरविंद के थिएटर इंडिया हैबिटेट सेंटर का हिस्सा बनीं और कई नाटकों में काम किया। उनका पहला प्ले गिरीश कर्नाड का ‘रक्त कल्याण’ था।